दिवाली और धनतेरस के बाद हर साल एक जैसा सीन दोहराता है। घर में नई सोने-चांदी की ज्वेलरी आ जाती है, पुराने गहने भी हैं, कुछ जरूरी कागज़ात — प्रॉपर्टी के पेपर, FD की रसीदें, वसीयत — सब मिलाकर एक सवाल खड़ा हो जाता है: “इसे घर में रखें या बैंक लॉकर में?” कानपुर के रमेश गुप्ता को भी यही दुविधा हुई। इस दिवाली उनकी पत्नी को ₹1.2 लाख की सोने की चूड़ियां मिली थीं, और घर में रखना उन्हें असुरक्षित लग रहा था। लेकिन जब वे बैंक गए तो पता चला कि लॉकर लेना जितना आसान लगता है, उसके पीछे के नियम उतने ही उलझे हुए हैं — रेंट कितना लगेगा, एग्रीमेंट साइन करना क्यों ज़रूरी है, और सबसे बड़ा सवाल: अगर लॉकर में रखा सामान चोरी या नुकसान हो जाए तो बैंक कितना मुआवज़ा देगा?
यह गाइड ठीक इन्हीं सवालों के जवाब देती है। हम बात करेंगे कि 2026 में बैंक लॉकर कैसे मिलता है, रेंट और GST का पूरा हिसाब क्या है, RBI के नए नियमों में क्या बदला है, Locker Agreement साइन न करने पर क्या होता है, नुकसान पर बैंक की ज़िम्मेदारी कितनी है, और नॉमिनेशन का पूरा प्रोसेस क्या है। हर जगह हम असली केलकुलेशन के साथ समझाएंगे, ताकि फैसला लेना आसान हो।

बैंक लॉकर (Safe Deposit Locker) क्या होता है?
बैंक लॉकर असल में बैंक की तिजोरी (vault) के अंदर बना एक छोटा सुरक्षित बॉक्स होता है, जिसे ग्राहक किराए पर लेता है ताकि अपने कीमती सामान — गहने, ज़रूरी दस्तावेज़, बॉन्ड सर्टिफिकेट, वसीयत — वहां सुरक्षित रख सके। यह बैंक अकाउंट की तरह डिपॉजिट नहीं है; इसमें पैसा जमा नहीं होता, बल्कि आपका अपना सामान एक सुरक्षित जगह पर रखा जाता है। बैंक के पास सिर्फ मास्टर-की होती है, और लॉकर खोलने के लिए आपकी खुद की चाबी और बैंक की चाबी — दोनों एक साथ लगानी पड़ती हैं (dual-key सिस्टम)।
ध्यान देने वाली बात यह है कि लॉकर कोई इंश्योरेंस प्रोडक्ट नहीं है। बैंक आपके सामान की कोई वैल्यूएशन नहीं करता और न ही उसे पता होता है कि लॉकर में क्या रखा है। इसीलिए नुकसान होने पर मुआवज़े की एक तय सीमा होती है, जिसे हम आगे विस्तार से समझेंगे।
लॉकर लेने के लिए पात्रता और ज़रूरी दस्तावेज़
ज़्यादातर बैंकों में लॉकर लेने के लिए उस ब्रांच में सेविंग्स या करंट अकाउंट होना ज़रूरी होता है, हालांकि नियम बैंक-दर-बैंक अलग हो सकते हैं। जॉइंट लॉकर भी लिया जा सकता है, जिसमें “Either or Survivor” जैसे ऑपरेटिंग इंस्ट्रक्शन सेट किए जाते हैं ताकि किसी एक की मौजूदगी में भी लॉकर ऑपरेट हो सके।
| दस्तावेज़ | किस काम आता है |
|---|---|
| पहचान प्रमाण (Aadhaar, PAN, Passport, Voter ID, Driving Licence) | KYC वेरिफिकेशन |
| पता प्रमाण (Aadhaar, Passport, बिजली/पानी का बिल, रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट) | एड्रेस कन्फर्मेशन |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो (2-3) | लॉकर एप्लिकेशन फॉर्म के साथ |
| मौजूदा KYC-कम्प्लायंट बैंक अकाउंट | अधिकतर बैंकों की शर्त |
| साइन किया और स्टैम्प्ड Locker Agreement | RBI के नियमों के तहत अनिवार्य |
| Fixed Deposit (कुछ बैंकों में) | रेंट और ब्रेक-ओपन चार्ज की सिक्योरिटी के तौर पर |
कई बैंक अब FD की शर्त भी लगाते हैं — आमतौर पर 1 से 3 साल के रेंट और ब्रेक-ओपन चार्ज के बराबर। हालांकि RBI के निर्देश के मुताबिक, जो ग्राहक लंबे समय से बैंक के साथ जुड़े हैं और जिनका अकाउंट अच्छी तरह से ऑपरेट हो रहा है, उनसे यह शर्त ज़बरदस्ती नहीं थोपी जा सकती। अगर आपकी ब्रांच में लॉकर खाली नहीं है, तो बैंक आपका नाम वेटिंग लिस्ट में डालता है और एक acknowledgment नंबर देता है — यह नंबर मांगना आपका अधिकार है।
2026 में लॉकर का रेंट कितना है? पूरी टेबल और GST का हिसाब
लॉकर का रेंट उसके साइज़ (Small, Medium, Large, Extra-Large) और ब्रांच की लोकेशन (मेट्रो/शहरी बनाम सेमी-अर्बन/ग्रामीण) पर निर्भर करता है। अलग-अलग बैंकों में ये आंकड़े थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्य रेंज कुछ ऐसी रहती है:
| लॉकर साइज़ | मेट्रो/शहरी (सालाना ₹) | सेमी-अर्बन/ग्रामीण (सालाना ₹) |
|---|---|---|
| Small | 1,500 – 2,000 | 1,000 – 1,500 |
| Medium | 3,000 – 4,000 | 2,000 – 3,000 |
| Large | 5,000 – 6,000 | 3,500 – 5,000 |
| Extra-Large | 8,000 – 10,000 | 5,000 – 8,000 |
इन सभी रेंट पर 18% GST अलग से लगता है, और यह मूल रेंट के ऊपर जुड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी मीडियम लॉकर का सालाना रेंट ₹3,000 है, तो:
बेस रेंट: ₹3,000
GST (18%): ₹540
कुल देय राशि: ₹3,540
इसके अलावा ज़्यादातर बैंक साल में कुछ फ्री विज़िट देते हैं — आमतौर पर 12 — और इसके बाद हर विज़िट पर अलग चार्ज लगता है। मान लीजिए किसी ग्राहक ने साल में 15 बार लॉकर ऑपरेट किया और बैंक की पॉलिसी 12 फ्री विज़िट की है:
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल विज़िट (साल में) | 15 |
| फ्री विज़िट लिमिट | 12 |
| एक्स्ट्रा विज़िट | 3 |
| प्रति एक्स्ट्रा विज़िट चार्ज (₹100 + 18% GST) | ₹118 |
| कुल एक्स्ट्रा चार्ज | ₹354 |
यह आंकड़े सिर्फ उदाहरण के तौर पर हैं — अपने बैंक की ब्रांच से असली रेंट, फ्री-विज़िट लिमिट और एक्स्ट्रा चार्ज की पुष्टि ज़रूर करें, क्योंकि यह ब्रांच और बैंक के हिसाब से बदलता रहता है।
RBI के नियमों में क्या बदला — बायोमेट्रिक, CCTV और SMS अलर्ट
पिछले कुछ सालों में RBI ने लॉकर से जुड़े नियमों को काफी सख्त किया है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और ग्राहकों को ज़्यादा सुरक्षा मिले। मुख्य बदलाव इस तरह हैं:
- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: लॉकर रूम में फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैनर लगाना अब ज़रूरी है, ताकि सिर्फ असली लॉकर होल्डर ही एक्सेस कर सके।
- CCTV रिकॉर्डिंग: बैंकों को लगातार रिकॉर्डिंग करनी होती है और फुटेज कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखनी होती है।
- SMS/Email अलर्ट: हर बार जब भी लॉकर एक्सेस होता है, ग्राहक को उसी दिन SMS या ईमेल से सूचना मिलनी चाहिए। यह आपके लिए एक तरह का सुरक्षा चेक है — अगर आपको ऐसा मैसेज मिलता है जो आपने खुद नहीं किया, तो फौरन बैंक को बताएं।
- स्टैंडर्ड, स्टैम्प्ड एग्रीमेंट: बैंकों को एक स्टैंडर्ड मॉडल एग्रीमेंट अपनाना था (Indian Banks’ Association द्वारा तय), जिसे ड्यूली स्टैम्प कर ग्राहक को उसकी साइन कॉपी देना ज़रूरी है।
- वेटिंग लिस्ट की पारदर्शिता: ब्रांच को एक पारदर्शी, acknowledged वेटिंग लिस्ट मेंटेन करनी होती है ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।
ये सारे नियम RBI के अगस्त 2021 के सर्कुलर और उसके बाद के संशोधनों से आए हैं, जो धीरे-धीरे पूरे बैंकिंग सिस्टम में लागू किए गए।

Locker Agreement साइन नहीं किया तो क्या होगा?
यह वह हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा कन्फ्यूज़न पैदा करता है। RBI ने शुरू में बैंकों को 1 जनवरी 2023 तक मौजूदा लॉकर होल्डर्स के साथ नया, रिवाइज़्ड एग्रीमेंट साइन करने को कहा था। बाद में यह डेडलाइन बढ़ाकर 31 दिसंबर 2023 कर दी गई, साथ में बीच के माइलस्टोन भी तय किए गए — 30 जून 2023 तक 50% ग्राहकों के एग्रीमेंट पूरे होने चाहिए थे, और 30 सितंबर 2023 तक 75%।
जिन ग्राहकों के लॉकर 1 जनवरी 2023 तक एग्रीमेंट न होने की वजह से “फ्रीज़” कर दिए गए थे, उन्हें RBI ने तुरंत अनफ्रीज़ करने का निर्देश दिया। बैंकों को यह भी कहा गया कि वे स्टैम्प पेपर, ई-स्टैम्पिंग या इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग जैसी सुविधाएं देकर ग्राहकों के लिए एग्रीमेंट साइन करना आसान बनाएं।
लेकिन असलियत यह है कि 2026 में भी बहुत से लॉकर होल्डर्स ने अभी तक रिवाइज़्ड एग्रीमेंट साइन नहीं किया है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के मध्य तक करीब 20% लॉकर होल्डर्स का एग्रीमेंट अब भी पेंडिंग था। इसका मतलब यह नहीं कि आपका लॉकर अपने आप बंद हो जाएगा, लेकिन अगर एग्रीमेंट पेंडिंग है तो एक्सेस में रुकावट या ऑपरेशनल दिक्कत आने का जोखिम बना रहता है। इसलिए सबसे सेफ तरीका यही है:
- अपनी ब्रांच से कन्फर्म करें कि आपका सप्लीमेंट्री/रिवाइज़्ड एग्रीमेंट साइन हुआ है या नहीं।
- अगर नहीं हुआ, तो ब्रांच मैनेजर से मिलकर स्टैम्प पेपर या ई-स्टैम्पिंग की प्रोसेस के बारे में पूछें।
- साइन करने के बाद एग्रीमेंट की सिग्नड कॉपी ज़रूर लें और सुरक्षित रखें।
एक और ज़रूरी बात — भले ही आपका पुराना एग्रीमेंट नए फॉर्मेट में अपडेट न हुआ हो, RBI के मुताबिक 2021 के सर्कुलर के लायबिलिटी और कंपनसेशन नियम फिर भी लागू होते हैं, भले ही आपके पुराने एग्रीमेंट में उनका ज़िक्र न हो।
लॉकर में नुकसान हो तो बैंक की जिम्मेदारी कितनी है? — 100 गुना मुआवज़े का नियम
यह शायद सबसे ज़रूरी और सबसे कम समझा जाने वाला नियम है। RBI ने तय किया है कि अगर लॉकर का कंटेंट आग, चोरी, डकैती या बैंक की लापरवाही की वजह से खो जाता है या नुकसान होता है, तो बैंक की ज़िम्मेदारी उस लॉकर के सालाना रेंट के 100 गुने तक सीमित है — इससे ज़्यादा नहीं।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मानिए कानपुर के रमेश गुप्ता का एक Small लॉकर है जिसका सालाना रेंट ₹2,000 है। अगर बैंक की लापरवाही से उनका लॉकर खाली हो जाता है (चोरी या आग की वजह से), तो अधिकतम मुआवज़ा इस तरह कैलकुलेट होगा:
सालाना रेंट: ₹2,000
अधिकतम मुआवज़ा (100 × रेंट): ₹2,00,000
अब जयपुर की प्रिया शर्मा का उदाहरण लेते हैं, जिनका Medium लॉकर है जिसका सालाना रेंट ₹3,500 है, और जिसमें उन्होंने ₹8,00,000 की ज्वेलरी रखी थी:
| विवरण | राशि |
|---|---|
| सालाना रेंट | ₹3,500 |
| अधिकतम मुआवज़ा (100 × रेंट) | ₹3,50,000 |
| ज्वेलरी की असली वैल्यू | ₹8,00,000 |
| संभावित शॉर्टफॉल | ₹4,50,000 |
यानी अगर प्रिया का पूरा सामान बैंक की लापरवाही से खो जाता है, तो उन्हें सिर्फ ₹3,50,000 तक का मुआवज़ा मिल सकता है — बाकी ₹4,50,000 का नुकसान उनका अपना होगा। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स बार-बार कहते हैं कि लॉकर इंश्योरेंस का विकल्प नहीं है। अगर आपके गहनों की वैल्यू ज़्यादा है, तो एक अलग Jewellery Insurance या Home Content Insurance पॉलिसी लेना समझदारी है जो असली वैल्यू के हिसाब से कवर दे।
यह भी ध्यान रखें कि यह 100 गुना मुआवज़ा सिर्फ बैंक की लापरवाही, चोरी, आग या डकैती जैसे मामलों पर लागू होता है। प्राकृतिक आपदा (जैसे भूकंप, बाढ़) या ग्राहक की अपनी लापरवाही (जैसे चाबी किसी और को देना) की वजह से हुए नुकसान पर बैंक ज़िम्मेदार नहीं है।

नॉमिनेशन और मृत्यु के बाद क्लेम प्रोसेस
लॉकर अलॉट होने के समय ही नॉमिनी का नाम देना एक ज़रूरी और समझदारी भरा कदम है — यह सुविधा सिंगल और जॉइंट दोनों तरह के लॉकर्स पर लागू होती है। अगर लॉकर होल्डर की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी या कानूनी वारिस को ज़रूरी दस्तावेज़ (डेथ सर्टिफिकेट, पहचान प्रमाण, नॉमिनेशन फॉर्म की कॉपी) जमा करने पर, नियमों के मुताबिक, बैंक को एक तय समय-सीमा (आमतौर पर 15 दिन के भीतर) में लॉकर का कंटेंट ट्रांसफर करना होता है।
अगर लॉकर में नॉमिनेशन नहीं है, तो प्रोसेस लंबा हो सकता है — कानूनी वारिस को सक्सेशन सर्टिफिकेट या लीगल हेयरशिप सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज़ दिखाने पड़ सकते हैं, जिसमें महीनों लग सकते हैं। इसलिए नॉमिनेशन अपडेट रखना — शादी, तलाक़, या परिवार में किसी बदलाव के बाद भी — बहुत ज़रूरी है।
इनएक्टिव लॉकर और ब्रेक-ओपन के नियम
अगर कोई लॉकर लंबे समय तक ऑपरेट नहीं होता, तो बैंक उसे “इनएक्टिव” घोषित कर सकता है। आमतौर पर नियम इस तरह काम करते हैं:
- अगर लॉकर लगातार लंबे समय (ज़्यादातर बैंकों में 1 से 3 साल) तक ऑपरेट नहीं हुआ है, तो बैंक नोटिस भेजता है।
- नोटिस के बावजूद जवाब न मिलने पर बैंक लॉकर को अधिकारिक तौर पर ब्रेक-ओपन कर सकता है, जिसमें दो बैंक अधिकारियों की मौजूदगी और पूरी प्रोसेस का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- अगर रेंट लगातार 3 साल तक न चुकाया जाए, तो भी बैंक लॉकर ब्रेक-ओपन करने का हक रखता है।
- ब्रेक-ओपन करने का चार्ज ग्राहक से वसूला जाता है और सामान को सुरक्षित तरीके से सीलबंद कर रखा जाता है, जिसे बाद में ग्राहक या उसके कानूनी वारिस को सौंपा जाता है।
इसलिए अगर आप लंबे समय के लिए शहर से बाहर जा रहे हैं या किसी वजह से लॉकर ऑपरेट नहीं कर पाएंगे, तो बैंक को पहले से सूचित करना बेहतर रहता है।

लॉकर में क्या नहीं रख सकते?
बैंक लॉकर एक सुरक्षित स्टोरेज है, लेकिन इसमें हर चीज़ नहीं रखी जा सकती। RBI के नियमों के मुताबिक, इन चीज़ों को रखना मना है:
- कैश और विदेशी मुद्रा (Currency notes)
- हथियार, विस्फोटक या कोई भी खतरनाक सामान
- खराब होने वाली (perishable) चीज़ें
- कोई भी गैरकानूनी वस्तु
अगर बैंक को शक होता है कि लॉकर में ऐसी कोई चीज़ रखी गई है, तो वह लॉकर को ब्रेक-ओपन कर सकता है और सर्विस बंद कर सकता है। इसलिए लॉकर का इस्तेमाल सिर्फ गहनों, ज़रूरी दस्तावेज़ों, बॉन्ड और सर्टिफिकेट जैसी चीज़ों के लिए ही करें।
लॉकर लेने से पहले चेकलिस्ट
- ✅ अपनी ज़रूरत के हिसाब से साइज़ चुनें — छोटे गहनों और दस्तावेज़ों के लिए Small काफी है।
- ✅ रेंट और GST दोनों मिलाकर कुल सालाना खर्च कन्फर्म करें।
- ✅ फ्री विज़िट लिमिट और एक्स्ट्रा विज़िट चार्ज पूछें।
- ✅ FD या सिक्योरिटी डिपॉज़िट की शर्त है या नहीं, यह पहले से जान लें।
- ✅ नॉमिनेशन फॉर्म ज़रूर भरें और उसे अपडेट रखें।
- ✅ Locker Agreement की सिग्नड कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें।
- ✅ हर बार लॉकर इस्तेमाल करने के बाद SMS/Email अलर्ट ज़रूर चेक करें।
- ✅ लॉकर में रखे सामान की एक निजी लिस्ट (फोटो के साथ) अपने पास भी रखें — क्लेम के समय यह मदद करती है।
लॉकर या घर पर गोल्ड रखना — कौन बेहतर है?
यह फैसला हर परिवार की स्थिति पर निर्भर करता है। नीचे एक सीधी तुलना दी गई है:
| बिंदु | बैंक लॉकर | घर पर रखना |
|---|---|---|
| चोरी का जोखिम | बहुत कम (बैंक की सुरक्षा) | ज़्यादा (घर में सेफ न हो तो) |
| आग/प्राकृतिक आपदा में नुकसान पर कवर | सीमित (100× रेंट, आपदा में शून्य) | शून्य (अगर इंश्योरेंस नहीं है) |
| एक्सेस की सुविधा | सिर्फ बैंक के वर्किंग आवर्स में | 24×7 उपलब्ध |
| सालाना खर्च | ₹1,000 – ₹10,000+ (GST अलग) | घर की सेफ का एक बार का खर्च |
| किसके लिए उपयुक्त | जिनके पास ज़्यादा कीमती गहने/दस्तावेज़ हैं | रोज़ाना इस्तेमाल के छोटे गहने |
एक व्यावहारिक तरीका यह भी है कि ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले गहने घर पर एक अच्छी क्वालिटी की सेफ में रखें, और जो गहने या दस्तावेज़ साल में कभी-कभार ही चाहिए होते हैं, उन्हें बैंक लॉकर में रखें। साथ ही, जिन गहनों की वैल्यू ज़्यादा है, उनके लिए अलग से Jewellery Insurance लेना एक समझदारी भरा अतिरिक्त कदम हो सकता है, क्योंकि जैसा ऊपर उदाहरण में दिखाया गया, लॉकर का मुआवज़ा हर बार पूरी वैल्यू कवर नहीं करता।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. बैंक लॉकर लेने के लिए क्या सेविंग्स अकाउंट होना ज़रूरी है?
ज़्यादातर बैंकों में उस ब्रांच में सेविंग्स या करंट अकाउंट होना ज़रूरी होता है, लेकिन सटीक शर्त बैंक-दर-बैंक अलग हो सकती है। अपनी ब्रांच से कन्फर्म करें।
Q2. लॉकर का रेंट हर साल बदलता है क्या?
बैंक समय-समय पर अपनी लॉकर पॉलिसी रिवाइज़ करते हैं, जिसमें रेंट भी बदल सकता है। हर साल अपनी ब्रांच से अपडेटेड रेंट चार्ट ज़रूर चेक करें।
Q3. अगर मैंने Locker Agreement साइन नहीं किया है तो क्या मेरा लॉकर बंद हो जाएगा?
तुरंत बंद नहीं होगा, लेकिन एग्रीमेंट पेंडिंग रहने पर ऑपरेशनल दिक्कत आने का जोखिम रहता है। बेहतर है कि जल्द से जल्द ब्रांच जाकर रिवाइज़्ड एग्रीमेंट साइन कर लें।
Q4. अगर लॉकर में रखा सामान चोरी हो जाए तो बैंक पूरा मुआवज़ा देगा?
नहीं। RBI के नियम के मुताबिक बैंक की ज़िम्मेदारी सालाना रेंट के 100 गुने तक सीमित है, भले ही आपके सामान की असली वैल्यू इससे ज़्यादा हो।
Q5. क्या प्राकृतिक आपदा (भूकंप, बाढ़) में बैंक मुआवज़ा देता है?
सामान्यतः नहीं। 100 गुना मुआवज़े का नियम बैंक की लापरवाही, चोरी, आग या डकैती के मामलों पर लागू होता है, प्राकृतिक आपदा में बैंक की ज़िम्मेदारी नहीं बनती।
Q6. लॉकर होल्डर की मृत्यु के बाद कंटेंट कैसे मिलता है?
अगर नॉमिनेशन है, तो डेथ सर्टिफिकेट और ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने पर बैंक नियमों के मुताबिक कंटेंट नॉमिनी को ट्रांसफर करता है। बिना नॉमिनेशन के यह प्रोसेस लंबा हो सकता है और सक्सेशन सर्टिफिकेट की ज़रूरत पड़ सकती है।
Q7. क्या लॉकर में कैश रखा जा सकता है?
नहीं, RBI के नियमों के मुताबिक लॉकर में कैश, विदेशी मुद्रा, हथियार, विस्फोटक या कोई भी खतरनाक/गैरकानूनी सामान रखना मना है।
Q8. लॉकर इंश्योरेंस का विकल्प है क्या?
नहीं। लॉकर सिर्फ सुरक्षित स्टोरेज है, इंश्योरेंस नहीं। अगर आपके गहनों या सामान की वैल्यू ज़्यादा है, तो अलग से Jewellery Insurance या Home Content Insurance पॉलिसी पर विचार करें।
निष्कर्ष
बैंक लॉकर कीमती सामान और ज़रूरी दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखने का एक भरोसेमंद ज़रिया है, लेकिन यह पूरी तरह रिस्क-फ्री या इंश्योरेंस का विकल्प नहीं है। 2026 में लॉकर लेने से पहले तीन बातें ध्यान में रखें — पहला, रेंट और GST का पूरा हिसाब समझ लें; दूसरा, Locker Agreement साइन करना न भूलें और नॉमिनेशन अपडेट रखें; और तीसरा, यह समझ लें कि नुकसान की स्थिति में बैंक का मुआवज़ा सिर्फ सालाना रेंट के 100 गुने तक सीमित है। अगर आपके गहनों या दस्तावेज़ों की वैल्यू ज़्यादा है, तो लॉकर के साथ-साथ एक अलग इंश्योरेंस कवर लेने पर भी विचार करें। सही जानकारी और थोड़ी सी प्लानिंग से आप अपने परिवार की जमा-पूंजी को कहीं ज़्यादा सुरक्षित रख सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है। यह निवेश, कानूनी या फाइनेंशियल सलाह नहीं है। बैंक लॉकर से जुड़े रेंट, चार्ज, GST दर और RBI के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी फैसले से पहले अपनी बैंक ब्रांच या संबंधित आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम जानकारी ज़रूर कन्फर्म करें।
