शाम को ऑफिस से घर लौटते हुए नागपुर के सुरेश पाटील ने यूं ही अपना EPFO पासबुक ऐप खोल लिया। महीनों बाद चेक किया तो देखकर हैरान हो गए — बैलेंस में अचानक एक बड़ी रकम जुड़ी हुई थी। यह कोई गलती नहीं थी, बल्कि साल 2025-26 के लिए EPFO द्वारा घोषित 8.25% ब्याज था, जो करोड़ों खातों में एक साथ क्रेडिट किया गया। अगर आपने भी अभी तक अपना पासबुक चेक नहीं किया है, या यह नहीं जानते कि यह ब्याज कैसे कैलकुलेट होता है, कब टैक्स लगता है और कब तक मिलता रहता है — तो यह गाइड आपके हर सवाल का सीधा जवाब देगी।
सीधी बात: Employees’ Provident Fund (EPF) पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25% प्रति वर्ष तय रही है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 जैसी ही है। यह ब्याज देशभर के करीब 34 करोड़ EPF खातों में 15 जुलाई 2026 तक क्रेडिट कर दिया गया था। नीचे हम समझेंगे कि यह ब्याज कैसे कैलकुलेट होता है, पासबुक में कैसे देखें, किस पर टैक्स लगता है, और खाता कब तक ब्याज देता रहता है।

EPF Interest Rate 2025-26 कितना है और कब क्रेडिट हुआ?
Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) हर साल वित्त वर्ष खत्म होने के बाद अगले साल की ब्याज दर की सिफारिश करती है। इस सिफारिश को सरकार की औपचारिक मंजूरी और नोटिफिकेशन के बाद ही खातों में लागू किया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए CBT ने 8.25% दर की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने मंजूरी देकर नोटिफाई किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया था कि इस दर के तहत करीब ₹1.44 लाख करोड़ का ब्याज करोड़ों खातों में बांटा गया है, और यह पहली बार था जब सभी योग्य खातों में ब्याज एक ही बैच में क्रेडिट किया गया।
EPF पर पिछले कुछ सालों की ब्याज दरों को देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है कि 8.25% का स्तर लगातार तीसरे साल बना हुआ है:
| वित्त वर्ष | EPF ब्याज दर |
|---|---|
| 2020-21 | 8.50% |
| 2021-22 | 8.10% |
| 2022-23 | 8.15% |
| 2023-24 | 8.25% |
| 2024-25 | 8.25% |
| 2025-26 | 8.25% |
गौर करने वाली बात यह है कि EPF ब्याज आमतौर पर ज्यादातर बैंक FD और छोटी बचत योजनाओं से बेहतर रहा है, और श्रम मंत्रालय के मुताबिक यह मुख्य रूप से EPFO के ETF (Exchange Traded Fund) निवेश से मिले अतिरिक्त रिटर्न की वजह से मुमकिन हो पाता है।

EPF Interest Calculate कैसे होता है? पूरा तरीका समझें
EPF पर ब्याज “मंथली रनिंग बैलेंस” तरीके से कैलकुलेट होता है, लेकिन खाते में क्रेडिट साल में एक बार ही होता है — वित्त वर्ष के आखिर में। सीधे शब्दों में समझें तो हर महीने का ब्याज उस महीने की शुरुआत में मौजूद बैलेंस पर जोड़ा जाता है, और किसी महीने में जमा हुआ कंट्रीब्यूशन उसी महीने ब्याज नहीं कमाता — वह अगले महीने से ब्याज कमाना शुरू करता है।
फॉर्मूला
महीने का ब्याज = (महीने की शुरुआत का बैलेंस) × (सालाना दर ÷ 12)
8.25% सालाना दर का मतलब है हर महीने करीब 0.6875% की दर से ब्याज जुड़ता है। साल के आखिर में सभी 12 महीनों का ब्याज जोड़कर एक साथ खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है।
कंट्रीब्यूशन कैसे बंटता है?
EPF खाते में हर महीने पैसा दो तरफ से आता है — कर्मचारी और नियोक्ता (employer) की तरफ से। लेकिन दोनों का पूरा पैसा EPF खाते में ब्याज नहीं कमाता:
| कंट्रीब्यूशन | दर | कहां जाता है | ब्याज मिलता है? |
|---|---|---|---|
| कर्मचारी (Employee) | Basic+DA का 12% | पूरा EPF खाते में | हां |
| नियोक्ता (Employer) | Basic+DA का 3.67% | EPF खाते में | हां |
| नियोक्ता (Employer) | Basic+DA का 8.33% | EPS (पेंशन स्कीम) खाते में | नहीं |
यानी अगर आपकी Basic+DA ₹25,000 महीना है, तो कर्मचारी की तरफ से ₹3,000 और नियोक्ता की तरफ से EPF में सिर्फ ₹917.50 (3.67%) जमा होता है — बाकी ₹2,082.50 EPS में जाता है जहां कोई ब्याज नहीं मिलता।
उदाहरण से समझें (python से कैलकुलेट किया गया)
मान लीजिए रमेश यादव (उदाहरण के लिए नाम) की Basic+DA ₹25,000 महीना है। 1 अप्रैल 2025 को उनके EPF खाते में ₹2,00,000 का ओपनिंग बैलेंस था, और हर महीने ₹3,918 (कर्मचारी ₹3,000 + नियोक्ता EPF हिस्सा ₹918) जमा होता रहा। 8.25% सालाना दर पर, मंथली रनिंग बैलेंस तरीके से साल भर का हिसाब इस तरह बनता है:
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| 1 अप्रैल 2025 का ओपनिंग बैलेंस | 2,00,000 |
| साल भर का कुल कंट्रीब्यूशन (12 महीने × ₹3,918) | 47,016 |
| 31 मार्च 2026 को ब्याज जोड़ने से पहले बैलेंस | 2,47,016 |
| साल भर में जमा हुआ ब्याज (8.25% पर) | लगभग 18,278 |
| 31 मार्च 2026 के बाद फाइनल क्लोजिंग बैलेंस | लगभग 2,65,294 |
ध्यान दें — यह सिर्फ एक उदाहरण है, मानी गई राशियों (ओपनिंग बैलेंस, सैलरी) पर आधारित है। आपकी असली राशि आपकी सैलरी, पिछले बैलेंस और साल भर की सैलरी में बदलाव के हिसाब से अलग होगी।

अपना EPF Balance और Interest Passbook में कैसे चेक करें?
अगर आपने अभी तक अपना अपडेटेड बैलेंस नहीं देखा है, तो तीन आसान तरीके हैं:
1. EPFO Member Passbook पोर्टल से
- EPFO के Member Passbook पोर्टल पर जाएं।
- अपना 12-डिजिट UAN, पासवर्ड और कैप्चा डालें।
- आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर पर आया OTP डालें।
- “View” में जाकर “Passbook Lite” चुनें — यहां आपका बैलेंस, कंट्रीब्यूशन और विदड्रॉल सब दिखेगा।
2. UMANG ऐप से
UMANG ऐप में अपना UAN लिंक करने के बाद आप अपना PF बैलेंस और महीने-दर-महीने कंट्रीब्यूशन देख सकते हैं।
3. SMS से (बिना इंटरनेट)
- अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFOHO UAN टाइप करके 7738299899 पर भेजें।
- अगर हिंदी या किसी दूसरी भाषा में जवाब चाहिए, तो UAN के बाद भाषा कोड भी जोड़ें।
- वापस आए मैसेज में आपका लेटेस्ट कंट्रीब्यूशन, बैलेंस और KYC स्टेटस दिख जाएगा।
अगर पासबुक अपडेट होने में देर लग रही है तो परेशान न हों — बड़े बैच में ब्याज क्रेडिट होने के बाद लाखों पासबुक अपडेट होने में कुछ दिन से कुछ हफ्ते तक का वक्त लग सकता है।

PF Interest पर टैक्स के नियम — हर किसी के लिए नहीं
अच्छी खबर यह है कि ज़्यादातर कर्मचारियों के लिए EPF पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री रहता है। लेकिन Finance Act, 2021 के बाद से एक अहम बदलाव है जो हाई-कंट्रीब्यूशन वाले कुछ कर्मचारियों पर असर डालता है।
नियम क्या है?
अगर आपकी अपनी तरफ से (EPF + VPF यानी Voluntary Provident Fund मिलाकर) एक वित्त वर्ष में जमा राशि एक तय सीमा से ज़्यादा हो जाती है, तो उस सीमा से ऊपर के हिस्से पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ जाता है:
- ₹2.5 लाख/साल — जहां नियोक्ता भी कंट्रीब्यूशन करता है (ज़्यादातर प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए यही लागू होता है)
- ₹5 लाख/साल — जहां नियोक्ता का कोई कंट्रीब्यूशन नहीं है (जैसे GPF के कुछ मामलों में)
यह नियम Income-tax Act, 1961 की Section 10(11) और 10(12) में जोड़े गए प्रोविज़ो और Income-tax Rules के Rule 9D के तहत आता है, और 2021-22 से लागू है। (नोट: 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए Income-tax Act, 2025 में भी यह छूट और इसकी सीमा जारी है, हालांकि नए एक्ट में सेक्शन नंबरिंग बदली गई है — सटीक नई सेक्शन संख्या के लिए अपने CA या नए एक्ट की आधिकारिक धारा-मैपिंग देखें)।
कैलकुलेशन कैसे होती है?
EPFO आपके खाते को दो हिस्सों में बांट देता है — एक “नॉन-टैक्सेबल” हिस्सा (सीमा तक का कंट्रीब्यूशन + 31 मार्च 2021 तक का पुराना बैलेंस) और एक “टैक्सेबल” हिस्सा (सीमा से ऊपर का कंट्रीब्यूशन)। सिर्फ टैक्सेबल हिस्से पर जमा हुआ ब्याज ही “Income from Other Sources” के तौर पर आपकी स्लैब दर से टैक्स होता है।
उदाहरण से समझें (python से कैलकुलेट)
मान लीजिए राकेश वर्मा (उदाहरण के लिए नाम) की EPF + VPF मिलाकर कुल सालाना अपनी तरफ से जमा राशि ₹6,00,000 है। इसमें से ₹2,50,000 नॉन-टैक्सेबल सीमा में आता है, और बाकी ₹3,50,000 टैक्सेबल हिस्से में जाता है। अगर यह राशि साल भर में बराबर-बराबर महीनों में जमा हुई मानें, तो मंथली रनिंग बैलेंस तरीके से 8.25% दर पर टैक्सेबल हिस्से पर बना ब्याज करीब ₹13,234 आता है।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| कुल सालाना कंट्रीब्यूशन (खुद की तरफ से) | ₹6,00,000 |
| नॉन-टैक्सेबल सीमा | ₹2,50,000 |
| टैक्सेबल हिस्सा (एक्सेस) | ₹3,50,000 |
| टैक्सेबल हिस्से पर बना ब्याज (लगभग) | ₹13,234 |
| मान लीजिए 30% स्लैब + 4% सेस पर टैक्स | लगभग ₹4,129 |
| EPFO द्वारा पहले से काटा गया TDS (10%) | लगभग ₹1,323 |
| बाकी बचा टैक्स (सेल्फ-असेसमेंट/एडवांस टैक्स से भरना होगा) | लगभग ₹2,806 |
यहां ₹6,00,000, 30% स्लैब दर और बराबर-बराबर महीनों में कंट्रीब्यूशन — ये सभी सिर्फ उदाहरण के लिए मानी गई बातें हैं, असली आंकड़े हर व्यक्ति के हिसाब से अलग होंगे।
TDS का नियम
EPFO टैक्सेबल ब्याज पर खुद TDS काटता है:
- अगर PAN लिंक है — Section 194A के तहत 10% TDS
- अगर वैध PAN लिंक नहीं है — Section 206AA के तहत 20% TDS
- NRI के मामले में Section 195 के तहत, DTAA या एक्ट की दर में जो भी ज़्यादा फायदेमंद हो
अगर आपकी स्लैब दर 10% से ज़्यादा है (जैसे ऊपर के उदाहरण में), तो बचा हुआ टैक्स आपको खुद सेल्फ-असेसमेंट टैक्स या एडवांस टैक्स के ज़रिए भरना होगा, नहीं तो Section 234B/234C के तहत ब्याज/पेनल्टी लग सकती है।
EPF खाता कब तक ब्याज देता रहता है?
यह एक ऐसा सवाल है जो बहुत कम लोग समय रहते पूछते हैं। EPFO के मौजूदा नियमों के मुताबिक:
- अगर आप 55 साल या उसके बाद रिटायर होते हैं, तो रिटायरमेंट के बाद भी 3 साल तक ब्याज मिलता रहता है। उदाहरण के लिए, 58 साल में रिटायर होने वाले को 61 साल तक ब्याज मिलेगा।
- अगर आप 55 साल से पहले रिटायर होते हैं (या नौकरी छोड़ देते हैं और दोबारा कंट्रीब्यूशन नहीं करते), तो ब्याज 58 साल की उम्र तक मिलता रहता है।
- अगर कोई सदस्य स्थायी रूप से विदेश चला जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है और 3 साल तक कोई कंट्रीब्यूशन नहीं आता, तो भी खाता “इनऑपरेटिव” (inoperative) हो जाता है।
इनऑपरेटिव होने का मतलब खाता बंद होना नहीं है — आप तब भी लॉगिन करके अपनी पूरी राशि क्लेम कर सकते हैं, सिर्फ उस पर आगे ब्याज जुड़ना बंद हो जाता है। जो लोग नौकरी बदलते रहते हैं और नया EPF खाता खुलने पर पुराना बैलेंस ट्रांसफर करते रहते हैं, उनके लिए यह समस्या नहीं बनती। (नोट: NRI बनने वाले सदस्यों के लिए रिटायरमेंट-उम्र वाला नियम लागू नहीं होता — यह मुख्य रूप से भारत में रहने वाले कर्मचारियों के लिए है।)
ब्याज क्रेडिट न होने या कम दिखने की सामान्य वजहें
अगर आपके खाते में अभी तक अपडेटेड ब्याज नहीं दिख रहा, तो इनमें से कोई वजह हो सकती है:
- UAN आधार से लिंक नहीं है — बिना आधार लिंकिंग के OTP वेरिफिकेशन नहीं होगा और पासबुक लॉगिन अटक सकता है।
- KYC पेंडिंग है — बैंक अकाउंट, PAN या आधार की डिटेल अधूरी होने पर अपडेट में देरी होती है।
- पासबुक अपडेट में देरी — करोड़ों खातों में एक साथ ब्याज क्रेडिट होने के बाद पासबुक पर दिखने में कुछ दिन से हफ्ते तक लग सकते हैं।
- खाता इनऑपरेटिव हो चुका है — ऊपर बताई गई रिटायरमेंट-उम्र या 3-साल वाली शर्तें लागू हो गई हों।
- नौकरी बदलने पर पुराना PF ट्रांसफर नहीं हुआ — ऐसे में दो अलग खातों का हिसाब अलग-अलग रहता है।
किसके लिए यह जानकारी सबसे ज़रूरी है?
| स्थिति | क्या ध्यान रखें |
|---|---|
| सामान्य सैलरीड कर्मचारी (बिना VPF) | ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री, सिर्फ पासबुक चेक करें |
| हाई सैलरी वाले कर्मचारी जो भारी VPF डालते हैं | ₹2.5 लाख/साल सीमा से ऊपर के ब्याज पर टैक्स और एडवांस टैक्स की जिम्मेदारी |
| नौकरी छोड़कर दूसरी कंपनी जॉइन करने वाले | पुराना PF नए खाते में ट्रांसफर करना न भूलें, वरना ब्याज मिलना बंद हो सकता है |
| जल्द रिटायर होने वाले (55-58 साल) | ब्याज कब तक मिलेगा यह पहले से समझकर विदड्रॉल प्लान करें |
| विदेश शिफ्ट होने वाले सदस्य | 3 साल के अंदर खाता सेटल करने या ट्रांसफर करने पर विचार करें |
यह भी पढ़ें
- PF Withdrawal Rules 2026: Online Process, ₹5 लाख Auto-Settlement और TDS के नियम
- NPS क्या है 2026: 80% निकासी के नए नियम, टैक्स छूट और पेंशन कैलकुलेशन
- ग्रेच्युटी के नए नियम 2026: नए Labour Code से बदलाव
- नया Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल 2026 से क्या बदला?
FAQ: EPF Interest Rate 2025-26 से जुड़े सवाल
Q1. EPF पर 2025-26 के लिए ब्याज दर कितनी है?
EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25% प्रति वर्ष तय की है, जो पिछले दो सालों जैसी ही है।
Q2. यह ब्याज कब क्रेडिट हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ब्याज 15 जुलाई 2026 तक करीब 34 करोड़ खातों में क्रेडिट कर दिया गया था। पासबुक पर दिखने में कुछ और समय लग सकता है।
Q3. क्या EPF पर मिलने वाला पूरा ब्याज टैक्स-फ्री है?
ज़्यादातर कर्मचारियों के लिए हां, पूरा ब्याज टैक्स-फ्री है। लेकिन अगर आपकी खुद की तरफ से (EPF+VPF) सालाना जमा राशि ₹2.5 लाख (या नियोक्ता कंट्रीब्यूशन न हो तो ₹5 लाख) से ज़्यादा है, तो ऊपर के हिस्से पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।
Q4. EPS में जमा पैसे पर भी ब्याज मिलता है क्या?
नहीं। नियोक्ता के कंट्रीब्यूशन का जो 8.33% हिस्सा EPS (पेंशन स्कीम) खाते में जाता है, उस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। सिर्फ EPF खाते में जमा राशि (कर्मचारी का 12% + नियोक्ता का 3.67%) पर ब्याज लागू होता है।
Q5. अगर मैं नौकरी छोड़ दूं तो क्या ब्याज मिलना बंद हो जाएगा?
तुरंत नहीं। 55 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर ब्याज 58 साल की उम्र तक मिलता रहता है। लेकिन उसके बाद खाता इनऑपरेटिव हो जाता है और ब्याज जुड़ना बंद हो जाता है (हालांकि आप तब भी राशि क्लेम कर सकते हैं)।
Q6. मेरा पासबुक अभी भी अपडेटेड ब्याज नहीं दिखा रहा, क्या करूं?
पहले UAN-आधार लिंकिंग और KYC स्टेटस चेक करें। अगर सब ठीक है तो कुछ दिन और इंतज़ार करें, क्योंकि करोड़ों खातों में एक साथ क्रेडिट होने के बाद पासबुक अपडेट होने में समय लगता है। समस्या बने रहने पर EPFO की हेल्पलाइन या अपने नियोक्ता के HR से संपर्क करें।
Q7. क्या EPF की ब्याज दर हर साल एक जैसी रहती है?
नहीं, यह दर EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ हर साल तय करती है और सरकार की मंजूरी से नोटिफाई होती है। पिछले कुछ सालों में यह 8.10% से 8.50% के बीच रही है।
Q8. VPF (Voluntary Provident Fund) में पैसा डालने का क्या फायदा है?
VPF में डाला गया पैसा भी EPF जैसी ही ब्याज दर कमाता है, जो ज़्यादातर बैंक FD से बेहतर रहती है। लेकिन ध्यान रखें कि अगर आपका कुल (EPF+VPF) कंट्रीब्यूशन ₹2.5 लाख/साल से ऊपर जाता है, तो ऊपर के हिस्से के ब्याज पर टैक्स लगेगा।
निष्कर्ष
EPF सिर्फ एक “कटने वाली रकम” नहीं है, बल्कि आपकी रिटायरमेंट के लिए एक भरोसेमंद, गारंटीड-ब्याज वाला साधन है जिसमें 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज तय हुआ है। अपना पासबुक समय-समय पर चेक करते रहें, UAN-आधार लिंकिंग और KYC अपडेटेड रखें, और अगर आप हाई कंट्रीब्यूटर हैं तो टैक्स के नियमों को समझकर एडवांस टैक्स की प्लानिंग पहले से कर लें। नौकरी बदलते समय पुराना PF ट्रांसफर करना भी न भूलें, ताकि आपकी जमा पूंजी बिना रुके ब्याज कमाती रहे।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। EPF ब्याज दर, टैक्स नियम और इनऑपरेटिव खाते से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने EPFO खाते की ताज़ा जानकारी epfindia.gov.in पर देखें और ज़रूरत पड़ने पर किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से सलाह लें।
