पिछले हफ्ते पुणे के रहने वाले संजय कुलकर्णी अपनी ₹8 लाख की FD रिन्यू करने बैंक ब्रांच गए। वहां रिलेशनशिप मैनेजर ने बताया कि पिछली बार जो 1 साल की FD पर 6% मिला था, अब उससे ज़्यादा मिल सकता है — क्योंकि RBI ने हाल ही में रेपो रेट बढ़ाया है और डिपॉज़िट रेट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। संजय को समझ नहीं आया कि आख़िर बदला क्या है, और क्या उन्हें अभी FD बुक कर लेनी चाहिए या कुछ और इंतज़ार करना चाहिए। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो यह गाइड आपके लिए है।
सीधी बात: Reserve Bank of India (RBI) ने 9 अक्टूबर 2026 को हुई Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक में Repo Rate को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया और अपना स्टांस “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” की तरफ शिफ्ट किया। इसके अलावा, 1 अक्टूबर 2026 से RBI के डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट से जुड़े नए नियम — Commercial Banks (Interest Rate on Deposits) Second Amendment Directions, 2026 — भी लागू हो गए हैं, जो बैंकों को FD रेट तय करने और दिखाने के तरीके में पारदर्शिता लाते हैं। इस लेख में हम दोनों बदलावों को आसान भाषा में समझेंगे, बड़े बैंकों की ताज़ा FD दरें देखेंगे, TDS के मौजूदा नियम समझेंगे और कुछ प्रैक्टिकल उदाहरणों से यह तय करने में मदद करेंगे कि आपको FD में पैसा कब और कैसे लगाना चाहिए।

RBI के Repo Rate Hike और नए Deposit Rules में क्या बदला?
अक्टूबर 2026 में दो अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े हुए बदलाव हुए हैं — एक मॉनिटरी पॉलिसी (ब्याज दरों की दिशा) से जुड़ा है, और दूसरा बैंकों के डिपॉज़िट प्रोडक्ट्स को रेगुलेट करने के तरीके से। दोनों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है, ताकि कन्फ्यूज़न न हो।
1. Repo Rate 5.50% — FD Rates पर इसका असर
RBI की MPC ने महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अक्टूबर 2026 की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) बढ़ाकर 5.50% कर दिया और अपनी नीति को “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” का नाम दिया — यानी आगे भी ज़रूरत पड़ने पर दरें बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन सावधानी से। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब यह दर बढ़ती है, तो बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो जाता है, जिसकी भरपाई के लिए वे अक्सर दो काम करते हैं — लोन की EMI बढ़ाते हैं, और डिपॉज़िटर्स को ज़्यादा पैसा जुटाने के लिए FD रेट भी बढ़ाते हैं। (लोन EMI पर इसके असर की पूरी जानकारी हमारे रेपो रेट और होम लोन EMI गाइड में है।)
हालांकि, यहां एक ज़रूरी बात समझनी होगी — रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक अगले ही दिन अपनी FD दरें बढ़ा देगा। बैंकों के पास पहले से काफी लिक्विडिटी हो तो वे रेट बढ़ाने में देरी भी कर सकते हैं। दरअसल, SBI के चेयरमैन ने हाल ही में यह संकेत भी दिया है कि बैंक आगे 2-3 महीनों तक डिपॉज़िट रेट में बड़ा बदलाव नहीं कर सकते, भले ही अलग-अलग बैंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से अपनी दरें बदलते रहें।
2. RBI के नए Deposit Interest Rules (1 अक्टूबर 2026 से लागू)
यह बदलाव FD रेट को सीधे बढ़ाता या घटाता नहीं, बल्कि यह तय करता है कि बैंक अपनी दरें किस तरह से तय करें और ग्राहकों को दिखाएं। RBI के Commercial Banks (Interest Rate on Deposits) Second Amendment Directions, 2026 के मुताबिक मुख्य बदलाव ये हैं:
- एक जैसी दर, सभी ब्रांच में: अगर आप और कोई दूसरा ग्राहक एक ही दिन, एक ही बैंक की अलग-अलग ब्रांच में, एक जैसी रकम और अवधि की FD खोलते हैं, तो दोनों को एक जैसी ही ब्याज दर मिलनी चाहिए। कोई भी ब्रांच मैनेजर अपनी तरफ से अलग रेट ऑफर नहीं कर सकता।
- पहले से प्रकाशित रेट शेड्यूल: बैंकों को अपनी वेबसाइट पर डिपॉज़िट रेट का शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगा, और ग्राहकों को सिर्फ वही दर मिलेगी जो पहले से पब्लिश है — कोई “अनऑफिशियल” या बातचीत से तय हुई दर नहीं।
- बल्क डिपॉज़िट की अलग व्यवस्था: शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों (RRB को छोड़कर) और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए आमतौर पर ₹3 करोड़ या उससे ज़्यादा की सिंगल रुपी टर्म डिपॉज़िट को “बल्क डिपॉज़िट” माना जाता है। बैंक इन बड़ी डिपॉज़िट पर Liquidity Coverage Ratio (LCR) के रन-ऑफ रेट्स के आधार पर अलग (फ्लेक्सिबल) ब्याज दर तय कर सकते हैं, लेकिन उन्हें यह दर हर कामकाजी दिन सुबह 10:00 बजे तक पब्लिश करनी होगी, जिसमें 10:10 बजे तक की ग्रेस अवधि मिलती है। यही छूट NRI के रुपी डिपॉज़िट पर भी लागू होती है।
- किसे लागू होता है: ये नियम कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों पर लागू होते हैं।
आम निवेशक (जिसकी FD ₹3 करोड़ से कम है) के लिए सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता का है — अब आप किसी भी बैंक की वेबसाइट पर जाकर पब्लिश्ड रेट शेड्यूल देख सकते हैं और भरोसे से तुलना कर सकते हैं, बिना यह डर रखे कि किसी और ग्राहक को उसी दिन, उसी रकम पर कहीं बेहतर डील मिल गई होगी। मौजूदा (पहले से चल रही) FD की दर और शर्तें इस बदलाव से प्रभावित नहीं होती — वे अपने मूल कॉन्ट्रैक्ट पर ही चलती रहेंगी।

Top बैंकों की ताज़ा FD Interest Rates (अक्टूबर 2026)
रेपो रेट हाइक के बाद बड़े बैंकों ने अपनी FD दरों को रिवाइज़ किया है। नीचे दी गई टेबल में ₹3 करोड़ से कम की सामान्य (जनरल पब्लिक) FD पर मौजूदा दरें दिखाई गई हैं। ध्यान रखें कि दरें बैंक-दर-बैंक और समय-समय पर बदलती रहती हैं, इसलिए बुकिंग से पहले हमेशा संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश्ड रेट शेड्यूल ज़रूर चेक करें।
| अवधि (Tenure) | HDFC Bank | ICICI Bank | PNB | Bank of Baroda |
|---|---|---|---|---|
| 7-45 दिन | 2.75% | 2.75% | 3.00% | 3.50% |
| 46-90 दिन | 4.25% | 4.00% | 4.50% | 5.00% |
| 91-180/184 दिन | 4.25% | 4.50% | 4.90% | 5.00% |
| ~6 महीने से 1 साल से कम | 5.50% – 5.75% | 5.50% | 5.60% – 6.25% | 5.50% – 6.00% |
| 1 साल | 6.25% | 6.25% | 6.25% | 6.25% |
| 1-2 साल | 6.45% तक | 6.30% तक | 6.60% तक | 6.25% तक |
| 2-3 साल | 6.45% | 6.45% | 6.30% – 6.50% | 6.25% |
| 3-5 साल | 6.50% | 6.50% | 6.30% – 6.35% | 6.30% |
| 5-10 साल | 6.15% | 6.50% | 6.00% | 6.00% |
इन चार बैंकों में, लगभग हर टेन्योर में 1 साल की FD पर 6.25% का रेट एक जैसा दिख रहा है, लेकिन 1-5 साल के बीच की दरों में थोड़ा अंतर है। कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक (जैसे Suryoday और Utkarsh) सामान्य ग्राहकों को 8% से ज़्यादा तक की दरें भी दे रहे हैं, लेकिन ऐसे बैंकों में पैसा लगाने से पहले उनकी क्रेडिट रेटिंग और DICGC इंश्योरेंस कवरेज (₹5 लाख प्रति डिपॉज़िटर प्रति बैंक) ज़रूर समझ लें — ज़्यादा रेट का मतलब अक्सर ज़्यादा जोखिम भी होता है।
सीनियर सिटीज़न को मिलने वाली Extra दर
सीनियर सिटीज़न को आमतौर पर 0.25% से 0.50% ज़्यादा ब्याज मिलता है, और कुछ खास (“स्पेशल”) टेन्योर पर यह फ़र्क़ और बड़ा हो जाता है:
| बैंक | सीनियर सिटीज़न की बेस्ट दर | किस टेन्योर पर |
|---|---|---|
| HDFC Bank | 7.10% | 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम तक |
| ICICI Bank | 7.10% | 3 साल 1 दिन से 5 साल (5 साल का Tax Saver FD भी शामिल) |
| PNB | 7.10% (सुपर सीनियर को 7.40%) | 444 दिन की स्पेशल स्कीम |
| Bank of Baroda | 7.25% (सुपर सीनियर को 7.35%) | 555 दिन की “Golden Goal” स्कीम |
अगर घर में कोई सीनियर सिटीज़न है, तो उनके नाम से FD खोलने पर यह एक्स्ट्रा रेट अपने आप मिल जाता है — इसके लिए बैंक में अलग से कोई फॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं होती, सिर्फ उम्र का प्रूफ (आधार/PAN) चाहिए। अगर कोई FD जॉइंट है और पहला होल्डर (first holder) सीनियर सिटीज़न है, तो भी कई बैंक यह बेनिफिट देते हैं — बुकिंग के समय अपनी ब्रांच से इसकी पुष्टि कर लें।
FD पर TDS के मौजूदा नियम — कब कटेगा, कितना कटेगा?
FD से मिलने वाला ब्याज “Income from Other Sources” में आता है और आपकी स्लैब दर के हिसाब से टैक्सेबल होता है। बैंक इस पर खुद TDS (Tax Deducted at Source) काटते हैं, लेकिन एक तय सीमा तक की ब्याज राशि पर कोई TDS नहीं कटता। नया Income-tax Act, 2025 लागू होने के बाद, यह प्रावधान अब पुराने Section 194A की जगह Section 393(1) के तहत आता है, हालांकि डिडक्शन की दरें इस रीनंबरिंग से नहीं बदली हैं। (FD और सेविंग्स अकाउंट TDS से जुड़े बाकी नियमों — जैसे Form 121 और 15G/15H — की पूरी जानकारी हमारी FD TDS के नए नियम वाली गाइड में है।)
- सामान्य (60 साल से कम) डिपॉज़िटर: एक वित्त वर्ष में एक बैंक से कुल FD ब्याज ₹50,000 से ज़्यादा होने पर TDS कटता है।
- सीनियर सिटीज़न (60 साल और उससे ऊपर): यह सीमा ₹1,00,000 प्रति वित्त वर्ष है।
- TDS की दर: वैलिड PAN दिया हो तो 10%, PAN न हो या अमान्य हो तो 20%। ध्यान दें — सीमा पार होने पर TDS सिर्फ़ ऊपर के हिस्से पर नहीं, पूरी ब्याज राशि पर कटता है।
- अगर आपकी कुल टैक्सेबल इनकम बेसिक एग्ज़ेम्पशन लिमिट से कम है, तो आप Form 15G (60 साल से कम) या Form 15H (सीनियर सिटीज़न) जमा कर TDS कटने से बचा सकते हैं।
उदाहरण 1 — सीनियर सिटीज़न की FD पर TDS (python से कैलकुलेट)
मान लीजिए वाराणसी के रिटायर्ड शिक्षक राधेश्याम मिश्रा (उदाहरण के लिए नाम, सीनियर सिटीज़न) ने एक बैंक में ₹16,00,000 की 1 साल की FD, 6.75% सीनियर सिटीज़न दर पर, तिमाही चक्रवृद्धि (quarterly compounding) के साथ बुक की है:
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| मूल राशि (Principal) | 16,00,000 |
| ब्याज दर (सीनियर सिटीज़न, 1 साल) | 6.75% प्रति वर्ष |
| 1 साल बाद मैच्योरिटी राशि | लगभग 17,10,765 |
| कुल ब्याज | लगभग 1,10,765 |
| सीनियर सिटीज़न TDS सीमा | 1,00,000 |
| सीमा पार? | हां |
| TDS @10% (PAN लिंक्ड) | लगभग 11,076 |
| TDS के बाद मिलने वाला ब्याज | लगभग 99,688 |
नोट: यह सिर्फ एक उदाहरण है — असली ब्याज दर, कंपाउंडिंग का तरीका (तिमाही/मासिक/सालाना) और FD की सही शर्तें बैंक और स्कीम के हिसाब से अलग हो सकती हैं। अगर राधेश्याम की कुल इनकम बेसिक एग्ज़ेम्पशन लिमिट से कम होती और उन्होंने Form 15H जमा कर दिया होता, तो यह ₹11,076 का TDS नहीं कटता — हालांकि ब्याज फिर भी उनकी ITR में दिखाना और उस पर लागू टैक्स (अगर कोई हो) चुकाना ज़रूरी रहता।
उदाहरण 2 — एक ही बैंक में दो FD होने पर TDS (python से कैलकुलेट)
ग्वालियर के रमेश यादव (उदाहरण के लिए नाम, 45 साल, सामान्य डिपॉज़िटर) की एक ही बैंक में दो अलग-अलग FD हैं — ₹6,00,000 और ₹4,00,000, दोनों 1 साल के लिए 6.25% साधारण ब्याज (simple interest, सालाना पेआउट) पर:
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| FD 1 (₹6,00,000) पर ब्याज | 37,500 |
| FD 2 (₹4,00,000) पर ब्याज | 25,000 |
| कुल ब्याज (एक ही बैंक से) | 62,500 |
| सामान्य डिपॉज़िटर TDS सीमा | 50,000 |
| सीमा पार? | हां |
| TDS @10% (PAN लिंक्ड) | 6,250 |
| TDS के बाद मिलने वाला ब्याज | 56,250 |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि TDS की सीमा हर बैंक के लिए अलग-अलग जोड़ी जाती है, पूरे देश में सभी बैंकों को मिलाकर नहीं। यानी अगर रमेश की ₹6,00,000 और ₹4,00,000 की FD दो अलग-अलग बैंकों में होती, तो किसी एक बैंक में भी ब्याज ₹50,000 के पार न जाता, और TDS नहीं कटता — भले ही कुल ब्याज वही ₹62,500 रहता। इसी वजह से कुछ लोग जानबूझकर अपनी FD अलग-अलग बैंकों में बांट देते हैं, हालांकि इससे टैक्स की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती — ITR में पूरी ब्याज आय दिखाना फिर भी ज़रूरी है, सिर्फ TDS कटने में फ़र्क़ पड़ता है।

FD Laddering — एक साथ अच्छी दर और लिक्विडिटी पाने का तरीका
बहुत से लोग पूरा पैसा एक ही FD में, एक ही टेन्योर पर लॉक कर देते हैं, जिससे अगर बीच में पैसों की ज़रूरत पड़े तो प्रीमैच्योर विड्रॉल पेनल्टी देनी पड़ती है। इसका एक आसान हल है — FD Laddering, यानी अपनी रकम को अलग-अलग अवधि की कई छोटी FD में बांट देना।
उदाहरण — ₹10,00,000 की Laddering (सिर्फ उदाहरण के लिए मानी गई रकम)
मान लीजिए नागपुर की सुनीता जोशी (उदाहरण के लिए नाम) के पास ₹10,00,000 की एकमुश्त रकम है, जिसे वे FD में लगाना चाहती हैं लेकिन आगे पैसों की ज़रूरत पड़ने की भी थोड़ी चिंता है। वे अपनी रकम इस तरह बांट सकती हैं:
| FD का हिस्सा | रकम (₹) | मकसद |
|---|---|---|
| 91 दिन की FD | 1,50,000 | इमरजेंसी लिक्विडिटी — जल्दी भुनाई जा सकती है |
| 1 साल की FD | 3,00,000 | बैलेंस्ड रेट, साल भर में फिर से रिन्यू/री-इनवेस्ट का मौका |
| 2 साल की FD | 3,00,000 | थोड़ी बेहतर दर, मीडियम-टर्म गोल के लिए |
| 3 साल की FD | 2,50,000 | सबसे अच्छी दर में से एक, लॉन्ग-टर्म सेविंग |
इस तरह बांटने से अगर अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ती है, तो पूरी रकम एक साथ नहीं तोड़नी पड़ती — सिर्फ जिस हिस्से की ज़रूरत है, उसी FD को भुनाया जा सकता है, और बाकी पैसा अपनी दर पर बढ़ता रहता है। साथ ही, हर साल कोई न कोई FD मैच्योर होती रहती है, जिससे आप मौजूदा ब्याज दरों के हिसाब से फिर से निवेश का फ़ैसला ले सकते हैं — अगर आगे रेट और बढ़ें, तो आपको ज़्यादा दर पर री-इनवेस्ट करने का मौका मिलता रहेगा।
FD में निवेश किसे करना चाहिए, किसे नहीं?
| FD कब सही विकल्प है | FD कब सही विकल्प नहीं है |
|---|---|
| इमरजेंसी फंड या शॉर्ट-टर्म गोल (1-3 साल) के लिए पैसा चाहिए | लॉन्ग-टर्म गोल (10+ साल) के लिए, जहां महंगाई को बीट करने के लिए ज़्यादा रिटर्न चाहिए |
| रिस्क बिलकुल नहीं लेना चाहते, पूंजी की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है | सिर्फ टैक्स बचाना मुख्य मकसद है और 80C सीमा अभी खाली है (तो 5-साल Tax Saver FD, PPF या ELSS भी देखें) |
| सीनियर सिटीज़न हैं और नियमित, पक्की इनकम चाहिए | इनकम स्लैब ऊँची है और ब्याज पर टैक्स का बड़ा हिस्सा कट जाता है (ऐसे में डेट म्यूचुअल फंड या अन्य विकल्प देख सकते हैं) |
| रिटायरमेंट के पैसों का एक हिस्सा स्टेबल रखना है | पूरा पोर्टफोलियो सिर्फ FD में है, कोई इक्विटी/ग्रोथ एक्सपोज़र नहीं (संतुलन बिगड़ सकता है) |
सीनियर सिटीज़न के लिए FD के अलावा Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) भी एक विकल्प है, जो सरकार समर्थित है और अक्सर FD से बेहतर या बराबर दर देती है, हालांकि उसमें निवेश की अधिकतम सीमा और लॉक-इन की अपनी शर्तें हैं। PPF के मुकाबले FD कैसी है, यह हमारी PPF vs FD कंपैरिज़न गाइड में विस्तार से समझाया गया है।

FD बुक करने से पहले यह Checklist ज़रूर देखें
- पब्लिश्ड रेट शेड्यूल चेक करें: बैंक की वेबसाइट पर जाकर आज की तारीख़ का ऑफिशियल रेट शेड्यूल देखें — ब्रांच में बताई गई दर उससे अलग नहीं होनी चाहिए।
- कम्युलेटिव बनाम नॉन-कम्युलेटिव चुनें: अगर नियमित इनकम चाहिए (जैसे रिटायर्ड लोग), तो नॉन-कम्युलेटिव (मंथली/क्वार्टरली पेआउट) चुनें; अगर मैच्योरिटी पर एकमुश्त बड़ी रकम चाहिए, तो कम्युलेटिव (चक्रवृद्धि) FD बेहतर रहती है।
- प्रीमैच्योर विड्रॉल की शर्तें पढ़ें: समय से पहले पैसा निकालने पर कितना पेनल्टी रेट कटेगा, यह बैंक-दर-बैंक अलग होता है — बुकिंग के पहले ही समझ लें।
- DICGC इंश्योरेंस कवरेज समझें: हर डिपॉज़िटर का हर बैंक में ₹5 लाख तक का डिपॉज़िट (प्रिंसिपल+ब्याज मिलाकर) DICGC इंश्योरेंस से सुरक्षित है। अगर आपकी रकम इससे ज़्यादा है, तो उसे अलग-अलग बैंकों में बांटने पर विचार करें।
- 15G/15H फॉर्म समय पर जमा करें: अगर आपकी टैक्सेबल इनकम बेसिक लिमिट से कम है, तो हर वित्त वर्ष की शुरुआत में ही फॉर्म जमा कर दें, ताकि बेवजह TDS न कटे।
- सीनियर सिटीज़न बेनिफिट कन्फर्म करें: उम्र का प्रूफ देकर यह तय कर लें कि आपको एक्स्ट्रा रेट मिल रहा है या नहीं।
- ऑटो-रिन्यूअल इंस्ट्रक्शन सेट करें: मैच्योरिटी पर FD अपने आप रिन्यू हो या अकाउंट में आ जाए, यह पहले से तय कर लें — वरना कई बार पैसा बिना ब्याज के सेविंग अकाउंट में पड़ा रह जाता है।
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FAQ: FD Interest Rate 2026 से जुड़े सवाल
Q1. अभी FD बुक करनी चाहिए या रेट और बढ़ने का इंतज़ार करें?
यह पूरी तरह आपकी ज़रूरत पर निर्भर करता है। SBI के चेयरमैन के बयान के मुताबिक बैंक आगे 2-3 महीने तक डिपॉज़िट रेट में बड़ा बदलाव नहीं कर सकते, इसलिए सिर्फ थोड़े बेहतर रेट के इंतज़ार में बहुत लंबा टालना ज़रूरी नहीं लगता। अगर पैसे की ज़रूरत तय है, तो FD Laddering के ज़रिए अलग-अलग अवधि में निवेश करना एक संतुलित तरीका हो सकता है।
Q2. RBI के नए डिपॉज़िट नियमों से क्या मेरी मौजूदा FD की दर बदल जाएगी?
नहीं। यह नियम सिर्फ आगे बुक होने वाली नई FD पर लागू होता है और बैंकों को पारदर्शिता बनाने के लिए बाध्य करता है। आपकी पहले से चल रही FD अपनी तय दर और शर्तों पर ही मैच्योर होगी।
Q3. क्या सभी बैंकों में 1 साल की FD पर एक जैसी दर मिलती है?
नहीं, अलग-अलग बैंकों की दरें अलग हो सकती हैं — नया नियम सिर्फ यह सुनिश्चित करता है कि एक ही बैंक के भीतर एक जैसी रकम और अवधि पर एक जैसी दर मिले, चाहे किसी भी ब्रांच में डिपॉज़िट खोली गई हो। बैंक-दर-बैंक तुलना अब भी ज़रूरी है।
Q4. FD पर TDS कब कटता है?
अगर एक वित्त वर्ष में एक बैंक से मिलने वाला कुल FD ब्याज सामान्य डिपॉज़िटर के लिए ₹50,000 और सीनियर सिटीज़न के लिए ₹1,00,000 से ज़्यादा हो जाता है, तो 10% (PAN लिंक्ड) या 20% (PAN न होने पर) की दर से TDS कटता है।
Q5. क्या ₹3 करोड़ से कम की FD पर भी बल्क डिपॉज़िट वाले नियम लागू होते हैं?
नहीं, ₹3 करोड़ या उससे ज़्यादा की सिंगल रुपी टर्म डिपॉज़िट को ही बल्क डिपॉज़िट माना जाता है, जिस पर बैंकों को LCR-आधारित अलग (फ्लेक्सिबल) दर तय करने की छूट है। आम निवेशकों की FD इस दायरे में नहीं आती।
Q6. सीनियर सिटीज़न को कितना एक्स्ट्रा ब्याज मिलता है?
आमतौर पर 0.25% से 0.50% ज़्यादा, लेकिन कुछ बैंकों की स्पेशल टेन्योर स्कीम (जैसे 444 दिन या 555 दिन) में यह फ़र्क़ और ज़्यादा भी हो सकता है। सही आंकड़े के लिए अपने बैंक का मौजूदा रेट शेड्यूल देखें।
Q7. क्या प्रीमैच्योर (समय से पहले) FD तोड़ने पर पेनल्टी लगती है?
ज़्यादातर बैंकों में हां — आमतौर पर लागू दर से 0.50%-1% तक कम ब्याज मिलता है, या बुकिंग के समय की दर की जगह उस अवधि की (जो पूरी हुई) मौजूदा दर लागू होती है। सटीक शर्तें हर बैंक में अलग हो सकती हैं, इसलिए बुकिंग से पहले ही पढ़ लें।
Q8. क्या 15G/15H जमा करने से टैक्स की ज़िम्मेदारी भी खत्म हो जाती है?
नहीं। 15G/15H सिर्फ TDS कटने से रोकता है, टैक्स की देनदारी से नहीं बचाता। अगर आपकी कुल इनकम टैक्सेबल है, तो FD ब्याज को ITR में दिखाना और उस पर लागू टैक्स चुकाना अब भी ज़रूरी है।
निष्कर्ष
अक्टूबर 2026 में एक साथ हुए दो बदलाव — रेपो रेट का 5.50% तक बढ़ना और RBI के नए डिपॉज़िट इंटरेस्ट नियम — FD निवेशकों के लिए अच्छी खबर हैं। एक तरफ कई बैंकों ने अपनी दरें थोड़ी बढ़ाई हैं, दूसरी तरफ पारदर्शिता भी बढ़ी है, जिससे रेट की तुलना करना और सही फ़ैसला लेना आसान हुआ है। लेकिन सिर्फ ऊंची दर देखकर पैसा नहीं लगाना चाहिए — अपनी ज़रूरत (लिक्विडिटी, टैक्स स्लैब, उम्र, गोल की अवधि) के हिसाब से टेन्योर चुनें, TDS के नियम समझें, और जहां मुमकिन हो, FD Laddering जैसी स्ट्रेटेजी अपनाकर रिस्क कम करें। बुकिंग से पहले हर बार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा पब्लिश्ड रेट शेड्यूल ज़रूर चेक करें, क्योंकि दरें बिना किसी नोटिस के भी बदल सकती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और वित्तीय जागरूकता के लिए है, यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। इसमें दी गई FD दरें, RBI के नियम और TDS की सीमाएं लेख प्रकाशित होने के समय की जानकारी पर आधारित हैं और समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी FD में निवेश करने या टैक्स से जुड़ा फ़ैसला लेने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, RBI की आधिकारिक अधिसूचना या किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट/वित्तीय सलाहकार से ज़रूर सलाह लें।
