शाम को ऑफिस से लौटते हुए ग्वालियर के संदीप अग्रवाल ने अपना म्यूचुअल फंड ऐप खोला। पांच साल पहले शुरू की गई SIP अब अच्छी रकम बन चुकी थी, और बेटी की हायर एजुकेशन के लिए पैसा निकालने का समय आ गया था। “Redeem” बटन दबाने से पहले उनके मन में एक ही सवाल था — इस पैसे पर टैक्स कितना कटेगा? यही सवाल आज हर उस निवेशक के मन में है जो 2026 में अपना Mutual Fund बेचने, SIP रोकने या पैसा निकालने की सोच रहा है।
जवाब सीधा नहीं है, क्योंकि Mutual Fund पर Capital Gains Tax इस बात पर निर्भर करता है कि फंड किस तरह का है (Equity, Debt या कोई और), यूनिट कब खरीदी गई थी और कितने समय बाद बेची जा रही है। इस गाइड में हम Equity Mutual Fund, Debt/Specified Mutual Fund, Gold-International-Hybrid Fund — सभी पर 2026 में लागू LTCG और STCG के नियम, असली उदाहरणों के साथ, आसान हिंदी में समझेंगे।
ध्यान दें: यह जानकारी शिक्षा के मकसद से दी जा रही है, यह निवेश या टैक्स सलाह नहीं है। अंतिम फैसला लेने से पहले नीचे दिया गया डिस्क्लेमर ज़रूर पढ़ें।
Mutual Fund पर Tax कब और कैसे लगता है?
सबसे पहली बात समझ लें — जब तक आप अपने Mutual Fund के यूनिट्स बेचते (Redeem करते) नहीं हैं, तब तक उस पर कोई टैक्स नहीं लगता, भले ही आपके निवेश की वैल्यू कितनी भी बढ़ जाए। टैक्स की देनदारी सिर्फ तीन मौकों पर बनती है:
- जब आप यूनिट्स को पूरा या आंशिक रूप से Redeem (बेचते) करते हैं।
- जब आप एक फंड से दूसरे फंड में Switch करते हैं — यह भी कानूनी तौर पर “बिक्री” माना जाता है।
- जब आपके फंड से Dividend या IDCW (Income Distribution cum Capital Withdrawal) के रूप में पैसा मिलता है — इस पर अलग तरह का टैक्स लगता है, जिसकी चर्चा आगे करेंगे।
Redeem करने पर जो मुनाफा (Capital Gain) बनता है, उसे टैक्स के हिसाब से दो हिस्सों में बांटा जाता है — Short Term Capital Gains (STCG) और Long Term Capital Gains (LTCG)। लेकिन “Short Term” और “Long Term” की परिभाषा हर फंड के लिए एक जैसी नहीं है — यही सबसे बड़ी गलतफहमी की वजह बनती है।

Equity Mutual Fund पर Tax के नियम 2026
Equity Mutual Fund वे फंड होते हैं जो अपने कुल पैसे का कम से कम 65% हिस्सा भारतीय शेयर बाजार (Listed Equity Shares) में लगाते हैं — जैसे Large Cap, Mid Cap, Small Cap, Flexi Cap, ELSS और ज़्यादातर Index Fund। इन पर टैक्स की शर्त यह भी है कि फंड पर Securities Transaction Tax (STT) चुकाया गया हो, जो आमतौर पर हर रिडेम्पशन पर अपने आप कट जाता है।
होल्डिंग पीरियड: Long Term vs Short Term
Equity Mutual Fund के लिए नियम सीधा है — यूनिट खरीदने की तारीख से अगर 12 महीने से ज़्यादा समय बीत गया है, तो वह Long Term माना जाएगा। 12 महीने या उससे कम में बेचने पर वह Short Term होगा।
LTCG Rate और ₹1.25 लाख की छूट
23 जुलाई 2024 से लागू नियम के मुताबिक, Equity Mutual Fund पर Long Term Capital Gains की दर 12.5% है (पहले यह 10% थी)। लेकिन अच्छी खबर यह है कि हर वित्त वर्ष में ₹1,25,000 तक का LTCG पूरी तरह टैक्स-फ्री रहता है — यह छूट हर निवेशक को अलग से मिलती है, चाहे उसके कितने भी Equity Fund हों। यानी टैक्स सिर्फ ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर ही लगेगा। बजट 2026 में इस दर और छूट में कोई बदलाव नहीं किया गया — यह FY 2026-27 के लिए भी यही बनी हुई है।
STCG Rate 20%
अगर Equity Mutual Fund को 12 महीने के अंदर ही बेच दिया जाए, तो होने वाले मुनाफे पर 20% Short Term Capital Gains Tax लगता है (जुलाई 2024 से पहले यह 15% था)। इसमें कोई छूट नहीं मिलती — पहले रुपये से ही टैक्स लागू हो जाता है, और ऊपर से लागू Cess अलग से जुड़ता है।
| फंड टाइप | होल्डिंग पीरियड | टैक्स की दर | छूट |
|---|---|---|---|
| Equity Mutual Fund | 12 महीने से ज़्यादा (LTCG) | 12.5% | ₹1,25,000 प्रति वित्त वर्ष |
| Equity Mutual Fund | 12 महीने या कम (STCG) | 20% | कोई छूट नहीं |
Debt और Specified Mutual Fund पर Tax के नियम
जो फंड अपने कुल पैसे का 65% या उससे ज़्यादा हिस्सा Debt और Money Market Instruments (जैसे सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड, Treasury Bills) में लगाते हैं, उन्हें Income Tax कानून में “Specified Mutual Fund” कहा जाता है। इसमें ज़्यादातर Liquid Fund, Short Duration Fund, Corporate Bond Fund और Gilt Fund शामिल हैं।
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए यूनिट्स का नियम
Finance Act 2023 में जोड़ी गई Section 50AA के तहत, अगर आपने किसी Specified Mutual Fund के यूनिट्स 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे हैं, तो उन्हें बेचने पर होने वाला मुनाफा — चाहे आपने उन्हें कितने भी साल रखा हो — हमेशा Short Term Capital Gains ही माना जाएगा। इस पर आपकी आमदनी के हिसाब से लागू Income Tax Slab Rate के मुताबिक टैक्स लगता है, यानी अगर आप 30% वाले टैक्स स्लैब में हैं, तो गेन पर लगभग 30% टैक्स (plus Cess) चुकाना होगा।
पुराने (1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदे) यूनिट्स का क्या होगा?
अगर आपके पास 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदे गए Debt Fund यूनिट्स अभी भी हैं, तो उनका टैक्स ट्रीटमेंट थोड़ा अलग और केस-बाय-केस हो सकता है, क्योंकि बीच में इंडेक्सेशन के नियम भी बदले हैं। ऐसे पुराने यूनिट्स बेचने से पहले अपनी एनुअल स्टेटमेंट में Purchase Date ज़रूर चेक करें और किसी CA से इसकी पुष्टि कर लें — यहाँ अंदाज़ा लगाने की बजाय सही जानकारी लेना बेहतर है।
Indexation Benefit अब क्यों नहीं मिलता?
पहले Debt Fund को 3 साल से ज़्यादा रखने पर Indexation (महंगाई के हिसाब से खरीद कीमत बढ़ाकर टैक्स कम करने की सुविधा) का फायदा मिलता था। लेकिन 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए यूनिट्स के लिए यह सुविधा पूरी तरह हटा दी गई है — अब टैक्स सीधे स्लैब रेट पर लगता है, चाहे आपने फंड को 1 साल रखा हो या 10 साल।
| फंड टाइप | खरीद की तारीख | टैक्स ट्रीटमेंट |
|---|---|---|
| Debt / Specified Mutual Fund | 1 अप्रैल 2023 या बाद में | हमेशा Short Term, Slab Rate पर टैक्स, कोई Indexation नहीं |
| Debt / Specified Mutual Fund | 1 अप्रैल 2023 से पहले | Purchase Date के हिसाब से अलग नियम — CA से पुष्टि करें |

Gold, International और Hybrid Fund पर Tax कैसे तय होता है?
जो फंड न तो 65% Equity में लगाते हैं और न ही 65% Debt में — जैसे Gold ETF, Gold Fund of Funds, International Equity Fund (US Stocks में निवेश करने वाले) और कई Multi-Asset/Hybrid Fund — उन्हें “Other Mutual Fund” की श्रेणी में रखा जाता है। 1 अप्रैल 2025 से इन पर नियम इस तरह लागू है:
- यूनिट 24 महीने से ज़्यादा रखने पर Long Term माना जाता है और उस पर 12.5% टैक्स बिना Indexation के लगता है।
- 24 महीने या उससे कम रखने पर Short Term माना जाता है और उस पर Income Tax Slab Rate से टैक्स लगता है।
- इन फंड्स पर Equity Fund वाली ₹1,25,000 की छूट लागू नहीं होती।
अगर आपके पास Gold Fund, International Fund या Multi-Asset Fund है, तो यह जरूर चेक कर लें कि आपका फंड किस कैटेगरी में आता है — फंड हाउस की वेबसाइट पर Scheme Information Document (SID) में Asset Allocation साफ दिया होता है। जब शक हो, Fund House की Customer Care या अपने CA से कन्फर्म करें, क्योंकि गलत कैटेगरी मानने पर टैक्स कैलकुलेशन गलत हो सकती है।
Mutual Fund Dividend (IDCW) पर TDS का नियम
अगर आपने Dividend/IDCW Option चुना है और आपका किसी एक फंड हाउस से मिलने वाला डिविडेंड एक वित्त वर्ष में ₹10,000 से ज़्यादा हो जाता है, तो फंड हाउस भुगतान करते समय 10% TDS काट लेता है (यह नियम पहले Section 194K के नाम से जाना जाता था और 1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income-tax Act में Section 393(1) के तहत आता है)। ₹10,000 तक के डिविडेंड पर कोई TDS नहीं कटता। ध्यान रहे — डिविडेंड पर कटा TDS आपकी फाइनल टैक्स देनदारी नहीं है; यह सिर्फ एडवांस कटौती है और डिविडेंड की पूरी रकम आपकी “Income from Other Sources” में जुड़कर स्लैब रेट से टैक्स होगी। ITR भरते समय यह कटा हुआ TDS आपके कुल टैक्स से Adjust हो जाता है।
वर्कड उदाहरण: असली नंबरों के साथ समझें
लखनऊ की प्रिया शर्मा ने 4 साल पहले एक Equity Mutual Fund में कुल ₹3,00,000 का निवेश किया था (SIP और Lumpsum मिलाकर)। अभी Redeem करने पर उन्हें ₹4,50,000 मिल रहे हैं। मान लीजिए सभी यूनिट्स 12 महीने से ज़्यादा पुरानी हैं:
- कुल मुनाफा (Capital Gain) = ₹4,50,000 − ₹3,00,000 = ₹1,50,000
- टैक्स-फ्री छूट = ₹1,25,000
- टैक्स योग्य LTCG = ₹1,50,000 − ₹1,25,000 = ₹25,000
- टैक्स @12.5% = ₹3,125 (plus लागू Cess)
अब मान लीजिए प्रिया ने इसी तरह का एक और फंड सिर्फ 8 महीने पहले ₹2,00,000 में खरीदा था और आज ₹2,30,000 में बेच रही हैं (यानी Short Term):
- मुनाफा = ₹2,30,000 − ₹2,00,000 = ₹30,000
- इस पर कोई छूट नहीं — टैक्स @20% = ₹6,000
अब एक Debt Fund का उदाहरण लें — दिल्ली के रोहन मेहता ने 1 अप्रैल 2023 के बाद ₹5,00,000 का एक Corporate Bond Fund खरीदा था, जिसे अब ₹5,60,000 में बेचा जा रहा है और रोहन 30% टैक्स स्लैब में आते हैं:
- मुनाफा = ₹5,60,000 − ₹5,00,000 = ₹60,000 — यह हमेशा Short Term माना जाएगा
- टैक्स @30% + 4% Cess (यानी effectively 31.2%) = लगभग ₹18,720
यह उदाहरण साफ दिखाता है कि एक जैसा मुनाफा होने पर भी Equity और Debt Fund पर टैक्स में कितना बड़ा फर्क आ सकता है — इसीलिए रिडेम्पशन से पहले फंड टाइप और होल्डिंग पीरियड दोनों चेक करना जरूरी है।

SIP से Redeem करते समय टैक्स बचाने के व्यावहारिक तरीके
| तरीका | कैसे काम करता है |
|---|---|
| हर साल ₹1.25 लाख की छूट का इस्तेमाल | पूरा फंड एक साथ न बेचकर, हर वित्त वर्ष में ज़रूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा Redeem करें ताकि LTCG छूट की सीमा का भरपूर फायदा मिले। |
| SIP की FIFO गिनती समझें | SIP में हर महीने की किस्त अलग यूनिट मानी जाती है (First In First Out)। Redeem करते समय सबसे पहले खरीदी गई यूनिट्स ही सबसे पहले बिकती हैं — इसलिए होल्डिंग पीरियड अलग-अलग किस्तों के लिए अलग हो सकता है। |
| Tax-Loss Harvesting | जिस फंड में नुकसान हो रहा है, उसे भी उसी साल बेचकर Capital Loss बुक करें — यह उसी साल के Capital Gain के साथ Set-off हो सकता है। |
| STP (Systematic Transfer Plan) का इस्तेमाल | बड़ी रकम एक साथ Equity में डालने के बजाय SIP/STP से धीरे-धीरे ट्रांसफर करने पर होल्डिंग पीरियड ट्रैक करना और टैक्स प्लानिंग करना आसान हो जाता है। |
इनमें से कोई भी तरीका अपनाने से पहले यह ध्यान रखें कि टैक्स बचाने के नाम पर अपनी जरूरत या फाइनेंशियल गोल से समझौता न करें — टैक्स प्लानिंग हमेशा गोल-बेस्ड निवेश के बाद ही आनी चाहिए।
Capital Gains को ITR में कैसे दिखाएं?
Mutual Fund से हुए Capital Gains को ITR-1 में नहीं दिखाया जा सकता — इसके लिए ITR-2 (अगर सैलरी/पेंशन के साथ कैपिटल गेन है और बिजनेस इनकम नहीं है) या ITR-3 (अगर बिजनेस/प्रोफेशन की इनकम भी है) भरना होता है। इसमें Schedule CG के तहत Equity और Debt Fund के गेन अलग-अलग दिखाए जाते हैं। रिटर्न भरने से पहले यह जरूर करें:
- अपने Mutual Fund की Capital Gains Statement हर फंड हाउस/RTA (CAMS, KFintech) की वेबसाइट से डाउनलोड करें।
- Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) में दिखाए गए Mutual Fund ट्रांजैक्शन से अपनी स्टेटमेंट मिलाकर चेक करें, कहीं कोई अंतर तो नहीं है।
- Dividend पर कटा TDS भी AIS में दिखेगा — इसे ITR में सही जगह क्लेम करें।
- अगर किसी साल Capital Loss हुआ है और उसे आगे के सालों में Carry Forward करना है, तो ITR Due Date के अंदर रिटर्न फाइल करना ज़रूरी है, वरना यह सुविधा नहीं मिलेगी।
किसे Mutual Fund टैक्स की ज़्यादा चिंता करनी चाहिए, किसे नहीं?
| स्थिति | ज़्यादा चिंता ज़रूरी? | वजह |
|---|---|---|
| सिर्फ Equity Fund में SIP, सालाना गेन ₹1.25 लाख से कम | नहीं | पूरा गेन टैक्स-फ्री छूट में आ जाता है |
| बड़ा Lumpsum Equity गेन या बार-बार Short Term Redemption | हाँ | 20% STCG और छूट से ऊपर LTCG टैक्स असर डाल सकता है |
| Liquid/Debt Fund में पार्किंग, बार-बार इन-आउट | हाँ | हर गेन Slab Rate पर टैक्स होता है, छूट नहीं मिलती |
| 30% टैक्स स्लैब में Debt Fund का बड़ा निवेश | हाँ | इंडेक्सेशन न होने से टैक्स आउटगो काफी बढ़ सकता है |
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FAQ: Mutual Fund Capital Gains Tax से जुड़े सवाल
Q1. Mutual Fund बेचने पर 2026 में कितना टैक्स लगता है?
यह फंड के टाइप पर निर्भर करता है। Equity Fund पर 12 महीने से ज़्यादा रखने पर 12.5% (₹1.25 लाख की छूट के साथ), और 12 महीने से कम रखने पर 20% टैक्स लगता है। Debt/Specified Fund (2023 के बाद खरीदे) पर हमेशा आपकी Income Tax Slab Rate से टैक्स लगता है।
Q2. Equity Mutual Fund पर LTCG छूट कितनी है?
हर वित्त वर्ष में ₹1,25,000 तक का Long Term Capital Gain Equity Fund पर पूरी तरह टैक्स-फ्री है। इससे ऊपर के गेन पर ही 12.5% टैक्स लगता है।
Q3. SIP के हर इंस्टॉलमेंट पर होल्डिंग पीरियड कैसे गिना जाता है?
हर महीने की SIP किस्त को अलग यूनिट खरीद माना जाता है, इसलिए हर किस्त की होल्डिंग पीरियड उसकी अपनी खरीद तारीख से गिनी जाती है, पूरी SIP की शुरुआत की तारीख से नहीं।
Q4. Debt Mutual Fund पर इंडेक्सेशन का फायदा अब क्यों नहीं मिलता?
Finance Act 2023 के बाद 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए Specified Mutual Fund (Debt Fund) के यूनिट्स पर इंडेक्सेशन की सुविधा हटा दी गई है। अब ऐसे गेन हमेशा Short Term माने जाते हैं और Slab Rate पर टैक्स लगता है।
Q5. Mutual Fund के Dividend पर TDS कटता है क्या?
हाँ, अगर एक फंड हाउस से मिलने वाला डिविडेंड एक वित्त वर्ष में ₹10,000 से ज़्यादा हो, तो 10% TDS कटता है। यह आपकी फाइनल टैक्स देनदारी नहीं है, बल्कि ITR भरते समय एडजस्ट होने वाली एडवांस कटौती है।
Q6. Mutual Fund का Capital Gain ITR के किस फॉर्म में दिखाना होता है?
Capital Gain दिखाने के लिए ITR-1 काम नहीं करता — सैलरी/पेंशन के साथ कैपिटल गेन होने पर ITR-2 और बिजनेस/प्रोफेशन इनकम होने पर ITR-3 भरना होता है, जिसमें Schedule CG के तहत गेन की डिटेल भरी जाती है।
Q7. Mutual Fund में हुए नुकसान को Set-off कैसे करें?
Short Term Capital Loss को किसी भी Capital Gain (Short या Long Term) से Set-off किया जा सकता है। Long Term Capital Loss केवल Long Term Capital Gain से ही Set-off होता है। बचे हुए नुकसान को समय पर ITR फाइल करने पर अगले 8 सालों तक Carry Forward किया जा सकता है।
Q8. नए Income Tax Act 2025 से Mutual Fund टैक्स के नियम बदल गए क्या?
1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income-tax Act, 2025 में मुख्य रूप से Section Numbers और भाषा को आसान बनाया गया है। Capital Gains की दरें, छूट की सीमा और होल्डिंग पीरियड के नियम वही बने हुए हैं, जो Finance Act 2024 के बाद से लागू हैं — बजट 2026 में भी इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

निष्कर्ष
Mutual Fund पर टैक्स की सबसे बड़ी सीख यह है कि “एक टैक्स रेट सभी के लिए” जैसा कुछ नहीं है — Equity, Debt, Gold और International Fund, सभी के लिए अलग नियम हैं, और होल्डिंग पीरियड से लेकर खरीद की तारीख तक हर चीज़ फर्क डालती है। Redeem करने से पहले अपने फंड की कैटेगरी, यूनिट्स की खरीद तारीख और सालाना LTCG छूट का हिसाब ज़रूर लगा लें। थोड़ी सी प्लानिंग — जैसे हर साल छूट की सीमा का इस्तेमाल करना या नुकसान वाले फंड को समय पर बुक करना — आपके टैक्स बिल को काफी हल्का कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है। यह निवेश सलाह, टैक्स सलाह या किसी भी तरह की पेशेवर सलाह नहीं है। Mutual Fund में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। टैक्स के नियम और दरें समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले नवीनतम नियमों की पुष्टि इनकम टैक्स विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से करें और अपने CA या रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह लें।
