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PPF Account 2026-27: 7.1% ब्याज दर, Loan-Withdrawal के नियम और 15 साल में ₹40 लाख कैसे बनाएं — पूरी गाइड

PPF अकाउंट 2026: भारतीय रुपये के नोटों का ढेर, लॉन्ग-टर्म सेविंग्स का प्रतीक

राजकोट में एक टेक्सटाइल एक्सपोर्ट कंपनी में अकाउंट्स मैनेजर का काम करने वाले 29 साल के विनोद मेहता ने पिछले हफ्ते अपनी सैलरी स्लिप देखी तो सोचा कि हर महीने थोड़ा पैसा ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां रिटर्न भी तय हो और टैक्स की बचत भी हो। दोस्तों ने Mutual Fund, Stock Market और Gold की सलाह दी, लेकिन विनोद को कहीं पढ़ा था कि एक सरकारी स्कीम आज भी ऐसी है जहां पैसा डूबने का खतरा नहीं है, ब्याज टैक्स-फ्री मिलता है और डिपॉजिट पर भी टैक्स छूट मिलती है। वह स्कीम है Public Provident Fund (PPF)। अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार ने PPF की ब्याज दर 7.1% सालाना पर बरकरार रखी है, यानी लगातार नौवीं तिमाही में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस आर्टिकल में हम PPF अकाउंट के सभी ज़रूरी नियम — खाता खोलने से लेकर मैच्योरिटी, लोन, पार्शियल विड्रॉल और नए Income Tax Act 2025 के तहत टैक्स बेनिफिट तक — आसान हिंदी में, उदाहरण के साथ समझेंगे।

PPF अकाउंट में सिक्का डालते हुए हाथ, बचत और निवेश का प्रतीक

PPF Interest Rate 2026-27: अक्टूबर-दिसंबर तिमाही का ताज़ा अपडेट

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) ने 30 सितंबर 2026 को छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों का ऐलान किया। अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए सभी प्रमुख दरें पिछली तिमाही जैसी ही रखी गई हैं। नीचे टेबल में सभी स्कीम की मौजूदा दरें देखें:

स्कीमब्याज दर (अक्टूबर-दिसंबर 2026)लॉक-इन / टेन्योर
Public Provident Fund (PPF)7.1%15 साल
Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)8.2%बेटी के 21 साल तक
Senior Citizen Savings Scheme (SCSS)8.2%5 साल
National Savings Certificate (NSC)7.7%5 साल
Kisan Vikas Patra (KVP)7.5%लगभग 9.5 साल (मैच्योरिटी पर डबल)

PPF की ब्याज दर हर तिमाही सरकार तय करती है और यह 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड से जुड़ी होती है। इसलिए दर स्थिर नहीं रहती, लेकिन यह फिलहाल बैंक FD की तुलना में टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न के मामले में आगे है, क्योंकि PPF का ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है जबकि FD का ब्याज आपकी इनकम में जुड़कर टैक्स होता है।

PPF अकाउंट है क्या और यह किसके लिए सही है

Public Provident Fund भारत सरकार की एक लॉन्ग-टर्म सेविंग्स स्कीम है जिसे नेशनल सेविंग्स इंस्टीट्यूट चलाता है। इसे 1968 में शुरू किया गया था और आज भी यह देश की सबसे पॉपुलर टैक्स-सेविंग निवेश स्कीमों में से एक है। PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में रखा जाता है — यानी जमा की गई रकम पर टैक्स छूट, हर साल मिलने वाले ब्याज पर टैक्स छूट, और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी टैक्स छूट। बहुत कम स्कीमें ऐसी तीन-तरफा छूट देती हैं।

यह स्कीम उनके लिए सबसे उपयुक्त है जो:

  • अपने पोर्टफोलियो में एक गारंटीड, जोखिम-मुक्त हिस्सा चाहते हैं
  • रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई जैसे 15+ साल के लक्ष्य के लिए पैसा लगाना चाहते हैं
  • पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में हैं और Section 80C (अब Section 123) का फायदा लेना चाहते हैं
  • Equity में जोखिम नहीं लेना चाहते, लेकिन FD से बेहतर टैक्स-एडजस्टेड रिटर्न चाहते हैं

लेकिन अगर आपको 15 साल से पहले बड़ी रकम की ज़रूरत पड़ सकती है, या आप New Tax Regime में हैं जहां यह डिडक्शन मिलता ही नहीं, तो PPF को अपने पूरे निवेश का आधार बनाने से पहले सोच लें — इसके बारे में आगे पूरी जानकारी है।

PPF अकाउंट कैसे खोलें — बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन

PPF अकाउंट किसी भी पोस्ट ऑफिस में या अधिकृत बैंक (SBI, HDFC, ICICI, Axis, Bank of Baroda, Punjab National Bank समेत ज़्यादातर बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक) की शाखा में खोला जा सकता है। कई बैंक अपने नेट बैंकिंग के ज़रिए ऑनलाइन PPF अकाउंट खोलने की सुविधा भी देते हैं, जिसमें KYC पहले से पूरी होने पर कुछ ही मिनट लगते हैं।

अकाउंट खोलने के लिए इन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है:

  • PPF Account Opening Form (फॉर्म A)
  • पहचान प्रमाण — PAN कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट या वोटर ID
  • पता प्रमाण — आधार कार्ड, बिजली बिल या पासपोर्ट
  • दो पासपोर्ट साइज फोटो
  • नॉमिनी की जानकारी (फॉर्म में ही भरनी होती है)
  • नाबालिग के नाम खाता खोलना है तो उसका जन्म प्रमाण पत्र

ध्यान रखें — एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ एक ही PPF अकाउंट खोला जा सकता है (नाबालिग बच्चों के नाम अलग खाता खोला जा सकता है, जो माता-पिता में से कोई एक ऑपरेट करता है)। ज्वॉइंट PPF अकाउंट की सुविधा नहीं है।

जमा करने के नियम: मिनिमम-मैक्सिमम लिमिट और ब्याज कैलकुलेशन

PPF में हर फाइनेंशियल ईयर में कम से कम ₹500 और ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,50,000 जमा किया जा सकता है। यह रकम एक बार में लम्पसम भी डाली जा सकती है या साल में अधिकतम 12 किस्तों में। ₹1.5 लाख से ज़्यादा जमा करने पर एक्स्ट्रा रकम पर कोई ब्याज नहीं मिलता और वह बिना किसी टैक्स बेनिफिट के वापस कर दी जाती है।

ब्याज कैलकुलेशन का तरीका बहुत कम लोग समझते हैं, और यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। PPF में ब्याज हर महीने की 5 तारीख़ से महीने के आख़िर तक की सबसे कम बैलेंस पर कैलकुलेट होता है, और साल के अंत में एक साथ क्रेडिट होता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप महीने की 6 तारीख़ या उसके बाद पैसा डालते हैं, तो उस पूरे महीने का ब्याज आपको नहीं मिलता।

उदाहरण: मान लीजिए सूरत के एक व्यापारी हर महीने 5 तारीख़ तक ₹12,500 (यानी साल में ₹1,50,000) जमा करते हैं, बनाम कोई व्यक्ति जो पूरे ₹1,50,000 अप्रैल के पहले हफ्ते में एक साथ जमा कर देता है। 7.1% सालाना दर पर, पहले साल का हिसाब पायथन से लगाने पर यह अंतर साफ़ दिखता है:

तरीकापहले साल का ब्याज
हर महीने 5 तारीख़ तक ₹12,500 जमा (12 किस्तों में)₹5,769 (लगभग)
1 अप्रैल को पूरे ₹1,50,000 एक साथ जमा₹10,650

यानी अगर आपके पास साल की शुरुआत में ही पूरी रकम उपलब्ध है, तो उसे अप्रैल के पहले हफ्ते (5 तारीख़ से पहले) में जमा कर देने से पहले ही साल में लगभग ₹4,881 ज़्यादा ब्याज मिल जाता है — और 15 साल में यह अंतर काफी बड़ा हो जाता है। जिनके लिए एक साथ इतनी रकम जमा करना मुमकिन नहीं है, उनके लिए भी महीने की 5 तारीख़ से पहले किस्त डालने की आदत ब्याज का नुकसान कम कर देती है।

भारतीय रुपये के नोट और सिक्के, PPF जमा राशि की गणना

PPF पर टैक्स बेनिफिट: नया Income Tax Act 2025 और Section 123 में क्या बदला

1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए Income Tax Act, 2025 ने पुराने इनकम टैक्स कानून के कई सेक्शन नंबर बदल दिए हैं, जिसमें मशहूर Section 80C भी शामिल है। PPF, EPF, Sukanya Samriddhi Yojana और ELSS जैसे निवेशों पर मिलने वाली डिडक्शन अब Section 123 के तहत आती है। डिडक्शन की लिमिट पहले जैसी ही है — ₹1.5 लाख प्रति फाइनेंशियल ईयर, सेक्शन का नाम भले बदल गया हो।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह डिडक्शन सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो Old Tax Regime चुनते हैं। अगर आपने New Tax Regime चुना है (जो अभी ज़्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए डिफॉल्ट है), तो PPF में डिपॉजिट पर कोई डिडक्शन नहीं मिलेगी — हालांकि ब्याज और मैच्योरिटी रकम दोनों रिजीम में टैक्स-फ्री ही रहती हैं, क्योंकि यह छूट डिपॉजिट पर मिलने वाली डिडक्शन से अलग है।

पहलूOld Tax RegimeNew Tax Regime
डिपॉजिट पर डिडक्शन (Section 123, पुराना 80C)हां, ₹1.5 लाख तकनहीं
सालाना ब्याज पर टैक्सटैक्स-फ्रीटैक्स-फ्री
मैच्योरिटी रकम पर टैक्सटैक्स-फ्रीटैक्स-फ्री

इसलिए New Tax Regime में होने वालों के लिए भी PPF पूरी तरह बेकार नहीं है — सिर्फ डिपॉजिट पर डिडक्शन वाला फायदा नहीं मिलेगा, बाकी गारंटीड रिटर्न और टैक्स-फ्री ब्याज का फायदा बना रहता है।

15 साल में PPF से कितना पैसा बनेगा — पूरा हिसाब

मान लीजिए राजकोट के विनोद मेहता हर साल अप्रैल के पहले हफ्ते में पूरे ₹1,50,000 PPF में जमा करते हैं, और दर पूरे 15 साल 7.1% सालाना ही बनी रहती है (असल में दर बदलती रहती है, यह सिर्फ उदाहरण के लिए एक मानी हुई दर है)। पायथन से सालाना चक्रवृद्धि (compounding) का हिसाब लगाने पर साल-दर-साल बैलेंस ऐसा दिखता है:

सालसाल के अंत में बैलेंस (लगभग)
1₹1,60,650
3₹5,16,978
5₹9,25,701
7₹13,94,524
10₹22,30,124
12₹28,90,750
15₹40,68,209

15 साल में विनोद कुल ₹22,50,000 (यानी ₹1.5 लाख × 15) जमा करेंगे, लेकिन मैच्योरिटी पर मिलेगी लगभग ₹40,68,209 — यानी सिर्फ ब्याज से ही ₹18,18,209 का फायदा, और यह पूरी रकम टैक्स-फ्री है। अगर विनोद मैच्योरिटी पर पैसा न निकालकर अकाउंट को 5 साल के एक ब्लॉक के लिए बढ़ा देते हैं और उसी रफ़्तार से जमा करते रहते हैं, तो 20 साल में यह रकम बढ़कर लगभग ₹66,58,288 हो जाती है।

हर किसी के लिए ₹1.5 लाख सालाना जमा करना मुमकिन नहीं होता। मुंबई में रहने वाली प्रिया अय्यर, जो एक स्कूल में टीचर हैं, हर साल ₹60,000 जमा करती हैं। उसी 7.1% दर पर 15 साल बाद उनका बैलेंस लगभग ₹16,27,284 होगा, जबकि उन्होंने कुल ₹9,00,000 जमा किए होंगे — यानी ₹7,27,284 का ब्याज फायदा।

PPF पर लोन की सुविधा — कब और कितना मिल सकता है

PPF अकाउंट पर इमरजेंसी में लोन लेने की सुविधा भी है, लेकिन इसके लिए टाइमिंग का ध्यान रखना ज़रूरी है। लोन सिर्फ अकाउंट खुलने के तीसरे से छठे फाइनेंशियल ईयर के बीच ही मिलता है। इसके बाद यह सुविधा बंद हो जाती है और सीधे पार्शियल विड्रॉल का रास्ता खुलता है।

  • लोन की रकम: अप्लाई करने वाले साल से 2 साल पहले वाले साल के अंत की बैलेंस का अधिकतम 25%
  • ब्याज दर: मौजूदा PPF दर से 1% ज़्यादा (यानी अभी लगभग 8.1%)
  • चुकाने की अवधि: मूल रकम 36 महीनों के अंदर चुकानी होती है, वरना ब्याज दर बढ़कर PPF दर से 6% ज़्यादा हो जाती है
  • दूसरा लोन: सिर्फ पहला लोन पूरा चुकाने के बाद ही मिलेगा

उदाहरण: अगर किसी का PPF अकाउंट 2023-24 में खुला और वे 2026-27 (यानी चौथे साल, लोन विंडो के अंदर) में लोन अप्लाई करते हैं, तो लोन की रकम 2 साल पहले यानी 2024-25 के अंत की बैलेंस पर निकाली जाएगी। अगर मानें कि हर साल ₹1.5 लाख जमा हुआ और उस साल के अंत में बैलेंस ₹5,16,978 था, तो अधिकतम लोन मिलेगा इसका 25% — यानी लगभग ₹1,29,244।

Partial Withdrawal के नियम — 7वें साल से कितना निकाल सकते हैं

PPF से पूरा पैसा तो 15 साल पूरे होने पर ही मिलता है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर 7वें फाइनेंशियल ईयर से (यानी अकाउंट खुलने के बाद पूरे 6 साल बीतने के बाद) साल में एक बार पार्शियल विड्रॉल किया जा सकता है।

निकासी की सीमा: इन दो में से जो भी रकम कम हो, उतनी ही निकाली जा सकती है —

  1. निकासी वाले साल से 4 साल पहले वाले साल के अंत की बैलेंस का 50%, या
  2. पिछले साल के अंत की बैलेंस का 50%

उदाहरण: ऊपर वाले ही ₹1.5 लाख सालाना जमा के उदाहरण में, अगर विनोद 10वें साल में पार्शियल विड्रॉल करना चाहें — तो 4 साल पहले (यानी 6वें साल के अंत) की बैलेंस थी ₹11,52,076, और पिछले साल (9वें साल के अंत) की बैलेंस थी ₹19,32,282। इन दोनों में कम रकम ₹11,52,076 है, और इसका 50% यानी अधिकतम ₹5,76,038 निकाला जा सकता है।

मैच्योरिटी के बाद: Extension के नियम (Form-4)

15 साल पूरे होने पर तीन रास्ते होते हैं:

  • पूरा पैसा निकालकर अकाउंट बंद कर दें
  • अकाउंट को 5-5 साल के ब्लॉक में बिना नई जमा के आगे बढ़ाएं — पुरानी रकम पर ब्याज मिलता रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर हर साल एक बार विड्रॉल भी कर सकते हैं
  • अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में नई जमा के साथ आगे बढ़ाएं — इसके लिए मैच्योरिटी के एक साल के अंदर फॉर्म-4 भरना ज़रूरी है

अगर नई जमा के साथ एक्सटेंशन चुना है, तो हर 5 साल के ब्लॉक में कुल निकासी उस ब्लॉक की शुरुआत वाली बैलेंस के 60% से ज़्यादा नहीं हो सकती। फॉर्म-4 भरने की डेडलाइन मिस करने पर अकाउंट अपने-आप “नई जमा के बिना एक्सटेंशन” मोड में चला जाता है, और उसके बाद उसमें दोबारा पैसा जमा नहीं किया जा सकता।

Premature Closure — 15 साल से पहले अकाउंट बंद करने के नियम

PPF अकाउंट को 15 साल पूरे होने से पहले बंद करने की इजाज़त सिर्फ 5 साल पूरे होने के बाद और सिर्फ इन वजहों से मिलती है:

  • खाताधारक, पति/पत्नी, आश्रित बच्चों या माता-पिता की गंभीर बीमारी (मेडिकल दस्तावेज़ ज़रूरी)
  • खाताधारक या आश्रित बच्चों की हायर एजुकेशन, भारत में या विदेश में (एडमिशन और फीस के दस्तावेज़ ज़रूरी)
  • खाताधारक का रेज़िडेंशियल स्टेटस बदलना, जैसे NRI बन जाना (पासपोर्ट, वीज़ा या ITR जैसे प्रूफ ज़रूरी)

इसके लिए फॉर्म-5 भरना होता है, और प्रीमैच्योर क्लोज़र पर पूरी अवधि के लिए मिलने वाली ब्याज दर में 1% की कमी कर दी जाती है — यानी अगर आपको 7.1% मिल रहा था, तो हिसाब 6.1% की दर से लगाया जाएगा।

परिवार के साथ बैठकर लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग करते हुए

PPF बनाम अन्य निवेश विकल्प — किसे चुनना चाहिए, किसे नहीं

आपकी स्थितिPPF सही है या नहीं
Old Tax Regime में हैं और 80C/Section 123 का फायदा चाहिएसही विकल्प — गारंटीड रिटर्न के साथ टैक्स डिडक्शन भी
15 साल तक पैसे की ज़रूरत नहीं, रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई का लक्ष्यसही विकल्प — लंबी अवधि में चक्रवृद्धि का पूरा फायदा
जोखिम बिल्कुल नहीं लेना चाहते, FD से बेहतर टैक्स-फ्री रिटर्न चाहिएसही विकल्प
New Tax Regime में हैं और सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश कर रहे हैंफायदा नहीं — डिपॉजिट पर डिडक्शन नहीं मिलेगी, Equity या हाइब्रिड फंड पर विचार करें
3-5 साल में पैसे की ज़रूरत है (घर की डाउन पेमेंट, शादी वगैरह)सही नहीं — पैसा 15 साल के लिए लॉक रहता है, लिक्विडिटी के लिए FD या डेट फंड बेहतर
महंगाई को बीट करने के लिए हाई ग्रोथ चाहिएसिर्फ PPF काफी नहीं — Equity Mutual Fund या SIP के साथ मिलाकर पोर्टफोलियो बनाएं

PPF में निवेश से पहले की Checklist

  1. हर साल ₹1.5 लाख की लिमिट के अंदर ही जमा करें, ज़्यादा जमा करने पर ब्याज नहीं मिलेगा
  2. हर महीने या साल में पैसा 5 तारीख़ से पहले जमा करने की आदत डालें ताकि उस महीने का ब्याज न छूटे
  3. Old Tax Regime में हैं तो ही डिडक्शन का हिसाब लगाकर निवेश करें
  4. नॉमिनी की जानकारी अकाउंट खोलते समय ज़रूर भरें और ज़रूरत पड़ने पर अपडेट करते रहें
  5. मैच्योरिटी से एक साल पहले ही तय कर लें कि अकाउंट बंद करना है या फॉर्म-4 भरकर आगे बढ़ाना है
  6. लोन या पार्शियल विड्रॉल से पहले दोनों की शर्तें और ब्याज दर अच्छी तरह समझ लें
  7. पासबुक की एंट्री समय-समय पर अपडेट कराते रहें ताकि ब्याज क्रेडिट सही दिख रहा हो

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FAQ — PPF से जुड़े सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल

Q1. PPF की मौजूदा ब्याज दर क्या है?

अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए PPF की ब्याज दर 7.1% सालाना है। यह दर हर तिमाही सरकार तय करती है और बदल सकती है।

Q2. PPF अकाउंट में साल में कितनी बार पैसा जमा कर सकते हैं?

एक फाइनेंशियल ईयर में अधिकतम 12 बार जमा किया जा सकता है, या चाहें तो एक बार में पूरी रकम लम्पसम भी जमा कर सकते हैं। कुल जमा ₹1.5 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

Q3. अगर एक साल में ₹500 भी जमा न करें तो क्या होगा?

अकाउंट “डिफॉल्ट” यानी निष्क्रिय हो जाता है। इसे फिर से एक्टिव कराने के लिए बकाया सालों का मिनिमम डिपॉजिट (₹500 प्रति वर्ष) के साथ पेनल्टी भरनी होती है, जो आमतौर पर प्रति वर्ष ₹50 होती है।

Q4. क्या NRI PPF अकाउंट खोल सकते हैं?

नहीं, NRI नया PPF अकाउंट नहीं खोल सकते। लेकिन अगर किसी ने रेजिडेंट रहते हुए PPF अकाउंट खोला था और बाद में NRI बन गए, तो मौजूदा अकाउंट मैच्योरिटी तक चलता रह सकता है (नियमों के मुताबिक, पूरी जानकारी अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस से ज़रूर कन्फर्म करें)।

Q5. PPF पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी रकम टैक्सेबल है क्या?

नहीं, PPF का सालाना ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम दोनों टैक्स-फ्री हैं, चाहे आप Old या New Tax Regime में हों। सिर्फ डिपॉजिट पर मिलने वाली डिडक्शन (Section 123) का फायदा New Regime में नहीं मिलता।

Q6. क्या PPF अकाउंट एक बैंक से दूसरे बैंक या पोस्ट ऑफिस में ट्रांसफर हो सकता है?

हां, PPF अकाउंट एक बैंक से दूसरे बैंक में, बैंक से पोस्ट ऑफिस में या पोस्ट ऑफिस से बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए मौजूदा ब्रांच में ट्रांसफर रिक्वेस्ट देनी होती है।

Q7. लोन और पार्शियल विड्रॉल दोनों एक साथ ले सकते हैं क्या?

लोन सुविधा सिर्फ तीसरे से छठे साल तक मिलती है, जबकि पार्शियल विड्रॉल सातवें साल से शुरू होती है। इसलिए दोनों सुविधाएं एक ही समय पर लागू नहीं रहती — जैसे ही पार्शियल विड्रॉल का विंडो खुलता है, लोन का विंडो बंद हो जाता है।

Q8. क्या नाबालिग बच्चे के नाम PPF खाता खुल सकता है?

हां, माता-पिता या कानूनी गार्जियन नाबालिग बच्चे के नाम PPF अकाउंट खोल सकते हैं और उसे ऑपरेट कर सकते हैं। लेकिन एक जानकारी ज़रूर ध्यान रखें — माता-पिता के अपने अकाउंट और बच्चे के अकाउंट में मिलाकर कुल डिपॉजिट ₹1.5 लाख की सालाना लिमिट के अंदर ही रहना चाहिए, तभी टैक्स डिडक्शन का पूरा फायदा मिलता है।

निष्कर्ष

PPF भारत की उन चुनिंदा स्कीमों में से एक है जो आज भी गारंटीड, टैक्स-फ्री रिटर्न के साथ टैक्स डिडक्शन का डबल फायदा देती है — बशर्ते आप Old Tax Regime में हों। 7.1% की मौजूदा दर शेयर बाज़ार जैसी चमक-दमक वाली नहीं लगती, लेकिन 15 साल की चक्रवृद्धि और टैक्स-फ्री होने की वजह से यह आंकड़ा असल में कई टैक्स-पेइंग निवेशकों के लिए FD या डेट फंड से बेहतर साबित होता है। अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है और आप जोखिम से दूर रहना चाहते हैं, तो PPF को अपने पोर्टफोलियो के “सुरक्षित हिस्से” के तौर पर ज़रूर देखें — लेकिन सिर्फ PPF के भरोसे पूरा फाइनेंशियल प्लान मत बनाइए, महंगाई को बीट करने के लिए इसके साथ Equity या Mutual Fund जैसे ग्रोथ विकल्पों को भी शामिल करना ज़रूरी है।

PPF पासबुक और बचत की योजना बनाते हुए व्यक्ति

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है, यह निवेश या टैक्स सलाह नहीं है। PPF की ब्याज दरें, टैक्स नियम और Income Tax Act 2025 से जुड़े प्रावधान समय-समय पर बदल सकते हैं। कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र, CA या संबंधित बैंक/पोस्ट ऑफिस से मौजूदा नियमों की पुष्टि ज़रूर कर लें।

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