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ITR नहीं भरा? Belated Return की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 — लेट फ़ीस, ब्याज, खोए फ़ायदे और Revised Return के नए नियम

Belated ITR की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 - कैलेंडर पर लाल पिन

दिल्ली के अर्जुन खन्ना एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एनालिस्ट हैं, सालाना सैलरी ₹22 लाख। हर साल जुलाई में वे ख़ुद ITR भरते थे, पर इस बार जुलाई में ऑफ़िस का प्रोजेक्ट, बेटे का स्कूल एडमिशन और घर शिफ़्ट करना — सब एक साथ आ गया। उन्होंने सोचा, “कंपनी तो TDS काट ही रही है, दो-चार हफ़्ते देर से भर दूँगा तो क्या होगा?” अक्टूबर में जब वे पोर्टल पर रिटर्न भरने बैठे, तो उन्हें तीन झटके लगे — ₹5,000 की लेट फ़ीस, बकाया टैक्स पर ब्याज, और सबसे बड़ा: वे अब पुरानी टैक्स व्यवस्था नहीं चुन सकते थे, जिसमें HRA और होम लोन की छूट से उनके करीब ₹14,000 बचते।

अगर आपने भी FY 2025-26 (AY 2026-27) का ITR तय तारीख़ तक नहीं भरा, तो घबराइए नहीं — अभी भी मौक़ा है। Belated ITR भरने की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 है। इस गाइड में हम समझेंगे कि belated return क्या है, कितनी फ़ीस और ब्याज लगेगा, कौन-से फ़ायदे खो जाते हैं, Finance Act 2026 में revised return के नियम कैसे बदले, और 31 दिसंबर भी निकल गई तो आख़िरी रास्ता (ITR-U) कितना महँगा है।

Belated ITR की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 - कैलेंडर पर लाल पिन

एक नज़र में: FY 2025-26 (AY 2026-27) की ज़रूरी तारीख़ें

रिटर्न / करदाताआख़िरी तारीख़
ITR-1 और ITR-2 (ज़्यादातर नौकरीपेशा)31 जुलाई 2026 (निकल चुकी)
ITR-3 और ITR-4 (बिना ऑडिट वाले कारोबारी/प्रोफ़ेशनल)31 अगस्त 2026 (निकल चुकी)
ऑडिट वाले मामलेCBDT के विस्तार के बाद 21 नवंबर 2026
Belated Return (देर से रिटर्न)31 दिसंबर 2026
Revised Return (बिना फ़ीस)31 दिसंबर 2026
Revised Return (फ़ीस के साथ)1 जनवरी से 31 मार्च 2027
Updated Return (ITR-U)AY ख़त्म होने के 48 महीने तक, अतिरिक्त टैक्स के साथ

नोट: FY 2025-26 की आय का रिटर्न पुराने Income-tax Act, 1961 के तहत ही भरा जा रहा है। नया Income-tax Act 2025 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए Tax Year 2026-27 पर लागू है।

Belated Return क्या है?

जब कोई करदाता Section 139(1) के तहत तय तारीख़ (ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए 31 जुलाई) तक रिटर्न नहीं भरता, तो वह Section 139(4) के तहत देर से रिटर्न भर सकता है — इसे ही Belated Return कहते हैं। FY 2025-26 के लिए यह खिड़की 31 दिसंबर 2026 तक खुली है (या असेसमेंट पूरा होने तक, जो पहले हो)।

Belated return भरने का तरीका बिल्कुल सामान्य ITR जैसा ही है — बस फ़ॉर्म में “Filed u/s 139(4) – Belated” चुनना होता है, और लेट फ़ीस व ब्याज पहले चुकाना होता है।

किसे ITR भरना ज़रूरी है?

आम तौर पर, अगर आपकी कुल आय (छूट और कटौतियों से पहले) बेसिक छूट सीमा से ज़्यादा है, तो ITR भरना अनिवार्य है। इसके अलावा कुछ और स्थितियों में भी रिटर्न ज़रूरी हो जाता है — जैसे बचत खाते में बड़ी रकम जमा, विदेश यात्रा पर बड़ा ख़र्च, बिजली का बड़ा बिल, या विदेशी संपत्ति होना। और अगर आपका TDS ज़्यादा कटा है, तो रिफ़ंड पाने के लिए भी ITR भरना ही पड़ेगा।

देर से रिटर्न भरने की कीमत: फ़ीस, ब्याज और खोए फ़ायदे

1. लेट फ़ीस — Section 234F

कुल आयलेट फ़ीस
₹5 लाख तकअधिकतम ₹1,000
₹5 लाख से ज़्यादा₹5,000
आय बेसिक छूट सीमा से कम (रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं था)आम तौर पर कोई फ़ीस नहीं

ध्यान दें — यह फ़ीस इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपका टैक्स बकाया है या नहीं। नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर रिबेट से टैक्स शून्य हो सकता है, पर अगर आय ₹5 लाख से ज़्यादा है और रिटर्न भरना ज़रूरी था, तो देर होने पर ₹5,000 की फ़ीस लग सकती है।

2. बकाया टैक्स पर ब्याज — Section 234A

अगर TDS, एडवांस टैक्स आदि घटाने के बाद भी टैक्स बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीना (या महीने का हिस्सा) ब्याज लगता है — तय तारीख़ के अगले दिन से रिटर्न भरने तक। एडवांस टैक्स कम भरा हो तो Section 234B और 234C का ब्याज अलग से लग सकता है। यानी जितनी देर, उतना ज़्यादा ब्याज।

देर से ITR भरने पर लेट फ़ीस 234F और ब्याज 234A - बिल देखता व्यक्ति

3. पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने का मौक़ा जा सकता है

यह सबसे बड़ा और सबसे कम समझा जाने वाला नुकसान है। FY 2025-26 से नई टैक्स व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। जिन लोगों की आय कारोबार या प्रोफ़ेशन से नहीं है (जैसे नौकरीपेशा), उनके लिए क़ानून के मुताबिक़ पुरानी व्यवस्था चुनने का विकल्प तय तारीख़ (Section 139(1)) तक भरे गए रिटर्न में दिया गया है। इसलिए belated return में आम तौर पर सिर्फ़ नई व्यवस्था ही लागू होती है। (कुछ ट्रिब्यूनल फ़ैसलों में अलग परिस्थितियों में राहत मिली है, पर इस पर भरोसा करके योजना न बनाएँ।)

जिन लोगों की HRA छूट, होम लोन ब्याज, 80C और NPS जैसी बड़ी कटौतियाँ हैं, उनके लिए यह नुकसान हज़ारों रुपये का हो सकता है।

4. घाटे (Loss) आगे नहीं ले जा सकते

शेयर/म्यूचुअल फंड पर कैपिटल लॉस या कारोबार का घाटा अगले सालों में आगे ले जाने (carry forward) के लिए रिटर्न तय तारीख़ तक भरना ज़रूरी है। Belated return में ये घाटे आगे नहीं जा सकते। हाँ, हाउस प्रॉपर्टी का घाटा और unabsorbed depreciation belated return में भी आगे ले जाए जा सकते हैं।

5. रिफ़ंड पर कम ब्याज

समय पर रिटर्न भरने पर रिफ़ंड पर 1 अप्रैल से ब्याज (Section 244A) मिलता है। Belated return में यह ब्याज रिटर्न भरने की तारीख़ से गिना जाता है, यानी कम मिलता है — और रिफ़ंड भी आम तौर पर देर से आता है।

अर्जुन का पूरा हिसाब: देर की असल कीमत

अर्जुन की सैलरी ₹22 लाख है। उनकी कटौतियाँ: HRA छूट ₹3.6 लाख, होम लोन ब्याज ₹2 लाख, 80C ₹1.5 लाख, हेल्थ इंश्योरेंस (80D) ₹50,000 और NPS ₹50,000। FD से ₹60,000 ब्याज भी आया।

बिंदुपुरानी व्यवस्था (समय पर भरते तो)नई व्यवस्था (belated में मजबूरी)
टैक्सेबल आय₹14.00 लाख₹21.85 लाख
टैक्स (सेस सहित)करीब ₹2,41,800करीब ₹2,56,100
अतिरिक्त टैक्स—करीब ₹14,300

उनकी कंपनी ने पुरानी व्यवस्था के हिसाब से TDS काटा था और बैंक ने FD पर TDS। कुल TDS घटाने के बाद नई व्यवस्था में उन पर करीब ₹27,000 टैक्स बकाया बनता है। अगर वे नवंबर 2026 में रिटर्न भरते हैं, तो:

  • लेट फ़ीस (234F): ₹5,000
  • ब्याज (234A): ₹27,000 × 1% × 4 महीने (अगस्त–नवंबर) ≈ ₹1,080 (साथ में 234B/234C का ब्याज भी लग सकता है)
  • पुरानी व्यवस्था का खोया फ़ायदा: करीब ₹14,300

यानी कुछ हफ़्तों की देरी की कुल कीमत करीब ₹20,000 से ज़्यादा। और अगर वे 31 दिसंबर भी चूक जाते, तो नुकसान इससे कई गुना हो सकता था (आगे ITR-U वाला हिस्सा देखें)।

Belated ITR कैसे भरें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

  1. दस्तावेज़ इकट्ठा करें: Form 16, AIS (Annual Information Statement), TIS और Form 26AS डाउनलोड करें। बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर/म्यूचुअल फंड बिक्री — सब AIS से मिलाएँ।
  2. टैक्स की गणना करें: बकाया टैक्स, 234A/B/C का ब्याज और 234F की लेट फ़ीस जोड़ें। पोर्टल का ऑफ़लाइन/ऑनलाइन यूटिलिटी यह अपने आप गिन देती है।
  3. पहले भुगतान करें: ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर “e-Pay Tax” से Self-Assessment Tax (300) के रूप में टैक्स, ब्याज और फ़ीस जमा करें। चालान की जानकारी रिटर्न में भरनी होती है।
  4. सही ITR फ़ॉर्म चुनें: सैलरी और ब्याज वालों के लिए आम तौर पर ITR-1 (₹50 लाख तक आय), कैपिटल गेन हो तो ITR-2।
  5. “139(4) – Belated” चुनें: फ़ाइलिंग सेक्शन में यह विकल्प ज़रूर चुनें।
  6. सबमिट और ई-वेरिफ़ाई करें: आधार OTP या नेट बैंकिंग से 30 दिन के अंदर ई-वेरिफ़िकेशन ज़रूर करें — बिना वेरिफ़िकेशन रिटर्न अधूरा माना जाता है।

रिटर्न भरने के बाद क्या-क्या जाँचना चाहिए, इसके लिए हमारी गाइड ITR फ़ाइल करने के बाद क्या करें पढ़ें।

इनकम टैक्स पोर्टल पर belated ITR ऑनलाइन फ़ाइल करते हुए - लैपटॉप पर काम करता व्यक्ति

Revised Return: Finance Act 2026 में बड़ा बदलाव

अगर आपने रिटर्न भर दिया है लेकिन उसमें कोई गलती रह गई — जैसे FD ब्याज छूट गया, कोई कटौती गलत लगी या बैंक खाता गलत डला — तो आप Revised Return (Section 139(5)) भर सकते हैं। Belated return को भी revise किया जा सकता है।

पहले revised return की आख़िरी तारीख़ भी 31 दिसंबर ही थी। Finance Act 2026 ने इसे बढ़ाकर असेसमेंट ईयर के अंत तक, यानी AY 2026-27 के लिए 31 मार्च 2027 तक कर दिया है — लेकिन एक नई फ़ीस (Section 234I) के साथ:

Revised return कब भराफ़ीस
31 दिसंबर 2026 तककोई फ़ीस नहीं
1 जनवरी – 31 मार्च 2027 (आय ₹5 लाख तक)₹1,000
1 जनवरी – 31 मार्च 2027 (आय ₹5 लाख से ज़्यादा)₹5,000
31 मार्च 2027 के बादRevised return नहीं भर सकते

असेसमेंट पूरा हो जाने पर revise का मौक़ा उससे पहले भी ख़त्म हो सकता है। ध्यान दें: यह बढ़ी हुई समय-सीमा सिर्फ़ उनके लिए है जिन्होंने पहले से रिटर्न भरा है। जिसने अभी तक कोई रिटर्न नहीं भरा, उसके लिए belated return की आख़िरी तारीख़ 31 दिसंबर 2026 ही है।

सलाह यही है कि गलती दिखते ही 31 दिसंबर से पहले revise कर दें, ताकि ₹5,000 तक की फ़ीस से बचा जा सके।

31 दिसंबर भी निकल गई तो? Updated Return (ITR-U)

31 दिसंबर 2026 के बाद जिसने रिटर्न नहीं भरा, उसके पास सिर्फ़ Updated Return (ITR-U, Section 139(8A)) का रास्ता बचता है। Finance Act 2025 के बाद इसे असेसमेंट ईयर ख़त्म होने से 48 महीने तक भरा जा सकता है, पर भारी अतिरिक्त टैक्स के साथ:

AY ख़त्म होने के बाद कब भराअतिरिक्त टैक्स (टैक्स + ब्याज पर)
12 महीने के अंदर25%
12 से 24 महीने50%
24 से 36 महीने60%
36 से 48 महीने70%

ITR-U की सबसे बड़ी सीमाएँ:

  • रिफ़ंड नहीं ले सकते: अगर आपका TDS ज़्यादा कटा है और आपने 31 दिसंबर तक रिटर्न नहीं भरा, तो वह रिफ़ंड लगभग हमेशा के लिए डूब सकता है।
  • टैक्स कम नहीं कर सकते: ITR-U सिर्फ़ आय और टैक्स बढ़ाने के लिए है।
  • नया घाटा नहीं दिखा सकते और एक असेसमेंट ईयर के लिए सिर्फ़ एक बार भर सकते हैं।
  • अगर विभाग ने पहले ही नोटिस, सर्च या जाँच शुरू कर दी है, तो कई मामलों में ITR-U भरने की अनुमति नहीं मिलती।

Revised return और updated return ITR-U के टैक्स फ़ॉर्म

टैक्स न बने तब भी belated return क्यों भरें?

बहुत से लोग सोचते हैं कि “मेरा तो टैक्स बनता ही नहीं, रिटर्न की क्या ज़रूरत?” लेकिन इन स्थितियों में 31 दिसंबर से पहले रिटर्न भरना आपके फ़ायदे में है:

  • TDS रिफ़ंड: FD ब्याज, किराये, प्रोफ़ेशनल फ़ीस या सैलरी पर ज़्यादा TDS कटा हो, तो पैसा वापस पाने का यही आख़िरी सस्ता रास्ता है।
  • लोन और वीज़ा: होम लोन, कार लोन या बिज़नेस लोन के लिए बैंक आम तौर पर पिछले 2–3 साल के ITR माँगते हैं। कई देशों के वीज़ा आवेदन में भी ITR आय का प्रमाण माना जाता है।
  • आय का रिकॉर्ड: फ़्रीलांसर, छोटे कारोबारी और नए नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR उनकी आय का सरकारी रिकॉर्ड बनता है, जो आगे बड़ा टर्म इंश्योरेंस लेने या क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने में काम आता है।
  • हाउस प्रॉपर्टी का घाटा: होम लोन के ब्याज से बना घाटा belated return में भी आगे ले जाया जा सकता है।

रिटर्न न भरने का सबसे बड़ा जोखिम: नोटिस

आयकर विभाग के पास AIS के ज़रिए आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, शेयर ट्रेडिंग, प्रॉपर्टी ख़रीद-बिक्री और बड़े लेन-देन की जानकारी पहले से होती है। अगर रिटर्न भरना ज़रूरी था और आपने नहीं भरा, तो विभाग नोटिस भेज सकता है। ऐसी स्थिति में टैक्स, ब्याज के साथ-साथ जुर्माना (penalty) और गंभीर मामलों में मुक़दमे तक की नौबत आ सकती है। इसलिए 31 दिसंबर से पहले belated return भर देना हर हाल में सस्ता सौदा है।

अगले साल से ऐसी गलती न हो: 6 आसान आदतें

  1. कैलेंडर रिमाइंडर: हर साल 15 जून (Form 16 आने के बाद) और 15 जुलाई का रिमाइंडर लगाएँ।
  2. AIS हर तिमाही देखें: ताकि साल के अंत में कोई आय छूटे नहीं।
  3. व्यवस्था का फ़ैसला पहले करें: पुरानी या नई — यह साल की शुरुआत में ही तय कर लें और नियोक्ता को बता दें।
  4. एडवांस टैक्स का ध्यान: FD ब्याज, कैपिटल गेन या किराये जैसी आय हो तो एडवांस टैक्स भरें, ताकि 234B/C का ब्याज न लगे। बड़े FD ब्याज पर TDS कैसे काम करता है, इसके लिए FD पर TDS गाइड देखें।
  5. दस्तावेज़ एक फ़ोल्डर में: रेंट रसीद, निवेश प्रमाण, होम लोन सर्टिफ़िकेट — सब एक डिजिटल फ़ोल्डर में रखें।
  6. बोनस और गिफ़्ट का टैक्स समझें: दिवाली बोनस जैसी अतिरिक्त आय से टैक्स कैसे बदलता है, यह हमारी दिवाली बोनस टैक्स गाइड में पढ़ें।

अर्जुन ने क्या किया?

अर्जुन ने उसी हफ़्ते AIS और Form 16 डाउनलोड किए, पोर्टल पर बकाया टैक्स, ब्याज और ₹5,000 की लेट फ़ीस Self-Assessment Tax के रूप में भरी, और नवंबर की शुरुआत में ही belated return फ़ाइल करके आधार OTP से वेरिफ़ाई कर दिया। उन्होंने अपने फ़ोन में अगले साल के लिए 1 जुलाई का रिमाइंडर भी लगा लिया। उनका कहना है — “₹20,000 की यह सीख महँगी थी, पर ITR-U में 25% अतिरिक्त टैक्स या नोटिस से तो सस्ती ही रही।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. FY 2025-26 का belated ITR कब तक भर सकते हैं?

31 दिसंबर 2026 तक (या असेसमेंट पूरा होने तक, जो पहले हो)।

2. Belated ITR पर कितनी लेट फ़ीस लगती है?

आय ₹5 लाख तक हो तो अधिकतम ₹1,000, और ₹5 लाख से ज़्यादा हो तो ₹5,000 (Section 234F)। बकाया टैक्स पर 1% प्रति महीना ब्याज अलग से।

3. क्या belated return में पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन सकते हैं?

नौकरीपेशा (बिना कारोबारी आय) लोगों के लिए पुरानी व्यवस्था का विकल्प तय तारीख़ तक भरे रिटर्न में है। Belated return में आम तौर पर नई व्यवस्था ही लागू होती है।

4. मेरा टैक्स रिबेट से शून्य है, क्या फिर भी लेट फ़ीस लगेगी?

अगर आपकी आय बेसिक छूट सीमा से ज़्यादा थी और रिटर्न भरना अनिवार्य था, तो देर होने पर लेट फ़ीस लग सकती है, भले ही टैक्स शून्य हो।

5. क्या belated return में रिफ़ंड मिलेगा?

हाँ, रिफ़ंड मिलेगा, पर उस पर ब्याज रिटर्न भरने की तारीख़ से मिलेगा। 31 दिसंबर के बाद ITR-U में रिफ़ंड नहीं लिया जा सकता।

6. Revised return अब कब तक भर सकते हैं?

Finance Act 2026 के बाद AY 2026-27 के लिए 31 मार्च 2027 तक। 31 दिसंबर 2026 तक कोई फ़ीस नहीं; उसके बाद ₹1,000 या ₹5,000 (Section 234I)।

7. शेयर बाज़ार का घाटा belated return में आगे ले जा सकते हैं?

नहीं। कैपिटल लॉस और कारोबारी घाटा आगे ले जाने के लिए रिटर्न तय तारीख़ तक भरना ज़रूरी है। हाउस प्रॉपर्टी का घाटा belated return में भी आगे जा सकता है।

8. 31 दिसंबर के बाद क्या विकल्प है?

सिर्फ़ Updated Return (ITR-U), जिसमें 25% से 70% तक अतिरिक्त टैक्स लगता है और रिफ़ंड नहीं मिलता।

निष्कर्ष

अगर FY 2025-26 का ITR अभी तक नहीं भरा है, तो 31 दिसंबर 2026 को अपनी आख़िरी तारीख़ मानिए — और इंतज़ार मत कीजिए। हर महीने की देरी पर बकाया टैक्स का ब्याज बढ़ता है, और यह तारीख़ निकलते ही रिफ़ंड का रास्ता लगभग बंद हो जाता है और ITR-U का महँगा विकल्प ही बचता है। जिन्होंने रिटर्न भर दिया है और उसमें गलती है, वे भी 31 दिसंबर से पहले बिना फ़ीस revise कर लें। और अगले साल के लिए — जुलाई का रिमाइंडर अभी से लगा लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। तारीख़ें और नियम Income-tax Act 1961, Finance Act 2025/2026 और अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं; CBDT आगे बदलाव या स्पष्टीकरण जारी कर सकता है। उदाहरण में दिए गए टैक्स आँकड़े अनुमानित हैं और सिर्फ़ समझाने के लिए हैं — आपकी असल देनदारी आपकी आय, कटौतियों और TDS पर निर्भर करेगी। रिटर्न भरने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर ताज़ा जानकारी जाँचें और ज़रूरत हो तो किसी योग्य CA से सलाह लें।

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