📰 Finance News
📈 ET Markets 💹 Market News 📊 BSE India
Headlines
Share Market Live
LIVE
Mon-Fri 9:15 AM - 3:30 PM IST | TradingView

धनतेरस और दिवाली 2026 मनी गाइड: बोनस, सोना-चांदी, शॉपिंग और टैक्स — त्योहार पर पैसे के हर फैसले की पूरी चेकलिस्ट

diwali decorations showcasing vibrant rangoli designs

आगरा के सुमित और नेहा गुप्ता की शादी को छह साल हो गए हैं। हर साल अक्टूबर आते ही घर में एक ही बहस होती है — “इस बार दिवाली पर कितना खर्च करें?” सुमित एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंट्स देखते हैं, नेहा एक स्कूल में पढ़ाती हैं। पिछले साल धनतेरस पर सोने का सिक्का, नया फ्रिज No Cost EMI पर, बच्चों के कपड़े, रिश्तेदारों के गिफ्ट, मिठाई, पटाखे, घर की पुताई — सब मिलाकर हिसाब कहाँ पहुँचा, पता ही नहीं चला। जनवरी में जब क्रेडिट कार्ड का बिल आया, तब दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और तय किया कि “अगली दिवाली पहले से प्लान करके मनाएँगे।”

अगर आपके घर में भी यही कहानी है, तो यह गाइड आपके लिए है। इस साल धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है और दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को। यानी अभी करीब चार हफ्ते का समय है — प्लानिंग के लिए बिल्कुल सही वक्त।

इस लेख में हम त्योहार से जुड़े पैसे के हर बड़े फैसले को एक जगह समेट रहे हैं — बजट कैसे बनाएँ, बोनस का क्या करें, सोना-चांदी किस रूप में लें, EMI और BNPL में क्या छिपा है, गिफ्ट पर टैक्स कब लगता है, ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें और मुहूर्त ट्रेडिंग क्या है। हर हिस्से के साथ हमने अपनी विस्तृत गाइड का लिंक भी दिया है, ताकि जिस विषय में आपको गहराई चाहिए, वहाँ सीधे पहुँच सकें।

दिवाली की रंगोली और दीये — धनतेरस दिवाली 2026 मनी गाइड

धनतेरस-दिवाली 2026: तारीखें एक नज़र में

त्योहारतारीखपैसे से जुड़ा ध्यान रखने वाला काम
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026सोना-चांदी, बर्तन या निवेश की खरीद
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली7 नवंबर 2026आखिरी शॉपिंग, बजट की दोबारा जांच
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)रविवार, 8 नवंबर 2026मुहूर्त ट्रेडिंग, नए निवेश की शुरुआत
गोवर्धन पूजा / भाई दूज9-10 नवंबर 2026गिफ्ट और शगुन के लेन-देन

नोट: पूजा का मुहूर्त शहर और पंचांग के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पुष्टि करें।

स्टेप 1: त्योहार से पहले “दिवाली बजट” बनाइए

ज़्यादातर परिवार दिवाली पर ज़्यादा खर्च इसलिए नहीं करते कि उनकी कमाई कम है, बल्कि इसलिए कि खर्च छोटे-छोटे टुकड़ों में होता है और कुल रकम कहीं लिखी नहीं होती। इसका सबसे आसान इलाज है — एक कागज़ या मोबाइल नोट में पहले से बजट बना लेना।

बजट बनाने के 4 आसान नियम

  1. कुल रकम पहले तय करें: दिवाली पर कुल कितना खर्च करेंगे, यह एक संख्या पहले लिख लें। यह रकम आपकी बचत या बोनस से आनी चाहिए, उधार से नहीं।
  2. खर्च को डिब्बों में बाँटें: पूजा-सजावट, कपड़े, गिफ्ट, मिठाई, घर का सामान, सोना-चांदी, यात्रा — हर डिब्बे की अलग सीमा रखें।
  3. 10% “अनचाहे खर्च” के लिए रखें: मेहमान, अचानक की खरीद, कोई भूला हुआ गिफ्ट — ये हर साल होते हैं।
  4. हर खर्च लिखें: UPI से भुगतान करें तो रिकॉर्ड अपने-आप बनता है। हफ्ते में एक बार देख लें कि कौन सा डिब्बा सीमा से ऊपर जा रहा है।

उदाहरण: ₹40,000 का दिवाली बजट

खर्च का डिब्बारकमहिस्सा
पूजा, सजावट, दीये, मिठाई₹6,00015%
परिवार के कपड़े₹8,00020%
रिश्तेदारों-दोस्तों के गिफ्ट₹6,00015%
घर का कोई ज़रूरी सामान₹8,00020%
शगुन के लिए सोना/चांदी₹8,00020%
अनचाहे खर्च₹4,00010%
कुल₹40,000100%

यह सिर्फ एक उदाहरण है। आपकी आमदनी, परिवार के आकार और ज़रूरतों के हिसाब से डिब्बे और रकम अलग होंगे। असली बात यह है कि सीमा पहले से तय हो।

स्टेप 2: दिवाली बोनस का सही इस्तेमाल

कई कंपनियाँ अक्टूबर-नवंबर में बोनस देती हैं। बोनस खाते में आते ही उसे खर्च कर देने का मन करता है, लेकिन थोड़ी सी प्लानिंग से यही रकम आपके पूरे साल को हल्का कर सकती है।

सबसे पहले: बोनस पर टैक्स समझ लें

कैश बोनस आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है। कंपनी आम तौर पर बोनस वाले महीने में TDS काटती है, इसलिए हाथ में आने वाली रकम बोनस की घोषित रकम से कम होती है। कंपनी से मिले गिफ्ट या वाउचर पर एक तय सीमा तक छूट है, और 2026 में इससे जुड़े नियम बदले हैं। पूरा हिसाब उदाहरणों के साथ हमारी गाइड दिवाली बोनस और गिफ्ट पर टैक्स 2026 में पढ़ें।

बोनस बाँटने का एक आसान तरीका: 4 हिस्से

मान लीजिए टैक्स कटने के बाद आपके हाथ में ₹50,000 बोनस आया। इसे ऐसे बाँट सकते हैं:

  • पहला हिस्सा — महंगा कर्ज़ चुकाएँ (₹15,000): क्रेडिट कार्ड का बकाया या पर्सनल लोन है, तो सबसे पहले उसे घटाएँ। क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज किसी भी आम निवेश के रिटर्न से कहीं ज़्यादा होता है।
  • दूसरा हिस्सा — इमरजेंसी फंड (₹10,000): अगर आपके पास अभी कम से कम 6 महीने के खर्च जितना सुरक्षित पैसा नहीं है, तो बोनस का एक हिस्सा वहीं डालें।
  • तीसरा हिस्सा — लंबी अवधि का निवेश (₹10,000): PPF, म्यूचुअल फंड SIP, या आपके लक्ष्य के हिसाब से कोई और निवेश।
  • चौथा हिस्सा — त्योहार की खुशी (₹15,000): यह रकम बिना अपराधबोध के खर्च कीजिए। दिवाली मनाने के लिए ही है।

अगर कोई कर्ज़ नहीं है और इमरजेंसी फंड पहले से तैयार है, तो पहले दो हिस्सों की रकम निवेश में जोड़ दें। इमरजेंसी फंड कितना हो और कहाँ रखें, यह हमने इमरजेंसी फंड कैसे बनाएँ वाली गाइड में स्टेप बाय स्टेप समझाया है।

दिवाली बोनस की रकम — भारतीय रुपये के नोट

स्टेप 3: धनतेरस पर सोना — किस रूप में खरीदें?

धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। परंपरा निभाने में कोई बुराई नहीं, लेकिन यह साफ रखें कि आप शगुन के लिए खरीद रहे हैं या निवेश के लिए। दोनों के लिए सबसे अच्छा रूप अलग है।

रूपकिसके लिए ठीकध्यान रखने वाली बात
गहनेपहनने और शगुन के लिएमेकिंग चार्ज और बेचते समय कटौती से निवेश के तौर पर महंगे
सोने का सिक्का/बारशगुन + थोड़ा निवेशहॉलमार्क और HUID ज़रूर जांचें, पक्का बिल लें
Gold ETFनिवेश के लिएDemat खाता चाहिए, मेकिंग चार्ज और GST नहीं
Gold ETF FoF / गोल्ड म्यूचुअल फंडबिना Demat के निवेश, SIPखर्च ETF से थोड़ा ज़्यादा
डिजिटल गोल्ड (ऐप)बहुत छोटी रकमSEBI के रेगुलेशन से बाहर, सावधानी ज़रूरी

सोना खरीदते समय 6 ज़रूरी सावधानियाँ

  1. हॉलमार्क और 6 अंकों का HUID देखें: सोने के गहनों पर BIS हॉलमार्किंग ज़्यादातर ज़िलों में अनिवार्य है। HUID को सरकारी BIS CARE ऐप में “Verify HUID” से वहीं दुकान पर जांच लें।
  2. बिल में तीन चीज़ें अलग लिखवाएँ: सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज और GST। इससे बाद में बेचते या बदलते समय हिसाब साफ रहता है।
  3. उस दिन का भाव पहले देख लें: IBJA या किसी भरोसेमंद स्रोत से। दुकान पर बताए भाव से तुलना करें।
  4. बायबैक पॉलिसी लिखित में पूछें: बेचते या बदलते समय कितनी कटौती होगी।
  5. बड़ी खरीद पर PAN: ₹2 लाख से ज़्यादा की ज्वेलरी खरीद पर आम तौर पर PAN देना होता है। और ₹2 लाख या उससे ज़्यादा का कैश लेन-देन कानूनी रूप से मना है, इसलिए बड़ी रकम UPI, कार्ड या बैंक ट्रांसफर से ही दें।
  6. “गोल्ड स्कीम” से सावधान: कुछ ज्वेलर्स 11 महीने की किस्त वाली स्कीम चलाते हैं। जुड़ने से पहले शर्तें, बोनस का असली हिसाब और दुकान की साख अच्छी तरह जांचें।

Physical Gold, Gold ETF, SGB और डिजिटल गोल्ड की पूरी तुलना — खर्च, टैक्स और सुरक्षा के साथ — हमारी गाइड सोने में निवेश कैसे करें 2026 में है। सिर्फ ETF बनाम फिज़िकल गोल्ड का सीधा मुकाबला देखना हो, तो Gold ETF vs Physical Gold 2026 पढ़ें।

धनतेरस पर सोने के सिक्के और गहने — हॉलमार्क जांचकर खरीदें

स्टेप 4: चांदी — परंपरा भी, सावधानी भी

बहुत से घरों में धनतेरस पर चांदी का सिक्का या बर्तन खरीदने की परंपरा है। 2026 में चांदी ने पहले रिकॉर्ड तेज़ी और फिर तेज़ गिरावट दिखाई है, इसलिए निवेश के तौर पर इसे देखते समय खास सावधानी चाहिए। चांदी सोने से कहीं ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाली धातु है।

  • शगुन के लिए: छोटा, हॉलमार्क और HUID वाला सिक्का लें।
  • निवेश के लिए: Silver ETF (Demat है तो) या Silver ETF FoF की SIP (Demat नहीं है तो)।
  • कितना: पूरे पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा ही, और वह भी किस्तों में।

चांदी के 6 तरीकों का असली खर्च, 2026 के टैक्स नियम और HUID जांचने का तरीका हमारी नई गाइड चांदी में निवेश कैसे करें 2026 में विस्तार से है।

स्टेप 5: त्योहारी सेल में No Cost EMI, BNPL और क्रेडिट कार्ड का सच

त्योहारी सेल का सबसे बड़ा आकर्षण है — “No Cost EMI”, “Pay Later”, “Pay in 3 parts”। ये सुविधाएँ गलत नहीं हैं, लेकिन इनके पीछे का हिसाब समझे बिना इस्तेमाल करना महंगा पड़ सकता है।

No Cost EMI: क्या सच में “नो कॉस्ट” है?

ज़्यादातर No Cost EMI में ब्याज खत्म नहीं होता, बल्कि सामान की कीमत में उतनी छूट देकर उसकी भरपाई की जाती है। ऊपर से बैंक उस ब्याज पर GST और कई बार प्रोसेसिंग फीस भी लेता है, जो आपकी जेब से जाती है। साथ ही, No Cost EMI चुनने पर कई बार आपको वह कैश डिस्काउंट नहीं मिलता जो पूरा भुगतान करने वालों को मिल रहा होता है। पूरा गणित उदाहरण के साथ पढ़ें: No Cost EMI का सच 2026।

BNPL (Buy Now Pay Later): छोटी रकम, बड़ा असर

BNPL में एक क्लिक में सामान आ जाता है और भुगतान बाद में होता है। लेकिन यह भी एक तरह का कर्ज़ है — समय पर भुगतान न हो तो लेट फीस लगती है और आपके CIBIL स्कोर पर असर पड़ सकता है। कई ऐप पर अलग-अलग BNPL लेने से कुल बकाया का अंदाज़ा भी नहीं रहता। विस्तार से: BNPL क्या है — CIBIL, चार्ज और RBI के नियम।

क्रेडिट कार्ड: “मिनिमम ड्यू” का जाल

त्योहार पर क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करना ठीक है, अगर आप पूरा बिल समय पर चुका सकते हैं। अगर सिर्फ “Minimum Amount Due” भरते हैं, तो बाकी रकम पर भारी ब्याज लगता है, और नई खरीद पर भी ब्याज-मुक्त अवधि का फायदा अक्सर खत्म हो जाता है।

EMI या उधार लेने से पहले 3 सवाल

  1. क्या यह चीज़ ज़रूरी है, या सिर्फ सेल की वजह से अच्छी लग रही है?
  2. सारी EMI मिलाकर क्या मेरी मासिक आय का बड़ा हिस्सा तो नहीं हो जाएगा?
  3. अगर अगले 3 महीने में कोई अचानक खर्च आ गया, तो क्या मैं EMI फिर भी आराम से भर पाऊँगा?

तीनों का जवाब साफ “हाँ, ठीक है” हो, तभी EMI लें। और एक नियम हमेशा याद रखें — सोना-चांदी जैसी निवेश वाली चीज़ें EMI या उधार पर न खरीदें। उधार का ब्याज निवेश के किसी भी संभावित फायदे को खा सकता है।

त्योहारी सेल में क्रेडिट कार्ड और EMI से ऑनलाइन शॉपिंग

स्टेप 6: गिफ्ट देने और लेने पर टैक्स के नियम

दिवाली पर गिफ्ट का लेन-देन खूब होता है। ज़्यादातर मामलों में इस पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन कुछ नियम जानना ज़रूरी है:

  • रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट: माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी जैसे “रिश्तेदार” की परिभाषा में आने वालों से मिला कैश या सामान, चाहे कितनी भी रकम का हो, टैक्स-फ्री है।
  • दोस्तों या दूसरे लोगों से: साल भर में ऐसे गिफ्ट की कुल कीमत ₹50,000 से ज़्यादा हो जाए, तो पूरी रकम आपकी आय में जुड़कर टैक्सेबल हो जाती है।
  • कंपनी से मिला गिफ्ट/वाउचर: एक तय सीमा तक छूट है, उससे ऊपर की रकम सैलरी की तरह टैक्सेबल। 2026 के बदले नियम इस गाइड में देखें।
  • बड़े कैश गिफ्ट से बचें: बड़ी रकम बैंक ट्रांसफर या चेक से दें, ताकि रिकॉर्ड साफ रहे।

1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act 2025 लागू हुआ है, जिसमें कई धाराओं के नंबर बदले हैं। क्या बदला, यह नया Income Tax Act 2025 वाले लेख में पढ़ें।

गिफ्ट का एक बेहतर विकल्प: “निवेश वाला गिफ्ट”

बच्चों या युवा रिश्तेदारों को इस बार कुछ ऐसा दीजिए जो साल भर बढ़ता रहे। जैसे बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड SIP की शुरुआत, या आपके अपने खाते में Gold ETF की कुछ यूनिट जो आप उनके लिए अलग रखें। ऐसा गिफ्ट बच्चों को पैसे की कीमत और निवेश की आदत भी सिखाता है। म्यूचुअल फंड की शुरुआत के लिए हमारी Zerodha और Groww की समीक्षा मदद करेगी।

स्टेप 7: त्योहारी ऑनलाइन फ्रॉड से बचें

त्योहारों में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ती है, और उसी के साथ धोखाधड़ी भी। ये आम तरीके हैं जिनसे लोग फँसते हैं:

  • नकली सेल वेबसाइट: बहुत भारी छूट वाले लिंक जो WhatsApp या SMS पर आते हैं। हमेशा कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही खरीदें।
  • “गिफ्ट जीतने” वाले मैसेज: “आपने दिवाली गिफ्ट जीता है, बस ₹99 भेजें” — ऐसे मैसेज लगभग हमेशा फ्रॉड होते हैं।
  • UPI “कलेक्ट रिक्वेस्ट”: पैसे पाने के लिए कभी UPI PIN नहीं डालना पड़ता। अगर कोई PIN डालने को कहे, तो वह पैसे लेने की चाल है।
  • नकली कस्टमर केयर: इंटरनेट पर मिले नंबर पर कॉल करके OTP या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें।
  • नकली डिलीवरी कॉल/मैसेज: “पार्सल अटका है, लिंक पर पता अपडेट करें” — लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें।

अगर फ्रॉड हो जाए: तुरंत अपने बैंक को बताकर कार्ड/UPI ब्लॉक करवाएँ, राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकवाने की संभावना उतनी बेहतर रहती है।

स्टेप 8: मुहूर्त ट्रेडिंग — क्या है और क्या करें?

दिवाली के दिन NSE और BSE एक खास, छोटा ट्रेडिंग सेशन रखते हैं जिसे मुहूर्त ट्रेडिंग कहते हैं। बहुत से निवेशक इसे नए हिंदू वित्त वर्ष (संवत) की शुभ शुरुआत मानकर इस दिन थोड़ा निवेश करते हैं। सेशन का सटीक समय एक्सचेंज कुछ दिन पहले घोषित करते हैं।

  • प्रतीकात्मक निवेश ठीक है: अपनी लंबी अवधि की योजना के हिसाब से किसी अच्छे फंड या शेयर में छोटी रकम लगाना।
  • “मुहूर्त टिप्स” से बचें: इस दिन सोशल मीडिया पर “पक्के” स्टॉक टिप्स की बाढ़ आती है। ऐसे टिप्स पर बड़ी रकम न लगाएँ।
  • एक दिन से कुछ तय नहीं होता: मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन बाज़ार ऊपर गया या नीचे, इससे पूरे साल का अंदाज़ा नहीं लगता।

अगर आप शेयर बाज़ार में नए हैं, तो पहले Sensex और Nifty क्या है पढ़ लें।

स्टेप 9: बड़ी खरीद (गाड़ी, घर का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स) का समझदार तरीका

धनतेरस और दिवाली पर नई गाड़ी, बाइक, फ्रिज, टीवी या मोबाइल खरीदने की भी परंपरा है। ऐसी बड़ी खरीद में एक गलत फैसला कई साल तक जेब पर भारी पड़ सकता है। इन बातों का ध्यान रखें:

  • कुल कीमत देखें, सिर्फ EMI नहीं: शोरूम अक्सर “सिर्फ ₹1,999 महीना” जैसा बोलकर बेचते हैं। हमेशा पूछें कि सभी किस्तें, प्रोसेसिंग फीस, बीमा और दूसरे चार्ज मिलाकर कुल कितना देना होगा।
  • कैश डिस्काउंट बनाम EMI ऑफर की तुलना करें: कई बार पूरा भुगतान करने पर मिलने वाली छूट, EMI ऑफर से ज़्यादा फायदेमंद होती है।
  • गाड़ी के लोन में डाउन पेमेंट ज़्यादा रखें: जितना बड़ा डाउन पेमेंट, उतना कम ब्याज। लोन की अवधि बेवजह लंबी न खींचें।
  • “फ्री” एक्सेसरीज़ और एक्सटेंडेड वारंटी: इनकी असली कीमत पूछें और ज़रूरत हो तभी लें।
  • बिल और वारंटी कार्ड संभालकर रखें: फोन में फोटो खींचकर भी रख लें, ताकि बाद में क्लेम में दिक्कत न हो।

अगर घर खरीदने का विचार है, तो त्योहारी ऑफर देखकर जल्दबाज़ी न करें। पहले घर खरीदें या किराये पर रहें वाला हिसाब ज़रूर देखें, और खरीदने का पक्का फैसला हो तो प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया समझ लें।

स्टेप 10: दिवाली के बाद — जनवरी में हिसाब ज़रूर करें

त्योहार खत्म होते ही ज़्यादातर लोग खर्च का हिसाब भूल जाते हैं, और फिर अगले साल वही गलतियाँ दोहराते हैं। दिवाली के 2-3 हफ्ते बाद, जब सारे कार्ड बिल आ जाएँ, आधा घंटा निकालकर यह देखें:

  1. बजट बनाम असली खर्च: हर डिब्बे में कितना तय किया था और असल में कितना गया।
  2. कौन सी खरीद काम की निकली: और कौन सी सिर्फ सेल के जोश में हो गई।
  3. बचे हुए बकाये की योजना: अगर कोई EMI या कार्ड बकाया बचा है, तो उसे कब तक पूरा चुकाएँगे, यह तारीख तय करें।
  4. अगले साल का “दिवाली फंड”: कुल खर्च को 12 से भाग दें और हर महीने उतनी रकम एक अलग रेकरिंग डिपॉज़िट या लिक्विड फंड में डालना शुरू करें। अगली दिवाली पर खर्च के लिए पैसा पहले से तैयार रहेगा, उधार की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

उदाहरण के लिए, अगर इस साल दिवाली पर कुल ₹48,000 खर्च हुए, तो अगले साल के लिए हर महीने ₹4,000 अलग रखने से नवंबर 2027 तक पूरी रकम जमा हो जाएगी — और ऊपर से उस पर थोड़ा ब्याज भी मिलेगा।

दिवाली से पहले का 10-पॉइंट मनी चेकलिस्ट

  1. दिवाली का कुल बजट तय करके लिख लिया है।
  2. बजट को डिब्बों में बाँट लिया है, 10% अनचाहे खर्च के लिए रखा है।
  3. बोनस का एक हिस्सा कर्ज़ चुकाने, इमरजेंसी फंड या निवेश के लिए अलग कर दिया है।
  4. क्रेडिट कार्ड का पिछला बकाया पूरा चुका दिया है।
  5. सोना-चांदी खरीदने से पहले उस दिन का भाव देखने का तरीका तय कर लिया है।
  6. BIS CARE ऐप फोन में डाउनलोड कर लिया है।
  7. कोई भी EMI लेने से पहले 3 सवालों की जांच कर ली है।
  8. निवेश वाली चीज़ें उधार पर नहीं खरीद रहे।
  9. परिवार के बड़ों और बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड के तरीकों के बारे में बता दिया है।
  10. हर खर्च UPI/कार्ड से कर रहे हैं, ताकि जनवरी में हिसाब देखा जा सके।

सुमित और नेहा ने इस बार क्या किया?

पिछले साल के क्रेडिट कार्ड बिल से सबक लेकर सुमित और नेहा ने इस बार सितंबर में ही बैठकर ₹45,000 का दिवाली बजट बनाया। सुमित के ₹60,000 के बोनस (टैक्स कटने के बाद) में से ₹20,000 से उन्होंने बचा हुआ क्रेडिट कार्ड बकाया पूरा चुकाया, ₹10,000 इमरजेंसी फंड में डाले और ₹10,000 से बेटी के नाम पर एक म्यूचुअल फंड SIP शुरू करने का फैसला किया। धनतेरस पर परंपरा के लिए 2 ग्राम का एक हॉलमार्क वाला सोने का सिक्का लेंगे और HUID दुकान पर ही चेक करेंगे। नया फ्रिज उन्होंने EMI की जगह अगले साल की गर्मियों तक टाल दिया, जब तक उसके लिए अलग से बचत न हो जाए। नेहा कहती हैं — “इस बार दिवाली भी पूरी मनाएँगे, और जनवरी में डर भी नहीं लगेगा।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

धनतेरस 2026 कब है?

धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है और दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को। पूजा का सटीक मुहूर्त अपने शहर के पंचांग से देखें।

धनतेरस पर निवेश के लिए सोना किस रूप में लेना बेहतर है?

शगुन के लिए छोटा हॉलमार्क वाला सिक्का ठीक है। निवेश के लिए Gold ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज और GST नहीं लगता और बेचना आसान है।

क्या दिवाली बोनस पर टैक्स लगता है?

हाँ, कैश बोनस सैलरी का हिस्सा है और आपके स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल है। कंपनी आम तौर पर उस पर TDS काटती है।

क्या रिश्तेदार से मिले दिवाली गिफ्ट पर टैक्स लगता है?

नहीं। कानून में परिभाषित रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट किसी भी रकम का हो, टैक्स-फ्री है। दूसरे लोगों से साल भर में ₹50,000 से ज़्यादा के गिफ्ट पर टैक्स लग सकता है।

क्या त्योहार पर No Cost EMI लेना सही है?

अगर चीज़ ज़रूरी है, EMI आराम से भर सकते हैं और प्रोसेसिंग फीस व ब्याज पर GST का हिसाब देख लिया है, तो ठीक है। सिर्फ सेल देखकर या निवेश वाली चीज़ें EMI पर खरीदना समझदारी नहीं।

मुहूर्त ट्रेडिंग में निवेश करना चाहिए?

अपनी लंबी अवधि की योजना के हिसाब से छोटी, प्रतीकात्मक रकम लगाना ठीक है। सोशल मीडिया के “मुहूर्त टिप्स” पर बड़ी रकम लगाने से बचें।

ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?

तुरंत बैंक को सूचना देकर कार्ड/UPI ब्लॉक कराएँ, 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

दिवाली खुशियों और समृद्धि का त्योहार है, और सच्ची समृद्धि वही है जो त्योहार के बाद भी बनी रहे। पहले से बजट, बोनस का समझदारी से बँटवारा, सोना-चांदी में शगुन और निवेश को अलग रखना, EMI और BNPL में सावधानी, और फ्रॉड से बचाव — ये छोटे-छोटे कदम आपकी दिवाली को खुशहाल भी बनाएँगे और जनवरी के बिलों को हल्का भी।

Moneycontrol24 की पूरी टीम की तरफ से आपको और आपके परिवार को धनतेरस और दिवाली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ। शुभ दीपावली!

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के लिए है, यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। लेख में दिए गए बजट और बोनस के आंकड़े सिर्फ उदाहरण हैं। टैक्स नियम, हॉलमार्किंग नियम और बाज़ार भाव समय के साथ बदल सकते हैं। कोई भी निवेश करने से पहले SEBI रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार या अपने टैक्स सलाहकार से सलाह लें। म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Share Market Live
LIVE
Mon-Fri 9:15 AM - 3:30 PM IST | TradingView