अगर आपके परिवार में भी किसी पुरानी बैंक पासबुक, दादा-दादी की फिक्स्ड डिपॉजिट या नौकरी बदलते समय बंद हुए किसी सैलरी अकाउंट की बात कभी उठी हो, तो यह लेख आपके लिए है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक देश के बैंकों में ऐसी रकम करोड़ों में पड़ी है जिसे उसके मालिकों ने वर्षों से छुआ ही नहीं। अच्छी खबर यह है कि यह पैसा कभी खत्म नहीं होता और RBI ने इसे ढूंढने के लिए एक सीधा-सादा ऑनलाइन तरीका — UDGAM पोर्टल — भी बना दिया है। इस गाइड में हम समझेंगे कि अनक्लेम्ड डिपॉजिट बनता कैसे है, 2026 में RBI के पास कितना पैसा पड़ा है, UDGAM पोर्टल पर सर्च कैसे करें, पैसा क्लेम करने का पूरा प्रोसेस क्या है, और अपने परिवार के पैसे को अनक्लेम्ड होने से कैसे बचाएं।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट क्या होता है और यह कैसे बनता है
किसी भी बैंक खाते में जमा पैसा अचानक “अनक्लेम्ड” नहीं हो जाता। इसके पीछे दो अलग-अलग स्टेज होते हैं, और दोनों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है।
पहली स्टेज — इनऑपरेटिव (निष्क्रिय) अकाउंट: RBI के नियम के मुताबिक यदि किसी सेविंग्स या करंट अकाउंट में लगातार दो साल तक कोई भी “customer-induced transaction” (यानी खाताधारक द्वारा खुद की गई जमा, निकासी, ऑनलाइन ट्रांसफर या KYC अपडेट) नहीं होती, तो बैंक उस अकाउंट को इनऑपरेटिव घोषित कर देता है। बैंक द्वारा खुद जोड़े गए ब्याज, चार्ज या फीस को इस गिनती में नहीं जोड़ा जाता।
दूसरी स्टेज — अनक्लेम्ड डिपॉजिट: अगर सेविंग्स या करंट अकाउंट में 10 साल या उससे ज़्यादा समय तक कोई ट्रांजैक्शन नहीं होता, या कोई फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट मैच्योर होने के 10 साल बाद भी क्लेम नहीं किया जाता, तो बैंक उस रकम को ब्याज के साथ RBI के Depositor Education and Awareness Fund (DEA Fund) में ट्रांसफर कर देता है। यह ट्रांसफर हर महीने के आखिरी कामकाजी दिन किया जाता है। डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर, बैंकर्स चेक, मार्जिन मनी और सिक्योरिटी डिपॉजिट जैसी रकम भी इसी दायरे में आती हैं।
यहां एक बात साफ समझ लें — पैसा RBI के फंड में जाने के बाद भी आपका मालिकाना हक खत्म नहीं होता। आप या आपके कानूनी वारिस कभी भी, बिना किसी समय सीमा के, अपने बैंक से यह रकम ब्याज के साथ वापस मांग सकते हैं।
2026 में RBI के पास कितना पैसा पड़ा है — पूरे आंकड़े
यह मामला छोटा नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 28 जनवरी 2026 को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि DEA Fund में कुल अनक्लेम्ड डिपॉजिट लगभग ₹72,454 करोड़ पहुंच गया है। इससे पहले मार्च 2024 के आंकड़ों के मुताबिक यह रकम ₹78,213 करोड़ थी — यानी RBI और बैंकों की जागरूकता मुहिम और UDGAM पोर्टल के चलते इस रकम में कुछ कमी आई है, भले ही यह अब भी बहुत बड़ा आंकड़ा है।
| बैंक का प्रकार | अनक्लेम्ड डिपॉजिट (28 जनवरी 2026 तक) |
|---|---|
| सरकारी बैंक (Public Sector Banks) | लगभग ₹60,571 करोड़ |
| प्राइवेट बैंक (Private Sector Banks) | लगभग ₹9,608 करोड़ |
| विदेशी बैंक (Foreign Banks) | लगभग ₹2,275 करोड़ |
| कुल (Total) | लगभग ₹72,454 करोड़ |
साफ है कि ज़्यादातर रकम सरकारी बैंकों में पड़ी है, क्योंकि इन बैंकों के ग्राहक आधार और शाखाओं की संख्या भी सबसे ज़्यादा है। DEA Fund का इस्तेमाल सिर्फ पैसा रखने के लिए नहीं होता — इससे वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, डिपॉजिटर अवेयरनेस सेमिनार और बैंकिंग सुरक्षा पर रिसर्च भी फंड होती है।
UDGAM पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है
RBI ने अगस्त 2023 में UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation) नाम का एक सेंट्रलाइज़्ड पोर्टल लॉन्च किया था, जिसका पता है udgam.rbi.org.in। इसका मकसद सीधा है — आपको हर बैंक की वेबसाइट या ब्रांच में अलग-अलग जाकर पुराना अकाउंट ढूंढने की ज़रूरत नहीं, एक ही जगह से कई बैंकों में अपने नाम से अनक्लेम्ड डिपॉजिट सर्च किया जा सकता है। मार्च 2024 तक इस पोर्टल पर 30 बैंक जोड़े जा चुके थे, जो DEA Fund की कुल रकम का करीब 90% हिस्सा कवर करते हैं।
एक बात ध्यान रखें — UDGAM पोर्टल सिर्फ सर्च की सुविधा देता है, यह खुद पैसा नहीं देता। जैसा कि RBI की ऑफिशियल FAQ में साफ लिखा है, “अनक्लेम्ड डिपॉजिट सिर्फ संबंधित बैंक से ही क्लेम किया जा सकता है।”
UDGAM पर रजिस्ट्रेशन कैसे करें
सबसे पहले आपको अपना नाम और मोबाइल नंबर देकर पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद OTP वेरिफिकेशन होता है, और फिर आप अलग-अलग बैंकों में सर्च शुरू कर सकते हैं।
सर्च के लिए क्या जानकारी चाहिए
| किसके लिए | ज़रूरी जानकारी |
|---|---|
| व्यक्ति (Individual) | खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, और इनमें से कोई एक — PAN, पासपोर्ट नंबर, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस या जन्मतिथि |
| संस्था / कंपनी (Non-Individual) | एंटिटी का नाम, बैंक का नाम, और इनमें से कोई एक — अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का नाम, PAN, CIN या निगमन तिथि |
| अगर ऊपर की कोई जानकारी न हो | खाताधारक या एंटिटी का पता (address) डालकर भी सर्च किया जा सकता है |

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: अपना पैसा कैसे ढूंढें और क्लेम करें
- Step 1: udgam.rbi.org.in पर जाएं और अपने नाम व मोबाइल नंबर से रजिस्टर करें।
- Step 2: OTP डालकर लॉगिन करें और वह बैंक या बैंकों की लिस्ट चुनें जहां आपको या परिवार के किसी सदस्य का पुराना अकाउंट होने का शक है।
- Step 3: खाताधारक का नाम डालें और PAN, वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या जन्मतिथि में से कोई एक जानकारी भरें। अगर यह उपलब्ध न हो तो पता (address) डालें।
- Step 4: सर्च रिजल्ट में अगर कोई मैच मिलता है, तो वहां बैंक का नाम और एक छोटा संकेत (जैसे खाता किस ब्रांच का है) दिखता है — पूरी डिटेल प्राइवेसी के चलते नहीं दिखाई जाती।
- Step 5: मैच मिलने पर उस बैंक की किसी भी ब्रांच में जाएं — ज़रूरी नहीं कि वही होम ब्रांच हो।
- Step 6: बैंक का तय किया हुआ क्लेम फॉर्म भरें और अपने KYC डॉक्यूमेंट (आधार, पासपोर्ट, वोटर ID या ड्राइविंग लाइसेंस) के साथ जमा करें। अगर अकाउंट होल्डर की मृत्यु हो गई है, तो कानूनी वारिस को मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस का प्रमाण और सक्सेशन सर्टिफिकेट या नॉमिनेशन डिटेल भी देनी होती है।
- Step 7: बैंक वेरिफिकेशन के बाद मूल रकम और उस पर बना ब्याज आपके खाते में ट्रांसफर करता है, और बाद में खुद RBI से DEA Fund से वह पैसा वापस ले लेता है। यानी आपको इंतज़ार बैंक की वेरिफिकेशन प्रक्रिया भर का करना होता है, RBI से सीधे डील नहीं करनी पड़ती।
ध्यान देने वाली बात — क्लेम करने की कोई आखिरी तारीख़ नहीं है। चाहे पैसा 5 साल पहले ट्रांसफर हुआ हो या 25 साल पहले, आप या आपके वारिस किसी भी समय यह रकम वापस मांग सकते हैं।
उदाहरण से समझें — ब्याज के साथ कितना पैसा वापस मिलेगा
मान लीजिए कानपुर के रमेश गुप्ता को पता चलता है कि उनके दादाजी का एक पुराना सेविंग्स अकाउंट था, जिसमें ₹85,000 जमा थे और वह अकाउंट 2018 में अनक्लेम्ड होकर DEA Fund में ट्रांसफर हो गया था। अब 2026 में, यानी करीब 8 साल बाद, रमेश यह रकम क्लेम करने जाते हैं। RBI द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार DEA Fund में रखी रकम पर ब्याज मिलता रहता है (यहां उदाहरण के लिए हम 3% सालाना साधारण ब्याज मान रहे हैं, जो RBI समय-समय पर तय करता है और बदल भी सकता है)।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| मूल जमा राशि (Principal) | ₹85,000 |
| मानी गई ब्याज दर (सालाना, साधारण) | 3% |
| समय अवधि | 8 साल |
| जोड़ा गया ब्याज | ₹20,400 |
| कुल मिलने वाली रकम | ₹1,05,400 |
एक और उदाहरण — लखनऊ की सुनीता वर्मा को पता चलता है कि उनकी ₹2,50,000 की एक पुरानी फिक्स्ड डिपॉजिट मैच्योरिटी के 10 साल बाद अनक्लेम्ड होकर 3 साल पहले DEA Fund में चली गई थी। उसी 3% सालाना साधारण ब्याज के हिसाब से 3 साल में ₹22,500 का ब्याज जुड़ेगा, और सुनीता को कुल ₹2,72,500 वापस मिलेंगे।
ध्यान रहे, ये दोनों उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए हैं। असल में मिलने वाली रकम और ब्याज दर आपके बैंक की पॉलिसी, डिपॉजिट के प्रकार (सेविंग्स, करंट या FD) और RBI के उस समय के नियमों पर निर्भर करेगी। क्लेम करते वक्त बैंक से सटीक राशि की पुष्टि ज़रूर करें।
इनऑपरेटिव अकाउंट और अनक्लेम्ड डिपॉजिट — फर्क समझें

बहुत से लोग इन दोनों शब्दों को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि इनमें बड़ा फर्क है।
- इनऑपरेटिव अकाउंट (2 साल): अकाउंट बैंक के रिकॉर्ड में बना रहता है, आपका पैसा आपके ही बैंक खाते में रहता है, सिर्फ KYC अपडेट करके इसे फिर से एक्टिव किया जा सकता है। बैंक इसके लिए कोई फीस नहीं ले सकता, न ही मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी लगा सकता है।
- अनक्लेम्ड डिपॉजिट (10 साल): पैसा आपके बैंक खाते से निकल कर RBI के DEA Fund में चला जाता है। इसे वापस पाने के लिए बैंक ब्रांच में जाकर क्लेम फॉर्म और KYC डॉक्यूमेंट के साथ अलग से दावा करना पड़ता है।
सीधी भाषा में कहें तो इनऑपरेटिव अकाउंट को ठीक करना आसान और तुरंत का काम है, जबकि अनक्लेम्ड डिपॉजिट क्लेम करने में थोड़ा ज़्यादा डॉक्यूमेंटेशन और समय लग सकता है।
2025-26 में क्या बदला — नए नियम
पिछले कुछ समय में RBI और सरकार ने इस मामले में कई नए कदम उठाए हैं:
- जून 2025 का RBI सर्कुलर: RBI ने 12 जून 2025 को “Inoperative Accounts/Unclaimed Deposits in Banks – Revised Instructions (Amendment) 2025” नाम का सर्कुलर जारी किया। इसमें बैंकों को कहा गया है कि वे होम ब्रांच के साथ-साथ किसी भी ब्रांच में KYC अपडेट की सुविधा दें, और Video-Customer Identification Process (V-CIP) के ज़रिए अकाउंट एक्टिवेट करने की सुविधा बढ़ाएं, ताकि ग्राहक को बार-बार ब्रांच जाने की ज़रूरत न पड़े। बैंक अब अधिकृत बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट के ज़रिए भी ऐसे अकाउंट एक्टिवेट कर सकते हैं।
- मल्टीपल नॉमिनेशन की सुविधा: Banking Laws (Amendment) Act, 2025 के तहत अब एक बैंक खाते में एक साथ (simultaneous) या एक के बाद एक (successive) कुल 4 नॉमिनी तक जोड़े जा सकते हैं। पहले सिर्फ एक ही नॉमिनी की सुविधा थी। इससे परिवार में किसी की मृत्यु के बाद पैसा अनक्लेम्ड रहने का खतरा काफी कम हो जाता है।
- जागरूकता कैंपेन: RBI ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच देश के सभी जिलों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट कैंप लगाए, जिससे लोग सीधे बैंक अधिकारियों से मिलकर अपने पुराने अकाउंट के बारे में जानकारी ले सकें।
अपने पैसे को अनक्लेम्ड होने से कैसे बचाएं — चेकलिस्ट

ऊपर दी गई पूरी प्रक्रिया से गुज़रने से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आपका अकाउंट कभी अनक्लेम्ड ही न बने। इसके लिए यह आसान चेकलिस्ट फॉलो करें:
- हर पुराने सेविंग्स अकाउंट में साल में कम से कम एक बार कोई छोटा-सा ट्रांजैक्शन ज़रूर करें — एक छोटी राशि जमा या निकालना भी काफी है।
- हर अकाउंट में नॉमिनी ज़रूर जोड़ें, और अब तक की नई सुविधा के तहत एक से ज़्यादा नॉमिनी भी जोड़ सकते हैं।
- KYC डॉक्यूमेंट — मोबाइल नंबर, पता और ईमेल — समय-समय पर अपडेट रखें, ताकि बैंक का कोई भी नोटिफिकेशन आपको मिल सके।
- मैच्योर हो चुकी FD या RD को तुरंत रीन्यू करें या रकम निकाल लें, मैच्योरिटी के बाद उसे भूलकर न छोड़ें।
- नौकरी बदलते समय पुराना सैलरी अकाउंट बंद करें या उसमें ज़रूरी ट्रांजैक्शन जारी रखें।
- परिवार के बड़े सदस्यों के साथ उनके बैंक खातों, FD और लॉकर की जानकारी साझा करें, ताकि किसी अनहोनी के बाद परिवार को भटकना न पड़े।
किसे क्या करना चाहिए
| स्थिति | क्या करें |
|---|---|
| आपकी खुद की पुरानी, भूली हुई सेविंग्स अकाउंट या FD है | UDGAM पोर्टल पर उस बैंक में अपने नाम से सर्च करें, मैच मिलने पर ब्रांच जाकर KYC के साथ क्लेम फॉर्म भरें |
| माता-पिता या दादा-दादी की मृत्यु के बाद उनका कोई पुराना अकाउंट मिलने की संभावना है | UDGAM पर उनके नाम और उपलब्ध पहचान जानकारी से सर्च करें, मृत्यु प्रमाण पत्र, सक्सेशन सर्टिफिकेट या नॉमिनेशन डिटेल के साथ बैंक में दावा करें |
| आप NRI हैं और भारत में पुराना अकाउंट था | भारत में मौजूद किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य या वकील के ज़रिए बैंक ब्रांच में क्लेम प्रोसेस पूरा करें, क्योंकि कुछ दस्तावेज़ी काम व्यक्तिगत रूप से करना पड़ सकता है |
| आपका कोई अकाउंट सिर्फ इनऑपरेटिव हुआ है, DEA Fund में नहीं गया | घबराने की ज़रूरत नहीं — किसी भी ब्रांच में KYC अपडेट कराकर या V-CIP के ज़रिए इसे बिना किसी फीस के एक्टिवेट करा सकते हैं |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. अनक्लेम्ड डिपॉजिट होने पर क्या मेरा पैसा हमेशा के लिए चला जाता है?
नहीं। पैसा RBI के DEA Fund में सुरक्षित रहता है, आपका या आपके कानूनी वारिस का मालिकाना हक कभी खत्म नहीं होता और इसे किसी भी समय, बिना किसी डेडलाइन के, बैंक से क्लेम किया जा सकता है।
Q2. UDGAM पोर्टल पर सभी बैंक जुड़े हैं क्या?
मार्च 2024 तक 30 बैंक इस पोर्टल पर जुड़े थे, जो DEA Fund की कुल रकम का करीब 90% कवर करते हैं। बाकी बैंकों को धीरे-धीरे जोड़ा जा रहा है, इसलिए अगर किसी बैंक का नाम लिस्ट में न दिखे, तो सीधे उस बैंक की शाखा में जाकर भी पूछा जा सकता है।
Q3. क्या UDGAM पोर्टल से ही मेरा पैसा वापस मिल जाएगा?
नहीं, UDGAM सिर्फ सर्च की सुविधा देता है। असली क्लेम हमेशा संबंधित बैंक की ब्रांच में जाकर, KYC डॉक्यूमेंट और क्लेम फॉर्म के साथ ही किया जाता है।
Q4. इनऑपरेटिव अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए बैंक फीस ले सकता है क्या?
नहीं। RBI के नियमों के मुताबिक बैंक इनऑपरेटिव अकाउंट को फिर से एक्टिव करने के लिए कोई फीस नहीं ले सकता, और मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी भी नहीं लगा सकता।
Q5. अगर अकाउंट होल्डर की मृत्यु हो गई है तो वारिस को क्या करना होगा?
वारिस को बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र, अपनी पहचान का प्रमाण, और स्थिति के अनुसार नॉमिनेशन डिटेल या सक्सेशन सर्टिफिकेट/लीगल हेयर सर्टिफिकेट देना होता है। बैंक इन दस्तावेज़ों की जांच के बाद रकम ट्रांसफर करता है।
Q6. क्या अनक्लेम्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है?
क्लेम के समय मिलने वाला ब्याज सामान्य ब्याज आय की तरह ही माना जाता है। टैक्स और TDS से जुड़ा सटीक ट्रीटमेंट आपकी कुल इनकम, बैंक की पॉलिसी और उस समय लागू नियमों पर निर्भर करता है, इसलिए क्लेम मिलने के बाद अपने CA या टैक्स सलाहकार से इसकी पुष्टि कर लें।
Q7. क्या NRI भी UDGAM पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं?
हां, पोर्टल पर सर्च करने के लिए भारत में होना ज़रूरी नहीं है। हालांकि असली क्लेम के लिए बैंक ब्रांच में डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं, जो परिवार के किसी सदस्य या अधिकृत व्यक्ति के ज़रिए भी किया जा सकता है, बैंक की पॉलिसी के अनुसार।
Q8. मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा कोई अकाउंट अनक्लेम्ड हो चुका है?
सबसे पहले परिवार में सभी पुराने बैंकों, नौकरियों और FD की लिस्ट बनाएं, फिर हर बैंक के नाम से UDGAM पोर्टल पर अपनी या परिवार के सदस्य की जानकारी डालकर सर्च करें। जिस बैंक का नाम UDGAM पर न हो, वहां सीधे ब्रांच में जाकर भी पूछा जा सकता है।
निष्कर्ष
₹72,454 करोड़ की यह रकम बताती है कि यह समस्या किसी एक-दो परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम की है। अच्छी बात यह है कि RBI ने UDGAM पोर्टल के ज़रिए इसे ढूंढना पहले से बहुत आसान बना दिया है, और 2025 के नए नियमों ने KYC अपडेट और नॉमिनेशन को भी ज़्यादा सुविधाजनक बना दिया है। अगर आपके परिवार में भी कोई पुराना अकाउंट, भूली हुई FD या किसी बुज़ुर्ग सदस्य का बैंकिंग रिकॉर्ड है, तो एक बार समय निकालकर UDGAM पोर्टल पर ज़रूर सर्च करें — हो सकता है कि आपका अपना ही पैसा आपका इंतज़ार कर रहा हो। और आगे के लिए, हर अकाउंट में नॉमिनी जोड़ना और साल में एक बार ट्रांजैक्शन करना न भूलें, ताकि यह मुश्किल दोबारा सामने न आए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है, यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। RBI के नियम, ब्याज दरें और प्रोसेस समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए क्लेम करने से पहले अपने बैंक या RBI की आधिकारिक वेबसाइट udgam.rbi.org.in से नवीनतम जानकारी ज़रूर जांच लें।
