पुणे की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले अनिल कुमार 12 साल से एक ही ऑफिस में जमे हुए हैं। पिछले हफ्ते HR डिपार्टमेंट से एक मेल आया — “Revised Wage Structure as per New Labour Codes”। अनिल ने सैलरी स्लिप खोली तो देखा कि उनका Basic Salary अचानक बढ़ गया है, जबकि Gross Salary वही है। दोस्तों से पूछा, गूगल पर सर्च किया, पर साफ जवाब कहीं नहीं मिला। असल में यह बदलाव सीधे उनकी ग्रेच्युटी से जुड़ा है — और अगर आपकी भी नौकरी प्राइवेट कंपनी में है, तो यह बदलाव आपकी सैलरी स्लिप पर भी दिख चुका होगा या जल्द दिखेगा।
21 नवंबर 2025 से भारत में चार नए Labour Codes लागू हो चुके हैं, और इनमें से एक — Code on Social Security, 2020 — सीधे ग्रेच्युटी के नियमों को छूता है। साथ ही Code on Wages, 2019 के तहत “wages” की नई परिभाषा ने ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन का पूरा आधार ही बदल दिया है। इस लेख में हम बिल्कुल सीधी भाषा में समझेंगे कि ग्रेच्युटी के नए नियम 2026 में असल में क्या बदला है, फॉर्मूला पर क्या असर पड़ा है, Fixed-term employees को क्या नया फायदा मिला है, टैक्स छूट की क्या स्थिति है, और आपको अपनी सैलरी स्लिप में क्या चेक करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: लेबर कोड अभी भी लागू होने की प्रक्रिया में हैं और कुछ बिंदुओं पर Ministry of Labour and Employment की FAQs और अलग-अलग विशेषज्ञों की राय में थोड़ा अंतर है। जहां भी कोई बिंदु अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, हमने साफ तौर पर बताया है। अपनी कंपनी की HR पॉलिसी और CA से जरूर कन्फर्म करें।

ग्रेच्युटी क्या है और यह क्यों जरूरी है
ग्रेच्युटी एक तरह का “थैंक यू बोनस” है जो कंपनी अपने कर्मचारी को लंबे समय तक सेवा देने के बदले देती है। यह Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत आता था, और अब इसे Code on Social Security, 2020 में शामिल कर लिया गया है। 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली हर फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस या कंपनी पर यह नियम लागू होता है। कर्मचारी के रिटायरमेंट, इस्तीफे, नौकरी छूटने या दुर्भाग्य से मृत्यु होने पर यह रकम दी जाती है। मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में पांच साल की शर्त वैसे भी लागू नहीं होती — यह नियम नया नहीं है, पहले से चला आ रहा है।
अभी तक ज्यादातर लोग यह सोचकर निश्चिंत बैठे रहते थे कि “मुझे तो अभी पांच साल पूरे करने हैं, ग्रेच्युटी की चिंता बाद में करूंगा।” लेकिन नए नियमों ने इस सोच में भी एक बड़ा बदलाव ला दिया है, खासकर Contract और Fixed-term पर काम करने वालों के लिए।
21 नवंबर 2025 से ग्रेच्युटी में क्या बदला — नए Labour Codes का असर
भारत सरकार ने चार लेबर कोड — Code on Wages, Industrial Relations Code, Occupational Safety Health and Working Conditions Code, और Code on Social Security — को एक साथ 21 नवंबर 2025 से लागू किया। इसके बाद मार्च और मई 2026 में मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट ने कई FAQs जारी करके इन्हें और स्पष्ट किया। ग्रेच्युटी से जुड़े दो सबसे बड़े बदलाव इस तरह हैं:
परमानेंट कर्मचारियों के लिए 5 साल का नियम अभी भी लागू
अगर आप किसी कंपनी में स्थायी (Permanent) कर्मचारी के रूप में काम करते हैं, तो ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार 5 साल की सेवा वाली पुरानी शर्त अभी भी वैसी ही बनी हुई है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी अगर अनिल कुमार जैसे किसी स्थायी कर्मचारी ने 5 साल से कम नौकरी की और सामान्य इस्तीफा दिया, तो उसे ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी — सिवाय मृत्यु या विकलांगता के मामलों में।
Fixed-term कर्मचारियों के लिए अब सिर्फ 1 साल में पात्रता
यह सबसे बड़ा बदलाव है। पहले Fixed-term Employment Contract पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी के लिए 5 साल पूरे करने पड़ते थे, जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव था क्योंकि इनके कॉन्ट्रैक्ट अक्सर 1-2 साल के ही होते हैं। Code on Social Security, 2020 की धारा 53 के प्रावधानों और मिनिस्ट्री की FAQs के मुताबिक, अब Fixed-term कर्मचारी अपने कॉन्ट्रैक्ट के दौरान एक साल की निरंतर सेवा (ज्यादातर स्पष्टीकरणों में इसे कम से कम 240 दिन की उपस्थिति बताया गया है) पूरी करने पर ग्रेच्युटी के लिए पात्र बन जाते हैं, और यह रकम कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के अनुपात में (Pro-rata) दी जाती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग सरकारी स्पष्टीकरणों और विशेषज्ञों की व्याख्या में “ठीक 1 साल” और “1 साल में 240 दिन” को लेकर थोड़ा फर्क है, और यह भी साफ नहीं है कि लगातार नए किए गए छोटे-छोटे कॉन्ट्रैक्ट जोड़कर एक साल बनता है या नहीं। इसलिए अगर आप कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं, तो अपनी HR टीम से अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें जरूर लिखित में कन्फर्म करें।
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फॉर्मूला — 15/26 रूल में कोई बदलाव नहीं
अच्छी खबर यह है कि ग्रेच्युटी निकालने का मूल फॉर्मूला नहीं बदला है। Code on Social Security, 2020 की धारा 53 में भी वही पुराना फॉर्मूला बरकरार रखा गया है:
| फॉर्मूला | ग्रेच्युटी = (15/26) × आखिरी महीने की वेतन (Basic + DA) × कुल सेवा के वर्ष |
|---|---|
| 26 क्यों | महीने में औसतन 26 कार्यदिवस माना जाता है (रविवार को छोड़कर) |
| 15 क्यों | हर साल सेवा के बदले 15 दिन की वेतन के बराबर राशि |
| आधा साल का नियम | यदि सेवा का आखिरी हिस्सा 6 महीने से ज्यादा है, तो उसे पूरा साल मानकर गिना जाता है — जैसे 5 साल 7 महीने की सेवा को 6 साल मानकर कैलकुलेशन होगी |
जो चीज बदली है वह फॉर्मूला नहीं, बल्कि इसमें इस्तेमाल होने वाली “वेतन” (Wages) की परिभाषा है — और यही बदलाव असल में ग्रेच्युटी की रकम को प्रभावित करने वाला है।

50% Wage Rule: वेतन की नई परिभाषा से ग्रेच्युटी की रकम कैसे बदल सकती है
यह वह हिस्सा है जो असल में अनिल कुमार की सैलरी स्लिप में बदला हुआ दिखा। Code on Wages, 2019 की धारा 2(y) के तहत “Wages” की एक नई, बहुत व्यापक परिभाषा दी गई है। इसमें से सिर्फ कुछ चुनी हुई चीजें ही बाहर रखी जा सकती हैं — जैसे House Rent Allowance (HRA), Conveyance Allowance, Overtime, और कंपनी का PF/Pension Contribution।
यहां एक अहम शर्त जुड़ी है: अगर यह excluded (बाहर रखी गई) राशि कुल वेतन (CTC) के 50% से ज्यादा हो जाती है, तो उस सीमा से ऊपर की राशि को वापस “Wages” में जोड़ दिया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो — आपकी कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा हमेशा “Wages” (यानी वह आधार जिस पर ग्रेच्युटी और PF निकलती है) के तौर पर गिना जाना अनिवार्य है, भले ही आपकी कंपनी ने Basic Salary कम रखकर बाकी हिस्सा Allowances में बांट दिया हो।
| Wages में शामिल (ज्यादातर मामलों में) | Wages से बाहर (एक सीमा तक) |
|---|---|
| Basic Salary | House Rent Allowance (HRA) |
| Dearness Allowance (DA) | Conveyance Allowance |
| सामान्य Special Allowance (ज्यादातर व्याख्याओं में) | Overtime Allowance |
| 50% फ्लोर पूरा करने के लिए वापस जोड़ा गया हिस्सा | कंपनी का PF/Pension Contribution, Gratuity, बोनस, कमीशन (कुछ शर्तों के साथ) |
उदाहरण से समझें — पुराने और नए वेतन-आधार का फर्क
मान लीजिए मोहित वर्मा नाम के एक कर्मचारी की कुल मासिक सैलरी (CTC) ₹75,000 है और उन्होंने कंपनी में 12 साल की सेवा पूरी कर ली है। पुराने ढांचे में उनका Basic Salary सिर्फ ₹22,000 था (बाकी हिस्सा HRA, Special Allowance और Conveyance में बंटा हुआ था)। नए 50% नियम के तहत, अगर excluded components 50% से ज्यादा बैठते हैं, तो वेतन-आधार को कम से कम ₹37,500 (CTC का 50%) तक ऊपर लाना होगा।
| विवरण | पुराना वेतन-आधार | नया वेतन-आधार (50% नियम) |
|---|---|---|
| मासिक वेतन-आधार | ₹22,000 | ₹37,500 |
| सेवा के वर्ष | 12 | 12 |
| ग्रेच्युटी (15/26 × वेतन × वर्ष) | ₹1,52,308 (लगभग) | ₹2,59,615 (लगभग) |
यानी सिर्फ वेतन की परिभाषा बदलने से ही मोहित वर्मा की ग्रेच्युटी में करीब ₹1,07,000 (लगभग 70%) का इजाफा हो जाता है — बिना सैलरी बढ़े, बिना साल जोड़े। यही वजह है कि बहुत सी कंपनियां अभी अपने Compensation Structure को रिवाइज कर रही हैं, ताकि CTC वही रहे और स्टेटुटरी देनदारी (गैरेच्युटी, PF) सही तरीके से निकले।
एक जरूरी बात यहां समझनी होगी — यह बदलाव हर किसी की Take-home सैलरी घटा भी सकता है, क्योंकि Basic बढ़ने से PF कटौती (Employee Contribution) भी बढ़ सकती है। यानी ग्रेच्युटी और Retirement Benefits बढ़ेंगे, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली रकम थोड़ी कम हो सकती है। अपनी सैलरी स्लिप में Basic और Gross का नया अनुपात जरूर चेक करें।
Fixed-term कर्मचारियों के लिए Pro-rata ग्रेच्युटी — एक उदाहरण (सिर्फ समझने के लिए)
मान लीजिए प्रिया नायर को किसी कंपनी ने 12 महीने के Fixed-term Contract पर रखा और उनकी मासिक वेतन-आधार ₹28,000 है। अगर वे पूरे 12 महीने काम करती हैं, तो पूरे साल की ग्रेच्युटी इस तरह बनेगी: 15/26 × ₹28,000 × 1 = लगभग ₹16,154। अगर उनका कॉन्ट्रैक्ट 10 महीने में ही खत्म हो जाता है (लेकिन वे न्यूनतम तय दिनों की सेवा पूरी कर चुकी हैं), तो Pro-rata आधार पर अनुमानित रकम इस तरह निकल सकती है: ₹16,154 × (10/12) ≈ ₹13,462।
ध्यान दें: सरकार ने अभी Pro-rata कैलकुलेशन का कोई आधिकारिक, तय फॉर्मूला अलग से नोटिफाई नहीं किया है — ऊपर दिया गया उदाहरण सिर्फ महीनों के अनुपात में बांटकर समझाने के लिए है, मान लीजिए कि यही तरीका अपनाया जाए। असल कंपनी अपनी पॉलिसी और Central Rules के फाइनल होने के बाद ही सटीक रकम बताएगी। इसे अंतिम आंकड़ा न समझें।

टैक्स छूट: ₹20 लाख की सीमा अभी भी लागू
ग्रेच्युटी पर टैक्स छूट को लेकर नए लेबर कोड में कोई बदलाव नहीं हुआ है। Income Tax Act की धारा 10(10)(ii) के तहत, Payment of Gratuity Act के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पर अधिकतम ₹20,00,000 तक की छूट मिलती है। यह सीमा 29 मार्च 2018 की सरकारी नोटिफिकेशन (S.O. 1420(E)) के जरिए ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख की गई थी, और अभी तक यही सीमा चल रही है।
मान लीजिए सुरेश पिल्लई 30 साल की सेवा के बाद रिटायर होते हैं और उनका आखिरी वेतन-आधार ₹95,000 प्रति महीना है। उनकी ग्रेच्युटी इस तरह बनेगी: 15/26 × ₹95,000 × 30 ≈ ₹16,44,231। यह रकम ₹20 लाख की सीमा से कम है, इसलिए पूरी रकम टैक्स-फ्री रहेगी। लेकिन अगर किसी की कैलकुलेटेड ग्रेच्युटी ₹20 लाख से ज्यादा बैठती है (जो अब 50% Wage Rule के बाद वेतन-आधार बढ़ने से ज्यादा लोगों के साथ हो सकता है), तो उस सीमा से ऊपर की रकम सामान्य इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होगी।
सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के लिए ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है, इस पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है — यह नियम भी पहले जैसा ही बना हुआ है।
ग्रेच्युटी कौन देता है और भुगतान में देरी पर क्या होता है
ग्रेच्युटी देने की जिम्मेदारी कर्मचारी के सीधे Employer की होती है। Contract Workers के मामले में, Contractor को ही Employer माना जाता है और वही ग्रेच्युटी चुकाने के लिए जिम्मेदार है — हालांकि क्या इसमें Principal Employer की भी साझा जिम्मेदारी बनती है, इस पर कानूनी स्पष्टता अभी बन रही है।
कानून के मुताबिक, ग्रेच्युटी की रकम देय होने के 30 दिन के भीतर चुका देनी चाहिए। अगर कंपनी इसमें देरी करती है, तो उसे सरकार द्वारा तय ब्याज दर (ज्यादातर मामलों में 10% प्रति वर्ष के आसपास) के साथ यह रकम चुकानी पड़ती है — यह नियम झारखंड हाई कोर्ट जैसे कई फैसलों में भी दोहराया गया है और नए कोड में भी कायम है। अगर आपकी ग्रेच्युटी तय समय पर नहीं मिली, तो आप अपने एरिया के Controlling Authority (Labour Commissioner Office) के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
किसे फायदा होगा, किसे नहीं — एक नजर में
| किसे फायदा | किसे सावधान रहना चाहिए |
|---|---|
| Fixed-term Contract पर काम करने वाले कर्मचारी जो पहले 5 साल पूरे नहीं कर पाते थे | वे कर्मचारी जिनका Take-home थोड़ा घट सकता है क्योंकि Basic/PF कटौती बढ़ गई |
| जिनका Basic Salary पहले बहुत कम और Allowances बहुत ज्यादा रखा गया था | जिनकी कुल ग्रेच्युटी नए हिसाब से ₹20 लाख की सीमा पार कर सकती है — उन्हें टैक्स प्लानिंग करनी होगी |
| लंबी सेवा वाले सीनियर कर्मचारी, जिन्हें रिटायरमेंट पर बड़ी रकम मिलेगी | Contract पर काम करने वाले — जिन्हें अभी भी अपनी पात्रता HR से लिखित में कन्फर्म करनी चाहिए |
अपनी ग्रेच्युटी चेक करने के लिए सरल चेकलिस्ट
- अपनी नई सैलरी स्लिप में Basic Salary और Gross Salary का नया अनुपात देखें।
- HR से पूछें कि आपका Wage Structure Code on Wages, 2019 के 50% नियम के हिसाब से रिवाइज हुआ है या नहीं।
- अपनी कुल सेवा के वर्ष गिनें — अगर आखिरी हिस्सा 6 महीने से ज्यादा है, तो उसे अगला पूरा साल मानें।
- 15/26 × नया वेतन-आधार × वर्ष लगाकर अपनी अनुमानित ग्रेच्युटी खुद निकालें।
- अगर आप Fixed-term Contract पर हैं, तो अपने कॉन्ट्रैक्ट में ग्रेच्युटी की पात्रता की शर्त लिखित में मांगें।
- अगर अनुमानित रकम ₹20 लाख के पास या उससे ऊपर जा रही है, तो किसी CA से टैक्स प्लानिंग पर सलाह लें।
- कंपनी से ग्रेच्युटी मिलने में देरी हो रही है, तो 30 दिन की सीमा और ब्याज के नियम की जानकारी लिखित में मांगें।

आगे क्या — Central Rules और बाकी स्पष्टता का इंतजार
Code on Wages (Central) Rules, 2026 को 8 मई 2026 को नोटिफाई किया गया, लेकिन वेतन की नई परिभाषा खुद 21 नवंबर 2025 से ही लागू मानी जा रही है — यानी Rules बाद में आए, पर असर पहले से है। कुछ बिंदु अभी भी राज्य सरकारों के अपने-अपने Rules और अदालती फैसलों के साथ और स्पष्ट होंगे — जैसे कि 21 नवंबर 2025 से पहले की गई सेवा को नए वेतन-आधार पर गिनना है या पुराने आधार पर बांटकर, और Fixed-term कर्मचारियों के लगातार रिन्यू हुए कॉन्ट्रैक्ट जोड़े जाएंगे या नहीं। जैसे-जैसे और सरकारी स्पष्टीकरण आते हैं, इस तरह के बदलावों पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या ग्रेच्युटी पाने के लिए अब सभी को सिर्फ 1 साल काम करना होगा?
नहीं। यह बदलाव सिर्फ Fixed-term Contract पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए है। Permanent कर्मचारियों के लिए 5 साल की सेवा वाला नियम अभी भी पहले जैसा ही लागू है।
Q2. ग्रेच्युटी का फॉर्मूला बदल गया है क्या?
फॉर्मूला (15/26 × वेतन × वर्ष) नहीं बदला है। जो बदला है वह “वेतन” की परिभाषा है, जिसकी वजह से कैलकुलेशन का आधार (वेतन-आधार) बढ़ सकता है।
Q3. 50% Wage Rule का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि आपकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा हमेशा “Wages” के तौर पर गिना जाना चाहिए, भले ही कंपनी ने बाकी हिस्सा Allowances में बांटा हो। अगर बाहर रखे गए हिस्से 50% से ज्यादा हैं, तो ऊपर की राशि वापस Wages में जोड़ दी जाती है।
Q4. क्या मेरी Take-home सैलरी इससे घट सकती है?
हां, हो सकता है। Basic Salary बढ़ने से PF की Employee Contribution भी बढ़ सकती है, जिससे हाथ में आने वाली रकम कुछ कम हो सकती है, जबकि ग्रेच्युटी और PF जैसे Retirement Benefits बढ़ते हैं।
Q5. क्या ग्रेच्युटी पर अभी भी टैक्स छूट है?
हां, Payment of Gratuity Act के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए धारा 10(10)(ii) के तहत ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री है। इस सीमा में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है।
Q6. Fixed-term कर्मचारी को ग्रेच्युटी कितनी मिलेगी?
उसे पूरे कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के अनुपात में (Pro-rata) ग्रेच्युटी मिलती है। इसका सटीक, सरकार द्वारा नोटिफाई किया गया फॉर्मूला अभी स्पष्ट नहीं है, इसलिए अपनी कंपनी की पॉलिसी जरूर चेक करें।
Q7. अगर कंपनी समय पर ग्रेच्युटी नहीं देती तो क्या करें?
कानून के मुताबिक रकम देय होने के 30 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। देरी होने पर ब्याज देना पड़ता है, और आप अपने इलाके के Labour Commissioner Office (Controlling Authority) के पास शिकायत कर सकते हैं।
Q8. क्या यह बदलाव सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू होता है?
सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी अलग नियमों (Pension Rules) के तहत आती है और वह पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है। ऊपर बताए गए ज्यादातर बदलाव मुख्य रूप से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों पर लागू होते हैं।
निष्कर्ष
ग्रेच्युटी के नए नियम 2026 में सबसे बड़ा संदेश यह है कि फॉर्मूला तो पुराना ही है, लेकिन “वेतन” किसे माना जाए, यह परिभाषा पूरी तरह बदल गई है — और इसी बदलाव से लाखों कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की रकम ऊपर-नीचे हो सकती है। अगर आप Fixed-term Contract पर हैं, तो अब आपको 5 साल का इंतजार नहीं करना है। अगर आप Permanent हैं, तो अपनी सैलरी स्लिप में Basic/Gross का अनुपात जरूर जांचें। और हां, जैसे-जैसे Central Rules और राज्य सरकारों के नियम और साफ होंगे, इस विषय पर अपडेट्स पर नजर बनाए रखना फायदेमंद रहेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ शिक्षा और जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। नए लेबर कोड अभी भी लागू होने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए नियम और राज्य-वार Rules आगे बदल सकते हैं। किसी भी फैसले से पहले अपनी कंपनी की HR पॉलिसी, नवीनतम सरकारी नोटिफिकेशन और अपने CA या लेबर कानून सलाहकार से जरूर पुष्टि करें।
