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दिवाली बोनस और गिफ्ट पर टैक्स 2026: ₹15,000 की नई छूट, कैश बोनस पर TDS और ₹12 लाख का जाल

दिवाली बोनस और गिफ्ट पर टैक्स 2026 - जलता हुआ दीया

इंदौर की एक फार्मा कंपनी में सेल्स मैनेजर विकास शर्मा हर साल अक्टूबर का इंतज़ार करते हैं। वजह साफ है — दिवाली बोनस। पिछले साल कंपनी ने ₹40,000 का कैश बोनस और ₹8,000 का गिफ्ट हैम्पर दिया था। विकास ने सोचा था कि पूरे ₹48,000 उनके हाथ में आएंगे, लेकिन अगले महीने की सैलरी स्लिप देखी तो TDS अचानक बढ़ा हुआ था। HR से पूछा तो जवाब मिला — “बोनस सैलरी का हिस्सा है, उस पर टैक्स कटेगा। और गिफ्ट की ₹5,000 से ऊपर की वैल्यू भी टैक्सेबल है।”

इस साल कहानी थोड़ी बदली हुई है। 1 अप्रैल 2026 से देश में नया Income-tax Act, 2025 और Income-tax Rules, 2026 लागू हो चुके हैं, और इनमें कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट की टैक्स-फ्री लिमिट ₹5,000 से बढ़कर ₹15,000 हो गई है। लेकिन कैश बोनस का नियम वही है — वह पूरा का पूरा आपकी सैलरी इनकम में जुड़ता है। इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि दिवाली 2026 पर मिलने वाले बोनस, गिफ्ट वाउचर, मिठाई के डिब्बे, रिश्तेदारों के कैश गिफ्ट और दोस्तों के तोहफ़ों पर कितना टैक्स लगेगा, और किन छोटी गलतियों से बचकर आप अपना पैसा बचा सकते हैं।

⚡ एक नज़र में — दिवाली बोनस और गिफ्ट टैक्स 2026

  • कंपनी का कैश बोनस — पूरा टैक्सेबल, सैलरी में जुड़ता है, employer TDS काटेगा।
  • कंपनी का गिफ्ट / वाउचर / टोकन (नॉन-कैश) — पूरे टैक्स ईयर में कुल वैल्यू ₹15,000 से कम रहे तो टैक्स-फ्री (पहले यह लिमिट ₹5,000 थी)।
  • रिश्तेदारों (माता-पिता, भाई-बहन, पति/पत्नी आदि) से मिला गिफ्ट — कितना भी हो, टैक्स-फ्री।
  • दोस्तों / गैर-रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट — साल भर में कुल ₹50,000 तक टैक्स-फ्री; इससे ऊपर गया तो पूरी रकम टैक्सेबल।
  • नियम पुरानी और नई दोनों टैक्स रिजीम में लागू होते हैं।

दिवाली 2026 कब है और बोनस का मौसम क्यों अहम है?

इस साल धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को और दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। ज़्यादातर कंपनियाँ अक्टूबर की सैलरी या नवंबर के पहले हफ्ते में बोनस और गिफ्ट बाँटती हैं। यही वह समय है जब लोग सोना, गाड़ी, इलेक्ट्रॉनिक्स या घर का सामान खरीदने की प्लानिंग करते हैं।

परेशानी यह है कि ज़्यादातर लोग बोनस की ग्रॉस रकम देखकर खर्च की प्लानिंग कर लेते हैं, जबकि हाथ में आने वाली रकम TDS कटने के बाद कम होती है। अगर आप पहले से जान लें कि आपके बोनस पर कितना टैक्स बनेगा, तो न सिर्फ खर्च बेहतर प्लान होगा, बल्कि साल के आखिर में ITR फाइल करते समय कोई झटका भी नहीं लगेगा।

2026 में क्या बदला है? नया कानून, नए नियम

1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act, 1961 की जगह Income-tax Act, 2025 लागू हुआ है और Income-tax Rules, 1962 की जगह Income-tax Rules, 2026। इससे कई चीज़ों के नाम और सेक्शन नंबर बदल गए हैं। दिवाली बोनस और गिफ्ट से जुड़े मुख्य बदलाव ये हैं:

विषयपहले (31 मार्च 2026 तक)अब (1 अप्रैल 2026 से)
कंपनी के गिफ्ट की टैक्स-फ्री लिमिट₹5,000 प्रति वर्ष (Rule 3(7)(iv))₹15,000 प्रति वर्ष (Rule 15)
सैलरी पर TDS का सेक्शनSection 192Section 392
सैलरी TDS सर्टिफिकेटForm 16Form 130
टैक्स पासबुकForm 26ASForm 168
गैर-रिश्तेदार से गिफ्ट का नियमSection 56(2)(x), ₹50,000Section 92(2)(m), ₹50,000 (लिमिट वही)
₹12 लाख तक टैक्स-फ्री रिबेट (नई रिजीम)Section 87ASection 156 (रकम वही)

ध्यान दें — Budget 2026 में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ। नई टैक्स रिजीम में टैक्स ईयर 2026-27 के लिए स्लैब वही हैं जो पिछले साल थे, और सैलरीड लोगों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता रहेगा। नए कानून के बाकी बदलावों को विस्तार से समझने के लिए हमारा लेख नया Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल 2026 से क्या बदला? ज़रूर पढ़ें।

सबसे पहले समझें: बोनस और गिफ्ट में फर्क क्या है?

टैक्स के हिसाब से “बोनस” और “गिफ्ट” दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं, और यही फर्क आपकी जेब पर सबसे ज़्यादा असर डालता है।

  • बोनस (कैश या बैंक ट्रांसफर): यह आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाता है। चाहे इसे “दिवाली बोनस”, “फेस्टिवल बोनस”, “परफॉर्मेंस बोनस” या “एक्सग्रेशिया” कहा जाए — कैश में मिला हर रुपया “Income from Salaries” में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इस पर कोई अलग छूट नहीं है।
  • गिफ्ट / वाउचर / टोकन (नॉन-कैश): मिठाई का डिब्बा, ड्राई फ्रूट हैम्पर, गिफ्ट कार्ड, ई-वाउचर, चांदी का सिक्का, इलेक्ट्रॉनिक सामान — ये सब “perquisite” (अनुलाभ) माने जाते हैं। इन्हीं पर ₹15,000 की सालाना छूट मिलती है।

यानी अगर आपकी कंपनी ₹15,000 कैश देती है तो वह पूरा टैक्सेबल है, लेकिन वही ₹15,000 से थोड़ा कम का गिफ्ट वाउचर दे तो वह टैक्स-फ्री हो सकता है। गिफ्ट का रूप तय करता है कि आपकी जेब में कितना बचेगा।

कंपनी से मिला दिवाली गिफ्ट - ₹15,000 टैक्स-फ्री लिमिट

कंपनी के दिवाली गिफ्ट पर ₹15,000 का नया नियम — पूरी जानकारी

Income-tax Rules, 2026 के Rule 15 के तहत, अगर आपके employer की तरफ से पूरे टैक्स ईयर (1 अप्रैल से 31 मार्च) में दिए गए सभी गिफ्ट, वाउचर और टोकन की कुल वैल्यू ₹15,000 से कम रहती है, तो उसकी perquisite वैल्यू “nil” यानी शून्य मानी जाती है — आपको उस पर कोई टैक्स नहीं देना।

तीन बातें जो सबसे ज़्यादा लोग गलत समझते हैं

1. यह लिमिट प्रति गिफ्ट नहीं, पूरे साल की है। दिवाली का वाउचर, नए साल का हैम्पर, बर्थडे गिफ्ट कार्ड और work-anniversary का तोहफ़ा — सब एक ही टैक्स ईयर में जुड़ेंगे। अगर अक्टूबर में ₹10,000 का दिवाली वाउचर मिला और मार्च में ₹5,000 का बर्थडे गिफ्ट, तो कुल ₹15,000 हो गया।

2. यह “डिडक्शन” नहीं, “थ्रेशोल्ड” है। बहुत से लोग सोचते हैं कि ₹15,000 तक छूट और उसके ऊपर की रकम पर टैक्स लगेगा। लेकिन नियम की भाषा के अनुसार वैल्यू तभी nil मानी जाती है जब कुल रकम ₹15,000 से कम रहे। कई टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कुल वैल्यू इस लिमिट तक पहुँच गई या पार हो गई, तो पूरी रकम टैक्सेबल perquisite बन सकती है — सिर्फ ऊपर वाला हिस्सा नहीं। इसे “क्लिफ इफेक्ट” कहा जाता है। कुछ संस्थान इसे अलग तरीके से भी पढ़ते हैं, इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि साल भर का कुल नॉन-कैश गिफ्ट ₹15,000 से नीचे रहे।

3. कैश इस छूट में शामिल नहीं है। नियम “gift, voucher or token” की बात करता है। कैश बोनस या बैंक में ट्रांसफर की गई रकम पर यह ₹15,000 वाली छूट नहीं मिलती।

उदाहरण से समझें

कंपनी से मिला (टैक्स ईयर 2026-27)कुल नॉन-कैश वैल्यूटैक्स स्थिति
₹8,000 का दिवाली ड्राई-फ्रूट हैम्पर₹8,000✅ टैक्स-फ्री
₹10,000 वाउचर (दिवाली) + ₹4,000 गिफ्ट कार्ड (नया साल)₹14,000✅ टैक्स-फ्री
₹12,000 वाउचर (दिवाली) + ₹4,000 बर्थडे गिफ्ट₹16,000⚠️ लिमिट पार — पूरी ₹16,000 टैक्सेबल perquisite मानी जा सकती है
₹15,000 कैश “दिवाली गिफ्ट”— (कैश)❌ पूरा सैलरी में जुड़ेगा, टैक्सेबल

तीसरी लाइन वाले केस में अगर कर्मचारी 30% स्लैब में है, तो ₹16,000 पर 4% सेस मिलाकर लगभग ₹4,992 टैक्स बन सकता है। वहीं अगर कुल गिफ्ट ₹14,000 पर रुक जाता, तो टैक्स शून्य होता। सिर्फ ₹2,000 के फर्क से लगभग ₹5,000 का टैक्स — यही “क्लिफ” का असली असर है।

अच्छी बात: यह ₹15,000 की छूट पुरानी और नई दोनों टैक्स रिजीम में मिलती है। यानी नई रिजीम चुनने वाले कर्मचारी भी इसका पूरा फायदा ले सकते हैं।

दिवाली कैश बोनस पर TDS - भारतीय रुपये के नोट

कैश दिवाली बोनस पर कितना टैक्स लगेगा?

कैश बोनस आपकी सालाना सैलरी में जुड़ जाता है और फिर पूरी इनकम पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। Employer को Section 392 के तहत अनुमानित सालाना टैक्स का हिसाब लगाकर TDS काटना होता है। इसीलिए बोनस वाले महीने में TDS अचानक बढ़ा हुआ दिखता है — कंपनी बचे हुए महीनों में बढ़ा हुआ टैक्स बाँटकर काटती है।

नई टैक्स रिजीम के स्लैब (टैक्स ईयर 2026-27)

टैक्सेबल इनकमटैक्स रेट
₹4 लाख तकशून्य
₹4 लाख – ₹8 लाख5%
₹8 लाख – ₹12 लाख10%
₹12 लाख – ₹16 लाख15%
₹16 लाख – ₹20 लाख20%
₹20 लाख – ₹24 लाख25%
₹24 लाख से ऊपर30%

₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर रिबेट (अब Section 156) की वजह से टैक्स शून्य हो जाता है। सैलरीड व्यक्ति के लिए ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ें तो ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर नई रिजीम में टैक्स नहीं बनता। सभी रकम पर 4% हेल्थ एवं एजुकेशन सेस अलग से लगता है।

चार अलग-अलग कर्मचारियों का हिसाब (नई रिजीम)

नीचे की टेबल में हमने ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाकर और 4% सेस जोड़कर हिसाब लगाया है। यह मानकर चला गया है कि कोई और इनकम या डिडक्शन नहीं है।

सालाना सैलरी (बोनस से पहले)दिवाली कैश बोनसबोनस से पहले टैक्सबोनस के बाद टैक्सबोनस की वजह से अतिरिक्त टैक्स
₹11,00,000₹50,000₹0₹0₹0
₹12,50,000₹50,000₹0₹26,000₹26,000
₹20,00,000₹1,00,000₹1,92,400₹2,14,500₹22,100
₹30,00,000₹1,00,000₹4,75,800₹5,07,000₹31,200

दिवाली बोनस पर टैक्स कैलकुलेशन - कैलकुलेटर और इनकम स्टेटमेंट

₹12 लाख वाला “जाल” — जहाँ बोनस का आधा हिस्सा टैक्स में चला जाता है

ऊपर की टेबल की दूसरी लाइन ध्यान से देखिए। ₹12.5 लाख सालाना सैलरी वाले कर्मचारी की टैक्सेबल इनकम ₹11.75 लाख है — रिबेट की वजह से टैक्स शून्य। लेकिन ₹50,000 का बोनस जुड़ते ही टैक्सेबल इनकम ₹12.25 लाख हो जाती है, जो ₹12 लाख की रिबेट सीमा से ऊपर है।

सामान्य स्लैब से इस इनकम पर ₹63,750 टैक्स बनता। लेकिन नई रिजीम में मार्जिनल रिलीफ का प्रावधान है — ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर इनकम वालों का टैक्स, ₹12 लाख से ऊपर वाली रकम से ज़्यादा नहीं हो सकता। इसलिए टैक्स ₹25,000 पर सीमित हो जाता है, और 4% सेस जोड़कर ₹26,000 बनता है।

मतलब ₹50,000 बोनस में से ₹26,000 टैक्स — यानी बोनस का 52% हिस्सा! यह मार्जिनल रिलीफ के बावजूद है। रिबेट की सीमा के ठीक आसपास वाले कर्मचारियों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे ज़्यादातर लोग नहीं जानते।

💡 क्या करें? अगर आपकी सैलरी ₹12–13.5 लाख के आसपास है, तो HR से बात करें। कई कंपनियाँ बोनस का एक हिस्सा नॉन-कैश वाउचर (₹15,000 से कम) में देने का विकल्प देती हैं। साथ ही अगर आपकी कंपनी NPS में employer contribution देती है, तो नई रिजीम में भी वह डिडक्शन के रूप में मिल सकता है — पर इसकी सटीक सीमा और शर्तें अपनी कंपनी के payroll या टैक्स सलाहकार से ज़रूर पूछ लें।

रिश्तेदारों और दोस्तों से मिले दिवाली गिफ्ट पर टैक्स

दिवाली पर सिर्फ ऑफिस से ही नहीं, परिवार और दोस्तों से भी कैश, सोना, चांदी या दूसरे तोहफ़े मिलते हैं। इनके लिए नियम Section 92(2)(m) में है।

रिश्तेदारों से गिफ्ट — पूरी तरह टैक्स-फ्री

टैक्स कानून में “रिश्तेदार” की एक तय सूची है। इसमें आते हैं:

  • पति/पत्नी
  • भाई-बहन और उनके पति/पत्नी
  • पति/पत्नी के भाई-बहन और उनके पति/पत्नी
  • माता-पिता के भाई-बहन (चाचा, बुआ, मामा, मौसी)
  • आपके या पति/पत्नी के लाइनियल पूर्वज और वंशज (माता-पिता, दादा-दादी, बच्चे, पोते-पोती आदि) और उनके पति/पत्नी

इन लोगों से मिला गिफ्ट चाहे ₹5,000 हो या ₹5 लाख, उस पर आपको टैक्स नहीं देना। ध्यान रहे — कज़िन (चचेरे/ममेरे भाई-बहन), भतीजा-भतीजी और दोस्त इस सूची में नहीं हैं।

गैर-रिश्तेदारों से गिफ्ट — ₹50,000 का नियम

दोस्त, पड़ोसी, कज़िन या किसी भी गैर-रिश्तेदार से पूरे टैक्स ईयर में मिले कैश गिफ्ट की कुल रकम अगर ₹50,000 से ज़्यादा हो जाती है, तो पूरी रकम “Income from Other Sources” में टैक्सेबल हो जाती है — सिर्फ ₹50,000 से ऊपर का हिस्सा नहीं।

उदाहरण: मान लीजिए दिवाली पर आपको तीन दोस्तों से ₹15,000-₹15,000 और एक कज़िन से ₹10,000 मिले — कुल ₹55,000। यह ₹50,000 से ऊपर है, इसलिए पूरे ₹55,000 आपकी इनकम में जुड़ जाएंगे। अगर कुल रकम ₹50,000 या उससे कम रहती, तो कोई टैक्स नहीं लगता।

यही ₹50,000 की सीमा सोना-चांदी के गहने, शेयर, पेंटिंग जैसी “specified movable property” पर भी लागू होती है (उनकी fair market value के हिसाब से)। हालाँकि टीवी, मोबाइल, कपड़े जैसी आम चीज़ें इस specified सूची में नहीं आतीं।

शादी पर मिले गिफ्ट

अगर दिवाली के मौसम में आपकी शादी हो रही है, तो शादी के मौके पर किसी से भी मिले गिफ्ट टैक्स-फ्री होते हैं, चाहे वे रिश्तेदार हों या नहीं।

₹2 लाख कैश का नियम मत भूलिए

Income-tax Act, 2025 के Section 186 (पुराने कानून का Section 269ST) के तहत किसी एक व्यक्ति से एक दिन में, एक लेनदेन में या एक मौके पर ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश लेना मना है। यह नियम रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर भी लागू होता है — रिश्तेदार का गिफ्ट टैक्स-फ्री है, लेकिन ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश में लेने पर पेनल्टी लग सकती है। बड़ी रकम हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक से लें।

बिज़नेस करने वाले और प्रोफेशनल्स ध्यान दें

अगर आप डॉक्टर, CA, वकील, कंसल्टेंट या व्यापारी हैं और किसी क्लाइंट या सप्लायर से दिवाली पर गिफ्ट मिलता है, तो वह गिफ्ट आपके बिज़नेस या प्रोफेशन से जुड़ा फायदा माना जा सकता है और बिज़नेस इनकम में टैक्सेबल हो सकता है। यहाँ ₹50,000 वाली छूट का तर्क लागू नहीं होता। साथ ही, क्लाइंट को दिए जाने वाले गिफ्ट पर देने वाले की तरफ से TDS के नियम भी लागू हो सकते हैं। अगर आपको बिज़नेस संबंधों से महंगे गिफ्ट मिलते हैं, तो अपने CA से एक बार ज़रूर बात कर लें।

पुरानी vs नई टैक्स रिजीम — क्या गिफ्ट के नियम अलग हैं?

नहीं। कंपनी के गिफ्ट पर ₹15,000 की लिमिट, रिश्तेदारों से टैक्स-फ्री गिफ्ट और गैर-रिश्तेदारों के लिए ₹50,000 की सीमा — ये सब दोनों रिजीम में एक जैसे हैं। फर्क सिर्फ टैक्स स्लैब और डिडक्शन का है। पुरानी रिजीम में 80C, HRA जैसे डिडक्शन मिलते हैं लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 है और स्लैब रेट ज़्यादा हैं। इसलिए एक ही बोनस पर दोनों रिजीम में टैक्स अलग बन सकता है।

दिवाली गिफ्ट और बोनस - Form 130 और ITR दस्तावेज़

अपना TDS और रिकॉर्ड कैसे चेक करें?

  1. बोनस वाले महीने की सैलरी स्लिप देखें: बोनस अलग लाइन में दिखना चाहिए और उस महीने का TDS बढ़ा हुआ होगा।
  2. गिफ्ट की वैल्यू का रिकॉर्ड रखें: कंपनी से मिले हर वाउचर/गिफ्ट की ईमेल या रसीद सँभालकर रखें, ताकि साल भर का कुल हिसाब आपके पास रहे।
  3. Form 130 चेक करें: टैक्स ईयर खत्म होने के बाद कंपनी Form 130 (पहले Form 16) देगी। उसमें बोनस “Gross Salary” में और अगर गिफ्ट ₹15,000 की लिमिट से ऊपर गया तो perquisite में दिखेगा।
  4. Form 168 (टैक्स पासबुक) मिलाएँ: इनकम टैक्स पोर्टल पर Form 168 (पहले 26AS) में देखें कि कंपनी ने जितना TDS काटा, वह सरकार के पास जमा भी हुआ है या नहीं।
  5. दोस्तों से मिले बड़े गिफ्ट ITR में दिखाएँ: अगर गैर-रिश्तेदारों से कुल गिफ्ट ₹50,000 से ऊपर गए, तो ITR में “Income from Other Sources” में ज़रूर दिखाएँ। Employer इसे आपके Form 130 में नहीं दिखाएगा।

TDS से जुड़ी दूसरी जानकारी के लिए हमारा लेख FD और Savings Account पर TDS के नए नियम 2026 भी उपयोगी है।

टैक्स कटने के बाद बचे बोनस का स्मार्ट इस्तेमाल

टैक्स समझ लेने के बाद अगला सवाल है — बचे पैसे का क्या करें? यहाँ कुछ व्यावहारिक तरीके हैं:

  • महंगा कर्ज़ पहले चुकाएँ: अगर क्रेडिट कार्ड का बकाया या पर्सनल लोन है, तो बोनस का बड़ा हिस्सा उसे चुकाने में लगाना सबसे अच्छा “रिटर्न” है, क्योंकि उनका ब्याज आमतौर पर किसी भी निवेश से ज़्यादा होता है।
  • इमरजेंसी फंड बनाएँ: कम से कम 3–6 महीने के खर्च जितना पैसा अलग रखें। हाल ही में नौकरी छूटने जैसे हालात में यही फंड काम आता है — इस पर हमारा लेख PF Withdrawal Rules 2026 भी देखें।
  • धनतेरस पर सोना सोच-समझकर: फिजिकल गोल्ड पर मेकिंग चार्ज और GST लगता है। निवेश के लिए Gold ETF या दूसरे विकल्प बेहतर हो सकते हैं। पूरी तुलना के लिए पढ़ें — सोना में निवेश कैसे करें 2026।
  • “No Cost EMI” के जाल से बचें: बोनस आने से पहले ही EMI पर बड़ी खरीदारी कर लेना आम गलती है। इसका असली खर्च जानने के लिए पढ़ें — No Cost EMI का सच 2026।
  • लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेश: बोनस का एक तय हिस्सा (जैसे 30–50%) रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए अलग रख दें।

5 आम गलतियाँ जो लोग दिवाली बोनस पर करते हैं

  1. ग्रॉस बोनस के हिसाब से खर्च प्लान करना — हमेशा TDS के बाद की नेट रकम के हिसाब से प्लानिंग करें।
  2. ₹15,000 को हर गिफ्ट की अलग लिमिट समझना — यह पूरे साल के सभी गिफ्ट की कुल लिमिट है।
  3. कैश “गिफ्ट” को टैक्स-फ्री मान लेना — कंपनी कैश को गिफ्ट कहे तब भी वह सैलरी है।
  4. कज़िन और दोस्तों के गिफ्ट को रिश्तेदार का गिफ्ट समझना — ये ₹50,000 के नियम में आते हैं।
  5. ₹12 लाख की सीमा को नज़रअंदाज़ करना — रिबेट सीमा के ठीक पास वालों का बोनस का बड़ा हिस्सा टैक्स में जा सकता है।

आगे क्या? Payroll और बोनस का बदलता तरीका

नए नियमों के बाद कंपनियाँ अपने गिफ्ट और बोनस स्ट्रक्चर पर फिर से सोच रही हैं। जिन कंपनियों के गिफ्ट बजट ₹5,000 की पुरानी लिमिट के हिसाब से बने थे, उनमें से कई अब नॉन-कैश वाउचर बढ़ाकर कर्मचारियों को ज़्यादा टैक्स-फ्री फायदा देने की कोशिश कर सकती हैं। साथ ही मील वाउचर की सीमा भी नए नियमों में बढ़ाई गई है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर में “फ्लेक्सी बेनिफिट” का हिस्सा बढ़ सकता है।

कर्मचारी के तौर पर आपके लिए सबसे अच्छी आदत यही है कि अपने HR से साल की शुरुआत में ही पूछ लें कि कंपनी कौन-कौन से गिफ्ट और वाउचर देने वाली है, और साल के आखिर तक उनका हिसाब रखें। नया कानून ज़्यादा सरल बनाया गया है, लेकिन सेक्शन नंबर और फॉर्म बदल गए हैं — इसलिए पहले साल में थोड़ी सावधानी ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या दिवाली कैश बोनस ₹15,000 तक टैक्स-फ्री है?
नहीं। ₹15,000 की छूट सिर्फ नॉन-कैश गिफ्ट, वाउचर और टोकन के लिए है। कैश बोनस पूरा सैलरी में जुड़ता है और टैक्सेबल है।

प्रश्न 2: कंपनी ने ₹10,000 का Amazon गिफ्ट वाउचर दिया है। क्या टैक्स लगेगा?
अगर इस टैक्स ईयर में कंपनी से मिले सभी गिफ्ट/वाउचर की कुल वैल्यू ₹15,000 से कम रहती है, तो कोई टैक्स नहीं लगेगा।

प्रश्न 3: क्या ₹15,000 की छूट नई टैक्स रिजीम में भी मिलती है?
हाँ, Income-tax Rules, 2026 के तहत यह छूट पुरानी और नई दोनों रिजीम में मिलती है।

प्रश्न 4: मेरे चाचा ने दिवाली पर ₹1 लाख बैंक ट्रांसफर किए हैं। क्या टैक्स लगेगा?
नहीं। चाचा (माता-पिता के भाई) टैक्स कानून में “रिश्तेदार” की सूची में आते हैं, इसलिए यह गिफ्ट पूरी तरह टैक्स-फ्री है।

प्रश्न 5: दोस्तों से कुल ₹60,000 मिले। कितनी रकम पर टैक्स लगेगा?
पूरे ₹60,000 पर। गैर-रिश्तेदारों से कुल गिफ्ट ₹50,000 से ज़्यादा होने पर पूरी रकम “Income from Other Sources” में टैक्सेबल हो जाती है।

प्रश्न 6: बोनस मिलने के बाद मेरा TDS इतना ज़्यादा क्यों कट रहा है?
Employer को Section 392 के तहत आपकी अनुमानित सालाना इनकम पर टैक्स बाँटकर काटना होता है। बोनस जुड़ने से सालाना टैक्स बढ़ता है, जो बचे महीनों में ज़्यादा TDS के रूप में दिखता है।

प्रश्न 7: Form 16 अब नहीं मिलेगा?
टैक्स ईयर 2026-27 से सैलरी का TDS सर्टिफिकेट Form 130 कहलाएगा। काम वही है, सिर्फ नाम और फॉर्मेट बदला है।

डिस्क्लेमर: यह लेख Income-tax Act, 2025 और Income-tax Rules, 2026 से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए टैक्स कैलकुलेशन अनुमानित हैं और यह मानकर किए गए हैं कि कोई अन्य इनकम या डिडक्शन नहीं है। आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार टैक्स अलग हो सकता है, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने टैक्स सलाहकार या CA से सलाह लें।

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