पुणे में एक प्राइवेट IT कंपनी में सीनियर मैनेजर अजय मेहता को मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में HR से एक मेल मिला — “Revised Salary Structure as per Income-tax Act, 2025″। अजय ने मेल खोला तो देखा कि सैलरी स्लिप पर “Assessment Year” की जगह अब “Tax Year 2026-27” लिखा हुआ था, और HRA की छूट वाली लाइन में भी कुछ बदलाव था। उनके दिमाग में पहला सवाल यही आया — “क्या मेरा टैक्स बढ़ने वाला है?”
अजय जैसे लाखों टैक्सपेयर्स के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। 65 साल पुराना Income-tax Act, 1961 अब इतिहास बन चुका है, और उसकी जगह ले लिया है नए, छोटे और आसान Income-tax Act, 2025 ने। लेकिन अच्छी खबर यह है कि टैक्स स्लैब, रेट और ज्यादातर डिडक्शन वही हैं — बदला है सिर्फ कानून लिखने और समझने का तरीका, और साथ में कुछ भत्तों (allowances) की सीमा भी काफी बढ़ी है। इस गाइड में हम बिल्कुल सीधी भाषा में समझेंगे कि असल में क्या बदला है, आपकी सैलरी स्लिप और ITR पर इसका क्या असर पड़ेगा, और आपको अभी क्या करना चाहिए।

नया Income Tax Act, 2025 है क्या?
Income-tax Act, 1961 भारत में सीधे टैक्स (direct tax) से जुड़ा सबसे पुराना और सबसे बड़ा कानून था। समय के साथ हर साल के Finance Act में संशोधन (amendments) जुड़ते-जुड़ते यह कानून इतना उलझा हुआ हो गया था कि आम टैक्सपेयर तो छोड़िए, CA और टैक्स वकीलों को भी कई बार सही सेक्शन ढूंढने में मुश्किल होती थी। सरकार ने इसे पूरी तरह दोबारा लिखने (redraft) का फैसला किया — न कि सिर्फ कुछ सेक्शन बदलने का।
नया Income-tax Act, 2025 का बिल 12 अगस्त 2025 को संसद में पास हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी 21 अगस्त 2025 को मिली। इसके बाद CBDT ने इससे जुड़े नए Income-tax Rules, 2026 को 20 मार्च 2026 को नोटिफाई किया, और पूरा कानून 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू हो गया। सरकार ने साफ कहा है कि यह बदलाव “underlying tax policy” में बदलाव किए बिना किया गया है — यानी मकसद टैक्स बढ़ाना या नई पॉलिसी लाना नहीं, बल्कि भाषा को आसान बनाना और ढांचे को व्यवस्थित करना था।
सबसे बड़ा बदलाव: अब सिर्फ “Tax Year” — Previous Year और Assessment Year की उलझन खत्म
पुराने कानून में हर टैक्सपेयर को दो साल याद रखने पड़ते थे — जिस साल में कमाई हुई, उसे “Previous Year” कहा जाता था, और जिस साल उस कमाई पर टैक्स रिटर्न भरा और असेस किया जाता था, उसे “Assessment Year” कहा जाता था। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के बीच की कमाई को Previous Year 2026-27 कहा जाता और उस पर रिटर्न Assessment Year 2027-28 में भरा जाता। नए Act में यह पूरी दोहरी व्यवस्था खत्म करके एक ही शब्द रखा गया है — Tax Year। यानी अप्रैल 2026 से मार्च 2027 की कमाई अब सीधे “Tax Year 2026-27” कहलाएगी।
| पुराना शब्द (Income-tax Act, 1961) | नया शब्द (Income-tax Act, 2025) | उदाहरण |
|---|---|---|
| Previous Year (जिस साल कमाई हुई) | Tax Year | अप्रैल 2026–मार्च 2027 = Tax Year 2026-27 |
| Assessment Year (जिस साल रिटर्न भरा/असेस हुआ) | अलग से कोई शब्द नहीं — Tax Year ही आधार | पहले: AY 2027-28, अब: सीधे Tax Year 2026-27 का रिटर्न |
| Section 1 से 298 (बिखरे हुए, 700+ सब-सेक्शन सहित) | Section 1 से 536 तक (कुल 536 सेक्शन) | 23 Chapters दोनों में, लेकिन पेज 823 से घटकर 622 |
ध्यान देने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (यानी 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की कमाई) अभी भी पुराने Income-tax Act, 1961 के तहत ही भरी और प्रोसेस होगी। नया Act सिर्फ 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली कमाई यानी Tax Year 2026-27 से लागू है। इसलिए अगर आप अभी (2026 में) अपनी FY 2025-26 की ITR भर रहे हैं, तो वहां अभी भी “Assessment Year 2026-27” ही लिखा मिलेगा — कोई गड़बड़ी नहीं है।

कानून छोटा हुआ, भाषा आसान हुई — TDS भी एक जगह
पुराने Act में टोटल मिलाकर 700 से ज्यादा सेक्शन और सब-सेक्शन थे, जिनकी भाषा भी पुरानी अंग्रेज़ी कानूनी शैली में बहुत जटिल (complex) थी — एक-एक वाक्य में कई “provided that”, “notwithstanding” जैसे शब्द होते थे। नए Act में सेक्शनों की संख्या घटाकर 536 कर दी गई है और भाषा को आम आदमी के पढ़ने लायक बनाया गया है। टोटल पेज भी 823 से घटकर 622 हो गए हैं।
एक और बड़ा सुधार यह हुआ है कि TDS (Tax Deducted at Source) के नियम, जो पहले सेक्शन 192 से 194T तक कई जगह बिखरे हुए थे, अब सारे एक ही जगह — Section 393 — में समेट दिए गए हैं। इससे किसी भी तरह की कमाई (सैलरी, FD interest, किराया, कमीशन, प्रॉफेशनल फीस) पर कितना TDS कटेगा, यह सब-सेक्शन के हिसाब से एक ही सेक्शन के भीतर मिल जाता है — अलग-अलग सेक्शन खोजने की जरूरत नहीं रहती।
80C, 80D जैसे मशहूर सेक्शन नंबर भी बदले
जो डिडक्शन सेक्शन नंबर से पूरी तरह पहचाने जाते थे, वे भी अब नए नंबर पर शिफ्ट हो गए हैं — हालांकि डिडक्शन की रकम और शर्तें वही रहीं। यहां एक मैपिंग टेबल है ताकि आपको पुराना सेक्शन देखकर नया याद रहे:
| डिडक्शन/छूट | पुराना सेक्शन (1961) | नया सेक्शन (2025) |
|---|---|---|
| PPF, ELSS, LIC जैसे निवेश — ₹1.5 लाख तक | 80C | 123 |
| NPS में निवेश | 80CCD | 124 |
| हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम | 80D | 126 |
| एजुकेशन लोन का ब्याज | 80E | 129 |
| डोनेशन/चैरिटी छूट | 80G | 133 |
| रिबेट (New Regime, ₹12 लाख तक टैक्स फ्री) | 87A | 156 |
| New Tax Regime (डिफॉल्ट रिजीम) | 115BAC | 202 |
| होम लोन ब्याज (Self-occupied) | 24(b) | (नए Act में री-नंबर, राशि वही ₹2 लाख) |
व्यवहार में इसका मतलब यह है कि अगर आपका CA या टैक्स सॉफ्टवेयर “Section 123 deduction ₹1.5 lakh” दिखाए, तो घबराने की जरूरत नहीं — यह वही पुराना जाना-पहचाना 80C ही है, सिर्फ नंबर बदला है।
सैलरी वालों के लिए असली फायदा: भत्तों (Allowances) की सीमा बहुत बढ़ी
जहां ज्यादातर बदलाव सिर्फ भाषा और नंबरिंग के हैं, वहां कुछ भत्तों की टैक्स-फ्री सीमा में वाकई बड़ा इजाफा हुआ है — और ये दशकों से नहीं बदले थे। सबसे बड़ा बदलाव HRA (House Rent Allowance) में शहरों की लिस्ट को लेकर है।
HRA छूट — अब 8 शहरों में 50% छूट
पुराने नियम में सिर्फ 4 महानगर — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई — “मेट्रो सिटी” माने जाते थे, जहां बेसिक सैलरी का 50% तक HRA छूट मिलती थी। बाकी शहरों (बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद सहित) में यह सीमा सिर्फ 40% थी। नए Income-tax Act, 2025 के तहत बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी 50% वाली लिस्ट में जोड़ दिया गया है — यानी अब टोटल 8 शहरों में 50% HRA छूट की सुविधा है।
⚠️ जरूरी बात: HRA छूट, Children Education/Hostel Allowance, मील वाउचर और गिफ्ट जैसी ये सभी बढ़ी हुई छूटें सिर्फ Old Tax Regime चुनने वालों को मिलती हैं। New Tax Regime (जो अब डिफॉल्ट है) में HRA और इन भत्तों की छूट नहीं मिलती। इसलिए नीचे दिए गए फायदे तभी लागू होंगे जब आप Old Regime चुनते हैं।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। पुणे में रहने वाले अजय मेहता (वही शुरुआत वाले मैनेजर) की Basic+DA ₹50,000/महीना है, कंपनी से HRA ₹35,000/महीना मिलता है, और वे किराए पर ₹40,000/महीना चुका रहे हैं। HRA छूट तीन चीज़ों में जो भी सबसे कम हो, उसके बराबर मिलती है — (1) असल में मिला HRA, (2) शहर के हिसाब से बेसिक का 40% या 50%, (3) किराया माइनस बेसिक का 10%।
| हिसाब | पुराना नियम (पुणे = 40% शहर) | नया नियम (पुणे = 50% शहर) |
|---|---|---|
| असल HRA मिला | ₹35,000/महीना | ₹35,000/महीना |
| शहर वाली सीमा (40%/50% of ₹50,000) | ₹20,000 | ₹25,000 |
| किराया − 10% बेसिक (₹40,000 − ₹5,000) | ₹35,000 | ₹35,000 |
| HRA छूट (सबसे कम वाला) | ₹20,000/महीना | ₹25,000/महीना |
| टैक्स योग्य HRA | ₹15,000/महीना | ₹10,000/महीना |
मतलब अजय को अब हर महीने ₹5,000 (सालाना ₹60,000) ज्यादा HRA छूट मिलेगी। अगर उनका टैक्स स्लैब 20% है, तो यह सीधे करीब ₹12,480 सालाना (20% + 4% cess) की टैक्स बचत है, और 30% स्लैब वालों के लिए यह बचत लगभग ₹18,720 सालाना तक हो सकती है। (यह सिर्फ उदाहरण के लिए मानी गई राशि है — आपकी असल बचत आपकी सैलरी स्ट्रक्चर और स्लैब पर निर्भर करेगी।)
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल भत्ता — 30 गुना तक बढ़ा
एक और भत्ता जो दशकों से नहीं बदला था, वह था Children Education Allowance और Hostel Allowance। पुराने नियम में एजुकेशन अलाउंस सिर्फ ₹100/महीना प्रति बच्चा (अधिकतम 2 बच्चे) और हॉस्टल अलाउंस सिर्फ ₹300/महीना प्रति बच्चा टैक्स-फ्री था — ये सीमाएं इतनी पुरानी थीं कि आज की महंगाई में इनका कोई मतलब नहीं बचा था। नए Act में इन्हें बढ़ाकर क्रमशः ₹3,000/महीना और ₹9,000/महीना प्रति बच्चा कर दिया गया है।
भोपाल में रहने वाली रीना शर्मा के दो बच्चे हैं — एक स्कूल में (डे-स्कॉलर) और एक हॉस्टल में रहकर पढ़ता है। दोनों के लिए एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल वाले बच्चे के लिए अलग से हॉस्टल अलाउंस मिलता है।
| भत्ता | पुरानी सालाना टैक्स-फ्री सीमा | नई सालाना टैक्स-फ्री सीमा |
|---|---|---|
| एजुकेशन अलाउंस (2 बच्चों के लिए, ₹100+₹100/महीना) | ₹2,400 | ₹72,000 (₹3,000×2×12) |
| हॉस्टल अलाउंस (1 बच्चे के लिए, ₹300/महीना) | ₹3,600 | ₹1,08,000 (₹9,000×12) |
| कुल टैक्स-फ्री भत्ता/साल | ₹6,000 | ₹1,80,000 |
यानी रीना के परिवार को हर साल ₹1,74,000 ज्यादा टैक्स-फ्री भत्ता मिल सकता है — बशर्ते कंपनी उनकी सैलरी स्ट्रक्चर में ये अलाउंस उतनी ही रकम में शामिल करे (कंपनी को पॉलिसी अपडेट करनी होगी)। 20% स्लैब पर यह करीब ₹36,000 सालाना तक की टैक्स बचत बन सकती है। (यह भी सिर्फ उदाहरण की गणना है — असल फायदा आपकी कंपनी की सैलरी पॉलिसी पर निर्भर करेगा।)
दूसरे छोटे भत्तों में भी बढ़ोतरी
- खाने का वाउचर/मील अलाउंस: ₹50 प्रति मील से बढ़कर ₹200 प्रति मील टैक्स-फ्री।
- नॉन-कैश गिफ्ट (त्योहारों पर): ₹5,000/साल से बढ़कर ₹15,000/साल टैक्स-फ्री।
- विदेश में इलाज के लिए टैक्स-फ्री सीमा: कर्मचारी की इनकम की सीमा ₹2 लाख से बढ़कर ₹8 लाख हुई, जिससे ज्यादा कर्मचारी इस छूट के दायरे में आ सकेंगे।
- कंपनी की कार पर पर्क्विजिट वैल्यू: छोटी इंजन (1.6 लीटर से कम) वाली कार के लिए ₹1,800+₹900 (ड्राइवर सहित) की पुरानी वैल्यू अब ₹5,000+₹3,000 हो गई है — यानी जिनकी कंपनी कार देती है, उनके लिए टैक्सेबल परक्विजिट बढ़ सकता है।
- मेडिकल एडवांस/लोन पर छूट: नियोक्ता से मिलने वाले ब्याज-मुक्त/सस्ते लोन पर छूट की सीमा ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है (Income-tax Rules, 2026)।

टैक्स स्लैब और रेट — कोई बदलाव नहीं!
यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है, तो साफ-साफ समझ लीजिए: नए Income-tax Act, 2025 में टैक्स स्लैब और रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। New Tax Regime (अब Section 202, पहले 115BAC) अब भी डिफॉल्ट रिजीम है, और Section 87A (अब Section 156) के तहत ₹12 लाख तक की इनकम पर रिबेट से टैक्स जीरो होने की सुविधा Tax Year 2026-27 में भी जारी है। 5% से 30% तक के वही स्लैब, वही इनकम ब्रैकेट — सिर्फ सेक्शन नंबर बदला है, पॉलिसी नहीं।
इसी तरह Long Term Capital Gains (LTCG), Short Term Capital Gains (STCG) का क्लासिफिकेशन भी पहले जैसा ही बना हुआ है — जैसे लिस्टेड इक्विटी को एक साल से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG टैक्स। Virtual Digital Assets (जैसे क्रिप्टो, NFT) पर भी 30% फ्लैट टैक्स की व्यवस्था नए Act में साफ तौर पर बनी रही है — अगर आपने किसी VDA को बेचकर मुनाफा कमाया है, तो चाहे मुनाफा छोटा हो या बड़ा, उस पर 30% टैक्स देना होगा, कोई बेसिक एग्जम्प्शन नहीं।
फॉर्म के नाम भी बदले — Form 16, Form 26AS को नए नंबर मिले
नए Act के साथ कुछ जाने-पहचाने फॉर्म के नाम भी बदल गए हैं, हालांकि इनका काम वही है। अगर आपका HR या बैंक अब इन नए नामों से फॉर्म भेजे तो घबराएं नहीं:
| पुराना फॉर्म नाम | नया फॉर्म नाम | काम क्या है |
|---|---|---|
| Form 16 | Form 130 | सैलरी पर TDS सर्टिफिकेट (कंपनी देती है) |
| Form 16A | Form 131 | सैलरी के अलावा कमाई पर TDS सर्टिफिकेट (जैसे FD interest) |
| Form 26AS | Form 168 | आपकी तरफ से कटे पूरे TDS/TCS का सालाना स्टेटमेंट |
ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन — किसे कब भरना है
ITR फाइलिंग की ड्यू डेट में भी कुछ बदलाव हुए हैं, खासकर बिज़नेस और प्रोफेशनल इनकम वालों के लिए। ध्यान रहे, नीचे दी गई डेडलाइन Tax Year 2026-27 (यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई कमाई) के लिए Tax Year खत्म होने के बाद लागू होंगी — असल ITR फॉर्म 2027 में भरे जाएंगे।
| टैक्सपेयर की कैटेगरी | ITR फॉर्म | फाइलिंग डेडलाइन |
|---|---|---|
| सैलरीड/सामान्य इंडिविजुअल (कोई ऑडिट नहीं) | ITR-1, ITR-2 | 31 जुलाई (पहले जैसी ही) |
| बिज़नेस/प्रोफेशनल इनकम (बिना ऑडिट) | ITR-3, ITR-4 | 31 अगस्त (पहले से थोड़ी ज्यादा मोहलत) |
| टैक्स ऑडिट वाले केस | लागू ITR फॉर्म | 31 अक्टूबर (पहले जैसी ही) |
| Belated Return (देर से रिटर्न) | लागू ITR फॉर्म | 31 दिसंबर तक (लेट फीस ₹1,000 / ₹5,000, इनकम के हिसाब से) |
| Revised Return (गलती सुधारने के लिए) | लागू ITR फॉर्म | 31 मार्च तक (Tax Year खत्म होने के 12 महीने के भीतर); 31 दिसंबर के बाद फाइल करने पर ₹1,000 / ₹5,000 फीस |
पुराना कानून कब तक “ज़िंदा” रहेगा? CBDT की सफाई
एक बहुत जरूरी और राहत भरी बात — नया Act लागू होने का मतलब यह नहीं कि पुराने मामले अचानक गायब हो गए। CBDT ने इस बदलाव पर FAQs जारी करते हुए साफ किया है कि:
- जो असेसमेंट, अपील या रीअसेसमेंट पहले से पेंडिंग हैं, वे पुराने Income-tax Act, 1961 के तहत ही पूरे होंगे।
- पुराने Act के तहत बने आपके अधिकार (rights), रिफंड और liabilities नए कानून के बाद भी पूरी तरह मान्य रहेंगे — कुछ भी रद्द नहीं होगा।
- पिछले सालों के losses और deductions बिना किसी रुकावट नए रिजीम में भी carry-forward होते रहेंगे।
- FY 2025-26 (पुराना Act) और FY/Tax Year 2026-27 (नया Act) के लेनदेन और TDS का रिकॉर्ड अलग-अलग रखना जरूरी है, क्योंकि दोनों अलग-अलग कानूनों के तहत हैं।
बाकी जरूरी बदलाव जो आपको पता होने चाहिए
- LRS पर TCS घटा: Liberalised Remittance Scheme के तहत पढ़ाई और इलाज के लिए ₹10 लाख से ज्यादा विदेश भेजने पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है, और विदेशी टूर पैकेज पर भी TCS अब 2% है। बाकी कामों (जैसे निवेश/गिफ्ट) के लिए ₹10 लाख से ऊपर TCS अब भी 20% है।
- F&O ट्रेडर्स के लिए STT बढ़ा: ऑप्शंस पर Securities Transaction Tax बढ़कर 0.15% (पहले 0.1-0.125%) और फ्यूचर्स पर 0.05% (पहले 0.02%) हो गया है — जो एक्टिव ट्रेडिंग करते हैं, उनकी ट्रांजैक्शन कॉस्ट थोड़ी बढ़ेगी।
- शेयर बायबैक की टैक्सेशन बदली: अब बायबैक से मिली रकम को डीम्ड डिविडेंड मानने के बजाय कैपिटल गेन की तरह टैक्स किया जाएगा।
- NRI के लिए प्रॉपर्टी TDS आसान: कोई भारतीय प्रॉपर्टी NRI से खरीद रहा है तो अब सिर्फ PAN-आधारित चालान से TDS काट सकता है, अलग से TAN रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं।
- Sovereign Gold Bond पर कैपिटल गेन छूट: अब यह छूट सिर्फ पहले (ओरिजिनल) खरीदार को मिलेगी, सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों को नहीं।
- डिविडेंड/म्यूचुअल फंड यूनिट इनकम पर इंटरेस्ट डिडक्शन हटा: अब लोन लेकर शेयर/म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदने पर चुकाए ब्याज को डिविडेंड या यूनिट इनकम के खिलाफ सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता।

आपको अभी क्या करना चाहिए? प्रैक्टिकल चेकलिस्ट
- अपनी सैलरी स्लिप पर “Tax Year 2026-27” ठीक से लिखा हुआ देखें — अगर अभी भी पुराना फॉर्मेट है तो HR/payroll टीम से कन्फर्म करें।
- अगर आप बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद या अहमदाबाद में रहते हैं, और Old Tax Regime चुनते हैं, तो HR से पूछें कि आपकी सैलरी स्ट्रक्चर में HRA को नए 50% वाले नियम के हिसाब से अपडेट किया गया है या नहीं। (बढ़ी हुई भत्ता सीमाओं के बाद Old vs New Regime की तुलना एक बार फिर करके देखें।)
- अगर बच्चों की पढ़ाई/हॉस्टल के लिए अलाउंस मिलता है, तो HR से नई लिमिट (₹3,000/₹9,000 प्रति माह) के हिसाब से सैलरी स्ट्रक्चर दोबारा बनवाने की रिक्वेस्ट करें।
- FY 2025-26 और Tax Year 2026-27 के निवेश, खर्च और TDS सर्टिफिकेट के दस्तावेज़ अलग-अलग फोल्डर/फाइल में रखें — दोनों अलग-अलग Act के तहत भरे जाएंगे।
- Form 16/16A/26AS अब Form 130/131/168 नाम से भी आ सकते हैं — नाम से कन्फ्यूज न हों, डेटा वही है।
- अगर आप F&O ट्रेडिंग या क्रिप्टो/VDA में सक्रिय हैं, तो नई STT दरों और 30% VDA टैक्स को अपनी ट्रेडिंग कॉस्ट कैलकुलेशन में शामिल करें।
- NRI हैं और भारत में प्रॉपर्टी बेच/खरीद रहे हैं, तो नए PAN-आधारित TDS चालान प्रोसेस के बारे में अपने CA से जानकारी लें।
- किसी भी बड़े फैसले (टैक्स रिजीम चुनना, निवेश बदलना) से पहले अपने CA या टैक्स एडवाइजर से नए Act के हिसाब से सलाह लें, क्योंकि सेक्शन नंबर बदलने से कई बार सॉफ्टवेयर/पोर्टल में अस्थायी गड़बड़ियां भी आ सकती हैं।
किसे नए Act पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए?
| टैक्सपेयर टाइप | क्या ध्यान दें |
|---|---|
| सैलरीड (8 बड़े शहरों में, Old Regime) | नई HRA लिमिट (50%) का फायदा सैलरी स्ट्रक्चर में जुड़ा या नहीं, चेक करें — Old vs New Regime की तुलना भी दोबारा करें |
| बच्चों की पढ़ाई वाले माता-पिता | एजुकेशन/हॉस्टल अलाउंस की नई लिमिट का फायदा लें |
| सीनियर सिटीजन | विदेश मेडिकल ट्रीटमेंट की बढ़ी इनकम-सीमा (₹8 लाख) देखें; रिफंड/पेंडिंग मामलों पर पुराना Act लागू |
| NRI (प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन) | PAN-आधारित TDS चालान प्रोसेस का फायदा लें, TAN जरूरत खत्म |
| F&O/इंट्राडे ट्रेडर | बढ़ी हुई STT दरों को ट्रेडिंग कॉस्ट में जोड़ें |
| क्रिप्टो/VDA निवेशक | 30% फ्लैट टैक्स और सख्त रिपोर्टिंग नियम का पालन करें |
| बिज़नेस/प्रोफेशनल (नॉन-ऑडिट) | ITR-3/4 की नई डेडलाइन (31 अगस्त) नोट करें |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. क्या नए Income-tax Act, 2025 से मेरा टैक्स बढ़ जाएगा?
नहीं। टैक्स स्लैब और रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कुछ भत्तों (HRA, एजुकेशन, हॉस्टल अलाउंस) की टैक्स-फ्री सीमा बढ़ी है, जिससे Old Tax Regime चुनने वाले सैलरीड लोगों का टैक्स घट सकता है (New Regime में ये छूटें नहीं मिलतीं)। कंपनी कार जैसे कुछ परक्विजिट में वैल्यू बढ़ने से टैक्सेबल इनकम थोड़ी बढ़ भी सकती है।
Q2. मेरी FY 2025-26 की ITR किस Act के तहत भरनी होगी?
FY 2025-26 (अप्रैल 2025–मार्च 2026) की कमाई पुराने Income-tax Act, 1961 के तहत ही भरी और प्रोसेस होगी, क्योंकि नया Act सिर्फ 1 अप्रैल 2026 से शुरू Tax Year 2026-27 से लागू है।
Q3. “Tax Year” का मतलब क्या है?
Tax Year वही अवधि है जिसे पहले Previous Year कहा जाता था — यानी जिस साल में आपने कमाई की। नए Act में अलग से Assessment Year का कॉन्सेप्ट हटाकर सीधे इसी Tax Year को आधार बना दिया गया है।
Q4. मेरे Form 16 पर अब “Form 130” लिखा है, क्या यह गलत फॉर्म है?
नहीं, यह सही है। नए Act में सिर्फ फॉर्म के नंबर बदले हैं, काम वही है — Form 16 अब Form 130, Form 16A अब Form 131 और Form 26AS अब Form 168 के नाम से जाना जाता है।
Q5. मैं बेंगलुरु/पुणे/हैदराबाद/अहमदाबाद में रहता हूं, क्या मुझे अपने आप ज्यादा HRA छूट मिल जाएगी?
छूट का नियम बदल गया है, लेकिन असली फायदा आपकी कंपनी द्वारा सैलरी स्ट्रक्चर अपडेट करने और आपके द्वारा सही तरीके से HRA क्लेम करने पर निर्भर करता है। अपनी payroll टीम से जरूर कन्फर्म करें कि नई 50% लिमिट लागू हुई है या नहीं। ध्यान रहे, HRA छूट सिर्फ Old Tax Regime में मिलती है — New Regime में नहीं।
Q6. क्या पुराने Act के तहत चल रहे मेरे पेंडिंग केस/नोटिस पर असर पड़ेगा?
नहीं। CBDT ने साफ किया है कि पेंडिंग असेसमेंट, अपील और रीअसेसमेंट पुराने Income-tax Act, 1961 के तहत ही पूरे किए जाएंगे। आपके अधिकार, रिफंड और पुरानी liabilities पूरी तरह सुरक्षित हैं।
Q7. क्रिप्टो/VDA पर टैक्स में कोई बदलाव आया?
टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं — Virtual Digital Assets पर अब भी हर मुनाफे पर फ्लैट 30% टैक्स लगता है, कोई बेसिक एग्जम्प्शन नहीं। नए Act में VDA की परिभाषा और रिपोर्टिंग को और स्पष्ट किया गया है।
Q8. क्या ITR भरने की प्रक्रिया भी पूरी तरह बदल गई है?
मूल प्रक्रिया काफी हद तक पहले जैसी ही है — ऑनलाइन फाइलिंग, Aadhaar-OTP वेरिफिकेशन, Form 130/131/168 जैसे डेटा सोर्स सब वही रहेंगे। बदलाव मुख्यतः सेक्शन नंबरिंग, कुछ डेडलाइन (जैसे ITR-3/4 अब 31 अगस्त) और भत्तों की सीमा में हुआ है।
निष्कर्ष
नया Income-tax Act, 2025 डराने वाला नाम लगता है, लेकिन असल में यह ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए राहत ही लेकर आया है — भाषा आसान हुई, सेक्शन कम हुए, TDS एक जगह आया, और HRA, एजुकेशन, हॉस्टल जैसे जरूरी भत्तों की दशकों पुरानी सीमाएं बढ़ीं। सबसे बड़ी बात — टैक्स स्लैब और रेट जहां के थे, वहीं हैं। आपके लिए सबसे जरूरी काम है: अपनी सैलरी स्ट्रक्चर में नई भत्ता सीमाएं जुड़ी हैं या नहीं यह चेक करना, FY 2025-26 और Tax Year 2026-27 के दस्तावेज़ अलग रखना, और अगर आपकी फाइनेंशियल सिचुएशन थोड़ी जटिल है (NRI, F&O, क्रिप्टो, बिज़नेस) तो एक बार अपने CA से नए सेक्शन नंबरों के हिसाब से सलाह ले लेना।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। Income-tax Act, 2025 से जुड़े नियम, दरें, सीमाएं और डेडलाइन समय-समय पर CBDT की नोटिफिकेशन से बदल सकती हैं। अपनी व्यक्तिगत स्थिति के हिसाब से सही और अंतिम जानकारी के लिए हमेशा incometax.gov.in पर आधिकारिक अपडेट देखें और किसी योग्य Chartered Accountant (CA) या टैक्स सलाहकार से सलाह लें।
