भोपाल में एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली रीता चौहान की सैलरी हर महीने 5 तारीख़ को आती है। बेटी की उम्र अभी 9 साल है, और रीता चाहती हैं कि अगले 5 साल में ऐसी रकम जमा हो जाए जिससे बेटी की आगे की पढ़ाई के लिए टेंशन न हो। शेयर बाज़ार का उतार-चढ़ाव उन्हें डराता है, और एक साथ बड़ी रकम FD में डालने के लिए पैसा नहीं है। पिछले हफ्ते बैंक गई तो रिलेशनशिप मैनेजर ने एक सीधा सुझाव दिया — “हर महीने जितना बचा सकती हैं, उतना RD यानी Recurring Deposit में डाल दीजिए। न बाज़ार का डर, न एक साथ बड़ी रकम की ज़रूरत, और ब्याज भी तय मिलेगा।” रीता जैसे लाखों लोगों के लिए RD आज भी सबसे आसान और भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक है, खास तौर पर तब जब अक्टूबर 2026 में RBI ने रेपो रेट 5.50% तक बढ़ाया और बैंकों की डिपॉजिट दरों पर नज़र रखना फिर से ज़रूरी हो गया है।
इस आर्टिकल में हम RD (Recurring Deposit) 2026 से जुड़ी हर ज़रूरी बात — यह क्या है, मौजूदा ब्याज दर, FD से तुलना, खाता कैसे खोलें, मैच्योरिटी अमाउंट की गणना, टैक्स के नियम, और किस्त मिस होने या पैसे की ज़रूरत पड़ने पर क्या करें — आसान हिंदी में, उदाहरणों के साथ समझेंगे।

RD (Recurring Deposit) क्या है और यह कैसे काम करता है
Recurring Deposit यानी RD एक ऐसी डिपॉजिट स्कीम है जिसमें आप एक साथ बड़ी रकम जमा करने के बजाय हर महीने एक तय रकम जमा करते हैं, और बदले में बैंक या पोस्ट ऑफिस उस पूरी अवधि के लिए एक तय ब्याज दर देता है — ठीक वैसे ही जैसे Fixed Deposit (FD) में मिलती है, सिर्फ फर्क यह है कि FD में पैसा एक बार में जमा होता है जबकि RD में हर महीने थोड़ा-थोड़ा।
RD की सबसे बड़ी खूबी है अनुशासन (discipline)। जिन लोगों के लिए एक साथ बड़ी रकम बचाना मुश्किल होता है, लेकिन हर महीने एक तय रकम अलग रखना आसान है, उनके लिए RD एक “फोर्स्ड सेविंग्स” टूल की तरह काम करता है। हर महीने की किस्त (installment) एक तय तारीख़ पर बैंक अकाउंट से ऑटो-डेबिट हो जाती है या पोस्ट ऑफिस में जमा करनी होती है, और तय तारीख़ (मैच्योरिटी) पर पूरी जमा रकम ब्याज के साथ वापस मिल जाती है।
RD में ब्याज आमतौर पर तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि (quarterly compounding) होता है — यानी हर तीन महीने पर जमा हुई रकम पर ब्याज जुड़ता है और अगली तिमाही में उस बढ़ी हुई रकम पर भी ब्याज मिलता है। यही वजह है कि RD में सिर्फ साधारण ब्याज (simple interest) से ज़्यादा रिटर्न मिलता है।
2026 में RD पर ब्याज दर कितनी है — पोस्ट ऑफिस और बैंक का पूरा हिसाब
RD पर ब्याज दर दो जगह से मिलती है — पोस्ट ऑफिस की सरकारी RD स्कीम से, और अलग-अलग बैंकों की अपनी RD स्कीम से। दोनों की दरें अलग-अलग होती हैं और बदलती रहती हैं, इसलिए निवेश से पहले मौजूदा दर ज़रूर चेक करें।
पोस्ट ऑफिस RD — अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही की दर
वित्त मंत्रालय हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दर तय करता है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए पोस्ट ऑफिस की 5-साल की RD स्कीम पर दर पिछली तिमाहियों जैसी ही 6.7% सालाना रखी गई है, और इसमें बदलाव नहीं हुआ है।
| पहलू | पोस्ट ऑफिस RD — ब्योरा |
|---|---|
| ब्याज दर (अक्टूबर-दिसंबर 2026) | 6.7% सालाना, तिमाही चक्रवृद्धि |
| मिनिमम मंथली जमा | ₹100 (इसके बाद ₹10 के मल्टीपल में) |
| मैक्सिमम जमा | कोई सीमा नहीं |
| टेन्योर | 5 साल (60 किस्तें), एक बार और 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है |
बैंक RD — उदाहरण के तौर पर मौजूदा दरें
बैंकों में RD की ब्याज दर आमतौर पर उस बैंक की FD दरों से ही जुड़ी होती है — यानी जितनी अवधि की RD है, उतनी ही अवधि की FD पर जो दर मिल रही है, वही RD पर भी मिलती है। नीचे टेबल में एक बड़े सरकारी बैंक (SBI) की नवंबर 2026 में मौजूद टर्म-डिपॉजिट दरें उदाहरण के तौर पर दी गई हैं, ताकि आपको एक अंदाज़ा मिल सके — ध्यान रखें कि हर बैंक की दर अलग होती है, इसलिए अपने बैंक की ताज़ा RD दर ज़रूर कन्फर्म करें:
| अवधि | सामान्य ग्राहक | सीनियर सिटीजन |
|---|---|---|
| 1 साल से 2 साल तक | 6.25% | 6.75% |
| 2 साल से 3 साल तक | 6.45% | 6.95% |
| 3 साल से 5 साल तक | 6.30% | 6.80% |
| 5 साल से 10 साल तक | 6.05% | 7.05%* |
*सीनियर सिटीजन के लिए 5-10 साल की दर में बैंक की स्पेशल सीनियर सिटीजन स्कीम का अतिरिक्त प्रीमियम भी शामिल है। (स्रोत: बैंक की नवंबर 2026 की दर-सूची)
ध्यान देने वाली बात — अक्टूबर 2026 में RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50% कर दिया। लेकिन रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह नहीं कि सभी बैंक अपनी डिपॉजिट दरें भी तुरंत उतनी ही बढ़ा देंगे — हर बैंक अपने हिसाब से फैसला लेता है, और पुरानी RD/FD पर उस समय बुक की गई दर ही लागू रहती है। नई RD खोलने वालों को आने वाले महीनों में थोड़ी बेहतर दर मिलने की उम्मीद ज़रूर बन सकती है, इसलिए दो-तीन बैंकों की दरें तुलना करके ही RD खोलें।

RD vs FD — कौन सा विकल्प आपके लिए बेहतर है
RD और FD दोनों ही गारंटीड रिटर्न वाले डिपॉजिट प्रोडक्ट हैं, लेकिन दोनों की ज़रूरत अलग-अलग तरह के निवेशकों को पड़ती है। नीचे टेबल में दोनों का फर्क समझें:
| पहलू | RD (Recurring Deposit) | FD (Fixed Deposit) |
|---|---|---|
| जमा करने का तरीका | हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम | एक बार में पूरी रकम |
| किसके लिए सही | सैलरी/नियमित इनकम वाले, जो धीरे-धीरे बचत करना चाहते हैं | जिनके पास एक साथ बड़ी रकम मौजूद है |
| ब्याज दर | लगभग उतनी ही अवधि की FD जैसी | अवधि के हिसाब से तय |
| लिक्विडिटी | प्रीमैच्योर क्लोज़र पर कम ब्याज, बैंक/पोस्ट ऑफिस नियम लागू | प्रीमैच्योर क्लोज़र पर कम ब्याज, पर रकम तुरंत मिल जाती है |
| TDS/टैक्स नियम | FD जैसे ही — धारा 393 के तहत थ्रेशोल्ड से ऊपर ब्याज पर TDS | धारा 393 के तहत थ्रेशोल्ड से ऊपर ब्याज पर TDS |
| अनुशासन (discipline) | ज़्यादा — हर महीने जमा करने की आदत बनती है | एक बार जमा करने के बाद कुछ नहीं करना पड़ता |
सीधी भाषा में कहें तो — अगर आपके पास अभी एक साथ बड़ी रकम रखी है जिसे आप फौरन काम में नहीं लाने वाले, तो FD बेहतर है, क्योंकि पूरी रकम दिन-1 से ब्याज कमाना शुरू कर देती है। लेकिन अगर आपकी सैलरी आती है और हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाना है, तो RD आपके लिए ज़्यादा व्यावहारिक (practical) विकल्प है, क्योंकि इसमें एक तय अनुशासन बन जाता है।
RD खाता कैसे खोलें — बैंक और पोस्ट ऑफिस में प्रोसेस
RD खाता खोलना बहुत आसान प्रोसेस है और इसमें ज़्यादा डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरत नहीं पड़ती, खास तौर पर अगर आपका पहले से उस बैंक में सेविंग्स अकाउंट है।
ज़रूरी डॉक्यूमेंट
- पहचान प्रमाण — आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या वोटर ID
- पता प्रमाण — आधार कार्ड, बिजली बिल या पासपोर्ट
- पासपोर्ट साइज फोटो
- नॉमिनी की जानकारी
- अगर पहले से सेविंग्स अकाउंट नहीं है, तो KYC के लिए अलग से फॉर्म
स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
- बैंक चुनें या पोस्ट ऑफिस जाएं: जिस बैंक या पोस्ट ऑफिस में आपका खाता है, वहीं RD खोलना सबसे आसान रहता है।
- टेन्योर और मंथली इंस्टॉलमेंट तय करें: बैंक में आमतौर पर 6 महीने से 10 साल तक और पोस्ट ऑफिस में सिर्फ 5 साल की RD मिलती है।
- ऑनलाइन या ब्रांच में अप्लाई करें: ज़्यादातर बड़े बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप से कुछ ही मिनटों में RD खुलवाने की सुविधा देते हैं। पोस्ट ऑफिस में अभी भी ज़्यादातर मामलों में ब्रांच जाना पड़ता है, हालांकि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के ज़रिए कुछ ऑनलाइन सुविधा भी मिलती है।
- ऑटो-डेबिट सेट करें: बैंक RD में हर महीने की किस्त आमतौर पर आपके सेविंग्स अकाउंट से ऑटोमैटिक डेबिट हो जाती है, ताकि किस्त मिस न हो।
- नॉमिनी ज़रूर भरें: किसी भी अनहोनी की स्थिति में पैसा सही व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए नॉमिनी की जानकारी खाता खोलते समय ही भर दें।
RD खाता व्यक्तिगत (single), जॉइंट, या नाबालिग के नाम माता-पिता/गार्जियन के ज़रिए भी खोला जा सकता है। कुछ बैंक सीनियर सिटीजन के लिए थोड़ी बेहतर दर भी देते हैं, इसलिए RD खुलवाते समय उम्र का फायदा ज़रूर पूछें।
RD मैच्योरिटी अमाउंट कैसे कैलकुलेट होता है — उदाहरण के साथ
RD में ब्याज तिमाही चक्रवृद्धि होता है, इसलिए इसका कैलकुलेशन FD जितना सीधा नहीं है। नीचे दिए गए उदाहरणों में हमने मानक RD मैच्योरिटी फॉर्मूला इस्तेमाल करके पायथन से हिसाब लगाया है। ध्यान रखें कि नीचे इस्तेमाल की गई ब्याज दरें सिर्फ उदाहरण के लिए मानी गई हैं (assumption) — असली मैच्योरिटी आपके बैंक/पोस्ट ऑफिस की उस समय की दर पर निर्भर करेगी।
उदाहरण 1: पोस्ट ऑफिस RD — ₹5,000 महीना, 5 साल, 6.7% ब्याज
मान लीजिए रीता चौहान हर महीने ₹5,000 पोस्ट ऑफिस की 5-साल RD में जमा करती हैं, मौजूदा 6.7% सालाना दर पर:
- कुल जमा (60 महीने): ₹3,00,000
- ब्याज से फायदा (लगभग): ₹56,829
- मैच्योरिटी अमाउंट (लगभग): ₹3,56,829
उदाहरण 2: बैंक RD — ₹10,000 महीना, 3 साल, 6.30% ब्याज
मान लीजिए इंदौर के एक प्राइवेट कंपनी कर्मचारी विकास राठौर हर महीने ₹10,000 अपने बैंक की 3-साल RD में डालते हैं, मान लीजिए उस अवधि पर 6.30% सालाना दर मिल रही है:
- कुल जमा (36 महीने): ₹3,60,000
- ब्याज से फायदा (लगभग): ₹36,999
- मैच्योरिटी अमाउंट (लगभग): ₹3,96,999
उदाहरण 3: सीनियर सिटीजन बैंक RD — ₹8,000 महीना, 2 साल, 6.75% ब्याज
मान लीजिए रांची के रिटायर्ड शिक्षक रमेश प्रसाद, जो सीनियर सिटीजन हैं, हर महीने ₹8,000 की 2-साल RD में डालते हैं, मान लीजिए सीनियर सिटीजन दर 6.75% सालाना मिल रही है:
- कुल जमा (24 महीने): ₹1,92,000
- ब्याज से फायदा (लगभग): ₹14,019
- मैच्योरिटी अमाउंट (लगभग): ₹2,06,019
इन तीनों उदाहरणों से साफ दिखता है कि RD में फायदा दो चीज़ों पर निर्भर करता है — कितनी लंबी अवधि के लिए पैसा जमा हो रहा है, और ब्याज दर कितनी है। लंबी अवधि और ज़्यादा दर, दोनों मिलकर ब्याज के हिस्से को बड़ा बना देते हैं।
RD पर टैक्स के नियम — TDS और धारा 393
RD से मिलने वाला ब्याज भी FD के ब्याज जैसे ही टैक्स के दायरे में आता है — यानी यह आपकी कुल इनकम में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है, और एक तय सीमा से ज़्यादा ब्याज होने पर बैंक/पोस्ट ऑफिस खुद TDS काट लेता है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income Tax Act, 2025 के तहत यह नियम अब धारा 393 के अंतर्गत आता है (पुरानी धारा 194A की जगह)।
| श्रेणी | सालाना ब्याज थ्रेशोल्ड | TDS दर (PAN उपलब्ध होने पर) |
|---|---|---|
| सामान्य व्यक्ति (60 साल से कम) | ₹50,000 | 10% |
| सीनियर सिटीजन (60 साल या ज़्यादा) | ₹1,00,000 | 10% |
| PAN उपलब्ध न होने पर | लागू | 20% |
अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी शून्य बनती है, तो पुराने Form 15G/15H की जगह अब आने वाले Form 121 को समय पर जमा करके TDS रुकवाया जा सकता है। यह थ्रेशोल्ड उस बैंक/पोस्ट ऑफिस से आपकी सभी FD और RD मिलाकर होने वाली कुल ब्याज आय पर लागू होता है, अलग-अलग RD अकाउंट खोलकर इससे बचा नहीं जा सकता। TDS, Form 121, और पूरी उदाहरण के साथ गणना हमने अपने एक अलग आर्टिकल में विस्तार से समझाई है — पूरी जानकारी नीचे “यह भी पढ़ें” सेक्शन में दिए गए लिंक पर मिल जाएगी।

RD में पैसे की ज़रूरत पड़ जाए तो क्या करें — प्रीमैच्योर क्लोज़र, मिस्ड किस्त और लोन
किस्त समय पर जमा न हो तो क्या होगा
पोस्ट ऑफिस RD में किस्त मिस होने पर एक तय डिफॉल्ट फीस लगती है (आमतौर पर हर ₹100 के मंथली डिपॉजिट पर ₹1 प्रति महीने की दर से), और यह बाद की किस्तों के साथ चुकानी होती है। लगातार 4 से ज़्यादा किस्तें मिस होने पर खाता डिस्कंटीन्यू हो जाता है, हालांकि इसे अगले 2 महीनों के अंदर रिवाइव कराया जा सकता है। बैंक RD में पेनल्टी की रकम और लगातार कितनी किस्तें मिस होने पर खाता बंद होगा, यह हर बैंक अपने हिसाब से तय करता है — आमतौर पर 3 से 5 महीने तक लगातार किस्त न जमा होने पर खाता बंद किया जा सकता है। इसलिए RD खुलवाते समय अपने बैंक से मिस्ड-इंस्टॉलमेंट की सही पेनल्टी ज़रूर पूछ लें।
प्रीमैच्योर क्लोज़र (मैच्योरिटी से पहले खाता बंद करना)
पोस्ट ऑफिस RD को खाता खुलने के 3 साल बाद ही प्रीमैच्योर बंद कराया जा सकता है, और उस स्थिति में RD की दर के बजाय पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट (POSA) वाली कम दर पर ब्याज मिलता है। बैंक RD में आमतौर पर ज़्यादातर बैंक कभी भी प्रीमैच्योर क्लोज़र की इजाज़त देते हैं, लेकिन उस अवधि पर लागू ब्याज दर में औसतन 0.5% से 1% की कमी कर दी जाती है — यह कमी बैंक-दर-बैंक अलग हो सकती है, इसलिए अपने बैंक से सही आंकड़ा कन्फर्म करें।
RD पर लोन की सुविधा
अगर मैच्योरिटी से पहले अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ जाए, तो RD बंद करने के बजाय उसके बदले लोन लेना एक बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे आपकी जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज जारी रहता है।
- पोस्ट ऑफिस RD पर लोन: खाता खुलने के 1 साल बाद से, जमा बैलेंस के अधिकतम 50% तक, ब्याज दर RD की दर से 2% ज़्यादा।
- बैंक RD पर लोन: ज़्यादातर बैंक जमा बैलेंस के 70% से 90% तक लोन देते हैं (कुछ बैंकों में यह सीमा और भी ज़्यादा हो सकती है), ब्याज दर आमतौर पर RD की दर से 2% से 3% ज़्यादा होती है। सही प्रतिशत और शर्तें बैंक-दर-बैंक अलग होती हैं, इसलिए अपने बैंक से कन्फर्म करें।
उदाहरण: मान लीजिए रीता चौहान की पोस्ट ऑफिस RD (₹5,000 महीना, 6.7% दर) को 3 साल (36 महीने) हो चुके हैं। उस समय तक जमा बैलेंस लगभग ₹1,99,746 बनता है (कुल जमा ₹1,80,000 + ब्याज लगभग ₹19,746)। इस बैलेंस के 50% तक, यानी लगभग ₹99,873 तक का लोन रीता ले सकती हैं, जबकि उनकी RD चालू रहेगी और ब्याज मिलता रहेगा।
RD किनके लिए सही है, किनके लिए नहीं
| आपकी स्थिति | RD सही है या नहीं |
|---|---|
| सैलरी/नियमित इनकम है और हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाना है | सही विकल्प — अनुशासन के साथ गारंटीड रिटर्न |
| शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म गोल है (बच्चे की फीस, छोटी ट्रिप, इमरजेंसी फंड का हिस्सा) | सही विकल्प — जोखिम-मुक्त और तय रिटर्न |
| रिस्क बिल्कुल नहीं लेना चाहते | सही विकल्प |
| एकमुश्त बड़ी रकम पहले से मौजूद है | FD ज़्यादा फायदेमंद — पूरी रकम दिन-1 से ब्याज कमाएगी |
| महंगाई को अच्छी तरह बीट करने वाला लॉन्ग-टर्म रिटर्न चाहिए | सिर्फ RD काफी नहीं — Equity Mutual Fund/SIP के साथ पोर्टफोलियो बनाएं |
| हर महीने किस्त जमा करने का अनुशासन नहीं बन पाता | सावधानी ज़रूरी — किस्त मिस होने पर पेनल्टी लगेगी |
RD में निवेश से पहले की Checklist
- 2-3 बैंकों और पोस्ट ऑफिस की मौजूदा RD दरें कंपेयर करें, सिर्फ अपने मौजूदा बैंक पर निर्भर न रहें।
- इतनी ही मंथली किस्त तय करें जितनी हर महीने बिना दबाव के जमा कर सकें, ताकि बीच में किस्त मिस न हो।
- ऑटो-डेबिट सेट करें और सेविंग्स अकाउंट में किस्त की तारीख़ से पहले पर्याप्त बैलेंस रखें।
- नॉमिनी की जानकारी ज़रूर भरें और ज़रूरत पड़ने पर अपडेट करें।
- अपनी सभी FD/RD की कुल सालाना ब्याज आय का हिसाब रखें, ताकि TDS थ्रेशोल्ड का अंदाज़ा रहे।
- अगर टैक्स देनदारी शून्य बनती है, तो समय पर Form 121 जमा करें।
- इमरजेंसी में पहले RD पर लोन का विकल्प देखें, प्रीमैच्योर क्लोज़र आख़िरी रास्ता रखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. RD में मिनिमम कितनी रकम से शुरुआत कर सकते हैं?
पोस्ट ऑफिस RD में मिनिमम ₹100 प्रति महीने से शुरुआत हो सकती है, इसके बाद ₹10 के मल्टीपल में जमा किया जा सकता है। बैंक RD में मिनिमम इंस्टॉलमेंट बैंक-दर-बैंक अलग होती है, आमतौर पर यह भी ₹100 या ₹500 के आसपास होती है।
Q2. RD की अधिकतम और न्यूनतम अवधि (टेन्योर) कितनी होती है?
पोस्ट ऑफिस RD की अवधि सिर्फ 5 साल (60 महीने) होती है, जिसे एक बार में 5 साल और बढ़ाया जा सकता है। बैंक RD में टेन्योर ज़्यादा फ्लेक्सिबल है — आमतौर पर 6 महीने से 10 साल तक, बैंक के हिसाब से अलग-अलग विकल्प मिलते हैं।
Q3. क्या RD पर मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री होता है?
नहीं, RD का ब्याज FD के ब्याज जैसे ही पूरी तरह टैक्सेबल होता है और आपकी कुल इनकम में जुड़कर आपके स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। एक तय सीमा से ज़्यादा ब्याज होने पर बैंक/पोस्ट ऑफिस TDS भी काट लेता है।
Q4. RD की किस्त एक महीने मिस हो जाए तो क्या पूरा खाता बंद हो जाता है?
एक किस्त मिस होने से खाता बंद नहीं होता, लेकिन उस पर पेनल्टी ज़रूर लगती है और बाद की किस्त के साथ बकाया राशि चुकानी होती है। लगातार कई महीनों तक (बैंक/पोस्ट ऑफिस के नियम के मुताबिक, आमतौर पर 3-5 महीने या उससे ज़्यादा) किस्त न जमा होने पर खाता डिस्कंटीन्यू हो सकता है।
Q5. RD और FD में से किसमें ज़्यादा ब्याज मिलता है?
समान अवधि के लिए आमतौर पर RD और FD की ब्याज दर लगभग बराबर ही रहती है, क्योंकि RD की दर उस बैंक की उतनी ही अवधि की FD दर से जुड़ी होती है। असली फर्क ब्याज दर में नहीं, बल्कि जमा करने के तरीके में है — FD में पूरी रकम दिन-1 से ब्याज कमाना शुरू करती है, जबकि RD में हर महीने की किस्त सिर्फ अपने बचे हुए टेन्योर पर ही ब्याज कमाती है।
Q6. क्या RD पर लोन लिया जा सकता है?
हां, ज़्यादातर बैंक और पोस्ट ऑफिस RD पर जमा बैलेंस के एक हिस्से (आमतौर पर 50% से 90% तक, संस्थान के हिसाब से अलग) के बराबर लोन देते हैं, जिसकी ब्याज दर RD की दर से थोड़ी ज़्यादा होती है। इससे RD बीच में बंद किए बिना ज़रूरत का पैसा मिल जाता है।
Q7. नाबालिग बच्चे के नाम RD खाता खुल सकता है क्या?
हां, माता-पिता या कानूनी गार्जियन नाबालिग बच्चे के नाम RD खाता खोल सकते हैं और उसे ऑपरेट कर सकते हैं, जब तक बच्चा खुद खाता संभालने की कानूनी उम्र तक नहीं पहुंच जाता।
Q8. RD मैच्योर होने के बाद पैसा कैसे मिलता है?
मैच्योरिटी की तारीख़ पर कुल जमा रकम और उस पर बना ब्याज अपने-आप आपके लिंक्ड सेविंग्स अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है (बैंक RD में), या पोस्ट ऑफिस में आपको मैच्योरिटी पेआउट के लिए एक सर्टिफिकेट/फॉर्म भरकर रकम लेनी होती है।
निष्कर्ष
RD कोई चमक-दमक वाला या हाई-रिटर्न देने वाला निवेश नहीं है, लेकिन जिन्हें हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत को एक अनुशासित, जोखिम-मुक्त तरीके से बढ़ाना है, उनके लिए यह आज भी एक भरोसेमंद विकल्प है। 2026 में, रेपो रेट बढ़ने के बाद दरों में हल्का सुधार आने की उम्मीद के बीच, पोस्ट ऑफिस और अलग-अलग बैंकों की RD दरें कंपेयर करके सही विकल्प चुनना फायदेमंद रहेगा। साथ ही टैक्स के नियम, मिस्ड-किस्त पेनल्टी और प्रीमैच्योर क्लोज़र की शर्तें पहले से समझ लेना ज़रूरी है, ताकि बाद में कोई सरप्राइज़ न मिले। अगर आपका लक्ष्य शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म है और आप बाज़ार का जोखिम नहीं लेना चाहते, तो RD को अपनी मंथली सेविंग्स का एक हिस्सा ज़रूर बनाइए — लेकिन महंगाई को बीट करने के लिए सिर्फ RD के भरोसे न रहें, पोर्टफोलियो में Equity या Mutual Fund जैसे ग्रोथ विकल्प भी शामिल करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है, यह निवेश या टैक्स सलाह नहीं है। इसमें दी गई ब्याज दरें, थ्रेशोल्ड लिमिट और नियम लेख लिखे जाने के समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और समय-समय पर बदल सकते हैं। कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले अपने बैंक, पोस्ट ऑफिस या फाइनेंशियल एडवाइज़र से मौजूदा दरों और नियमों की पुष्टि ज़रूर कर लें।
