पुणे में एक IT कंपनी में काम करने वाले दिनेश कुलकर्णी के बेटे अर्जुन को जर्मनी की एक यूनिवर्सिटी से मास्टर्स के लिए एडमिशन मिल गया। फीस, रहने का खर्च और फ्लाइट मिलाकर करीब ₹28 लाख का जुगाड़ करना था। दिनेश ने अपनी सेविंग्स से ₹8 लाख दिए और बाकी ₹20 लाख के लिए बैंक से एजुकेशन लोन ले लिया। लोन मिल गया, लेकिन असली सवाल अब शुरू हुआ — “इस लोन पर जो ब्याज हर महीने भरना है, उस पर टैक्स में कोई राहत मिलेगी या नहीं? और अगर मिलेगी तो कितनी, कब तक, और किस तरह क्लेम करनी है?”
जवाब सीधा है — हां, एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में इसे Section 80E कहा जाता था, और नए Income Tax Act, 2025 (1 अप्रैल 2026 से लागू) में यही प्रावधान अब Section 129 के नाम से जाना जाता है। इस छूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ब्याज की रकम पर कोई अपर लिमिट नहीं है, लेकिन यह सिर्फ उन्हीं टैक्सपेयर्स को मिलती है जो Old Tax Regime में हैं, और इसे सिर्फ 8 साल तक ही क्लेम किया जा सकता है। इस गाइड में हम पूरी डिटेल में समझेंगे कि यह छूट किसे मिलती है, कितनी मिलती है, एजुकेशन लोन के बिना-कॉलेटरल नियम क्या हैं, सरकार की कौन सी स्कीम्स ब्याज में राहत देती हैं, और ITR में इसे कैसे क्लेम करना है।

एजुकेशन लोन टैक्स बेनिफिट क्या है? Section 80E अब Section 129 क्यों हुआ
जब भी कोई व्यक्ति हायर एजुकेशन के लिए बैंक या किसी मान्यता प्राप्त फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन से लोन लेता है, तो उस लोन पर जो ब्याज वह साल भर में चुकाता है, उस पूरी ब्याज रकम को उसकी टैक्सेबल इनकम से घटाया जा सकता है। यह डिडक्शन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज सेक्शन 80E के मुताबिक “किसी भी वित्तीय संस्थान या अनुमोदित चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन से लिए गए लोन पर पिछले वर्ष में चुकाए गए ब्याज” पर मिलता है।
जुलाई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए Income Tax Act, 2025 में Chapter VI-A के पुराने डिडक्शन सेक्शन्स को दोबारा व्यवस्थित करके Chapter VIII में डाला गया है, और इस रीऑर्गनाइजेशन में पुराना Section 80E अब Section 129 बन गया है — यह बात दो अलग टैक्स पोर्टल्स से कन्फर्म हुई है। कानून का मतलब (कोई अपर लिमिट नहीं, 8 साल की सीमा, कौन क्लेम कर सकता है) जहां तक रिपोर्ट किया गया है वही बना हुआ है, बस सेक्शन नंबर बदला है। ITR भरते समय अगर आपका सॉफ्टवेयर या CA पुराना नाम “Section 80E” दिखाए तो घबराएं नहीं — मतलब वही है, सिर्फ नए एक्ट में नंबरिंग अलग है। फिर भी, क्लेम करने से पहले अपने CA से या इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट से नए एक्ट का एग्जैक्ट सेक्शन टेक्स्ट एक बार जरूर कन्फर्म करवा लें, क्योंकि यह जानकारी सेकेंडरी सोर्सेज पर आधारित है।
यह टैक्स छूट किसे मिलती है? Eligibility की पूरी शर्तें
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक यह डिडक्शन सिर्फ “individual” टैक्सपेयर को मिलता है — यानी किसी भी HUF, पार्टनरशिप फर्म या कंपनी को यह बेनिफिट नहीं मिलता। इसके अलावा लोन किसके लिए लिया गया है, यह भी मैटर करता है। कानून के मुताबिक डिडक्शन तभी मिलता है जब लोन निम्नलिखित में से किसी एक की हायर एजुकेशन के लिए लिया गया हो:
- खुद टैक्सपेयर की हायर एजुकेशन के लिए
- टैक्सपेयर के पति/पत्नी की हायर एजुकेशन के लिए
- टैक्सपेयर के बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए
- किसी ऐसे स्टूडेंट की हायर एजुकेशन के लिए, जिसका टैक्सपेयर लीगल गार्जियन (legal guardian) हो
ध्यान देने वाली बात यह है कि लोन टैक्सपेयर के खुद के नाम पर लिया गया होना चाहिए — यानी अगर पिता बेटे की पढ़ाई के लिए लोन लेते हैं, तो डिडक्शन पिता को मिलेगा, भले ही पढ़ाई बेटे की हो रही हो। अगर बेटा खुद लोन लेकर नौकरी लगने के बाद खुद ही चुकाए, तो डिडक्शन बेटे को मिलेगा।
“हायर एजुकेशन” की परिभाषा — कौन से कोर्स कवर होते हैं
कानून के मुताबिक “हायर एजुकेशन” का मतलब है — “कोई भी ऐसा कोर्स जो सीनियर सेकेंडरी परीक्षा (यानी 12वीं) या उसके समकक्ष पास करने के बाद किया गया हो, और जो किसी स्कूल, बोर्ड या यूनिवर्सिटी से हो जिसे केंद्र सरकार, राज्य सरकार, लोकल अथॉरिटी या किसी अन्य अधिकृत संस्था से मान्यता मिली हो।” यानी सिर्फ ग्रेजुएशन या मास्टर्स ही नहीं, बल्कि 12वीं के बाद का कोई भी मान्यता प्राप्त वोकेशनल या डिप्लोमा कोर्स भी इस दायरे में आता है।
एक और जरूरी सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ भारत में पढ़ाई के लिए मिलता है या विदेश में पढ़ाई के लिए भी? टैक्स पोर्टल्स के मुताबिक जवाब है — हां, भारत और विदेश दोनों जगह की पढ़ाई के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर यह डिडक्शन मिलता है। इसलिए दिनेश कुलकर्णी जैसे पैरेंट्स, जिनके बच्चे विदेश में पढ़ने जा रहे हैं, वे भी इस छूट के लिए पूरी तरह एलिजिबल हैं।

कितनी टैक्स छूट मिलती है और कितने साल तक — No Limit, लेकिन 8 साल की सीमा
यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस डिडक्शन पर कोई अपर मॉनेटरी लिमिट नहीं है। आप साल भर में जितना भी ब्याज चुकाएं — ₹50,000 हो या ₹5 लाख — पूरी रकम आपकी टैक्सेबल इनकम से घट जाती है। लेकिन इसकी एक टाइम लिमिट है: इनकम टैक्स कानून के मुताबिक यह डिडक्शन “initial assessment year” (यानी जिस साल से आपने ब्याज चुकाना शुरू किया) और उसके बाद के अगले 7 असेसमेंट ईयर — यानी कुल मिलाकर अधिकतम 8 साल तक ही क्लेम किया जा सकता है, या जब तक पूरा ब्याज चुका न दिया जाए, जो भी पहले हो।
एक जरूरी बात यह भी है कि यह डिडक्शन सिर्फ ब्याज पर मिलता है, लोन की मूल रकम (प्रिंसिपल) की वापसी पर नहीं मिलता। मूल रकम की किस्त चाहे कितनी भी बड़ी हो, उस पर कोई टैक्स छूट नहीं है।
| बिंदु | नियम |
|---|---|
| किस पर छूट मिलती है | सिर्फ ब्याज पर (मूल रकम पर नहीं) |
| अधिकतम लिमिट | कोई अपर लिमिट नहीं |
| कितने साल तक | अधिकतम 8 असेसमेंट ईयर (ब्याज चुकाना शुरू करने वाले साल से) |
| कौन क्लेम कर सकता है | सिर्फ Individual (HUF/कंपनी/फर्म नहीं) |
| किसकी पढ़ाई के लिए | खुद, पति/पत्नी, बच्चे, या जिसका लीगल गार्जियन हो वह स्टूडेंट |
| कवरेज | भारत और विदेश, दोनों जगह की हायर एजुकेशन |
उदाहरण: मानिए रोहित शर्मा ने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए 2024 में एजुकेशन लोन लिया, जिसकी मोरेटोरियम (पढ़ाई की अवधि + 1 साल ग्रेस पीरियड) खत्म होने के बाद 2026 से EMI चुकाना शुरू हुआ। तो रोहित यह डिडक्शन असेसमेंट ईयर 2027-28 (यानी इनिशियल ईयर) से लेकर अगले 7 साल तक, यानी असेसमेंट ईयर 2034-35 तक क्लेम कर सकते हैं — बशर्ते तब तक लोन का ब्याज पूरी तरह चुका न दिया गया हो।
कौन से लोन इस डिडक्शन के लिए क्वालिफाई करते हैं
यह बहुत जरूरी पॉइंट है जिसे ज्यादातर लोग मिस कर जाते हैं। यह डिडक्शन सिर्फ उन लोन पर मिलता है जो इन दो तरह के सोर्स से लिए गए हों:
- फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन: कोई भी बैंकिंग कंपनी जिस पर Banking Regulation Act, 1949 लागू होता है (यानी सभी शेड्यूल्ड बैंक), या कोई अन्य फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन जिसे केंद्र सरकार ऑफिशियल गजट में नोटिफाई करे (जैसे NBFC जिन्हें सरकार ने मंजूरी दी हो)
- अप्रूव्ड चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन: कोई ऐसी संस्था जिसे Section 10(23C) के तहत या Section 80G के तहत चैरिटेबल पर्पज के लिए अप्रूवल मिला हो
इसका सीधा मतलब है — अगर आपने पढ़ाई के लिए किसी दोस्त, रिश्तेदार या एम्प्लॉयर से पैसे उधार लिए हैं, तो उस पर चुकाए गए ब्याज पर यह डिडक्शन नहीं मिलेगा, चाहे वह ब्याज आपने सच में चुकाया हो। डिडक्शन क्लेम करने के लिए लोन किसी रजिस्टर्ड बैंक या NBFC से ही लिया होना चाहिए।
Old Tax Regime बनाम New Tax Regime — यह छूट कहां मिलेगी?
यह सबसे जरूरी और सबसे ज्यादा गलत समझी जाने वाली बात है। मल्टीपल टैक्स पोर्टल्स इस बात पर एकमत हैं कि Section 80E/129 का डिडक्शन सिर्फ Old Tax Regime में उपलब्ध है। अगर आपने ITR भरते समय New Tax Regime (Section 115BAC) चुना है, तो आप एजुकेशन लोन के ब्याज पर यह छूट क्लेम नहीं कर सकते।
| टैक्स रिजीम | एजुकेशन लोन इंटरेस्ट डिडक्शन |
|---|---|
| Old Tax Regime | मिलता है (कोई अपर लिमिट नहीं, 8 साल तक) |
| New Tax Regime (Section 115BAC) | नहीं मिलता |
इसलिए अगर आपका एजुकेशन लोन का ब्याज बड़ी रकम में बन रहा है, तो यह जरूर कैलकुलेट करें कि Old Regime में इस डिडक्शन के साथ आपका टैक्स आउटगो कम हो रहा है या New Regime की कम स्लैब रेट्स के साथ। बेहतर यही है कि दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके कंपेयर कर लें, या अपने CA से यह हिसाब लगवा लें।
ITR में Section 80E/129 का डिडक्शन कैसे क्लेम करें
- ITR फॉर्म भरते समय “Old Tax Regime” सेलेक्ट करें (डिफॉल्ट अब New Regime है, इसलिए यह स्टेप मिस न करें)
- “Chapter VI-A Deductions” (या नए सिस्टम में “Chapter VIII Deductions”) सेक्शन में जाएं
- Section 80E (या Section 129) के सामने उस फाइनेंशियल ईयर में बैंक को चुकाए गए टोटल ब्याज की रकम भरें — यह रकम अपने बैंक से मिलने वाले “इंटरेस्ट सर्टिफिकेट” या “प्रोविजनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट” से लें, जो लगभग हर बैंक साल के अंत में जारी करता है
- सिर्फ ब्याज की रकम भरें, EMI में शामिल प्रिंसिपल अमाउंट को इसमें शामिल न करें
- डिडक्शन अपने आप आपकी ग्रॉस टोटल इनकम से घट जाएगा और टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी
- इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, लोन सैंक्शन लेटर और लोन अकाउंट स्टेटमेंट को सेफ रखें — असेसिंग ऑफिसर मांगे तो दिखाने के लिए
बिना कॉलेटरल एजुकेशन लोन कैसे मिलता है — RBI और IBA के नियम
जुलाई 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में एजुकेशन लोन से जुड़े आंकड़े और नियम साझा किए। उनके मुताबिक सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक Indian Banks’ Association (IBA) के Model Education Loan Scheme को फॉलो करते हैं, जिसके तहत सरकार की सब्सिडी और गारंटी स्कीम्स के सहारे ₹7.5 लाख तक का लोन बिना कॉलेटरल और बिना थर्ड-पार्टी गारंटी के मिल सकता है।
| लोन अमाउंट | कॉलेटरल/मार्जिन नियम |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | कोई मार्जिन नहीं, RBI ने बैंकों को कॉलेटरल न मांगने की सलाह दी है |
| ₹7.5 लाख तक | सरकारी गारंटी स्कीम्स के सहारे बिना कॉलेटरल, बिना थर्ड-पार्टी गारंटर |
| ₹7.5 लाख से ऊपर | सामान्यतः प्रॉपर्टी या FD जैसा टैंजिबल कॉलेटरल जरूरी |
रिपेमेंट होलीडे (यानी मोरेटोरियम पीरियड) आम तौर पर कोर्स की अवधि + 1 साल तक का होता है, और रिपेमेंट टेन्योर 15 साल तक जा सकता है। यह ध्यान रहे कि यह जनरल गाइडलाइन है — हर बैंक की अपनी पॉलिसी में थोड़ा फर्क हो सकता है, इसलिए अपने बैंक से लिखित में कॉलेटरल और मोरेटोरियम की शर्तें जरूर कन्फर्म करें।
सरकार की इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम्स — PM Vidyalaxmi, CSIS और CGFSEL
केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष (2026-27) में एजुकेशन लोन को आसान बनाने वाली स्कीम्स के लिए ₹1,050 करोड़ का बजट रखा है, जो तीन स्कीम्स में बंटा है — यह जानकारी वित्त मंत्री के राज्यसभा में दिए गए जवाब पर आधारित है।
| स्कीम | क्या मिलता है | किसके लिए |
|---|---|---|
| PM Vidyalaxmi (नवंबर 2024 से लागू) | ₹10 लाख तक के लोन पर मोरेटोरियम पीरियड (कोर्स + 1 साल) के दौरान 3% इंटरेस्ट रिलीफ; बैंकों को ₹7.5 लाख तक के लोन पर 75% सरकारी क्रेडिट गारंटी | टॉप-रैंक्ड हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस में एडमिशन, पारिवारिक इनकम ₹8 लाख/साल तक (अधिकतम 1 लाख स्टूडेंट्स/साल, अगर कोई और स्कॉलरशिप/सब्सिडी नहीं मिल रही) |
| Central Sector Interest Subsidy Scheme (CSIS, 2009 से) | ₹10 लाख तक के लोन पर मोरेटोरियम पीरियड में पूरा ब्याज सब्सिडाइज्ड | परिवार की संयुक्त वार्षिक इनकम ₹4.5 लाख तक; NAAC/NBA-एक्रेडिटेड या इंस्टिट्यूशन ऑफ नेशनल इम्पॉर्टेंस में प्रोफेशनल/टेक्निकल कोर्स |
| Credit Guarantee Fund Scheme for Education Loans (CGFSEL, 2015 से) | ₹7.5 लाख तक के लोन पर नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी के जरिए 75% क्रेडिट गारंटी बैंक को | जिन स्टूडेंट्स के पास कॉलेटरल या गारंटर नहीं है; कोई इनकम लिमिट नहीं |
इन तीनों स्कीम्स की जानकारी और अप्लाई करने का प्रोसेस आधिकारिक Vidya Lakshmi पोर्टल (vidyalakshmi.co.in) पर उपलब्ध है, जहां से स्टूडेंट्स एक ही एप्लीकेशन से कई बैंकों में लोन अप्लाई कर सकते हैं। ध्यान दें कि इसके अलावा कुछ राज्य सरकारों और SC/ST, OBC, माइनॉरिटी वर्गों के लिए अलग से इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम्स भी चलती हैं — लेकिन इनकी एग्जैक्ट इनकम लिमिट और बेनिफिट की डिटेल बदलती रहती है, इसलिए अपनी कैटेगरी के हिसाब से सटीक जानकारी के लिए Vidya Lakshmi पोर्टल या नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (scholarships.gov.in) पर ही चेक करें — यहां गलत आंकड़ा बताने से बेहतर है कि आप सीधे पोर्टल से कन्फर्म करें।

बैंक के हिसाब से इंटरेस्ट रेट — एक उदाहरण (SBI)
एजुकेशन लोन की ब्याज दर बैंक, कॉलेटरल और इंस्टिट्यूशन के हिसाब से अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए SBI की पब्लिश्ड रेट शीट के मुताबिक (जो रेपो रेट से जुड़ी External Benchmark Rate पर आधारित है और समय-समय पर बदलती है):
| स्कीम | ब्याज दर (उदाहरण, बदल सकती है) |
|---|---|
| SBI Student Loan — बिना कॉलेटरल (₹7.5 लाख तक) | करीब 10.15% |
| SBI Student Loan — कॉलेटरल के साथ (₹7.5 लाख से ऊपर) | करीब 9.15% |
| SBI Scholar Loan (चुनिंदा टॉप इंस्टिट्यूशंस के लिए) | करीब 7.15% – 7.90% |
| SBI Skill Loan — बिना कॉलेटरल (₹7.5 लाख तक) | करीब 9.65% |
| PM Vidyalaxmi स्कीम के तहत | करीब 7.15% – 8.65% |
ज्यादातर बैंक गर्ल स्टूडेंट्स को 0.25% से 0.50% तक की अतिरिक्त छूट भी देते हैं। ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण के लिए हैं और समय-समय पर बदलते रहते हैं (ब्याज दरें रेपो रेट से लिंक्ड हैं), इसलिए लोन लेने से ठीक पहले अपने बैंक की ब्रांच या वेबसाइट से करंट रेट जरूर कन्फर्म करें।
हिसाब लगाकर समझें — 3 प्रैक्टिकल उदाहरण
उदाहरण 1 — EMI और टोटल इंटरेस्ट: मानिए सूरत की नेहा पटेल ने बिना कॉलेटरल ₹8,00,000 का एजुकेशन लोन 10.15% ब्याज दर पर लिया और मोरेटोरियम के बाद 8 साल (96 महीने) में इसे चुकाना है। EMI फॉर्मूले से कैलकुलेट करने पर:
- मंथली EMI ≈ ₹12,203
- 8 साल में टोटल पेमेंट ≈ ₹11,71,480
- इसमें से टोटल ब्याज ≈ ₹3,71,480
यानी नेहा 8 साल में करीब ₹3.71 लाख सिर्फ ब्याज के रूप में चुकाएंगी — और यह पूरी रकम (हर साल जितना ब्याज उस साल चुकाया गया) Section 80E/129 के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए क्लेम हो सकती है, बशर्ते वे Old Tax Regime में हों।
उदाहरण 2 — PM Vidyalaxmi की 3% इंटरेस्ट रिलीफ से कितनी बचत: मानिए ₹10,00,000 का लोन है, जिसकी सामान्य ब्याज दर 10.15% है, लेकिन PM Vidyalaxmi स्कीम के तहत पारिवारिक इनकम ₹8 लाख/साल से कम होने पर 3% की इंटरेस्ट रिलीफ मिल रही है (यानी असल ब्याज दर 7.15% हो जाती है), 10 साल के रिपेमेंट टेन्योर पर:
- बिना रिलीफ (10.15%): EMI ≈ ₹13,298, टोटल पेमेंट ≈ ₹15,95,793
- 3% रिलीफ के साथ (7.15%): EMI ≈ ₹11,688, टोटल पेमेंट ≈ ₹14,02,596
- टोटल बचत ≈ ₹1,93,197 पूरे टेन्योर में
उदाहरण 3 — टैक्स में कितनी बचत: मानिए किसी टैक्सपेयर ने एक फाइनेंशियल ईयर में ₹85,000 ब्याज चुकाया और वे 30% टैक्स स्लैब (Old Regime, 4% सेस के साथ) में आते हैं। डिडक्शन क्लेम करने पर टैक्स में बचत होगी:
₹85,000 × 30% × 1.04 (सेस) ≈ ₹26,520 टैक्स की बचत उस साल। अगर कोई 20% स्लैब में है, तो यही बचत घटकर करीब ₹17,680 रह जाएगी। (ये कैलकुलेशन सिर्फ उदाहरण के लिए दिए गए असम्पशन पर आधारित हैं, अपनी एक्चुअल इनकम और स्लैब के हिसाब से आंकड़े अलग होंगे।)

एजुकेशन लोन लेने से पहले ध्यान रखने वाली बातें — चेकलिस्ट
- सिर्फ ब्याज दर नहीं, प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनल्टी भी कंपेयर करें
- ₹7.5 लाख तक की जरूरत हो तो पहले सरकारी गारंटी स्कीम्स (CGFSEL) वाले बैंक से बिना कॉलेटरल लोन की कोशिश करें
- PM Vidyalaxmi, CSIS जैसी स्कीम्स के लिए एलिजिबिलिटी Vidya Lakshmi पोर्टल पर जरूर चेक करें — फ्री सब्सिडी छूट जाना बड़ा नुकसान है
- इंटरेस्ट सर्टिफिकेट हर साल बैंक से लेकर रखें, ITR फाइलिंग के वक्त यही डॉक्यूमेंट काम आएगा
- Old Regime में ही यह डिडक्शन मिलता है, इसलिए ITR फाइल करने से पहले दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके देखें
- मोरेटोरियम पीरियड में भी अगर संभव हो तो ब्याज का कुछ हिस्सा चुकाते रहें, ताकि असल ब्याज का बोझ (compounding) कम हो
- को-एप्लिकेंट/गार्जियन के तौर पर कौन लोन में शामिल है, यह साफ कर लें — क्योंकि डिडक्शन उसी को मिलेगा जिसके नाम पर लोन है
एजुकेशन लोन के फायदे और नुकसान
| फायदे | नुकसान / सावधानियां |
|---|---|
| ₹7.5 लाख तक बिना कॉलेटरल मिल सकता है | ₹7.5 लाख से ऊपर प्रॉपर्टी/FD जैसा कॉलेटरल मांगा जा सकता है |
| ब्याज पर कोई अपर लिमिट वाली टैक्स छूट (Old Regime में) | New Tax Regime में यह छूट बिल्कुल नहीं मिलती |
| मोरेटोरियम पीरियड (कोर्स + 1 साल) मिलता है | मोरेटोरियम के दौरान भी ब्याज जुड़ता रहता है (जमा होता है) |
| PM Vidyalaxmi/CSIS जैसी सरकारी स्कीम्स से ब्याज में सीधी राहत | सब्सिडी स्कीम्स में इनकम लिमिट और सीटों की संख्या सीमित होती है |
| रिपेमेंट टेन्योर 15 साल तक मिल सकता है, EMI मैनेजेबल रहती है | लंबा टेन्योर मतलब टोटल ब्याज ज्यादा चुकाना |
यह लोन किसके लिए सही है और किसके लिए नहीं
अगर आपको मान्यता प्राप्त इंस्टिट्यूशन में एडमिशन मिला है, पारिवारिक इनकम सीमित है, और आप Old Tax Regime में टैक्स भरना पसंद करते हैं, तो एजुकेशन लोन + सरकारी सब्सिडी स्कीम्स का कॉम्बिनेशन फाइनेंशियली समझदारी भरा फैसला हो सकता है। लेकिन अगर आपके पास पहले से पर्याप्त सेविंग्स हैं, या आप New Tax Regime में हैं जहां यह डिडक्शन काम नहीं करेगा, तो पूरा लोन लेने से पहले एक बार ओनरशिप कॉस्ट (ब्याज + प्रोसेसिंग फीस) बनाम सेविंग्स का इस्तेमाल करने का हिसाब जरूर लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट की कोई अपर लिमिट है?
नहीं, Section 80E (नए एक्ट में Section 129) के तहत ब्याज की रकम पर कोई अपर मॉनेटरी लिमिट नहीं है। जितना भी ब्याज साल में चुकाया जाए, पूरी रकम डिडक्शन के लिए क्लेम हो सकती है, बशर्ते Old Tax Regime में हों।
Q2. क्या New Tax Regime में एजुकेशन लोन का डिडक्शन मिलता है?
नहीं। मल्टीपल टैक्स पोर्टल्स के मुताबिक यह डिडक्शन सिर्फ Old Tax Regime में उपलब्ध है, New Tax Regime (Section 115BAC) में नहीं मिलता।
Q3. यह डिडक्शन कितने साल तक क्लेम कर सकते हैं?
अधिकतम 8 असेसमेंट ईयर तक — जिस साल से ब्याज चुकाना शुरू किया (इनिशियल असेसमेंट ईयर) और उसके बाद के 7 साल, या जब तक पूरा ब्याज चुका न दिया जाए, जो भी पहले हो।
Q4. क्या विदेश में पढ़ाई के लिए लिया गया एजुकेशन लोन भी कवर होता है?
हां, टैक्स पोर्टल्स के मुताबिक भारत और विदेश दोनों जगह की हायर एजुकेशन के लिए लिया गया लोन इस डिडक्शन के लिए एलिजिबल है।
Q5. क्या प्रिंसिपल (मूल रकम) की EMI पर भी टैक्स छूट मिलती है?
नहीं, यह डिडक्शन सिर्फ ब्याज की रकम पर मिलता है। प्रिंसिपल रिपेमेंट पर कोई टैक्स छूट नहीं है।
Q6. दोस्त या रिश्तेदार से उधार लिए पैसे पर क्या यह छूट मिलेगी?
नहीं। यह छूट सिर्फ बैंक/अप्रूव्ड फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन या अप्रूव्ड चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन से लिए गए लोन पर मिलती है। दोस्त, रिश्तेदार या एम्प्लॉयर से लिया उधार इसमें कवर नहीं होता।
Q7. ₹7.5 लाख तक का एजुकेशन लोन बिना कॉलेटरल कैसे मिलेगा?
IBA के Model Education Loan Scheme और सरकार की CGFSEL जैसी क्रेडिट गारंटी स्कीम्स के सहारे कई बैंक ₹7.5 लाख तक का लोन बिना कॉलेटरल और बिना थर्ड-पार्टी गारंटर के देते हैं। इसके लिए सीधे बैंक से इस स्कीम के तहत अप्लाई करने की बात करें।
Q8. PM Vidyalaxmi स्कीम का फायदा कौन ले सकता है?
सरकारी डेटा के मुताबिक जिन स्टूडेंट्स को टॉप-रैंक्ड हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस में एडमिशन मिला है और जिनकी पारिवारिक इनकम ₹8 लाख/साल तक है, वे ₹10 लाख तक के लोन पर मोरेटोरियम पीरियड के दौरान 3% इंटरेस्ट रिलीफ के लिए एलिजिबल हो सकते हैं (हर साल अधिकतम 1 लाख स्टूडेंट्स तक सीमित)। एग्जैक्ट एलिजिबिलिटी Vidya Lakshmi पोर्टल पर चेक करें।
यह भी पढ़ें
- नया Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल 2026 से क्या बदला?
- CIBIL Score क्या है 2026: सुधारने के पूरे तरीके
- ₹5 लाख Personal Loan की EMI कितनी होगी?
- गोल्ड लोन के नए नियम 2026
निष्कर्ष
एजुकेशन लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट — पुराना नाम Section 80E, नया नाम Section 129 — एक ऐसा बेनिफिट है जिसकी कोई अपर लिमिट नहीं है, लेकिन इसकी शर्तें साफ समझना जरूरी है: यह सिर्फ Old Tax Regime में मिलता है, सिर्फ बैंक/अप्रूव्ड इंस्टिट्यूशन से लिए लोन पर मिलता है, सिर्फ ब्याज पर मिलता है (प्रिंसिपल पर नहीं), और सिर्फ 8 साल तक क्लेम किया जा सकता है। इसके साथ ही PM Vidyalaxmi, CSIS और CGFSEL जैसी सरकारी स्कीम्स ब्याज दर में सीधी राहत या बिना-कॉलेटरल लोन की सुविधा देती हैं — इनकी एलिजिबिलिटी जरूर चेक करें, क्योंकि यह मुफ्त पैसा बचाने का मौका है। लोन लेने से पहले हर बैंक की करंट ब्याज दर, कॉलेटरल की शर्त और अपनी टैक्स रिजीम का हिसाब लगाकर ही फैसला लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है, यह कोई टैक्स या इनवेस्टमेंट एडवाइस नहीं है। इनकम टैक्स के नियम, सेक्शन नंबरिंग (नए Income Tax Act, 2025 के तहत) और बैंकों की ब्याज दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं। किसी भी डिडक्शन का क्लेम करने या एजुकेशन लोन लेने से पहले कृपया अपने CA, टैक्स एडवाइजर या बैंक से मौजूदा नियम और दरें जरूर कन्फर्म करें।
