लखनऊ में एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली सुनीता वर्मा ने सितंबर 2025 में अखबार में पढ़ा था कि सरकार ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर GST पूरी तरह हटा दिया है। उन्होंने सोचा कि अगली बार पॉलिसी रिन्यू कराने पर उनका प्रीमियम सीधे 18% कम हो जाएगा। अक्टूबर 2026 में जब उनकी फैमिली फ्लोटर पॉलिसी रिन्यूअल का समय आया, तो बिल देखकर वे थोड़ी हैरान हुईं — प्रीमियम पहले जैसा ही लग रहा था, बल्कि कुछ ज्यादा भी। सवाल यह है कि क्या GST हटने का फायदा वाकई ग्राहकों तक पहुंचा, या यह सिर्फ कागजों पर एक अच्छी खबर बनकर रह गया?
यह सवाल सिर्फ सुनीता का नहीं है। लाखों पॉलिसीहोल्डर्स यही समझना चाहते हैं कि GST insurance premium में बदलाव का असली फायदा किसे मिला और किसे नहीं। इस आर्टिकल में हम पूरी टाइमलाइन, सरकारी आंकड़े, एक बड़े सर्वे के नतीजे और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ यह समझेंगे कि आज, एक साल बाद, हकीकत क्या है।
GST छूट लाई ही क्यों गई थी?
भारत में इंश्योरेंस की पहुंच (insurance penetration) लंबे समय से एक चिंता का विषय रही है। बड़ी आबादी के पास आज भी कोई हेल्थ या लाइफ कवर नहीं है, और सरकार का लक्ष्य “Insurance for All” यानी हर नागरिक तक इंश्योरेंस की सुविधा पहुंचाना रहा है। प्रीमियम पर लगने वाला 18% GST अक्सर यह कहकर आलोचना का विषय बनता था कि यह सुरक्षा खरीदने की लागत को ही बढ़ा देता है — यानी जो चीज लोगों को जोखिम से बचाने के लिए बनी है, टैक्स की वजह से वही महंगी हो जाती है। इसी सोच के साथ GST काउंसिल ने व्यक्तिगत हेल्थ और लाइफ पॉलिसी को टैक्स के दायरे से बाहर निकालने का फैसला लिया, ताकि ज्यादा लोग औपचारिक इंश्योरेंस कवर खरीदने के लिए प्रेरित हों।

GST और इंश्योरेंस प्रीमियम पर क्या बदला — पूरी टाइमलाइन
यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे एक साफ सरकारी फैसला और एक तारीख है, जिसे समझना जरूरी है।
- 3 सितंबर 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 56वीं GST काउंसिल मीटिंग में व्यक्तिगत (individual) लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर GST पूरी तरह हटाने का फैसला लिया गया।
- 22 सितंबर 2025: यह नया नियम लागू हुआ। इस तारीख से नई पॉलिसी खरीदने और पुरानी पॉलिसी रिन्यू कराने दोनों पर असर पड़ा।
- पहले: इन पॉलिसी पर 18% GST, साथ में इंश्योरेंस कंपनी को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा मिलता था।
- अब: GST 0% यानी पूरी तरह माफ, लेकिन इसे टैक्स की भाषा में “Exempt” रखा गया, “Nil-rated” नहीं — और यही आगे की पूरी कहानी का सबसे जरूरी मोड़ है।
किन पॉलिसी पर यह छूट लागू हुई और किन पर नहीं, यह नीचे की टेबल में साफ देखा जा सकता है।
| पॉलिसी का प्रकार | पुराना GST (22 सितंबर 2025 से पहले) | नया GST (22 सितंबर 2025 के बाद) |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस | 18% | 0% (Exempt) |
| ULIP, एंडोमेंट, मनी-बैक पॉलिसी | 18% | 0% (Exempt) |
| व्यक्तिगत हेल्थ/मेडिक्लेम, फैमिली फ्लोटर | 18% | 0% (Exempt) |
| सीनियर सिटीजन हेल्थ पॉलिसी | 18% | 0% (Exempt) |
| कंपनी की ग्रुप हेल्थ/लाइफ इंश्योरेंस स्कीम | 18% | 18% (कोई बदलाव नहीं) |
| मोटर, फायर, मरीन जैसे जनरल इंश्योरेंस | 18% | 18% (कोई बदलाव नहीं) |
यानी अगर आपने अपनी निजी सेविंग्स से हेल्थ या लाइफ पॉलिसी ली है, तो आप इस छूट के दायरे में आते हैं। लेकिन अगर आपकी पॉलिसी कंपनी की तरफ से ग्रुप स्कीम के तहत है, तो आप पर यह बदलाव लागू नहीं होता।
बहुत से नौकरी करने वाले लोग भ्रम में रहते हैं कि उनकी कंपनी वाली हेल्थ पॉलिसी पर भी GST माफ हो गया होगा। असल में ऐसा नहीं है। कंपनी की ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी में भी अब 18% GST ही लगता है, भले ही आपके अपने पैसे से खरीदी गई पर्सनल टॉप-अप पॉलिसी पर यह छूट लागू हो। इसलिए अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट में यह जरूर देख लें कि आपकी पॉलिसी “इंडिविजुअल” श्रेणी में है या “ग्रुप/कॉर्पोरेट” श्रेणी में, क्योंकि यही फर्क तय करता है कि GST छूट आप पर लागू होगी या नहीं।
असली सवाल: फायदा ग्राहक तक पहुंचा या बीच में ही रुक गया?
यहीं से मामला दिलचस्प होता है। GST के नियमों में दो अलग-अलग चीजें होती हैं — “Nil-rated” और “Exempt”। आम आदमी के लिए दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें जमीन-आसमान का फर्क है।
अगर कोई सप्लाई “Nil-rated” होती, तो इंश्योरेंस कंपनी अपने खर्चों (जैसे दफ्तर का किराया, एजेंट कमीशन, IT सिस्टम) पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वापस ले पाती। लेकिन सरकार ने इसे “Exempt” रखा, जिसमें ITC का फायदा नहीं मिलता। मतलब कंपनी अपने ऑपरेशनल खर्च पर जो GST चुकाती है, वह उसे वापस नहीं मिलेगा — और यह बोझ कहीं न कहीं प्रीमियम में ही जुड़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस वजह से:
- सामान्य और मल्टी-लाइन इंश्योरेंस कंपनियां (जिनके पास मोटर, फायर जैसे टैक्स योग्य प्रोडक्ट भी हैं) लगभग 5-6% तक बेस प्रीमियम बढ़ा सकती हैं।
- सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस बेचने वाली स्टैंडअलोन कंपनियों के पास नुकसान भरने का कोई और जरिया नहीं होता, इसलिए उनके लिए यह बढ़ोतरी 12% से 18% तक जा सकती है।
यानी सिद्धांत में GST 18% से 0% हुआ, लेकिन व्यवहार में कई कंपनियों ने “बेस प्रीमियम” बढ़ाकर अपना नुकसान पूरा करने की कोशिश की। ग्राहक के बिल में कुल रकम कम तो हुई, लेकिन जितनी होनी चाहिए थी, उतनी नहीं।

LocalCircles के सर्वे ने खोली असली सच्चाई
यह सिर्फ अनुमान नहीं है। कंज्यूमर सर्वे प्लेटफॉर्म LocalCircles ने नवंबर 2025 और मार्च 2026 में देश के 301 से ज्यादा जिलों के 20,000 से अधिक लोगों के बीच एक सर्वे किया, ताकि यह पता चल सके कि GST छूट का फायदा असल में पॉलिसीहोल्डर तक पहुंचा या नहीं। मार्च 2026 के नतीजे इस तरह रहे:
| ग्राहकों का अनुभव | कितने लोगों ने बताया |
|---|---|
| GST छूट का पूरा फायदा मिला | 48% |
| इंश्योरर ने बेस प्राइस बढ़ाकर फायदा खत्म कर दिया | 26% |
| रिन्यूअल प्रीमियम बढ़ने से फायदा नहीं दिखा | लगभग 10% |
| आंशिक फायदा मिला, साथ में कुछ बढ़ोतरी भी हुई | 5% |
| अभी भी 18% GST ही वसूला जा रहा है | 5% |
सीधी भाषा में कहें तो लगभग हर तीन में से एक ग्राहक को GST छूट का कोई ठोस फायदा महसूस नहीं हुआ। LocalCircles के फाउंडर सचिन तपारिया ने इस पर कहा कि तीन में से एक व्यक्ति को अब भी फायदा न मिलना एक गंभीर बात है और इसमें सरकार की दखल जरूरी है। इसी के आधार पर LocalCircles ने यह मामला IRDAI चेयरमैन अजय सेठ और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक पहुंचाया है।
इंश्योरेंस इंडस्ट्री के आंकड़े क्या बताते हैं?
जहां ग्राहकों का अनुभव मिला-जुला है, वहीं कंपनियों के बिजनेस आंकड़े साफ दिखाते हैं कि GST छूट के बाद पॉलिसी खरीदना काफी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) के आंकड़े देखें तो:
- लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का न्यू बिजनेस प्रीमियम (NBP) FY26 में ₹4.60 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो पिछले साल से लगभग 16% ज्यादा है।
- LIC का NBP करीब ₹2.60 लाख करोड़ रहा (57% मार्केट शेयर के साथ), जो सालाना आधार पर 15% बढ़ा।
- SBI Life का प्रीमियम ₹42,550 करोड़ के आसपास रहा, जिसमें 20% की ग्रोथ दिखी।
- HDFC Life का प्रीमियम लगभग ₹36,646 करोड़ रहा, 9% ग्रोथ के साथ।
- ICICI Prudential Life का प्रीमियम करीब ₹24,810 करोड़ रहा, 10% ग्रोथ के साथ।
- नॉन-लाइफ (जनरल और हेल्थ) इंश्योरेंस प्रीमियम FY26 में 9.3% बढ़कर ₹3.36 लाख करोड़ हो गया।
- इसमें सिर्फ स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का प्रीमियम 19.4% बढ़कर करीब ₹45,866 करोड़ पर पहुंच गया — पिछले सालों के मुकाबले यह बढ़ोतरी साफ तेज है।
इसका मतलब यह है कि GST हटने के ऐलान ने लोगों को पॉलिसी खरीदने के लिए प्रेरित तो जरूर किया — शायद यह सोचकर कि अब सस्ता मिलेगा — लेकिन इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई (प्रीमियम कलेक्शन) भी साथ-साथ तेजी से बढ़ी। कंपनियों का यह भी कहना है कि ITC का फायदा छूटने से उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ा है, जिसकी वजह से बेस प्राइस में कुछ बढ़ोतरी हुई।
तुलना के लिए देखें तो FY25 (वित्त वर्ष 2024-25) में लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम की ग्रोथ अकाउंटिंग नियमों में बदलाव की वजह से सुस्त रहकर सिर्फ लगभग 6.2% रही थी, जबकि उससे पहले FY24 में यह ग्रोथ लगभग 13% थी। GST छूट लागू होने के बाद FY26 में यह ग्रोथ फिर तेज होकर 16% पर पहुंच गई, जो दिखाता है कि टैक्स छूट की खबर ने लोगों का रुझान पॉलिसी खरीदने की तरफ बढ़ाया।
IRDAI और सरकार का रुख क्या है?
इस पूरे मामले में नियामक (regulator) का रुख भी समझना जरूरी है। एक तरफ IRDAI चेयरमैन अजय सेठ ने इंश्योरेंस कंपनियों से कहा है कि वे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्राइस यानी प्रीमियम पर प्रतिस्पर्धा करें, न कि सिर्फ एजेंट और डिस्ट्रिब्यूटर को दिए जाने वाले कमीशन के आधार पर अपने प्रोडक्ट बेचें। उनका कहना रहा है कि GST दर में कमी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एक “ग्रोथ का मौका” है, जिसका इस्तेमाल वे ज्यादा पॉलिसी बेचकर करें। दूसरी तरफ, जब LocalCircles जैसे कंज्यूमर प्लेटफॉर्म ने सर्वे के आधार पर यह दिखाया कि कई ग्राहकों को फायदा नहीं मिल रहा, तो यही शिकायत सीधे IRDAI चेयरमैन और वित्त मंत्री तक पहुंचाई गई, ताकि इंश्योरेंस कंपनियों की प्राइसिंग पर नजर रखी जा सके। यानी नियामक की तरफ से इंडस्ट्री को बढ़ने का मौका भी दिख रहा है और ग्राहकों की शिकायत पर ध्यान देने का दबाव भी बना हुआ है।

वर्कड उदाहरण: असल में कितना फर्क पड़ता है?
आंकड़ों को समझना आसान बनाने के लिए दो उदाहरण देखते हैं। मान लीजिए दोनों केस में पुराना प्रीमियम (18% GST शामिल) एक जैसा आधार रखता है, और सिर्फ यह देखना है कि GST माफ होने के बाद अलग-अलग स्थितियों में ग्राहक को कितना बचता है।
उदाहरण 1 — सुनीता वर्मा (लखनऊ), फैमिली फ्लोटर हेल्थ पॉलिसी, बेस प्रीमियम ₹18,000:
| स्थिति | कुल भुगतान | पुराने ₹21,240 (18% GST सहित) से बचत |
|---|---|---|
| अगर इंश्योरर ने बेस प्राइस नहीं बढ़ाया (पूरा फायदा) | ₹18,000 | ₹3,240 (लगभग 15.3%) |
| अगर इंश्योरर ने बेस प्राइस 6% बढ़ा दी (आंशिक फायदा) | ₹19,080 | ₹2,160 (लगभग 10.2%) |
उदाहरण 2 — राजेश पाटिल (पुणे), टर्म इंश्योरेंस, बेस प्रीमियम ₹12,000:
| स्थिति | कुल भुगतान | पुराने ₹14,160 (18% GST सहित) से बचत |
|---|---|---|
| अगर इंश्योरर ने बेस प्राइस नहीं बढ़ाया (पूरा फायदा) | ₹12,000 | ₹2,160 (लगभग 15.3%) |
| अगर इंश्योरर ने बेस प्राइस 12% बढ़ा दी (बहुत कम फायदा) | ₹13,440 | ₹720 (लगभग 5.1%) |
(ये आंकड़े सिर्फ समझाने के लिए मान्य हिसाब हैं; असली प्रीमियम आपकी उम्र, कवरेज, मेडिकल हिस्ट्री और इंश्योरर की पॉलिसी के हिसाब से अलग हो सकता है।)
इन दोनों उदाहरणों से एक बात साफ होती है — GST माफ होने का फायदा तभी पूरा मिलता है जब इंश्योरेंस कंपनी बेस प्रीमियम को वही रखे जो 22 सितंबर 2025 से पहले था। अगर कंपनी ने बेस प्रीमियम बढ़ा दिया है, तो कागज पर “GST 0%” लिखा दिखेगा, लेकिन आपकी जेब पर असर उतना नहीं पड़ेगा जितनी उम्मीद थी।

आपको खुद क्या चेक करना चाहिए
अगर आप अपनी हेल्थ या लाइफ पॉलिसी रिन्यू करा रहे हैं या नई खरीद रहे हैं, तो सिर्फ “GST नहीं लगा” देखकर संतुष्ट न हों। नीचे दिया चेकलिस्ट मदद कर सकता है:
- पुराना प्रीमियम निकालें: अपनी पिछली पॉलिसी का प्रीमियम रिसीट (सितंबर 2025 से पहले का) निकालकर देखें कि बेस प्रीमियम कितना था।
- नए प्रीमियम की तुलना करें: नई रिन्यूअल रकम को सीधे पुराने बेस प्रीमियम से मिलाएं, सिर्फ “टोटल” से नहीं।
- ब्रेकअप मांगें: इंश्योरर से प्रीमियम का पूरा ब्रेकअप मांगें — बेस प्रीमियम, लोडिंग (यदि कोई हो), और GST अलग-अलग दिखना चाहिए।
- एजेंट/कंपनी से सीधा सवाल करें: पूछें कि क्या सितंबर 2025 के बाद उनकी बेस प्राइसिंग में कोई बदलाव हुआ है।
- कई कंपनियों से कोटेशन लें: रिन्यूअल से पहले 2-3 इंश्योरर से नई पॉलिसी का कोटेशन लेकर तुलना करें।
- शिकायत का रास्ता जानें: अगर लगे कि फायदा नहीं मिला, तो IRDAI के शिकायत पोर्टल या बीमा भरोसा (Bima Bharosa) प्रणाली के जरिए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
किसको असली फायदा मिल सकता है, किसको नहीं
| स्थिति | फायदा मिलने की संभावना |
|---|---|
| व्यक्तिगत हेल्थ/लाइफ पॉलिसी, इंश्योरर ने बेस प्राइस नहीं बढ़ाई | पूरा फायदा — लगभग 15% तक कम भुगतान |
| व्यक्तिगत पॉलिसी, इंश्योरर ने बेस प्राइस 5-6% बढ़ाई | आंशिक फायदा — 9-10% तक कम भुगतान |
| स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर की पॉलिसी, बेस प्राइस 12-18% बढ़ी | बहुत कम या नाम-मात्र फायदा |
| कंपनी की ग्रुप हेल्थ/लाइफ स्कीम वाले कर्मचारी | कोई फायदा नहीं — अब भी 18% GST लागू |
| मोटर/होम/अन्य जनरल इंश्योरेंस पॉलिसीधारक | कोई फायदा नहीं — GST दर में कोई बदलाव नहीं |
यह भी पढ़ें
- हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें? IRDAI के नए नियम और Cashless Claim की पूरी गाइड
- Term Insurance क्यों जरूरी है — पूरी Hindi गाइड
- Emergency Fund क्या है, कितना रखें और कहाँ रखें?
- FD और Savings Account पर TDS के नए नियम 2026
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. GST इंश्योरेंस प्रीमियम पर कब से हटा?
56वीं GST काउंसिल मीटिंग (3 सितंबर 2025) के फैसले के बाद यह छूट 22 सितंबर 2025 से लागू हुई।
Q2. क्या सभी इंश्योरेंस पॉलिसी पर GST माफ है?
नहीं। सिर्फ व्यक्तिगत (individual) लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर यह छूट है। कंपनी की ग्रुप स्कीम और मोटर, फायर जैसे जनरल इंश्योरेंस पर अब भी 18% GST लगता है।
Q3. मेरा प्रीमियम पहले जैसा ही क्यों दिख रहा है?
इसकी वजह इंश्योरर का बेस प्रीमियम बढ़ाना हो सकती है, जो GST में ITC का फायदा न मिलने की वजह से किया गया है। कुल बिल में GST तो नहीं है, लेकिन बेस प्राइस पहले से ज्यादा हो सकता है।
Q4. क्या मुझे अभी पॉलिसी रिन्यू करानी चाहिए या थोड़ा रुकना चाहिए?
हेल्थ और लाइफ कवरेज को लगातार बनाए रखना फायदेमंद होता है क्योंकि बीच में गैप आने से वेटिंग पीरियड फिर से शुरू हो सकता है। इसलिए सिर्फ कीमत के इंतजार में रिन्यूअल न टालें — प्रीमियम की तुलना करें, लेकिन कवरेज में गैप न आने दें।
Q5. अगर मुझे लगे कि फायदा नहीं मिला, तो शिकायत कहां करूं?
IRDAI के शिकायत निवारण पोर्टल (Bima Bharosa) पर या सीधे संबंधित इंश्योरेंस कंपनी के ग्रीवांस सेल में लिखित शिकायत दी जा सकती है।
Q6. ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या होता है और इसका असर प्रीमियम पर क्यों पड़ता है?
ITC वह सुविधा है जिसमें कंपनी अपने खर्चों पर चुकाए गए GST को वापस क्लेम कर सकती है। “Exempt” श्रेणी में यह सुविधा नहीं मिलती, इसलिए कंपनी को वह लागत किसी और तरीके से पूरी करनी पड़ती है — अक्सर प्रीमियम बढ़ाकर।
Q7. क्या नई पॉलिसी खरीदने पर भी यही नियम लागू होता है?
हां, 22 सितंबर 2025 के बाद खरीदी गई सभी व्यक्तिगत हेल्थ और लाइफ पॉलिसी पर यह GST छूट लागू होती है, चाहे वह नई पॉलिसी हो या रिन्यूअल।
Q8. क्या भविष्य में सरकार इस पर कोई और बदलाव कर सकती है?
LocalCircles जैसे संगठनों ने यह मामला IRDAI और वित्त मंत्रालय तक पहुंचाया है, इसलिए आगे कोई स्पष्टीकरण या सख्त दिशानिर्देश आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए नियमित रूप से आधिकारिक अपडेट देखना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
GST हटने की खबर अपने आप में अच्छी थी, और इसने लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया — यही वजह है कि FY26 में प्रीमियम कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। लेकिन हकीकत यह भी है कि हर तीन में से लगभग एक ग्राहक को इसका कोई असली फायदा महसूस नहीं हुआ, क्योंकि कुछ इंश्योरेंस कंपनियों ने ITC का नुकसान पूरा करने के लिए बेस प्रीमियम बढ़ा दिया। इसलिए अगली बार जब आप पॉलिसी रिन्यू कराएं, तो सिर्फ “0% GST” का लेबल देखकर संतुष्ट न हों — पुराने और नए प्रीमियम का पूरा हिसाब खुद लगाकर देखें, और जरूरत पड़े तो सवाल पूछने और शिकायत करने से न हिचकें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है, इसे निवेश, टैक्स या इंश्योरेंस खरीद से जुड़ी पेशेवर सलाह न समझें। GST दरें, IRDAI के नियम और इंश्योरेंस कंपनियों की प्राइसिंग पॉलिसी समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए अपनी पॉलिसी खरीदने या रिन्यू कराने से पहले संबंधित इंश्योरेंस कंपनी, अपने फाइनेंशियल एडवाइजर या आधिकारिक IRDAI वेबसाइट से नवीनतम जानकारी जरूर जांच लें।
