नोएडा की एक IT कंपनी में काम करने वाले संदीप वर्मा 32 साल के हैं। इस साल अप्रैल में HR ने उन्हें एक फ़ॉर्म दिया — “क्या आप Corporate NPS में शामिल होना चाहेंगे? कंपनी आपकी Basic Salary का 14% तक NPS में डाल सकती है।” संदीप ने फ़ॉर्म दराज़ में रख दिया। उनके दिमाग़ में वही पुरानी बातें घूम रही थीं जो उन्होंने दोस्तों से सुनी थीं — “NPS में पैसा 60 साल तक लॉक रहता है”, “40% पैसे से ज़बरदस्ती पेंशन ख़रीदनी पड़ती है”, “नई टैक्स व्यवस्था में तो कोई फ़ायदा ही नहीं”।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई बातें अब पूरी तरह सच नहीं रहीं। दिसंबर 2025 में पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने NPS के निकासी नियमों में बड़े बदलाव किए — अब ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर रिटायरमेंट पर 80% तक रकम एकमुश्त निकाल सकते हैं, और सिर्फ़ 20% से पेंशन (annuity) ख़रीदनी होती है। साथ ही 1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income-tax Act 2025 में NPS की टैक्स छूट की धाराओं के नंबर भी बदल गए हैं। इस गाइड में हम समझेंगे कि NPS क्या है, 2026 में इसके नियम क्या हैं, टैक्स में कितना फ़ायदा मिलता है, और 30 साल में कितना पैसा व पेंशन बन सकती है — पूरे हिसाब के साथ।

एक नज़र में: NPS 2026
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) |
| रेगुलेटर | PFRDA (पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण) |
| कौन जुड़ सकता है | 18 से 70 साल का कोई भी भारतीय नागरिक (नौकरीपेशा, बिज़नेस, फ़्रीलांसर) |
| खाते के प्रकार | Tier I (मुख्य पेंशन खाता) और Tier II (वैकल्पिक, लचीला खाता) |
| निवेश कहाँ होता है | इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड (C), सरकारी बॉन्ड (G) और कुछ हद तक वैकल्पिक संपत्तियाँ (A) |
| रिटर्न | बाज़ार से जुड़ा — कोई गारंटी नहीं |
| रिटायरमेंट पर (ग़ैर-सरकारी) | कॉर्पस ₹12 लाख से ज़्यादा हो तो 80% तक एकमुश्त, कम से कम 20% से annuity |
| रिटायरमेंट पर (सरकारी कर्मचारी) | 60% तक एकमुश्त, कम से कम 40% से annuity |
| टैक्स-फ्री एकमुश्त रकम | कुल कॉर्पस का 60% (80% निकालने पर ऊपर का 20% टैक्सेबल माना जा रहा है) |
| खाता कब तक चला सकते हैं | 85 साल की उम्र तक |
NPS क्या है और कैसे काम करता है?
NPS एक सरकारी, लंबी अवधि की रिटायरमेंट बचत योजना है। शुरुआत में (2004 से) यह सिर्फ़ नए सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन 2009 से इसे हर भारतीय नागरिक के लिए खोल दिया गया। सोच सीधी है — आप नौकरी के सालों में हर महीने या साल में थोड़ा-थोड़ा पैसा डालें, वह पैसा पेशेवर पेंशन फंड मैनेजर बाज़ार में निवेश करें, और रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड (कॉर्पस) तैयार हो जाए। रिटायरमेंट पर उस फंड का एक हिस्सा आपको एकमुश्त मिलता है और बाकी से हर महीने पेंशन।
NPS में जुड़ते ही आपको एक PRAN (Permanent Retirement Account Number) मिलता है। यह नंबर पूरी ज़िंदगी आपके साथ रहता है — नौकरी बदलें, शहर बदलें या बिज़नेस शुरू करें, PRAN वही रहता है। यही NPS की सबसे बड़ी सुविधा है जिसे “पोर्टेबिलिटी” कहते हैं।
Tier I और Tier II खाते में फ़र्क
- Tier I: यह मुख्य पेंशन खाता है। टैक्स छूट इसी पर मिलती है, और पैसा निकालने के नियम सख़्त हैं (आगे विस्तार से)।
- Tier II: यह एक वैकल्पिक, लचीला खाता है — कभी भी पैसा डालें, कभी भी निकालें। इसे खोलने के लिए Tier I होना ज़रूरी है। आम तौर पर इस पर टैक्स छूट नहीं मिलती, इसलिए यह एक सामान्य निवेश खाते जैसा ही है।
पैसा कहाँ लगता है? Active Choice बनाम Auto Choice
NPS का पैसा चार तरह की संपत्तियों में लगता है — इक्विटी (E) यानी शेयर, कॉर्पोरेट बॉन्ड (C), सरकारी प्रतिभूतियाँ (G) और सीमित मात्रा में वैकल्पिक निवेश (A)। आप दो तरीक़ों में से एक चुन सकते हैं:
- Active Choice: आप ख़ुद तय करते हैं कि कितना हिस्सा इक्विटी में जाए और कितना बॉन्ड में। इक्विटी की एक ऊपरी सीमा होती है, जो उम्र बढ़ने के साथ घटती जाती है।
- Auto Choice (Life Cycle Fund): उम्र के हिसाब से अपने आप बँटवारा होता है — जवानी में इक्विटी ज़्यादा, रिटायरमेंट के नज़दीक आते-आते बॉन्ड ज़्यादा। Aggressive, Moderate और Conservative जैसे विकल्प मिलते हैं।
जो लोग बाज़ार को रोज़ ट्रैक नहीं करते, उनके लिए Auto Choice आसान रहता है। आप साल में कुछ बार अपना पेंशन फंड मैनेजर और निवेश का पैटर्न बदल भी सकते हैं।
दिसंबर 2025 के बाद NPS निकासी के नए नियम
यह 2026 की सबसे बड़ी ख़बर है। PFRDA ने दिसंबर 2025 में NPS के निकासी नियमों में संशोधन किए, जिससे ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबरों (All Citizen और Corporate मॉडल) को रिटायरमेंट पर कहीं ज़्यादा पैसा हाथ में मिल सकता है। पहले नियम था — 60% एकमुश्त और कम से कम 40% से annuity। अब:
सामान्य निकासी (60 साल पर या 15 साल पूरे होने पर) — ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर
| कुल कॉर्पस | क्या कर सकते हैं |
|---|---|
| ₹8 लाख तक | पूरी 100% रकम निकाल सकते हैं, annuity ज़रूरी नहीं |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | ₹6 लाख तक एकमुश्त, बाकी से annuity या कम से कम 6 साल तक किश्तों में निकासी (SUR); या 80% एकमुश्त + 20% annuity |
| ₹12 लाख से ज़्यादा | 80% तक एकमुश्त, कम से कम 20% से annuity |
सरकारी कर्मचारियों के लिए 60% एकमुश्त और कम से कम 40% annuity का पुराना ढाँचा ही बना हुआ है (छोटे कॉर्पस के लिए ऊपर जैसी ₹8 लाख/₹12 लाख वाली छूटें मिलती हैं)।
समय से पहले निकासी (Premature Exit)
अगर आप 60 साल या 15 साल की शर्त पूरी होने से पहले NPS से बाहर निकलना चाहते हैं:
- कॉर्पस ₹5 लाख तक हो तो पूरा पैसा निकाल सकते हैं।
- कॉर्पस ₹5 लाख से ज़्यादा हो तो सिर्फ़ 20% एकमुश्त मिलेगा और कम से कम 80% से annuity ख़रीदनी होगी। उदाहरण: ₹20 लाख के कॉर्पस पर अधिकतम ₹4 लाख हाथ में, ₹16 लाख से पेंशन।
यानी समय से पहले निकलना अब भी महँगा सौदा है। NPS को सिर्फ़ रिटायरमेंट का पैसा मानकर ही इसमें निवेश करें।
आंशिक निकासी (Partial Withdrawal)
NPS में कम से कम 3 साल पूरे होने के बाद, कुछ ख़ास ज़रूरतों के लिए खाता बंद किए बिना पैसा निकाला जा सकता है:
- हर बार अपने योगदान (contribution) का 25% तक — ध्यान दें, यह 25% आपके जमा किए पैसे का है, कुल बैलेंस का नहीं, और नियोक्ता का योगदान इसमें शामिल नहीं होता।
- 60 साल से पहले अधिकतम 4 बार, और दो निकासियों के बीच कम से कम 4 साल का अंतर।
- मकसद: बच्चों की उच्च शिक्षा या शादी, घर ख़रीदना या बनवाना, गंभीर बीमारी का इलाज, विकलांगता से जुड़े खर्च आदि।
85 साल तक खाता और किश्तों में निकासी
नए नियमों में NPS खाता 85 साल की उम्र तक चलाया या टाला (defer) जा सकता है। साथ ही एकमुश्त रकम को एक बार में लेने की बजाय SLW (Systematic Lump-sum Withdrawal) या SUR (Systematic Unit Redemption) के ज़रिए किश्तों में भी लिया जा सकता है। इसका फ़ायदा यह है कि जो पैसा अभी नहीं निकाला, वह निवेशित रहकर बढ़ता रहता है — हालाँकि बाज़ार के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है।
सब्सक्राइबर की मृत्यु होने पर
ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर की मृत्यु होने पर पूरा कॉर्पस नॉमिनी या कानूनी वारिस को मिलता है, और annuity ख़रीदना ज़रूरी नहीं होता। इसलिए NPS खाते में नॉमिनेशन ज़रूर अपडेट रखें।
NPS पर टैक्स छूट 2026: नए Income-tax Act 2025 में धाराएँ
1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act, 2025 लागू है। NPS से जुड़ी पुरानी धाराएँ 80CCD(1), 80CCD(1B) और 80CCD(2) अब नए नंबरों में चली गई हैं — छूट की सीमाएँ वही हैं:
| छूट | पुरानी धारा (1961 Act) | नया Act 2025 | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था |
|---|---|---|---|---|
| अपना योगदान (₹1.5 लाख की कुल सीमा में) | 80CCD(1) | Section 123 (Schedule XV) | हाँ | नहीं |
| अपना अतिरिक्त योगदान ₹50,000 तक | 80CCD(1B) | Section 124 | हाँ | नहीं |
| नियोक्ता (कंपनी) का योगदान | 80CCD(2) | Section 124 | हाँ — Basic+DA का 10% (सरकारी कर्मचारी 14%) | हाँ — Basic+DA का 14% |

नई टैक्स व्यवस्था वालों के लिए असली फ़ायदा: Employer NPS
संदीप की ग़लतफ़हमी यहीं थी। नई टैक्स व्यवस्था में आप अपने पैसे से NPS में जो डालते हैं, उस पर छूट नहीं मिलती — यह सच है। लेकिन कंपनी आपकी तरफ़ से जो NPS में डालती है, वह Basic+DA के 14% तक नई व्यवस्था में भी टैक्स-फ्री है। नई व्यवस्था में यह गिनी-चुनी छूटों में से एक बची है।
उदाहरण से समझिए: संदीप की Basic Salary ₹50,000 महीना है। अगर वे कंपनी से CTC का पुनर्गठन करवाकर 14% यानी ₹7,000 महीना (₹84,000 सालाना) NPS में डलवाते हैं, तो यह ₹84,000 उनकी टैक्सेबल आय से बाहर हो जाएगा। अगर उनकी आय 25% वाले स्लैब में आती है, तो सेस मिलाकर करीब ₹21,840 सालाना टैक्स की बचत; 30% स्लैब में करीब ₹26,200। ध्यान रहे, यह पैसा उनके CTC से ही आता है — यानी इन-हैंड सैलरी उतनी कम होगी, पर वह पैसा उनके रिटायरमेंट खाते में बढ़ता रहेगा।
एक सीमा याद रखें: नियोक्ता का EPF, NPS और सुपरएनुएशन फंड में कुल योगदान एक साल में ₹7.5 लाख से ज़्यादा हो, तो ऊपर की रकम टैक्सेबल हो जाती है। ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों पर यह सीमा लागू नहीं होती, पर ऊँची सैलरी वालों को इसका ध्यान रखना चाहिए।
पुरानी व्यवस्था वालों के लिए अतिरिक्त ₹50,000
अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था में हैं, तो Section 123 की ₹1.5 लाख सीमा (PPF, EPF, ELSS, बीमा आदि मिलाकर) के ऊपर ₹50,000 की अतिरिक्त छूट सिर्फ़ NPS में मिलती है। 30% स्लैब में इससे करीब ₹15,600 और 20% स्लैब में करीब ₹10,400 सालाना टैक्स बचता है।
निकासी पर टैक्स कैसे लगता है?
- एकमुश्त रकम: कुल कॉर्पस का 60% टैक्स-फ्री है। नए नियमों में ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर 80% तक निकाल सकते हैं, लेकिन टैक्स-फ्री सीमा को 80% करने की कोई घोषणा फ़रवरी 2026 के बजट में नहीं हुई। इसलिए 60% से ऊपर का अतिरिक्त 20% फ़िलहाल टैक्सेबल माना जा रहा है। निकासी से पहले अपने CA से ताज़ा स्थिति ज़रूर जाँच लें।
- आंशिक निकासी: अपने योगदान के 25% तक की आंशिक निकासी, शर्तों के साथ, टैक्स-फ्री है।
- Annuity (पेंशन): annuity ख़रीदते समय टैक्स नहीं लगता, लेकिन हर महीने मिलने वाली पेंशन उस साल की आय में जुड़कर स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।
30 साल में कितना पैसा बनेगा? NPS कैलकुलेशन
NPS का रिटर्न बाज़ार पर निर्भर है, इसलिए नीचे हमने दो अनुमानित सालाना रिटर्न — 9% और 10% — लेकर हिसाब लगाया है (हर महीने एक तय रकम, रिटर्न पूरे समय स्थिर माना गया)। असली रिटर्न इससे कम या ज़्यादा हो सकता है।
| मासिक निवेश | अवधि | कुल जमा | कॉर्पस @9% (अनुमान) | कॉर्पस @10% (अनुमान) |
|---|---|---|---|---|
| ₹3,000 | 30 साल | ₹10.8 लाख | ₹55.3 लाख | ₹68.4 लाख |
| ₹5,000 | 25 साल | ₹15 लाख | ₹56.5 लाख | ₹66.9 लाख |
| ₹5,000 | 30 साल | ₹18 लाख | ₹92.2 लाख | ₹1.14 करोड़ |
| ₹10,000 | 25 साल | ₹30 लाख | ₹1.13 करोड़ | ₹1.34 करोड़ |
| ₹10,000 | 30 साल | ₹36 लाख | ₹1.84 करोड़ | ₹2.28 करोड़ |
तालिका में एक बात साफ़ दिखती है — ₹5,000 महीना 25 की बजाय 30 साल डालने पर जमा सिर्फ़ ₹3 लाख बढ़ती है, लेकिन कॉर्पस (10% पर) ₹67 लाख से बढ़कर ₹1.14 करोड़ हो जाता है। जल्दी शुरू करना ही NPS का सबसे बड़ा फ़ायदा है।

संदीप का पूरा हिसाब: रिटायरमेंट पर हाथ में कितना?
मान लीजिए संदीप 30 साल तक ₹5,000 महीना NPS में डालते हैं और औसत रिटर्न 10% रहता है। 60 साल पर उनका कॉर्पस करीब ₹1.14 करोड़ होगा। नए नियमों के मुताबिक:
- 80% एकमुश्त: करीब ₹91.2 लाख। इसमें से 60% यानी करीब ₹68.4 लाख टैक्स-फ्री; ऊपर के करीब ₹22.8 लाख फ़िलहाल टैक्सेबल माने जाएँगे।
- 20% से annuity: करीब ₹22.8 लाख। अगर annuity दर 6.5% सालाना मिले, तो करीब ₹12,300 महीना पेंशन (टैक्सेबल)।
अगर संदीप चाहें तो 80% एकमुश्त लेने की बजाय सिर्फ़ 60% (टैक्स-फ्री हिस्सा) लें और बाकी 40% से annuity ख़रीदें — तब पेंशन करीब ₹24,700 महीना होगी। यानी नए नियम विकल्प देते हैं, मजबूरी नहीं। कौन-सा रास्ता बेहतर है, यह आपकी बाकी आय, स्वास्थ्य, परिवार की ज़रूरतें और टैक्स स्लैब देखकर तय करें।
ज़्यादा एकमुश्त रकम: फ़ायदा या जोखिम?
80% रकम हाथ में आना सुनने में अच्छा लगता है, पर इसका दूसरा पहलू भी है। Annuity ज़िंदगी भर की पक्की पेंशन देती है, चाहे आप कितने भी साल जिएँ। एकमुश्त पैसा अगर ग़लत जगह लग गया, बच्चों की ज़रूरतों में ख़र्च हो गया या जल्दी ख़त्म हो गया, तो 75–80 साल की उम्र में आय का कोई सहारा नहीं बचेगा। इसलिए एकमुश्त रकम लेने से पहले उसके लिए एक साफ़ योजना बनाएँ — जैसे कुछ हिस्सा FD या वरिष्ठ नागरिक बचत योजना जैसी सुरक्षित योजनाओं में और कुछ हिस्सा बैलेंस्ड निवेश में।
NPS खाता कैसे खोलें? (स्टेप-बाय-स्टेप)
- ऑनलाइन (eNPS): NPS Trust के आधिकारिक पोर्टल या Protean/KFintech/CAMS जैसी CRA वेबसाइट पर जाएँ।
- KYC: आधार (OTP) या PAN + बैंक खाते से KYC पूरी करें।
- विवरण भरें: नाम, पता, नॉमिनी, बैंक खाते की जानकारी डालें।
- निवेश विकल्प चुनें: पेंशन फंड मैनेजर और Active या Auto Choice चुनें।
- पहला योगदान: Tier I में न्यूनतम योगदान करें (आम तौर पर पहली बार ₹500 और साल में कम से कम ₹1,000)।
- PRAN पाएँ: खाता खुलते ही PRAN नंबर मिल जाता है। ई-साइन से प्रक्रिया पूरी करें।
- Corporate NPS: अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो HR से पूछें कि कंपनी Corporate NPS देती है या नहीं — वहीं से नियोक्ता योगदान सेट होता है।
बैंक शाखाओं और डाकघरों में (Point of Presence – POP) ऑफ़लाइन भी खाता खोला जा सकता है।
NPS vs EPF vs PPF: रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?
| बिंदु | NPS | EPF | PPF |
|---|---|---|---|
| रिटर्न | बाज़ार से जुड़ा, गारंटी नहीं | सरकार हर साल तय करती है | 7.1% (अक्टूबर–दिसंबर 2026) |
| इक्विटी एक्सपोज़र | हाँ, आपकी पसंद के अनुसार | बहुत सीमित | नहीं |
| कौन | 18–70 साल का कोई भी नागरिक | संगठित क्षेत्र के कर्मचारी | कोई भी भारतीय निवासी |
| नई टैक्स व्यवस्था में छूट | नियोक्ता योगदान (14% तक) | नियोक्ता योगदान (सीमा के अंदर) | नहीं (ब्याज टैक्स-फ्री) |
| परिपक्वता पर टैक्स | 60% टैक्स-फ्री, annuity की पेंशन टैक्सेबल | शर्तों के साथ टैक्स-फ्री | पूरी तरह टैक्स-फ्री |
| लिक्विडिटी | सीमित (आंशिक निकासी शर्तों के साथ) | शर्तों के साथ निकासी | शर्तों के साथ आंशिक निकासी |
सच यह है कि ये तीनों एक-दूसरे के विकल्प कम और साथी ज़्यादा हैं। EPF और PPF सुरक्षित, स्थिर नींव देते हैं, जबकि NPS कम लागत में इक्विटी से बढ़त का मौका देता है। PF के नियम विस्तार से जानने के लिए हमारी PF Withdrawal Rules 2026 गाइड पढ़ें, और यह जानने के लिए कि रिटायरमेंट के लिए हर महीने कितना निवेश चाहिए, यह कैलकुलेशन गाइड देखें।
NPS में निवेश करते समय 6 आम ग़लतियाँ
- Employer NPS को नज़रअंदाज़ करना: नई टैक्स व्यवस्था में यह सबसे बड़ी बची हुई छूट है। HR से ज़रूर पूछें।
- NPS को इमरजेंसी फंड समझना: समय से पहले निकलने पर 80% annuity में फँसता है। आपात स्थिति के लिए अलग इमरजेंसी फंड रखें।
- जवानी में बहुत कम इक्विटी: 25–35 की उम्र में सिर्फ़ सरकारी बॉन्ड चुनने से लंबी अवधि में कॉर्पस काफ़ी छोटा रह सकता है।
- 80% एकमुश्त का टैक्स भूल जाना: 60% से ऊपर का हिस्सा फ़िलहाल टैक्सेबल माना जा रहा है — योजना बनाते समय इसे जोड़ें।
- न्यूनतम योगदान चूकना: Tier I में साल का न्यूनतम योगदान न होने पर खाता निष्क्रिय (frozen) हो सकता है।
- नॉमिनी अपडेट न करना: मृत्यु की स्थिति में पूरा कॉर्पस नॉमिनी को जाता है — नॉमिनेशन हमेशा अपडेट रखें।
संदीप ने आख़िर क्या फ़ैसला किया?
पूरा हिसाब देखने के बाद संदीप ने दराज़ से वह फ़ॉर्म निकाला और Corporate NPS में Basic का 14% चुन लिया। इससे उन्हें नई टैक्स व्यवस्था में ही सालाना करीब ₹21,800 की टैक्स बचत होगी, और ₹7,000 महीना अपने आप रिटायरमेंट फंड में जाता रहेगा। उन्होंने Auto Choice (Aggressive) चुना ताकि अभी इक्विटी ज़्यादा रहे और उम्र के साथ अपने आप घटती जाए। अपनी इमरजेंसी ज़रूरतों के लिए उन्होंने अलग से 6 महीने का खर्च बचत खाते और लिक्विड फंड में रखा — ताकि NPS को कभी समय से पहले छूने की नौबत न आए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या NPS में अब 80% पैसा एकमुश्त निकाल सकते हैं?
हाँ, दिसंबर 2025 के PFRDA संशोधन के बाद ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर ₹12 लाख से ज़्यादा कॉर्पस होने पर रिटायरमेंट पर 80% तक एकमुश्त निकाल सकते हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए सीमा 60% है।
2. क्या पूरा 80% टैक्स-फ्री है?
नहीं। कुल कॉर्पस का 60% टैक्स-फ्री है। अतिरिक्त 20% पर टैक्स-छूट बढ़ाने की कोई घोषणा फ़रवरी 2026 के बजट में नहीं हुई थी, इसलिए यह फ़िलहाल टैक्सेबल माना जा रहा है।
3. नई टैक्स व्यवस्था में NPS का कोई फ़ायदा है?
हाँ — नियोक्ता का योगदान Basic+DA के 14% तक Section 124 के तहत नई व्यवस्था में भी छूट-योग्य है। अपने योगदान पर छूट सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में है।
4. NPS में न्यूनतम कितना निवेश करना होता है?
Tier I में आम तौर पर खाता खोलते समय ₹500 और हर साल कम से कम ₹1,000 का योगदान ज़रूरी है। अधिकतम की कोई सीमा नहीं है, पर टैक्स छूट तय सीमा तक ही मिलती है।
5. NPS में रिटर्न की गारंटी है?
नहीं। NPS बाज़ार से जुड़ा है — इक्विटी हिस्से का रिटर्न शेयर बाज़ार पर और बॉन्ड हिस्से का ब्याज दरों पर निर्भर करता है।
6. क्या 60 के बाद भी NPS में निवेश जारी रख सकते हैं?
हाँ, नए नियमों में खाता 85 साल की उम्र तक जारी रखा या निकासी टाली जा सकती है।
7. नौकरी बदलने पर NPS खाते का क्या होगा?
कुछ नहीं बदलता — PRAN वही रहता है। नई कंपनी में Corporate NPS हो तो उसी PRAN को उससे जोड़ दें।
8. सब्सक्राइबर की मृत्यु होने पर पैसा किसे मिलता है?
ग़ैर-सरकारी सब्सक्राइबर के मामले में पूरा कॉर्पस नॉमिनी या कानूनी वारिस को मिलता है, annuity ख़रीदना ज़रूरी नहीं।
निष्कर्ष
2026 का NPS पहले से कहीं ज़्यादा लचीला है — 80% तक एकमुश्त निकासी, छोटे कॉर्पस पर पूरी निकासी, 85 साल तक खाता और किश्तों में निकासी के विकल्प। नौकरीपेशा लोगों के लिए Employer NPS नई टैक्स व्यवस्था में भी सबसे काम की टैक्स छूटों में से एक है। बस याद रखें: NPS लंबी अवधि का रिटायरमेंट निवेश है, बीच में निकलना महँगा है, रिटर्न की गारंटी नहीं है, और 80% एकमुश्त में से सिर्फ़ 60% टैक्स-फ्री है। जल्दी शुरू करें, सही निवेश विकल्प चुनें और इसे EPF/PPF के साथ मिलाकर अपने रिटायरमेंट की मज़बूत योजना बनाएँ।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स सलाह नहीं। NPS के नियम PFRDA द्वारा दिसंबर 2025 में किए गए संशोधनों पर और टैक्स जानकारी Income-tax Act 2025 पर आधारित है; दोनों में आगे बदलाव हो सकते हैं। कॉर्पस और पेंशन के आँकड़े 9–10% रिटर्न और 6.5% annuity दर मानकर किए गए अनुमान हैं — NPS बाज़ार से जुड़ा है और असली रकम अलग हो सकती है। निवेश या निकासी से पहले NPS Trust/PFRDA की आधिकारिक जानकारी जाँचें और किसी योग्य वित्तीय सलाहकार या CA से सलाह लें।
