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प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS 2026: पुराना 194-IA अब Section 393(1), Form 26QB की जगह Form 141 — पूरी गाइड

रियल एस्टेट एजेंट चाबी और घर के मॉडल के साथ प्रॉपर्टी डील समझाते हुए

जब भी कोई ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस ही नहीं, बल्कि एक और ज़िम्मेदारी खरीदार के कंधों पर आ जाती है — प्रॉपर्टी TDS नियम के तहत TDS काटना। लंबे समय से यह नियम Income Tax Act, 1961 के Section 194-IA के तहत चलता था, जिसमें खरीदार को कुल कीमत का 1% TDS काटकर Form 26QB के ज़रिए सरकार के पास जमा करना होता था। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act, 2025 लागू हो जाने के बाद यही नियम अब Section 393(1) के तहत आता है, और 26QB की जगह नया Form 141 इस्तेमाल होता है। दर और ₹50 लाख की लिमिट वही पुरानी है, लेकिन सेक्शन नंबर, फॉर्म और कुछ प्रोसेस बदल गए हैं — और यही बदलाव बहुत से खरीदारों और यहां तक कि कुछ एजेंट्स को भी कंफ्यूज कर रहा है। इस गाइड में हम पूरी बात — पुराना नियम, नया नियम, दर, फॉर्म, due date, पेनल्टी और असली उदाहरणों के साथ — आसान हिंदी में समझेंगे।

रियल एस्टेट एजेंट चाबी और घर के मॉडल के साथ प्रॉपर्टी डील समझाते हुए

Section 194-IA क्या था, और यह अब क्यों बदल गया?

2013 में शुरू हुए Section 194-IA का मकसद सीधा था — प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में सरकार को यह पता चल सके कि कितने पैसों का ट्रांजैक्शन हुआ, और सेलर की तरफ से टैक्स चोरी की गुंजाइश कम हो। इस सेक्शन के तहत अगर कोई प्रॉपर्टी ₹50 लाख या इससे ज़्यादा में बिकती थी (खेती की ज़मीन को छोड़कर), तो खरीदार को कुल रकम का 1% टैक्स काटकर सरकार के पास जमा करना पड़ता था। यह नियम वर्षों तक बिना किसी बड़े बदलाव के चलता रहा।

2025 में संसद ने पूरे Income Tax Act, 1961 की जगह एक नया, सरल Income Tax Act, 2025 पास किया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गया। इस नए कानून में पुराने ज़्यादातर नियमों को वैसे ही रखा गया है, बस सेक्शन नंबरिंग और भाषा को आसान बनाया गया है। प्रॉपर्टी पर TDS का यही नियम अब नए कानून में Section 393 के तहत TDS की पूरी टेबल में एक एंट्री के रूप में आता है, जिसे आमतौर पर Section 393(1) कहा जा रहा है।

पुराना बनाम नया: एक नज़र में फर्क

नीचे की टेबल में पुराने और नए नियम का सीधा तुलना दिया गया है, जिससे कंफ्यूजन दूर हो जाए:

बिंदुपुराना नियम (31 मार्च 2026 तक)नया नियम (1 अप्रैल 2026 से)
कानूनIncome Tax Act, 1961Income Tax Act, 2025
सेक्शनSection 194-IASection 393(1)
फॉर्म (पेमेंट/स्टेटमेंट)Form 26QBForm 141
TDS दर1% (सामान्य), PAN न होने पर 20%1% (सामान्य), PAN न होने पर 20% — कोई बदलाव नहीं
थ्रेशोल्ड लिमिट₹50 लाख या उससे ज़्यादा₹50 लाख या उससे ज़्यादा — कोई बदलाव नहीं
TAN की ज़रूरतनहीं, PAN से काम चलता हैनहीं, PAN से काम चलता है
जमा करने की समय-सीमाकटौती वाले महीने के खत्म होने से 30 दिन के भीतरकटौती वाले महीने के खत्म होने से 30 दिन के भीतर

साफ है कि मूल भावना — यानी 1% की दर और ₹50 लाख की लिमिट — बिल्कुल नहीं बदली है। बदलाव सिर्फ सेक्शन नंबर और फॉर्म के नाम में हुआ है। अगर आपका ट्रांजैक्शन 31 मार्च 2026 से पहले का है, तो पुराना Form 26QB ही भरना होगा; 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद के पेमेंट के लिए Form 141 इस्तेमाल होगा। अगर किसी एक डील में पेमेंट इस तारीख के आगे-पीछे बंटा हुआ है, तो दोनों फॉर्म अलग-अलग किश्तों के लिए भरने पड़ सकते हैं।

किन प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन पर यह TDS लागू होता है?

यह TDS हर प्रॉपर्टी डील पर नहीं, बल्कि कुछ तय शर्तों पर लागू होता है:

  • प्रॉपर्टी की कुल कीमत या स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू, जो भी ज़्यादा हो, ₹50 लाख या इससे ऊपर होनी चाहिए।
  • यह नियम flats, plots, commercial property, बने हुए मकान — यानी ज़्यादातर तरह की immovable property पर लागू होता है।
  • खेती की ज़मीन (rural agricultural land) को इस नियम से बाहर रखा गया है।
  • सेलर भारत में रेज़िडेंट होना चाहिए। अगर सेलर non-resident है, तो TDS इस सेक्शन के तहत नहीं, बल्कि अलग प्रावधान के तहत कटता है और दर भी अलग (ज़्यादा) होती है — ऐसे मामलों में CA से सलाह ज़रूरी है।
  • सरकार, RBI, कुछ कॉर्पोरेशन और नोटिफाइड म्यूचुअल फंड जैसे पेयी (payee) को यह TDS लागू नहीं होता।

₹50 लाख की लिमिट कैसे गिनी जाती है?

यहां सबसे ज़्यादा गलतफहमी होती है। मान लीजिए किसी फ्लैट की कीमत ₹48 लाख है, लेकिन उसमें parking, club membership और maintenance का advance मिलाकर कुल ₹52 लाख बन जाता है — तो TDS पूरे ₹52 लाख पर कटेगा, सिर्फ बेसिक प्राइस पर नहीं। इसी तरह, अगर प्रॉपर्टी में दो या ज़्यादा खरीदार या बेचने वाले हैं (joint buyers/sellers), तो हर व्यक्ति की अलग-अलग हिस्सेदारी नहीं, बल्कि पूरी प्रॉपर्टी की कुल कीमत देखी जाती है। मतलब अगर पति-पत्नी मिलकर ₹70 लाख का फ्लैट खरीद रहे हैं और हर एक का हिस्सा ₹35 लाख है, तब भी TDS लागू होगा, क्योंकि कुल वैल्यू ₹50 लाख से ज़्यादा है।

TDS दर कितनी है — 1% या 20%?

सामान्य स्थिति में दर सिर्फ 1% है, और इस पर सरचार्ज या सेस अलग से नहीं जुड़ता। लेकिन अगर सेलर का PAN उपलब्ध नहीं है, या PAN Aadhaar से लिंक नहीं है (inoperative PAN), तो Section 206AA के तहत दर सीधे 20% तक पहुंच जाती है। यह फर्क इतना बड़ा होता है कि आगे दिए उदाहरण में आप देखेंगे कि यह कितने लाख रुपये का अंतर बना सकता है। इसलिए डील फाइनल करने से पहले सेलर का PAN ज़रूर चेक करें और यह भी पक्का करें कि वह Aadhaar से लिंक और “ऑपरेटिव” स्थिति में है।

TDS कब और कैसे काटें — Step by Step प्रोसेस

प्रॉपर्टी खरीदते समय TDS की ज़िम्मेदारी पूरी तरह खरीदार की होती है, न कि सेलर या बिल्डर की। प्रोसेस इस तरह चलता है:

  1. कटौती कब करें: पेमेंट करने या प्रॉपर्टी की कीमत को क्रेडिट करने में से जो भी पहले हो, उस समय TDS काटा जाता है। अगर पेमेंट किश्तों में हो रहा है (जैसे अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट), तो हर किश्त पर अलग से 1% TDS काटना होगा।
  2. कितना काटें: हर पेमेंट/किश्त का 1% (या PAN इश्यू होने पर 20%)।
  3. कहां जमा करें: Income Tax e-filing पोर्टल पर जाकर e-Pay Tax सेक्शन में Form 26QB (पुराने ट्रांजैक्शन के लिए) या Form 141 (1 अप्रैल 2026 या बाद के ट्रांजैक्शन के लिए) भरें।
  4. जानकारी भरें: खरीदार और सेलर की डिटेल (PAN, पता), प्रॉपर्टी का पता, कुल कंसिडरेशन, और TDS की रकम — ये सभी एक ही फॉर्म में भरनी होती हैं।
  5. पेमेंट करें: नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या अन्य उपलब्ध माध्यम से तुरंत पेमेंट करें या “Pay Later” चुनकर बाद में जमा करें — लेकिन due date का ध्यान रखें।
  6. सर्टिफिकेट डाउनलोड करें: पेमेंट कन्फर्म होने के बाद TRACES पोर्टल पर जाकर टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट जनरेट करें, जो सेलर को देना होता है ताकि वह अपने ITR में क्रेडिट क्लेम कर सके।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके लिए खरीदार को अलग से TAN लेने की ज़रूरत नहीं है — सिर्फ PAN से यह पूरा काम हो जाता है, जो एक सामान्य नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए भी आसान बनाता है।

व्यक्ति मेज़ पर TDS फॉर्म और प्रॉपर्टी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते हुए

Due Date, लेट पेमेंट और पेनल्टी के नियम

TDS काटने के बाद उसे जमा करने के लिए एक तय समय-सीमा है: जिस महीने में पेमेंट हुआ, उस महीने के खत्म होने से 30 दिन के भीतर। उदाहरण के लिए अगर पेमेंट 15 दिसंबर को हुआ, तो महीना 31 दिसंबर को खत्म हुआ, और 30 दिन जोड़ने पर आखिरी तारीख़ 30 जनवरी बनती है। इस समय-सीमा को चूकने पर अलग-अलग तरह के ब्याज और पेनल्टी लग सकते हैं:

चूकब्याज/पेनल्टीसेक्शन
TDS काटा ही नहीं1% प्रति माह (जब से काटना था तब से कटने तक)ब्याज प्रावधान
TDS काटा पर जमा नहीं किया1.5% प्रति माह (काटने की तारीख़ से जमा होने तक)ब्याज प्रावधान
Form 26QB/141 स्टेटमेंट देर से भरा₹200 प्रति दिन, लेकिन कुल TDS रकम से ज़्यादा नहींSection 234E
स्टेटमेंट समय पर नहीं भरा (गंभीर देरी)₹10,000 से ₹1,00,000 तक पेनल्टीSection 271H
TDS काटा ही नहीं (जानबूझकर)अलग से पेनल्टीSection 271C
काटकर जमा न करने पर गंभीर मामलों मेंअभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की संभावना, वाजिब कारण होने पर राहतSection 221 / 276B

व्यवहार में सबसे ज़्यादा जिन दो चीज़ों में लोग चूक करते हैं, वे हैं — पहला, डील के उत्साह में TDS काटना ही भूल जाना, और दूसरा, काट तो लेना लेकिन 30 दिन के भीतर जमा न करना क्योंकि यह याद ही नहीं रहता। दोनों ही गलतियां ब्याज के रूप में एक्स्ट्रा पैसा खर्च करा देती हैं, जो पूरी तरह टाला जा सकता था।

किसे TDS काटना ज़रूरी है, किसे नहीं

स्थितिTDS काटना ज़रूरी?
फ्लैट/प्लॉट/मकान की कीमत ₹50 लाख या ज़्यादाहां
प्रॉपर्टी ₹50 लाख से कम में खरीदी जा रही हैनहीं
खेती की ज़मीन (rural agricultural land) की खरीदनहीं
सेलर non-resident हैहां, लेकिन अलग सेक्शन और दर के तहत — यह नियम लागू नहीं
सेलर सरकार/RBI/notified संस्था हैनहीं
किश्तों में पेमेंट हो रहा है और हर किश्त अलग-अलग ₹50 लाख से कम है पर कुल कीमत ज़्यादा हैहां, हर किश्त पर (कुल कीमत देखी जाती है, किश्त नहीं)

तीन असली जैसे उदाहरण — पूरा हिसाब समझिए

कैलकुलेटर, सिक्के और नोटबुक से TDS की रकम का हिसाब लगाते हुए

उदाहरण 1: पुणे के विकास देशपांडे — सीधा 1% TDS

पुणे में रहने वाले विकास देशपांडे एक रेडी-टू-मूव फ्लैट ₹85,00,000 में खरीद रहे हैं। चूंकि कीमत ₹50 लाख से ज़्यादा है, उन्हें रजिस्ट्री से पहले सेलर को पूरी रकम देने के बजाय, कुल रकम में से 1% यानी ₹85,000 काटकर सीधे Form 141 के ज़रिए सरकार के पास जमा करना होगा, और बाकी ₹84,15,000 सेलर को देना होगा। यह ₹85,000 न विकास की जेब से “अतिरिक्त खर्च” है, न सेलर का नुकसान — यह सेलर के टैक्स का ही एक हिस्सा है, जिसे वह आगे अपने ITR में क्रेडिट के रूप में क्लेम कर लेंगे।

उदाहरण 2: जयपुर की नेहा और रोहित अग्रवाल — किश्तों में पेमेंट

जयपुर के नेहा और रोहित अग्रवाल एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट ₹60,00,000 में बुक कर रहे हैं, जिसका पेमेंट बिल्डर को 4 बराबर किश्तों में करना है — हर किश्त ₹15,00,000 की। नियम के मुताबिक हर किश्त पर अलग से 1% TDS कटेगा, यानी हर बार ₹15,000 काटना होगा, और पूरी डील में कुल TDS ₹60,000 बनेगा। अगर वे यह सोचकर गलती करें कि “हर किश्त ₹50 लाख से कम है तो TDS नहीं कटेगा”, तो यह गलत होगा — क्योंकि कुल प्रॉपर्टी वैल्यू ही लिमिट तय करती है, हर किश्त अलग से नहीं देखी जाती।

उदाहरण 3: PAN लिंक न होने का झटका

मान लीजिए ऊपर वाले उदाहरण में विकास देशपांडे के सेलर का PAN, आधार से लिंक नहीं है (inoperative है)। ऐसी स्थिति में दर 1% से बढ़कर सीधे 20% हो जाती है। उसी ₹85,00,000 वाली डील पर अब TDS ₹17,00,000 बनेगा — यानी सही PAN न होने की वजह से ₹16,15,000 ज़्यादा काटना पड़ेगा। यह रकम इतनी बड़ी है कि सेलर की तरफ से यह पक्का करा लेना बेहद ज़रूरी है कि उसका PAN, Aadhaar से लिंक और ऑपरेटिव स्थिति में है — वरना डील की पूरी कैश-फ्लो प्लानिंग बिगड़ सकती है।

उदाहरण 4: देर से जमा करने पर ब्याज का हिसाब

अगर विकास देशपांडे ने ₹85,000 का TDS सही समय पर काट लिया, लेकिन किसी वजह से उसे जमा करने में 3 महीने की देरी हो गई, तो 1.5% प्रति माह की दर से ब्याज बनेगा — यानी ₹85,000 × 1.5% × 3 = ₹3,825 अतिरिक्त ब्याज के रूप में देना होगा। अगर स्टेटमेंट भी 10 दिन लेट भरा गया, तो ₹200 प्रति दिन की दर से ₹2,000 का अलग लेट फीस (234E) भी जुड़ सकता है — यानी छोटी सी देरी भी हज़ारों रुपये का फर्क डाल सकती है।

प्रॉपर्टी खरीदते समय TDS से जुड़ा ज़रूरी चेकलिस्ट

  • डील फाइनल करने से पहले प्रॉपर्टी की कुल कीमत और स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू, दोनों चेक करें — जो ज़्यादा हो, वही TDS का आधार बनेगी।
  • सेलर से PAN कार्ड की कॉपी लें और यह वेरिफाई करें कि वह Aadhaar से लिंक है।
  • पेमेंट से पहले यह तय करें कि यह एकमुश्त है या किश्तों में — हर किश्त पर अलग TDS काटने की प्लानिंग करें।
  • सही फॉर्म चुनें — 31 मार्च 2026 तक के पेमेंट के लिए Form 26QB, 1 अप्रैल 2026 या बाद के पेमेंट के लिए Form 141।
  • TDS काटने के बाद 30 दिन की समय-सीमा को कैलेंडर में तुरंत नोट करें, टालें नहीं।
  • जमा होने के बाद TRACES से टैक्स सर्टिफिकेट डाउनलोड करें और सेलर को ज़रूर दें, ताकि उसे ITR में क्रेडिट मिल सके।
  • बड़ी रकम की डील हो या सेलर non-resident हो, तो रजिस्ट्री से पहले एक बार CA या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह ले लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या ₹50 लाख से कम की प्रॉपर्टी पर भी TDS कटता है?

नहीं। अगर प्रॉपर्टी की कुल कीमत और स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू दोनों ₹50 लाख से कम हैं, तो Section 393(1) (पुराना 194-IA) के तहत कोई TDS नहीं काटना होता। हालांकि, अगर कीमत ₹50 लाख के बहुत करीब है (जैसे ₹49.5 लाख), तो club membership या parking जैसे अतिरिक्त चार्ज जोड़कर यह लिमिट पार हो सकती है, इसलिए कुल रकम ध्यान से जोड़ें।

Q2. Form 26QB और Form 141 में क्या फर्क है?

दोनों का काम एक जैसा है — प्रॉपर्टी पर कटे हुए TDS को जमा करना और उसकी जानकारी सरकार को देना। फर्क सिर्फ यह है कि Form 26QB पुराने Income Tax Act, 1961 के तहत और 31 मार्च 2026 तक के पेमेंट के लिए इस्तेमाल होता था, जबकि Form 141 नए Income Tax Act, 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 और उसके बाद के पेमेंट के लिए इस्तेमाल होता है।

Q3. अगर सेलर का PAN नहीं है तो क्या होगा?

अगर सेलर PAN नहीं देता, या उसका PAN Aadhaar से लिंक नहीं है, तो TDS की दर 1% से बढ़कर 20% हो जाती है। इसलिए रजिस्ट्री से पहले सेलर का PAN और उसकी “ऑपरेटिव” स्थिति ज़रूर जांच लें।

Q4. क्या प्रॉपर्टी खरीदने वाले को TAN लेना ज़रूरी है?

नहीं। यह सेक्शन की खास बात है — आम खरीदार को अलग से TAN (Tax Deduction Account Number) लेने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ अपने PAN से Form 26QB/141 भरकर TDS जमा किया जा सकता है।

Q5. TDS की रकम किसके खाते से कटती है — खरीदार की जेब से या सेलर की रकम से?

TDS सेलर को देने वाली कुल रकम से ही काटा जाता है। मतलब खरीदार अपनी जेब से अलग से कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं देता — वह कुल कीमत में से 1% सरकार के पास जमा करता है और बाकी 99% सेलर को देता है। यह रकम बाद में सेलर के टैक्स क्रेडिट में जुड़ जाती है।

Q6. अगर किश्तों में पेमेंट हो रहा है तो TDS कब-कब काटना होगा?

हर किश्त के पेमेंट या क्रेडिट के समय अलग से 1% TDS काटना होगा, भले ही हर किश्त अपने आप में ₹50 लाख से कम हो। लिमिट तय करने के लिए प्रॉपर्टी की कुल कीमत देखी जाती है, अलग-अलग किश्त नहीं।

Q7. TDS जमा करने की आखिरी तारीख़ कैसे तय होती है?

जिस महीने में पेमेंट हुआ/TDS काटा गया, उस महीने के खत्म होने की तारीख़ से 30 दिन के भीतर जमा करना होता है। जैसे, अगर पेमेंट 10 फरवरी को हुआ, तो महीना 28 फरवरी को खत्म होगा, और आखिरी तारीख़ 30 दिन बाद यानी लगभग 30 मार्च बनेगी।

Q8. क्या non-resident सेलर से प्रॉपर्टी खरीदने पर यही नियम लागू होगा?

नहीं। non-resident सेलर से प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS Section 393(1) के बजाय अलग प्रावधान (पुराने कानून में Section 195) के तहत कटता है, और दर भी ज़्यादा व अलग तरीके से तय होती है। ऐसे मामलों में डील से पहले किसी योग्य CA से सलाह लेना ज़रूरी है।

निष्कर्ष

प्रॉपर्टी खरीदना ज़िंदगी के सबसे बड़े फैसलों में से एक है, और इसमें TDS जैसी छोटी-सी दिखने वाली ज़िम्मेदारी को नज़रअंदाज़ करना महंगा पड़ सकता है। 1 अप्रैल 2026 से नियम का नाम और फॉर्म बदल गया है — Section 194-IA अब Section 393(1) है, और Form 26QB की जगह Form 141 आ गया है — लेकिन मूल भावना वही है: ₹50 लाख या इससे ऊपर की डील पर 1% TDS, PAN न होने पर 20%, और 30 दिन के भीतर जमा करना ज़रूरी। अगर आप खरीदार हैं, तो डील फाइनल करने से पहले ही सेलर का PAN चेक कर लें, सही फॉर्म चुनें, और समय-सीमा को कैलेंडर में नोट कर लें — इतनी सी सावधानी आपको ब्याज और पेनल्टी दोनों से बचा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है, यह निवेश, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं है। Income Tax Act, 2025 से जुड़े नियम, फॉर्म और प्रोसेस समय-समय पर बदल सकते हैं। कोई भी प्रॉपर्टी डील फाइनल करने या TDS जमा करने से पहले कृपया इनकम टैक्स विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (incometax.gov.in) पर मौजूद ताज़ा जानकारी ज़रूर देखें, और अपने CA या टैक्स सलाहकार से सलाह लें।

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