दिसंबर की शुरुआत होते-होते हर साल एक ही सवाल अकाउंटेंट्स, CA और टैक्स पोर्टल के सर्च बार में बार-बार दिखता है — “एडवांस टैक्स किसे भरना है, कितना भरना है और 15 दिसंबर तक क्या करना ज़रूरी है?” अगर आपकी सैलरी के साथ फ्रीलांस इनकम है, आपने शेयर या प्रॉपर्टी बेचकर मुनाफ़ा कमाया है, या आपका अपना बिज़नेस है, तो यह सवाल आप पर भी लागू हो सकता है। नए Income Tax Act, 2025 के लागू होने के बाद सेक्शन नंबर भी बदल गए हैं, तो पुरानी जानकारी अब थोड़ी कन्फ्यूज़िंग हो सकती है।
इस गाइड में हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि एडवांस टैक्स क्या होता है, कौन इसे भरने के लिए बाध्य है, किसे छूट मिली है, 2026-27 के लिए due dates और percentage क्या हैं, नए एक्ट में सेक्शन नंबर कैसे बदले हैं, देर से या कम भरने पर कितना ब्याज लगेगा, और ऑनलाइन पेमेंट कैसे करें। साथ में कुछ असली जैसे उदाहरण भी देंगे ताकि हिसाब पूरी तरह समझ आ जाए।
एडवांस टैक्स क्या है?
एडवांस टैक्स को “pay-as-you-earn” यानी “जितना कमाओ, उतना साथ-साथ टैक्स भरो” वाली व्यवस्था कहा जाता है। सामान्य तौर पर टैक्सपेयर पूरे साल की इनकम पर टैक्स अगले साल ITR भरते वक्त एक साथ चुकाते हैं। लेकिन सरकार को साल भर पैसे की ज़रूरत होती है, इसलिए जिनकी अनुमानित टैक्स देनदारी एक तय सीमा से ज़्यादा है, उन्हें साल के बीच में ही चार हिस्सों में टैक्स जमा करना पड़ता है।
नए Income Tax Act, 2025 में एडवांस टैक्स से जुड़े प्रावधान धारा 403 से 410 के बीच दिए गए हैं। इनमें देनदारी किसे होगी, थ्रेशोल्ड कितना है, हिसाब कैसे होगा और due dates क्या हैं — यह सब शामिल है। पुराने Income Tax Act, 1961 में यही प्रावधान धारा 207 से 211 के बीच थे।
कौन-कौन एडवांस टैक्स भरता है?
धारा 404 के मुताबिक, अगर किसी भी व्यक्ति, HUF, पार्टनरशिप फर्म, LLP, घरेलू या विदेशी कंपनी की अनुमानित टैक्स देनदारी — TDS और TCS क्रेडिट घटाकर — ₹10,000 या उससे ज़्यादा बनती है, तो उसे एडवांस टैक्स भरना ज़रूरी है। इसमें ये लोग शामिल हैं:
- सैलरीड व्यक्ति जिनकी सैलरी के अलावा किराया, कैपिटल गेन, FD ब्याज, डिविडेंड या फ्रीलांस इनकम है
- फ्रीलांसर, कंसल्टेंट और प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, वकील, CA
- पार्टनरशिप फर्म और LLP
- घरेलू कंपनियां
- भारत में इनकम रखने वाली विदेशी कंपनियां और NRI
सिर्फ सैलरी वाले ज़्यादातर लोगों पर यह लागू नहीं होता क्योंकि एम्प्लॉयर हर महीने TDS काटकर पहले ही सरकार के खाते में जमा करता रहता है। लेकिन जैसे ही सैलरी के अलावा कोई और इनकम सोर्स जुड़ता है जिस पर TDS नहीं कट रहा या कम कट रहा है, एडवांस टैक्स की ज़िम्मेदारी बन सकती है।
किसे एडवांस टैक्स से छूट है?
एक बड़ी राहत वाली बात — अगर आप भारत में रहने वाले (resident) वरिष्ठ नागरिक हैं यानी उम्र 60 साल या उससे ज़्यादा है, और आपकी कोई बिज़नेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है (सिर्फ पेंशन, FD ब्याज, किराया जैसी इनकम है), तो आपको एडवांस टैक्स भरने की ज़रूरत नहीं है। आप सीधे ITR भरते समय ही पूरा टैक्स चुका सकते हैं, बिना किसी ब्याज के।
| स्थिति | एडवांस टैक्स लागू? |
|---|---|
| 60+ साल के निवासी वरिष्ठ नागरिक, कोई बिज़नेस इनकम नहीं | नहीं, छूट है |
| 60+ साल के निवासी वरिष्ठ नागरिक, लेकिन बिज़नेस/प्रोफेशन से इनकम है | हाँ, लागू है |
| सैलरीड व्यक्ति जिनकी देनदारी TDS से पूरी कवर हो जाती है | व्यावहारिक रूप से नहीं (TDS ही एडवांस टैक्स जैसा काम करता है) |
| सैलरीड व्यक्ति + कैपिटल गेन/किराया/फ्रीलांस इनकम, कुल देनदारी ₹10,000+ | हाँ, लागू है |
| फ्रीलांसर/प्रोफेशनल, देनदारी ₹10,000+ | हाँ, लागू है (चाहे तो presumptive व्यवस्था में एक ही किस्त में) |

Due Dates और कितना प्रतिशत भरना है — 2026-27 का पूरा शेड्यूल
यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है जिसे हर टैक्सपेयर को याद रखना चाहिए। धारा 408 के तहत सामान्य टैक्सपेयर (कंपनी हो या व्यक्ति) को साल भर में चार किस्तों में कुल अनुमानित टैक्स देनदारी का यह हिस्सा जमा करना होता है:
| किस्त | Due Date | कुल देनदारी का कितना % जमा होना चाहिए |
|---|---|---|
| पहली किस्त | 15 जून 2026 | कम से कम 15% |
| दूसरी किस्त | 15 सितंबर 2026 | कम से कम 45% (पहले भरी रकम घटाकर) |
| तीसरी किस्त | 15 दिसंबर 2026 | कम से कम 75% (पहले भरी रकम घटाकर) |
| चौथी किस्त | 15 मार्च 2027 | 100% (पहले भरी रकम घटाकर) |
ध्यान दें — ये प्रतिशत “cumulative” यानी संचयी हैं। मतलब हर due date तक आपकी कुल जमा रकम (पहले की किस्तें मिलाकर) उस प्रतिशत तक पहुँचनी चाहिए, न कि हर बार अलग से उतना प्रतिशत भरना है।
Presumptive टैक्सपेयर के लिए खास नियम
अगर आप presumptive taxation व्यवस्था चुनते हैं (नए एक्ट में धारा 58(2) के टेबल में दी गई कैटेगरी, जो पुराने 44AD/44ADA से मिलती है) — जैसे छोटे दुकानदार, छोटे बिज़नेस या कुछ प्रोफेशनल्स — तो आपको चार किस्तों में बांटने की ज़रूरत नहीं। आप पूरे 100% एडवांस टैक्स की रकम एक ही किस्त में, 15 मार्च 2027 तक जमा कर सकते हैं। ध्यान रहे, यह राहत धारा 44AE के तहत प्रेज़म्प्टिव इनकम दिखाने वालों (जैसे ट्रांसपोर्ट बिज़नेस) पर लागू नहीं होती — उन्हें सामान्य चार-किस्त वाला शेड्यूल ही फॉलो करना होता है।
कैपिटल गेन, लॉटरी और अचानक आई इनकम पर क्या नियम है?
शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन, लॉटरी-क्रॉसवर्ड-रेस जैसी “casual income”, नया शुरू हुआ बिज़नेस या प्रोफेशन, और डिविडेंड इनकम — इन सबको साल की शुरुआत में अनुमान लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि ये अक्सर अचानक आती हैं। इसलिए कानून कहता है कि जिस तिमाही में यह इनकम आपके हाथ लगी है, उसके बाद आने वाली अगली due date तक उस पर टैक्स जमा कर दें। अगर यह इनकम आख़िरी किस्त (15 मार्च) के बाद आई है, तो 31 मार्च तक टैक्स जमा करने पर भी कोई ब्याज नहीं लगेगा।
उदाहरण के लिए अगर किसी ने जनवरी 2027 में शेयर बेचकर मुनाफ़ा कमाया, तो उस पर टैक्स 15 मार्च 2027 की किस्त में शामिल कर सकते हैं — उससे पहले की किस्तों में इसका हिसाब न देने पर कोई पेनल्टी नहीं है।
उदाहरण 1 — सैलरीड व्यक्ति जिनकी किराये से भी इनकम है
पुणे में एक IT कंपनी में काम करने वाले रोहित वर्मा की सैलरी पर हर महीने TDS कटता है, लेकिन उनके पास एक फ्लैट भी है जिससे किराया आता है और कुछ FD भी हैं। आइए उनका हिसाब देखें:
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| FY 2026-27 के लिए अनुमानित कुल टैक्स देनदारी | 1,20,000 |
| सैलरी और FD पर अनुमानित TDS क्रेडिट | 95,000 |
| शेष एडवांस टैक्स (देनदारी घटा TDS) | 25,000 |
चूँकि ₹25,000, ₹10,000 की सीमा से ज़्यादा है, रोहित को एडवांस टैक्स भरना होगा। किस्तों में बंटवारा इस तरह होगा:
| Due Date | संचयी देनदारी | इस किस्त में कितना भरना है |
|---|---|---|
| 15 जून 2026 (15%) | ₹3,750 | ₹3,750 |
| 15 सितंबर 2026 (45%) | ₹11,250 | ₹7,500 |
| 15 दिसंबर 2026 (75%) | ₹18,750 | ₹7,500 |
| 15 मार्च 2027 (100%) | ₹25,000 | ₹6,250 |
यानी रोहित को हर तिमाही छोटी-छोटी रकम जमा करनी है, न कि साल के आख़िर में ₹25,000 का एक बड़ा बोझ उठाना है।
उदाहरण 2 — फ्रीलांसर जो Presumptive व्यवस्था चुनता है
जयपुर की ग्राफिक डिज़ाइनर प्रिया शर्मा फ्रीलांस काम करती हैं और उनकी सालाना अनुमानित टैक्स देनदारी ₹1,00,000 है। उनका कोई TDS क्रेडिट नहीं कटता क्योंकि ज़्यादातर क्लाइंट विदेशी हैं। अगर प्रिया presumptive taxation (धारा 58(2), पुराने 44ADA जैसा) चुनती हैं, तो उन्हें चार किस्तों में बांटने की ज़रूरत नहीं — वे पूरे ₹1,00,000 सीधे 15 मार्च 2027 तक एक ही बार में जमा कर सकती हैं, बिना किसी ब्याज के डर के। बाकी टैक्सपेयर्स को ऐसी छूट नहीं मिलती, इसलिए यह presumptive व्यवस्था चुनने वालों के लिए एक व्यावहारिक सुविधा है।

देर से या कम भरने पर कितना ब्याज लगेगा?
यहीं पर ज़्यादातर लोग गलती करते हैं और बाद में हज़ारों रुपये ब्याज के रूप में चुकाते हैं। नए एक्ट में दो तरह के ब्याज प्रावधान हैं — एक पूरे साल में कम भरने पर (पुरानी धारा 234B की जगह अब धारा 424), और दूसरा किस्त-दर-किस्त कम भरने पर (पुरानी धारा 234C की जगह अब धारा 425)।
धारा 424 — पूरे साल में एडवांस टैक्स कम भरने पर ब्याज
अगर आपने assessed tax (आकलित टैक्स) का 90% से कम एडवांस टैक्स के रूप में जमा किया है, तो 1 अप्रैल से लेकर जिस तारीख तक टैक्स की रकम तय होती है या भर दी जाती है, तब तक हर महीने (या महीने के हिस्से पर भी पूरे महीने जैसा) 1% साधारण ब्याज लगता है। यह ब्याज सिर्फ उस शॉर्टफॉल (कमी) की रकम पर लगता है, जिसे नज़दीकी ₹100 तक नीचे की ओर राउंड कर दिया जाता है।
धारा 425 — किस्त में कमी रहने पर ब्याज
| Due Date | न्यूनतम संचयी % | कमी पर ब्याज दर |
|---|---|---|
| 15 जून | 15% | 3% |
| 15 सितंबर | 45% | 3% |
| 15 दिसंबर | 75% | 3% |
| 15 मार्च | 100% | 1% |
यह दरें असल में “1% प्रति महीना” के हिसाब से ही हैं — पहली तीन किस्तों पर 3 महीने के बराबर (1% × 3 = 3%) और आख़िरी किस्त पर सिर्फ 1 महीने के बराबर (1%) ब्याज गिना जाता है। एक राहत की बात यह भी है — अगर आपने 15 जून तक कम से कम 12% और 15 सितंबर तक कम से कम 36% जमा कर दिया है, तो पहली दो किस्तों पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, भले ही यह आधिकारिक 15%/45% के टारगेट से थोड़ा कम हो।
उदाहरण 3 — ब्याज का हिसाब कैसे लगता है
अहमदाबाद के छोटे बिज़नेसमैन मनीष पटेल का assessed tax ₹2,00,000 बनता है, लेकिन उन्होंने 31 मार्च तक सिर्फ ₹1,40,000 (यानी सिर्फ 70%) एडवांस टैक्स जमा किया — जो 90% की सीमा से कम है। अब उन्हें धारा 424 के तहत ब्याज देना होगा:
| विवरण | राशि |
|---|---|
| Assessed Tax | ₹2,00,000 |
| 31 मार्च तक जमा एडवांस टैक्स (70%) | ₹1,40,000 |
| शॉर्टफॉल (कमी) | ₹60,000 |
| मान लीजिए मनीष ने बाकी रकम जुलाई 2027 में भरी (1 अप्रैल से 4 महीने) | 4 महीने |
| ब्याज (1% × 4 महीने × ₹60,000) | ₹2,400 |
| कुल देनदारी (मूल + ब्याज) | ₹62,400 |
इसी तरह, अगर मनीष की 15 दिसंबर की किस्त में भी कमी रह जाती — मान लीजिए कुल टैक्स का 75% यानी ₹1,12,500 जमा होना था, लेकिन उन्होंने सिर्फ ₹90,000 जमा किया — तो ₹22,500 की कमी पर धारा 425 के तहत 3% ब्याज यानी लगभग ₹675 अलग से देना होगा। यह दिखाता है कि छोटी-छोटी देरी भी मिलाकर बड़ी रकम बन सकती है, इसलिए हर due date को गंभीरता से लेना ज़रूरी है।
एडवांस टैक्स ऑनलाइन कैसे भरें — Step by Step
- Income Tax e-Filing पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें।
- “e-File” मेन्यू में जाकर “e-Pay Tax” ऑप्शन चुनें।
- “New Payment” पर क्लिक करें और “Income Tax” टाइप चुनें, फिर “Proceed” दबाएं।
- सही Tax Year (जैसे 2026-27) चुनें और Minor Head में “Advance Tax” (कोड 100) चुनें।
- टैक्स, सरचार्ज, सेस और अन्य कॉलम में सही रकम भरें।
- पेमेंट मोड चुनें — नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, UPI या बैंक काउंटर — और पेमेंट पूरा करें।
- पेमेंट के बाद मिलने वाला BSR कोड और चालान सीरियल नंबर ज़रूर सेव कर लें, यह ITR भरते समय चाहिए होगा।
अगर लॉगिन नहीं करना चाहते, तो “Quick Links” में दिए “e-Pay Tax” ऑप्शन से सिर्फ PAN नंबर और मोबाइल OTP से भी पेमेंट किया जा सकता है।


एडवांस टैक्स भरने से पहले का चेकलिस्ट
- साल की शुरुआत में ही सभी इनकम सोर्स (सैलरी, किराया, ब्याज, फ्रीलांस, कैपिटल गेन) का मोटा अनुमान लगा लें।
- TDS/TCS क्रेडिट का हिसाब ज़रूर घटाएं — सिर्फ बाकी बची रकम ही एडवांस टैक्स के दायरे में आती है।
- हर due date से कम से कम 2-3 दिन पहले पेमेंट कर दें, ताकि किसी तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में भी देरी न हो।
- अगर बीच में कोई बड़ी इनकम (जैसे शेयर बेचना) आती है, तो अगली due date में उसका हिसाब जोड़ लें।
- Challan details (BSR कोड, सीरियल नंबर, तारीख) को सुरक्षित रखें — ITR फाइलिंग में यह जानकारी भरनी पड़ती है।
- Form 26AS और AIS में TDS क्रेडिट चेक करते रहें, ताकि अनुमान ज़्यादा गलत न हो।
किसे एडवांस टैक्स भरना चाहिए, किसे नहीं — एक नज़र में
| टैक्सपेयर टाइप | भरना चाहिए? | वजह |
|---|---|---|
| सिर्फ सैलरी, पूरा TDS कटता है | सामान्यतः नहीं | TDS ही देनदारी कवर कर लेता है |
| सैलरी + किराया/ब्याज/कैपिटल गेन, कुल देनदारी ₹10,000+ | हाँ | अतिरिक्त इनकम पर TDS नहीं या कम कटता है |
| फ्रीलांसर/प्रोफेशनल (presumptive नहीं) | हाँ, चार किस्तों में | कोई TDS क्रेडिट नहीं या बहुत कम |
| फ्रीलांसर/प्रोफेशनल (presumptive, धारा 58(2)) | हाँ, पर एक ही किस्त में (15 मार्च तक) | विशेष राहत दी गई है |
| 60+ साल के निवासी वरिष्ठ नागरिक, कोई बिज़नेस इनकम नहीं | नहीं | कानून में साफ़ छूट है |
| घरेलू/विदेशी कंपनी, LLP, फर्म | हाँ | सभी बिज़नेस एंटिटी पर नियम लागू |
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FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. अगर मेरी देनदारी ₹10,000 से कम है तो क्या मुझे एडवांस टैक्स भरना होगा?
नहीं। धारा 404 के तहत ₹10,000 से कम देनदारी पर एडवांस टैक्स की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती। ऐसे में आप पूरा टैक्स ITR भरते समय ही जमा कर सकते हैं।
Q2. क्या वरिष्ठ नागरिकों को हमेशा छूट मिलती है?
नहीं, सिर्फ उन्हें जो भारत में निवासी हैं, उम्र 60 साल या ज़्यादा है, और जिनकी बिज़नेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक बिज़नेस चला रहे हैं, तो उन्हें भी सामान्य नियम लागू होंगे।
Q3. मैंने जून और सितंबर की किस्त मिस कर दी, अब क्या करूं?
जितनी जल्दी हो सके बाकी रकम जमा करें। हर महीने देरी पर 1-3% ब्याज (धारा 424/425 के अनुसार) जुड़ता रहेगा, इसलिए जितनी जल्दी भरेंगे, ब्याज उतना कम बनेगा।
Q4. क्या एडवांस टैक्स कैलकुलेशन बाद में बदल सकती है?
हाँ, यह सिर्फ अनुमान पर आधारित होता है। अगर बाद में इनकम कम या ज़्यादा निकलती है, तो आने वाली किस्तों में उसे एडजस्ट कर सकते हैं। आख़िरी हिसाब ITR फाइलिंग के समय ही फाइनल होता है।
Q5. कैपिटल गेन पर एडवांस टैक्स कब भरना है?
जिस तिमाही में गेन हुआ है, उसके बाद आने वाली अगली due date तक। अगर गेन 15 मार्च के बाद हुआ है, तो 31 मार्च तक जमा करने पर भी कोई ब्याज नहीं लगेगा।
Q6. Presumptive टैक्सपेयर को भी due dates का पूरा पालन करना है क्या?
नहीं, जो धारा 58(2) के तहत presumptive इनकम दिखाते हैं (जैसे पुराने 44AD/44ADA केस), वे पूरी रकम एक ही किस्त में 15 मार्च तक जमा कर सकते हैं।
Q7. क्या एडवांस टैक्स न भरने पर कोई पेनल्टी नोटिस आ सकता है?
ब्याज के अलावा, अगर कमी बहुत बड़ी और लंबे समय तक बनी रहे, तो असेसिंग ऑफिसर आगे के आकलन में इसकी जांच कर सकते हैं। इसलिए ब्याज के साथ-साथ समय पर भरना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
Q8. TDS क्रेडिट को कैसे घटाकर हिसाब करूं?
अपनी अनुमानित सालाना कुल टैक्स देनदारी से, साल भर में कटने वाले कुल अनुमानित TDS/TCS को घटा दें। बचा हुआ अमाउंट ही एडवांस टैक्स के तहत किस्तों में जमा करना होता है। Form 26AS और AIS से TDS का हिसाब समय-समय पर चेक करते रहें।
निष्कर्ष
एडवांस टैक्स को साल के आख़िर में एक झटके में भरने वाला बोझ समझने के बजाय, इसे चार छोटी-छोटी किस्तों में बांटकर देखें तो यह न सिर्फ जेब पर हल्का पड़ता है, बल्कि ब्याज से भी बचाता है। नए Income Tax Act, 2025 में भले ही सेक्शन नंबर बदल गए हों (404, 408, 424, 425 जैसे), लेकिन मूल भावना वही है — जितना कमाओ, उतना साथ-साथ टैक्स चुकाओ। 15 दिसंबर 2026 की अगली due date नज़दीक है, तो अपना हिसाब अभी से लगा लें ताकि आख़िरी समय में जल्दबाज़ी और ब्याज दोनों से बचा जा सके।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शिक्षा और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है, यह निवेश या टैक्स सलाह नहीं है। टैक्स नियम, सेक्शन नंबर और दरें समय-समय पर बदल सकती हैं। कृपया अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार फाइनल फैसला लेने से पहले अपने CA, टैक्स सलाहकार या आधिकारिक incometax.gov.in पोर्टल से नवीनतम जानकारी ज़रूर जांच लें।
