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BNPL (Buy Now Pay Later) क्या है? CIBIL Score, Charges और RBI के नियम — पूरी गाइड 2026

स्मार्टफोन से ऑनलाइन शॉपिंग करते हुए BNPL पेमेंट ऑप्शन चुनना

दिवाली और त्योहारी सीजन की शॉपिंग सेल शुरू होते ही फोन, लैपटॉप और कपड़ों की वेबसाइट पर चेकआउट करते समय एक नया बटन अक्सर दिख जाता है — “Pay in 3 parts”, “Pay Later” या “Simpl Pay in 3″। एक क्लिक में सामान आपके घर की तरफ रवाना हो जाता है, पैसा अभी नहीं कटता, और लगता है जैसे कोई जादू हो गया। यही है BNPL यानी Buy Now Pay Later — आज भारत में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले डिजिटल क्रेडिट प्रोडक्ट्स में से एक।

बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली मेघा अग्रवाल ने पिछले फेस्टिव सीजन में एक स्मार्टफोन BNPL से खरीदा था। पहली किस्त समय पर गई, लेकिन दूसरी किस्त की तारीख भूल गईं क्योंकि वह एक अलग ऐप में थी — उनके बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में कोई रिमाइंडर नहीं आया। कुछ दिन बाद लेट फीस के साथ मैसेज आया, और मेघा को पता चला कि यह “बिना ब्याज” वाला ऑप्शन देर होने पर उतना मुफ्त नहीं रहता। यही कहानी हर दूसरे BNPL यूज़र की है — शुरुआत आसान लगती है, लेकिन डिटेल्स समझना ज़रूरी है।

इस गाइड में हम सीधे-सीधे समझेंगे कि BNPL असल में काम कैसे करता है, इसका आपके CIBIL Score पर क्या असर पड़ता है, RBI के कौन से नियम इस पर लागू होते हैं, क्रेडिट कार्ड EMI और No Cost EMI से यह कितना अलग है, और फेस्टिव सीजन में इसे इस्तेमाल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

स्मार्टफोन से ऑनलाइन शॉपिंग करते हुए BNPL पेमेंट ऑप्शन चुनना

BNPL Kya Hai Aur Kaise Kaam Karta Hai?

BNPL यानी Buy Now Pay Later एक शॉर्ट-टर्म क्रेडिट सुविधा है, जिसमें आप कोई सामान या सर्विस अभी खरीद लेते हैं और उसकी पूरी कीमत कुछ हफ्तों या महीनों में छोटी-छोटी किस्तों में चुकाते हैं। यह क्रेडिट कार्ड की तरह दिखता है, लेकिन असल में इसके पीछे अलग मॉडल काम करता है।

सामान्य तरीका यह है:

  • आप किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट या ऐप पर चेकआउट करते हैं और “Pay Later” या किसी BNPL पार्टनर का ऑप्शन चुनते हैं।
  • BNPL प्रोवाइडर (जो खुद एक NBFC हो सकता है, या किसी बैंक/NBFC के साथ टाई-अप में काम करता है) आपकी बेसिक जानकारी, मोबाइल नंबर, PAN और कभी-कभी बैंक स्टेटमेंट के आधार पर एक “सॉफ्ट” क्रेडिट चेक करता है।
  • मंज़ूरी मिलने पर आपको एक छोटी क्रेडिट लिमिट मिलती है, और सामान की पूरी रकम उस समय आपके बदले BNPL प्रोवाइडर मर्चेंट को चुका देता है।
  • आप उस रकम को तय किस्तों में — ज़्यादातर मामलों में 2 से 4 किस्तों में, कुछ में 3 से 12 महीनों में — बिना ब्याज या कम ब्याज पर वापस चुकाते हैं।
  • समय पर किस्त न चुकाने पर लेट फीस और कुछ मामलों में ब्याज भी जुड़ जाता है।

यानी असल में यह एक छोटी-अवधि का अनसिक्योर्ड लोन है, जिसे “शॉपिंग फीचर” की तरह पैकेज किया गया है। यही वजह है कि इसे समझते समय लोन की तरह ही सावधानी बरतनी ज़रूरी है, सिर्फ एक “पेमेंट मेथड” की तरह नहीं।

Bharat Mein BNPL Dene Wale Popular Platforms

भारत में इस समय कई फिनटेक कंपनियां और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपने ग्राहकों को BNPL की सुविधा देते हैं। इनमें LazyPay, Simpl, Amazon Pay Later, Flipkart Pay Later, Paytm Postpaid, Mobikwik Zip और Slice जैसे नाम शामिल हैं। कुछ प्लेटफॉर्म सीधे किसी बैंक या NBFC के पार्टनरशिप में चलते हैं, तो कुछ खुद NBFC लाइसेंस के तहत काम करते हैं।

हर प्रोवाइडर की क्रेडिट लिमिट, किस्तों की संख्या, इंटरेस्ट-फ्री पीरियड और लेट फीस की पॉलिसी अलग-अलग होती है, और यह समय के साथ बदलती भी रहती है। इसलिए इस गाइड में हम किसी एक प्रोवाइडर के सटीक चार्ज या लिमिट का दावा नहीं कर रहे — ये हर ऐप में अलग हो सकते हैं और बदल भी सकते हैं। BNPL इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने प्रोवाइडर के ऐप या वेबसाइट पर मौजूद Terms & Conditions, लेट फीस और रिपोर्टिंग पॉलिसी खुद चेक कर लें — यही सबसे सुरक्षित तरीका है।

BNPL vs Credit Card EMI vs No Cost EMI — Kya Fark Hai?

तीनों ऑप्शन देखने में एक जैसे लगते हैं — सामान अभी, पैसा बाद में — लेकिन इनकी बनावट अलग है। हमारे पहले के No Cost EMI के सच पर आर्टिकल में हमने बताया था कि No Cost EMI में भी प्रोसेसिंग फीस और GST जुड़ा हुआ हो सकता है। नीचे की टेबल में तीनों की तुलना देखें:

बिंदुBNPLक्रेडिट कार्ड EMINo Cost EMI
किसे चाहिएबिना क्रेडिट कार्ड वाले भी ले सकते हैंक्रेडिट कार्ड होना ज़रूरीक्रेडिट कार्ड या कुछ मामलों में डेबिट कार्ड
अप्रूवल प्रोसेसतुरंत, सॉफ्ट चेक, मिनटों मेंकार्ड पहले से अप्रूव होना चाहिएकार्ड पहले से अप्रूव होना चाहिए
सामान्य अवधि2 हफ्ते से लेकर 3-12 महीने तक (प्रोवाइडर पर निर्भर)3 से 24 महीने तक3 से 24 महीने तक
ब्याज/फीससमय पर चुकाने पर अक्सर शून्य, देर होने पर लेट फीस व ब्याजब्याज सीधे लगता है (बहुत ऊंचा हो सकता है)दिखने में ब्याज शून्य, पर अक्सर प्रोसेसिंग फीस + GST जुड़ा होता है
CIBIL पर असरप्रोवाइडर के बैंक/NBFC टाई-अप पर निर्भर, सब रिपोर्ट नहीं करतेहर महीने रिपोर्ट होता हैक्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट के हिस्से के तौर पर रिपोर्ट होता है

सीधी भाषा में समझें तो BNPL उन लोगों के लिए आसान एंट्री पॉइंट है जिनके पास अभी क्रेडिट कार्ड नहीं है, लेकिन इसकी ट्रांसपेरेंसी और रेगुलेशन अभी क्रेडिट कार्ड जितनी स्थिर नहीं है।

BNPL Ka CIBIL Score Par Kya Asar Padta Hai?

यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है, और इसका जवाब “यह निर्भर करता है” से शुरू होता है।

जब कोई बैंक या NBFC — यानी RBI की भाषा में “Regulated Entity” (RE) — किसी BNPL प्रोडक्ट के पीछे खड़ा होता है, तो RBI के 2022 के डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस के मुताबिक उस लेंडिंग को लोन के टेन्योर या नेचर से कोई फर्क नहीं पड़ता, उसे Credit Information Companies यानी CIC (जैसे CIBIL, Equifax, CRIF High Mark, Experian) को रिपोर्ट करना ज़रूरी है। यानी अगर आपका BNPL किसी बैंक या NBFC के नाम पर दर्ज है, तो उसकी रिपेमेंट हिस्ट्री — अच्छी या बुरी दोनों — आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में जा सकती है।

लेकिन व्यवहार में सभी छोटे फिनटेक-ओनली BNPL प्रोडक्ट्स, खासकर वे जो किसी RBI-रेगुलेटेड इकाई के बिना या इनफॉर्मल स्ट्रक्चर में चलते थे, हर ट्रांजैक्शन को बराबर तरीके से रिपोर्ट नहीं करते — यह हर प्रोवाइडर की अपनी पॉलिसी और टाई-अप पर निर्भर करता है। इसलिए दो अलग-अलग BNPL ऐप पर एक जैसी देर से भरी किस्त का असर आपके CIBIL Score पर अलग-अलग हो सकता है।

कुछ ज़रूरी बातें:

  • ज़्यादातर BNPL साइनअप के समय सिर्फ “सॉफ्ट इंक्वायरी” करते हैं, जिससे स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता।
  • क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए अनुरोध करने पर कभी-कभी “हार्ड इंक्वायरी” हो सकती है, जिससे स्कोर थोड़ी देर के लिए हल्का गिर सकता है।
  • अगर BNPL अकाउंट बैंक/NBFC से जुड़ा है और आप किस्त चुकाने में देर करते हैं, तो यह डिफॉल्ट की तरह रिपोर्ट हो सकता है और स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • छोटी क्रेडिट लिमिट पर ज़्यादा यूटिलाइज़ेशन (यानी ₹10,000 की लिमिट में से ₹9,000 इस्तेमाल करना) क्रेडिट कार्ड की तरह ही स्कोर के लिहाज़ से अच्छा नहीं दिखता।
  • सिर्फ समय पर BNPL चुकाने से आपका स्कोर अपने आप “बहुत ऊंचा” नहीं बन जाता — स्कोर बनाने के लिए एक मज़बूत, लंबी क्रेडिट हिस्ट्री (जैसे क्रेडिट कार्ड, लोन) ज़्यादा असरदार होती है।

अगर आपको यह समझना है कि आपका स्कोर आज किस स्थिति में है और उसे कैसे सुधारा जाए, तो हमारा CIBIL Score की पूरी गाइड ज़रूर पढ़ें।

क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट करते हुए हाथ, BNPL और क्रेडिट कार्ड की तुलना

RBI Ke Niyam: BNPL Par Regulation Kaise Badla

BNPL के लिए कोई एक अलग, पूरी तरह समर्पित कानून अभी भारत में नहीं है, लेकिन पिछले कुछ सालों में RBI ने डिजिटल लेंडिंग को लेकर कई ज़रूरी नियम लागू किए हैं जो BNPL पर भी लागू होते हैं, खासकर जब वह किसी बैंक या NBFC के ज़रिए चलता है।

2022 — Digital Lending Guidelines

अगस्त 2022 में RBI ने डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस जारी की थीं, जिनमें ये मुख्य नियम शामिल हैं:

  • लोन का पैसा सीधे बॉरोअर के बैंक खाते और RE (बैंक/NBFC) के खाते के बीच ही ट्रांसफर होना चाहिए — किसी थर्ड-पार्टी वॉलेट या पूल अकाउंट के ज़रिए नहीं।
  • BNPL समेत हर तरह का डिजिटल लोन, उसकी अवधि या नेचर से बिना फर्क किए, क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
  • हर डिजिटल लोन में एक “कूलिंग-ऑफ” पीरियड होना चाहिए, जिसमें बॉरोअर बिना पेनाल्टी के सिर्फ मूलधन और उस समय तक का प्रोपोर्शनेट ब्याज चुका कर लोन से बाहर निकल सकता है।
  • क्रेडिट लिमिट अपने आप, बॉरोअर की सहमति के बिना नहीं बढ़ाई जा सकती।

अप्रैल-अक्टूबर 2024 — Key Fact Statement (KFS)

अप्रैल 2024 में RBI ने ऐलान किया और 1 अक्टूबर 2024 से यह नियम लागू हुआ कि सभी रिटेल और MSME लोन (क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि को छोड़कर) के लिए लेंडर को एक Key Fact Statement देना ज़रूरी है। इसमें शामिल होता है: ऑल-इनक्लूसिव ब्याज दर, APR यानी वास्तविक सालाना दर पूरी गणना के साथ, अमॉर्टाइज़ेशन शेड्यूल, और वे सभी फीस जो KFS में नहीं बताई गई हैं उन्हें बॉरोअर की साफ सहमति के बिना चार्ज नहीं किया जा सकता। डिजिटल लेंडर्स के लिए KFS पहले से ज़रूरी था, और यह नया नियम रिटेल लोन के दायरे को और बड़ा करता है।

मई 2025 — Digital Lending Directions, 2025

मई 2025 में RBI ने एक सर्कुलर (RBI/2025-26/36) के ज़रिए यह निर्देश दिया कि सभी रेगुलेटेड इकाइयों — बैंक और NBFC — को अपने सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLA) को RBI के CIMS पोर्टल पर रजिस्टर और रिपोर्ट करना होगा, जिसकी डेडलाइन 15 जून 2025 रखी गई थी। इसका मकसद एक सेंट्रल रजिस्ट्री बनाना है जिससे RBI गैर-अधिकृत या फर्ज़ी लेंडिंग ऐप्स पर नज़र रख सके।

कुल मिलाकर, इन नियमों का असली मतलब यह है: अगर आपका BNPL किसी असली बैंक या NBFC के ज़रिए चल रहा है, तो उसमें पारदर्शिता की उम्मीद ज़्यादा है। लेकिन अगर कोई प्लेटफॉर्म बिना साफ बताए किसी अनरेगुलेटेड तरीके से क्रेडिट दे रहा है, तो वहां जोखिम कहीं ज़्यादा है — ऐसे में प्रोवाइडर की लेंडिंग पार्टनर जानकारी वेबसाइट पर ज़रूर चेक करें।

BNPL Ke Fayde

सही तरीके से इस्तेमाल करने पर BNPL के कुछ असली फायदे हैं:

  • तुरंत एक्सेस: जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है — जैसे स्टूडेंट्स, फ्रीलांसर्स, नए जॉब वाले युवा — उनके लिए भी यह एक एंट्री-लेवल क्रेडिट ऑप्शन बन जाता है।
  • बिना सेविंग्स खाली किए खरीदारी: ज़रूरी सामान (जैसे कोई ज़रूरी अप्लायंस) एक साथ खरीदने के बजाय छोटी किस्तों में बांटा जा सकता है।
  • समय पर चुकाने पर जीरो कॉस्ट: कई BNPL प्रोडक्ट्स में समय पर पूरी रकम चुकाने पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता।
  • आसान और तेज़ प्रोसेस: क्रेडिट कार्ड की लंबी अप्लीकेशन प्रोसेस के मुकाबले BNPL मिनटों में अप्रूव हो जाता है।

BNPL Ke Nuksan Aur Risk

सिक्के का दूसरा पहलू भी समझना ज़रूरी है:

  • ओवरस्पेंडिंग: “अभी पैसा नहीं कटेगा” वाली सोच अक्सर बजट से बाहर खरीदारी करा देती है, खासकर फेस्टिव सेल में।
  • कई प्लान्स ट्रैक करना मुश्किल: अलग-अलग ऐप्स में अलग-अलग किस्तें चलने से तारीख भूलना आसान हो जाता है।
  • लेट फीस और ब्याज: देर होने पर फ्लैट लेट फीस के साथ-साथ ऊंची ब्याज दर भी लग सकती है, जो सालाना आधार पर काफी महंगी पड़ सकती है।
  • क्रेडिट हिस्ट्री का भरोसा न होना: अगर आपका प्रोवाइडर CIC को रिपोर्ट नहीं करता, तो समय पर चुकाने का भी आपके स्कोर को कोई फायदा नहीं मिलता — जबकि डिफॉल्ट की सूरत में कई बार रिकवरी एजेंट ज़रूर संपर्क करते हैं।
  • फाइन प्रिंट में छिपी शर्तें: कुछ प्लेटफॉर्म पर “ज़ीरो कॉस्ट” ऑफर के पीछे मर्चेंट प्राइस पहले से थोड़ा बढ़ा हुआ हो सकता है।
  • कमज़ोर आय वर्ग के लिए ज़्यादा जोखिम: कम इनकम वाले और पहली बार क्रेडिट इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स पर ओवरस्पेंडिंग और डिफॉल्ट का असर सबसे ज़्यादा देखा गया है।

शॉपिंग के दौरान क्रेडिट कार्ड या BNPL से पेमेंट स्वाइप करते हुए

Worked Example 1: Suresh Kumar, Bhopal — Deri Hone Par Kitna Extra Dena Pada

भोपाल में रहने वाले सुरेश कुमार ने फेस्टिव सेल में एक स्मार्टफोन ₹24,000 का BNPL से खरीदा, जिसे 4 बराबर किस्तों में चुकाना था यानी हर किस्त ₹6,000 की। मान लीजिए दूसरी किस्त देने में उन्हें 10 दिन की देरी हो जाती है, और प्रोवाइडर की पॉलिसी में फ्लैट ₹300 लेट फीस के साथ बकाया राशि पर 24% सालाना ब्याज की दर लगती है (यह सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर लिया गया मानक है, हर प्रोवाइडर की दर अलग हो सकती है)। 10 दिन के लिए ₹6,000 पर 24% सालाना ब्याज लगभग ₹39 बनता है। यानी सिर्फ 10 दिन की देरी से सुरेश को ₹300 + ₹39 ≈ ₹339 एक्स्ट्रा चुकाना पड़ा, और फोन की असल कीमत ₹24,000 से बढ़कर ₹24,339 हो गई। आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन अगर यही गलती हर महीने दोहराई जाए, तो सालभर में यह रकम कई गुना बढ़ सकती है।

Worked Example 2: Priya Nair, Kochi — No Cost EMI vs BNPL Ka Hisaab

कोच्चि की प्रिया नायर एक ₹50,000 का अप्लायंस खरीदना चाहती हैं। उनके सामने दो ऑप्शन हैं — क्रेडिट कार्ड पर 6 महीने का No Cost EMI, या किसी BNPL प्लेटफॉर्म पर 3 महीने का इंटरेस्ट-फ्री प्लान।

ऑप्शन A — No Cost EMI (6 महीने): मान लीजिए प्रोसेसिंग फीस कीमत का 2% है, यानी ₹1,000, और उस पर 18% GST यानी ₹180 अलग से जुड़ता है। कुल एक्स्ट्रा खर्च ₹1,180 हो जाता है, यानी प्रिया को असल में ₹51,180 चुकाने होंगे — हर महीने लगभग ₹8,530 की किस्त।

ऑप्शन B — BNPL (3 महीने, समय पर चुकाने पर): अगर प्रिया हर किस्त समय पर चुकाती हैं, तो कई BNPL प्लेटफॉर्म पर एक्स्ट्रा चार्ज शून्य रहता है, यानी कुल ₹50,000 ही चुकाने होंगे — हर महीने लगभग ₹16,667 की किस्त।

इस उदाहरण में, समय पर चुकाने की शर्त पर, BNPL प्रिया को ₹1,180 की बचत दे सकता है। लेकिन ध्यान रहे — यह फायदा सिर्फ तभी है जब हर किस्त बिना देरी के चुकाई जाए, और मासिक किस्त की रकम भी ज़्यादा बड़ी है (कम महीनों में बंटी होने की वजह से), जो हर किसी के बजट में फिट नहीं बैठती। यह सिर्फ एक उदाहरण के लिए मानी गई गणना है — असल दरें और फीस प्रोवाइडर और बैंक के हिसाब से अलग हो सकती हैं।

Kaun BNPL Istemal Kare, Kaun Na Kare?

स्थितिBNPL इस्तेमाल करना ठीक है?क्यों
फिक्स्ड सैलरी है और किस्त की रकम बजट में साफ फिट होती हैहां, सावधानी सेसमय पर चुकाने की क्षमता है, रिस्क कम है
पहली बार क्रेडिट इस्तेमाल कर रहे हैं और कोई क्रेडिट कार्ड नहीं हैहां, पर छोटी रकम से शुरुआत करेंक्रेडिट हिस्ट्री बनाने का मौका, पर जोखिम सीमित रखें
एक साथ 3-4 अलग-अलग BNPL प्लान चल रहे हैंनहींट्रैकिंग मुश्किल, डिफॉल्ट का खतरा बढ़ जाता है
इनकम अनिश्चित है (फ्रीलांस, कमीशन-बेस्ड)सावधान रहेंकिस्त के महीने में कम कमाई होने पर डिफॉल्ट का रिस्क
सिर्फ “फ्री लगता है” इसलिए गैर-ज़रूरी सामान खरीदनानहींओवरस्पेंडिंग की सबसे बड़ी वजह यही है

Festive Season Mein BNPL Use Karte Waqt Checklist

  • खरीदारी से पहले तय करें कि यह खर्च आपके महीने के बजट में पहले से शामिल है या नहीं।
  • किस्त की हर तारीख को फोन के कैलेंडर में अलग से रिमाइंडर लगाएं — सिर्फ ऐप के नोटिफिकेशन पर निर्भर न रहें।
  • एक समय में एक से ज़्यादा BNPL प्लान न चलाएं, ताकि ट्रैकिंग आसान रहे।
  • साइन अप करने से पहले प्रोवाइडर की वेबसाइट पर लेट फीस, ब्याज दर और क्या यह CIC को रिपोर्ट होता है — यह ज़रूर पढ़ें।
  • “No Cost” या “Zero Interest” लिखा दिखे तो भी टोटल अमाउंट कैलकुलेटर से चेक करें कि कोई हिडन फीस तो नहीं जुड़ी।
  • अगर एक महीने में एक से ज़्यादा किस्त ड्यू है, तो उस महीने नई BNPL खरीदारी टालें।

क्रेडिट और BNPL डेट ट्रैप से बचने के उपाय सोचता व्यक्ति

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FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. BNPL लेने के लिए क्या क्रेडिट कार्ड होना ज़रूरी है?

नहीं। BNPL का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसके लिए क्रेडिट कार्ड होना ज़रूरी नहीं है। ज़्यादातर प्रोवाइडर सिर्फ PAN, मोबाइल नंबर और बेसिक KYC से मंज़ूरी दे देते हैं।

Q2. क्या BNPL का CIBIL Score पर हमेशा असर पड़ता है?

यह प्रोवाइडर पर निर्भर करता है। अगर BNPL किसी बैंक या NBFC के ज़रिए चल रहा है, तो RBI के नियमों के मुताबिक उसे क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट किया जाना चाहिए। लेकिन सभी छोटे फिनटेक-ओनली प्रोडक्ट्स हर ट्रांजैक्शन बराबर तरीके से रिपोर्ट नहीं करते — अपने प्रोवाइडर से यह सीधे पूछना बेहतर है।

Q3. समय पर किस्त न चुकाने पर क्या होता है?

आम तौर पर फ्लैट लेट फीस लगती है, और कई प्रोवाइडर बकाया रकम पर ब्याज भी जोड़ देते हैं। कुछ मामलों में लगातार डिफॉल्ट पर रिकवरी एजेंट भी संपर्क कर सकते हैं, और अगर यह CIC को रिपोर्ट होता है तो क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है।

Q4. BNPL और नो कॉस्ट EMI में से कौन बेहतर है?

दोनों की अपनी जगह है। BNPL उन लोगों के लिए बेहतर है जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है और जो कम महीनों में रकम चुका सकते हैं। No Cost EMI उन लोगों के लिए बेहतर हो सकता है जिनके पास क्रेडिट कार्ड है और जिन्हें लंबी अवधि (6-24 महीने) में भुगतान करना है — बशर्ते प्रोसेसिंग फीस और GST चेक कर लिया जाए।

Q5. क्या BNPL से लिया गया कर्ज़ भी “कर्ज़” की तरह गिना जाता है?

हां, कानूनी और व्यावहारिक दोनों रूप से यह एक शॉर्ट-टर्म अनसिक्योर्ड लोन ही है, चाहे इसे “पेमेंट फीचर” की तरह दिखाया जाए। इसे उसी गंभीरता से लेना चाहिए जैसे किसी भी और लोन को।

Q6. क्या सभी BNPL प्लेटफॉर्म RBI के नियमों के दायरे में आते हैं?

RBI के डिजिटल लेंडिंग नियम सीधे तौर पर बैंक और NBFC जैसी “रेगुलेटेड इकाइयों” और उनके लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स पर लागू होते हैं। इसलिए BNPL इस्तेमाल करने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि असल लेंडिंग पार्टनर कौन है — यह जानकारी प्रोवाइडर की वेबसाइट पर “Lending Partner” या “NBFC Partner” सेक्शन में मिलनी चाहिए।

Q7. क्या स्टूडेंट्स या बिना इनकम प्रूफ वाले लोग BNPL ले सकते हैं?

कुछ प्लेटफॉर्म कम सख्त शर्तों पर मंज़ूरी दे देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चुकाने की ज़िम्मेदारी कम हो जाती है। बिना स्थिर इनकम के BNPL लेना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर अगर एक से ज़्यादा प्लान एक साथ चल रहे हों।

Q8. फेस्टिव सेल में BNPL इस्तेमाल करने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?

सिर्फ उन चीज़ों के लिए BNPL इस्तेमाल करें जो पहले से आपके बजट में तय हैं, एक समय में एक ही प्लान चलाएं, हर किस्त की तारीख अलग से रिमाइंड करें, और खरीदारी से पहले प्रोवाइडर की लेट फीस व रिपोर्टिंग पॉलिसी पढ़ लें।

निष्कर्ष

BNPL न तो पूरी तरह “बुरा” है, न ही पूरी तरह “मुफ्त”। यह एक असली क्रेडिट प्रोडक्ट है, जो सही इस्तेमाल पर आपकी फेस्टिव शॉपिंग को आसान बना सकता है, और गलत इस्तेमाल पर एक छोटी-सी देरी को भी महंगी बना सकता है। RBI के डिजिटल लेंडिंग नियमों ने इसमें पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश ज़रूर की है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा आपके बजट और अनुशासन पर ही निर्भर करता है। खरीदारी से पहले एक बार रुककर यह पूछना न भूलें — “क्या यह खर्च मेरे बजट में पहले से तय है, या सिर्फ इसलिए कर रहा हूं क्योंकि अभी पैसा नहीं कट रहा?”

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के मकसद से लिखा गया है। यह निवेश, कर या कानूनी सलाह नहीं है। BNPL प्रोवाइडर्स की फीस, ब्याज दर, क्रेडिट लिमिट और रिपोर्टिंग पॉलिसी समय के साथ बदल सकती है और प्रोवाइडर-दर-प्रोवाइडर अलग होती है। कोई भी BNPL या क्रेडिट प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले संबंधित प्रोवाइडर की आधिकारिक वेबसाइट, Terms & Conditions और नवीनतम RBI गाइडलाइंस ज़रूर देखें।

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