किसी भी business या professional के लिए TDS काटना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है उसे समय पर सरकार के खाते में जमा करना। अक्सर ऐसा होता है कि vendor को payment करते समय TDS तो काट लिया गया, लेकिन challan भरना कुछ दिन टल गया। नतीजा — हर महीने के हिसाब से interest, और return देर से भरने पर अलग से late fee।
अच्छी बात यह है कि यह interest निकालना मुश्किल नहीं है, बस एक नियम समझना है: महीने का कोई भी हिस्सा पूरा महीना गिना जाता है। इस गाइड में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि TDS late payment interest कैसे calculate करते हैं, 1% और 1.5% का फर्क क्या है, Tax Year 2026-27 की due dates क्या हैं, late fee और penalty कब लगती है, और Excel में इसे अपने आप कैसे track करें।

पहले एक ज़रूरी बात: नया Income-tax Act 2025
1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act, 1961 की जगह Income-tax Act, 2025 लागू हुआ है। इसके साथ कई section numbers बदल गए हैं और “Assessment Year / Previous Year” की जगह “Tax Year” शब्द आया है। TDS के मूल नियम — कटौती, जमा, return और interest — काफी हद तक पहले जैसे हैं, लेकिन section के नंबर नए हैं। उदाहरण के लिए:
- TDS पर late interest का पुराना Section 201(1A) अब नए Act के Section 398(3) में आता है।
- Salary पर TDS का पुराना Section 192 अब Section 392 में है।
- Contract (194C) और Professional fees (194J) जैसे payments नए Act के Section 393(1) की table में अलग-अलग items के रूप में आते हैं।
इस लेख में हम पुराने और नए दोनों नंबर बताएँगे, ताकि आप पुराने notices या software में भी आसानी से पहचान सकें। Section numbers और rates के लिए हमेशा incometax.gov.in और CBIC/CBDT की ताज़ा notifications देखें, क्योंकि transition के समय कई बदलाव आते रहते हैं।
TDS Interest के दो प्रकार: 1% और 1.5%
TDS में दो अलग-अलग गलतियों पर अलग-अलग interest लगता है। इन्हें अलग-अलग समझना बहुत ज़रूरी है:
1. TDS देर से काटा (Late Deduction) — 1% प्रति माह
अगर payment या credit के समय TDS काटना था, लेकिन आपने उस समय नहीं काटा और बाद में काटा (या बिल्कुल नहीं काटा), तो 1% प्रति माह या उसका हिस्सा interest लगता है। यह interest उस तारीख से गिना जाता है जिस दिन TDS कटना चाहिए था, और उस तारीख तक जिस दिन असल में काटा गया।
2. TDS काटा पर देर से जमा किया (Late Payment) — 1.5% प्रति माह
अगर आपने TDS सही समय पर काट लिया, लेकिन सरकार के खाते में due date तक जमा नहीं किया, तो 1.5% प्रति माह या उसका हिस्सा interest लगता है। यह interest कटौती की तारीख से लेकर जमा करने की तारीख तक गिना जाता है — due date से नहीं। यही वह बात है जिसे ज़्यादातर लोग गलत समझते हैं।
दोनों interest का आधार पुराने Act का Section 201(1A) था, जो अब नए Act के Section 398(3) में है। ध्यान रखें कि यह interest TDS return भरने से पहले जमा कर देना चाहिए, नहीं तो return के processing में demand आ जाती है।
“महीने का हिस्सा = पूरा महीना” — यह नियम कैसे काम करता है
TDS interest में दिन नहीं गिने जाते, महीने गिने जाते हैं। और व्यवहार में महीने calendar month के हिसाब से गिने जाते हैं। यानी अगर कटौती मई में हुई और जमा जुलाई में, तो मई, जून और जुलाई — तीनों महीने गिने जाएँगे, भले ही असल देरी सिर्फ कुछ दिनों की हो।
इसका सीधा असर यह है कि महीने की शुरुआत में की गई एक छोटी सी देरी भी आपको कई महीनों का interest दिला सकती है। इसलिए “बस 2-4 दिन की तो बात है” सोचना महँगा पड़ सकता है।
Tax Year 2026-27 के लिए TDS Due Dates

TDS जमा करने की due date (Non-government deductor)
- अप्रैल से फरवरी के बीच काटा गया TDS — अगले महीने की 7 तारीख तक जमा करना होता है। जैसे मई 2026 में काटा TDS, 7 जून 2026 तक।
- मार्च में काटा गया TDS — 30 अप्रैल तक जमा करना होता है।
Government deductors (book entry से जमा करने वाले) के लिए नियम अलग हैं, उन्हें अपने विभाग के निर्देश देखने चाहिए।
TDS Return (Quarterly Statement) की due date
- Q1 (अप्रैल–जून) — 31 जुलाई
- Q2 (जुलाई–सितंबर) — 31 अक्टूबर
- Q3 (अक्टूबर–दिसंबर) — 31 जनवरी
- Q4 (जनवरी–मार्च) — 31 मई
ये तारीखें सरकार कभी-कभी बढ़ा भी देती है। इसलिए हर quarter से पहले portal पर ताज़ा due date ज़रूर देखें।
Step-by-Step: TDS Late Payment Interest कैसे Calculate करें
किसी भी entry का interest निकालने के लिए बस ये 5 steps follow करें:
- TDS की रकम लिखें — जितना TDS काटा गया।
- कटौती की तारीख देखें — जिस दिन TDS काटा (payment/credit की तारीख)।
- Due date निकालें — अगले महीने की 7 तारीख (मार्च के लिए 30 अप्रैल)।
- जमा की असल तारीख देखें — challan की तारीख। अगर यह due date के अंदर है, तो कोई interest नहीं।
- महीने गिनें और गुणा करें — कटौती वाले महीने से जमा वाले महीने तक के कुल महीने × 1.5% × TDS की रकम।
उदाहरण 1: देर से जमा (1.5%)

मान लीजिए किसी professional को fees देते समय 15 मई 2026 को ₹8,000 TDS काटा गया। इसकी due date थी 7 जून 2026, लेकिन challan भरा गया 2 जुलाई 2026 को।
- गिने जाने वाले महीने: मई, जून, जुलाई = 3 महीने
- Interest = ₹8,000 × 1.5% × 3 = ₹360
देखिए — due date से सिर्फ 25 दिन की देरी हुई, लेकिन interest 3 महीने का लगा, क्योंकि गिनती कटौती की तारीख से शुरू होती है और हर अधूरा महीना पूरा माना जाता है।
उदाहरण 2: देर से कटौती (1%)
मान लीजिए किसी contractor को 10 अप्रैल 2026 को ₹5,00,000 का payment किया गया, जिस पर ₹10,000 TDS बनता था, लेकिन TDS उस दिन नहीं काटा गया। बाद में गलती पता चली और TDS 20 मई 2026 को काटा गया।
- गिने जाने वाले महीने: अप्रैल, मई = 2 महीने
- Interest = ₹10,000 × 1% × 2 = ₹200
और अगर यह ₹10,000 भी अपनी due date (7 जून) के बाद जमा हुआ, तो कटौती की तारीख (20 मई) से जमा की तारीख तक 1.5% वाला interest अलग से लगेगा।
उदाहरण 3: समय पर जमा
अगर 10 अप्रैल को TDS काटा और 6 मई को जमा कर दिया (due date 7 मई), तो कोई interest नहीं। यही सबसे अच्छी स्थिति है।
Excel में Interest का Formula खुद कैसे लगाएँ
अगर आप अपनी Excel sheet में ही interest निकालना चाहते हैं, तो यह तरीका अपनाएँ। मान लीजिए कॉलम B में कटौती की तारीख, कॉलम I में TDS की रकम और कॉलम J में जमा (challan) की तारीख है।
Step 1 — Due date: मार्च के लिए 30 अप्रैल और बाकी महीनों के लिए अगले महीने की 7 तारीख:
=IF(MONTH(B2)=3,DATE(YEAR(B2),4,30),DATE(YEAR(B2),MONTH(B2)+1,7))
Step 2 — गिने जाने वाले महीने: अगर जमा due date के बाद हुआ, तो कटौती वाले महीने से जमा वाले महीने तक calendar महीने गिनें:
=IF(J2>L2,(YEAR(J2)-YEAR(B2))*12+MONTH(J2)-MONTH(B2)+1,0)
(यहाँ L2 में Step 1 वाली due date है।)
Step 3 — Interest:
=ROUND(I2*1.5%*N2,0)
(N2 में Step 2 वाले महीने हैं।)
ध्यान रखें कि यह formula calendar-month के आधार पर एक अनुमान देता है। कुछ मामलों में (जैसे महीने के आख़िरी दिन कटौती) TRACES की गणना थोड़ी अलग आ सकती है, इसलिए final रकम हमेशा TRACES से मिला लें।
एक नज़र में: किस स्थिति में क्या लगेगा
- समय पर काटा, समय पर जमा किया — कुछ नहीं।
- समय पर काटा, देर से जमा किया — कटौती की तारीख से जमा तक 1.5% प्रति माह।
- देर से काटा, समय पर जमा किया — काटने योग्य तारीख से असल कटौती तक 1% प्रति माह।
- देर से काटा, देर से भी जमा किया — दोनों interest अलग-अलग: पहले 1%, फिर 1.5%।
- काटा ही नहीं — 1% interest, साथ में expense disallowance और deductee के हिस्से की ज़िम्मेदारी का जोखिम।
- Return देर से भरा — interest के अलावा ₹200 प्रति दिन late fee।
Late Fee और Penalty: Interest से अलग चीज़ें
बहुत से लोग interest, late fee और penalty को एक ही समझ लेते हैं। ये तीनों अलग हैं:
Late Filing Fee — ₹200 प्रति दिन
अगर TDS return (quarterly statement) due date तक नहीं भरा, तो ₹200 प्रति दिन की late fee लगती है, जब तक return न भरा जाए। लेकिन यह fee कुल TDS की रकम से ज़्यादा नहीं हो सकती। यह पुराने Act का Section 234E था; नए Act में इसका नंबर बदला है (उपलब्ध sources के अनुसार Section 427)।
उदाहरण: Q2 का return 31 अक्टूबर तक भरना था, पर 10 नवंबर को भरा। देरी = 10 दिन, late fee = 10 × ₹200 = ₹2,000 (अगर उस quarter का TDS ₹2,000 से ज़्यादा है)।
Penalty — ₹10,000 से ₹1 लाख तक
Return न भरने या गलत जानकारी भरने पर assessing officer ₹10,000 से ₹1,00,000 तक penalty लगा सकता है (पुराना Section 271H)। राहत की बात यह है कि अगर TDS, interest और late fee जमा करके due date से एक साल के अंदर return भर दिया जाए, तो आम तौर पर यह penalty नहीं लगती।
Expense Disallowance
अगर TDS काटा ही नहीं गया या तय समय तक जमा नहीं किया गया, तो उस खर्च का एक हिस्सा आपकी business income की गणना में disallow हो सकता है। यानी interest के अलावा income tax भी बढ़ सकता है। इस नियम की ताज़ा शर्तें अपने tax consultant से ज़रूर समझें।
Prosecution
काटा हुआ TDS सरकार को जमा न करना गंभीर मामला माना जाता है, और लंबे समय तक या बड़ी रकम में ऐसा होने पर prosecution तक की कार्रवाई हो सकती है। इसलिए TDS का पैसा कभी भी business के दूसरे खर्चों में इस्तेमाल न करें।
Interest कैसे जमा करें?
- incometax.gov.in पर login करके e-Pay Tax option चुनें।
- TDS/TCS के लिए सही challan (Challan No. 281) चुनें और TAN डालें।
- सही Tax Year, section/nature of payment और minor head चुनें।
- TDS की रकम, interest और late fee — तीनों अलग-अलग column में भरें।
- Payment के बाद challan की BSR code, तारीख और serial number सँभालकर रखें — ये return में भरने होंगे।
अगर पहले जमा किए गए challan में interest कम रह गया हो, तो TRACES पर आए demand / default में सही रकम दिख जाती है। Final रकम हमेशा TRACES से मिलाकर ही जमा करें।
सबसे आम गलतियाँ जिनसे interest बढ़ता है
- Interest due date से गिनना — जबकि late payment का interest कटौती की तारीख से गिना जाता है।
- दिनों के हिसाब से interest निकालना — TDS में महीने गिने जाते हैं, अधूरा महीना पूरा।
- मार्च की due date भूल जाना — मार्च का TDS 30 अप्रैल तक, बाकी महीनों का 7 तारीख तक।
- गलत Tax Year या section का challan — इससे TDS mismatch और demand आती है।
- Deductee का PAN गलत लिखना — गलत या invalid PAN पर ऊँची दर से TDS और mismatch की समस्या होती है।
- Interest और late fee जमा किए बिना return भरना — return processing में तुरंत demand बन जाती है।
Excel में TDS Tracker: Due Date और Interest अपने आप
अगर आप हर महीने कई deductees को payment करते हैं, तो हर entry का due date, interest और quarter manually याद रखना मुश्किल है। इसके लिए हमने एक तैयार TDS Deduction & Payment Tracker (Excel) बनाया है। इसमें आपको सिर्फ entry भरनी होती है — बाकी सब अपने आप होता है:
- Deduction date डालते ही Due Date अपने आप — हर महीने की 7 तारीख, मार्च के लिए 30 अप्रैल
- Status अपने आप — Paid On Time, Paid Late, Pending या Overdue
- Late payment पर interest का estimate (महीने का हिस्सा पूरा महीना मानकर)
- गलत format वाला PAN लाल रंग में highlight
- Quarter-wise summary (Q1–Q4) — return भरते समय सीधे काम आता है
- TDS rate आप खुद डालते हैं — इसलिए नियम बदलने पर भी sheet काम करती रहती है; due day और interest rate “Settings” sheet में बदले जा सकते हैं

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TDS समय पर जमा करने के Practical Tips
- हर महीने 5 तारीख को TDS दिन रखें — ताकि 7 तारीख से पहले challan भरने का समय रहे।
- Payment करते समय ही TDS अलग खाते में रखें — ताकि वह पैसा दूसरे खर्चों में न चला जाए।
- Tally या accounting software में TDS ledger section-wise रखें — इससे quarter के अंत में मिलान आसान होता है।
- Deductee का PAN payment से पहले verify करें।
- Quarter खत्म होते ही return की तैयारी शुरू करें — आखिरी दिन पर portal धीमा हो सकता है।
- हर quarter के बाद TRACES पर default देखें — छोटी गलती जल्दी पकड़ में आती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
TDS late payment interest due date से गिना जाता है या कटौती की तारीख से?
देर से जमा करने पर 1.5% वाला interest कटौती की तारीख से जमा करने की तारीख तक गिना जाता है, due date से नहीं।
एक दिन की देरी पर कितना interest लगेगा?
कम से कम दो महीने का, क्योंकि कटौती वाला महीना और जमा वाला महीना — दोनों गिने जाते हैं। जैसे अप्रैल में काटा TDS अगर 8 मई को जमा हुआ, तो अप्रैल और मई = 2 महीने का interest बनेगा।
क्या TDS interest को business expense मान सकते हैं?
आम तौर पर TDS पर लगने वाला interest कानूनी देनदारी के उल्लंघन से जुड़ा माना जाता है और courts व department इसे सामान्य business expense के रूप में allow करने को लेकर सख्त रहे हैं। अपने मामले में tax consultant से सलाह लें।
अगर deductee ने अपना tax पहले ही भर दिया हो, तब भी interest लगेगा?
अगर TDS काटा ही नहीं गया था और deductee ने उस income को अपने ITR में दिखाकर पूरा tax भर दिया है, तो कुछ शर्तों के साथ आपको “assessee in default” नहीं माना जाता। लेकिन interest आम तौर पर deductee के ITR भरने की तारीख तक फिर भी देना पड़ता है। इसके लिए deductee से ज़रूरी certificate/form लेना होता है, इसलिए इस स्थिति में अपने tax consultant की मदद ज़रूर लें।
Late fee और interest में क्या फर्क है?
Interest TDS देर से काटने या जमा करने पर लगता है। Late fee TDS return देर से भरने पर लगती है — ₹200 प्रति दिन, अधिकतम TDS की रकम तक।
नए Income-tax Act 2025 में interest की दर बदली है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार दरें वही हैं — देर से कटौती पर 1% और देर से जमा पर 1.5% प्रति माह। सिर्फ section का नंबर बदला है (201(1A) से 398(3))। फिर भी portal पर ताज़ा नियम ज़रूर देखें।
निष्कर्ष
TDS interest का हिसाब एक बार समझ में आ जाए तो बहुत आसान है — कटौती की तारीख से जमा की तारीख तक के calendar महीने गिनें, अधूरे महीने को पूरा मानें, और रकम × 1.5% × महीने कर दें। लेकिन सबसे अच्छा तरीका है कि interest की नौबत ही न आए। हर महीने 7 तारीख से पहले TDS जमा करें, quarter के अंत में return समय पर भरें, और अपनी entries को एक साफ़ tracker में रखें।
अगर आपको ITR से जुड़ी देर की जानकारी भी चाहिए, तो पढ़ें: Belated ITR की आख़िरी तारीख और late fee।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे कानूनी या tax सलाह न मानें। Income-tax Act 2025 लागू होने के बाद section numbers, due dates और प्रक्रिया में बदलाव आ सकते हैं। अंतिम interest, late fee और demand के लिए incometax.gov.in और TRACES पर ताज़ा जानकारी देखें या किसी योग्य Chartered Accountant / tax consultant से सलाह लें।
