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FD और Savings Account पर TDS के नए नियम 2026: Form 121 ने कैसे बदला 15G-15H का सिस्टम

भारतीय रुपये के नोट और बैंक FD ब्याज पर TDS की गणना 2026

शाम को बैंक से मैसेज आया — “₹5,600 TDS deducted on interest payment”। सुनीता वर्मा, जो लखनऊ में एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं, उस मैसेज को देखकर थोड़ा परेशान हो गईं। उन्होंने तो FD करवाई थी ताकि पैसा बढ़े, फिर अचानक इतनी बड़ी रकम बैंक ने क्यों काट ली? जब उन्होंने ब्रांच में पूछा तो पता चला कि 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत बैंक और पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर TDS के नियम बदल गए हैं, और साथ ही पुराने Form 15G और 15H की जगह अब एक नया, डिजिटल Form 121 आ गया है।

अगर आपकी भी बैंक में FD है, Recurring Deposit है या सेविंग्स अकाउंट में ब्याज मिलता है, तो यह जानना जरूरी है कि नया TDS सिस्टम कैसे काम करता है, किन लोगों पर यह लागू होता है, कितनी ब्याज आय पर TDS कटेगा, और TDS से बचने के लिए अब कौन-सा फॉर्म भरना होगा। इस लेख में हम पूरी बात आसान हिंदी में, उदाहरणों के साथ समझेंगे।

भारतीय रुपये के नोट और बैंक ब्याज पर TDS की गणना

TDS क्या है और बैंक FD पर यह कैसे लागू होता है?

TDS यानी Tax Deducted at Source — जब भी बैंक आपके फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट या सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज देता है, तो एक तय सीमा से ज्यादा ब्याज होने पर बैंक खुद ही उसमें से कुछ हिस्सा टैक्स के रूप में काटकर सरकार के पास जमा कर देता है। यह कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है — यह आपकी आने वाली इनकम टैक्स देनदारी का ही एक हिस्सा है, जिसे एडवांस में काट लिया जाता है। बाद में जब आप ITR फाइल करते हैं, तो यह कटा हुआ TDS आपके कुल टैक्स में एडजस्ट हो जाता है, और अगर ज्यादा कट गया है तो रिफंड भी मिल जाता है।

पहले यह नियम इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 194A के तहत चलता था। अब 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है, और इसी तरह की व्यवस्था अब धारा 393 के तहत काम करती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक मूल दरें और सीमाएं काफी हद तक पुराने नियम जैसी ही रखी गई हैं, लेकिन पूरे ढांचे को एक जगह, एक टेबल के रूप में व्यवस्थित कर दिया गया है, जिससे कंप्लायंस आसान हो।

2026 में FD/सेविंग्स ब्याज पर TDS की नई सीमा कितनी है?

आयकर विभाग ने यह साफ कर दिया है कि चाहे बैंक सरकारी हो, प्राइवेट हो या को-ऑपरेटिव, ब्याज आय पर TDS का नियम सबके लिए एक जैसा रहेगा। नीचे टेबल में थ्रेशोल्ड लिमिट और टैक्स दर दी गई है:

श्रेणीसालाना ब्याज थ्रेशोल्ड (इस सीमा के ऊपर TDS लागू)TDS दर (PAN उपलब्ध होने पर)
सामान्य व्यक्ति (60 साल से कम)₹50,00010%
सीनियर सिटीजन (60 साल या उससे ज्यादा)₹1,00,00010%
अन्य ब्याज आय (बैंक/पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट के अलावा, जैसे कंपनी डिपॉजिट)₹10,00010%
PAN उपलब्ध न होने या PAN-आधार लिंक न होने परलागू20%

एक जरूरी बात समझ लें — यह थ्रेशोल्ड पूरे साल में उस बैंक से मिलने वाली कुल ब्याज आय पर लागू होता है, चाहे आपकी एक FD हो या कई अलग-अलग ब्रांच में कई FD। ज्यादातर बड़े बैंक अब Core Banking Solution (CBS) की वजह से पूरे बैंक में आपका PAN एक साथ ट्रैक करते हैं, इसलिए अलग-अलग ब्रांच में FD बांटकर TDS से बचने की पुरानी ट्रिक अब काम नहीं करती।

नया आयकर अधिनियम 2025 और धारा 393 — बदलाव को समझें

नया आयकर अधिनियम 2025, 1 अप्रैल 2026 से उन सभी लेन-देन पर लागू होता है जिनमें ब्याज का क्रेडिट या भुगतान इस तारीख के बाद हुआ है। इससे पहले के लेन-देन पुराने 1961 वाले कानून के हिसाब से ही माने जाएंगे। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार धारा 393 ने TDS से जुड़े तमाम बिखरे हुए प्रावधानों — जो पहले 194A, 194C जैसी अलग-अलग धाराओं में थे — को एक टेबल फॉर्मेट में समेट दिया है। मकसद यह है कि बैंकों, कंपनियों और टैक्सपेयर्स के लिए यह समझना आसान हो जाए कि किस तरह की इनकम पर कितना TDS कटेगा।

व्यावहारिक तौर पर आम FD निवेशक के लिए असली बदलाव दो जगह दिखता है — पहला, कानून की धारा नंबर बदल गई है (194A से 393), और दूसरा, TDS से छूट पाने के लिए फॉर्म का तरीका पूरी तरह बदल गया है, जिसकी चर्चा अब हम करेंगे।

नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत टैक्स फॉर्म और दस्तावेज

Form 121 क्या है? 15G और 15H की जगह अब क्या भरना होगा

अब तक जो लोग टैक्स के दायरे में नहीं आते थे — यानी जिनकी कुल इनकम टैक्स योग्य सीमा से कम थी — वे TDS से बचने के लिए 60 साल से कम उम्र वालों के लिए Form 15G और सीनियर सिटीजन के लिए Form 15H जमा करते थे। नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत अब इन दोनों फॉर्म की जगह एक ही, डिजिटल Form 121 ने ले ली है। उम्र चाहे 25 साल हो या 75 साल, अब सबके लिए एक ही फॉर्म भरना होता है — बस अंदर की शर्तें उम्र के हिसाब से थोड़ी अलग हैं।

पुराने सिस्टम और Form 121 में अंतर

पहलूपुराना तरीका (15G/15H)नया Form 121
फॉर्म की संख्यादो अलग फॉर्म — उम्र के हिसाब सेएक ही फॉर्म, सबके लिए
प्रक्रियाज्यादातर कागजी या बैंक की वेबसाइट पर अलग अपलोडपूरी तरह डिजिटल, प्री-फिल्ड जानकारी के साथ
सत्यापनमैनुअल सत्यापनरियल-टाइम वैलिडेशन और UIN (यूनीक आईडी नंबर) जनरेट होता है
रिपोर्टिंगतिमाही TDS रिटर्न में अलग से एंट्रीहर Form 121 पर मिला UIN सीधे तिमाही TDS रिटर्न में दर्ज होता है

Form 121 कौन भर सकता है?

Form 121 भरने के लिए मुख्य रूप से दो शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • आप भारत के निवासी (resident) व्यक्ति हों — NRI, कंपनियां और पार्टनरशिप फर्में इसके पात्र नहीं हैं।
  • आपकी अनुमानित कुल टैक्स देनदारी उस साल के लिए शून्य (nil) हो।

यहां 60 साल से कम उम्र वालों और सीनियर सिटीजन के बीच एक अहम फर्क है। 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति के लिए एक अतिरिक्त शर्त है — धारा 393(6) के तहत आने वाली उनकी कुल ब्याज जैसी आय, मूल छूट सीमा यानी नई टैक्स व्यवस्था में ₹4,00,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, भले ही रिबेट (छूट) की वजह से अंतिम टैक्स शून्य ही क्यों न बन रहा हो। जबकि सीनियर सिटीजन के लिए यह अतिरिक्त आय-सीमा वाली शर्त लागू नहीं होती — उन्हें सिर्फ यह दिखाना होता है कि उनकी कुल अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य है, जो नई टैक्स व्यवस्था की रिबेट व्यवस्था (₹12,00,000 तक टैक्स-फ्री आय) को देखते हुए ज्यादा लोगों के लिए संभव हो जाता है।

Form 121 में क्या जानकारी भरनी होती है

  • आपका नाम, PAN, पता और संपर्क जानकारी (ज्यादातर पहले से भरी हुई/प्री-फिल्ड आती है)
  • उस खास बैंक/पोस्ट ऑफिस से होने वाली अनुमानित ब्याज आय
  • साल भर की सभी स्रोतों से होने वाली कुल अनुमानित आय
  • पिछले दो साल की ITR से जुड़ी जानकारी

फॉर्म जमा करने के बाद बैंक उसे वेरिफाई करता है और एक 26 अंकों का Unique Identification Number (UIN) जारी करता है, जिसे बैंक अपनी तिमाही TDS रिपोर्ट में इनकम टैक्स विभाग को भेजता है। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाती है और गलत तरीके से फॉर्म भरने पर आसानी से पकड़ में आ जाता है।

जरूरी सलाह: Form 121 सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए मान्य होता है। अगर अगले साल भी आपकी टैक्स देनदारी शून्य रहने वाली है, तो हर साल अप्रैल में दोबारा यह फॉर्म जमा करना जरूरी है — ब्याज क्रेडिट होने से पहले।

Form 121 भरने की प्रक्रिया — स्टेप बाय स्टेप

  1. समय पर जमा करें: वित्त वर्ष की शुरुआत में ही, यानी अप्रैल के पहले हफ्ते में फॉर्म जमा कर दें, ताकि ब्याज क्रेडिट होने से पहले बैंक को निर्देश मिल जाए।
  2. PAN और आधार लिंक जरूर चेक करें: बिना PAN-आधार लिंक के फॉर्म मान्य नहीं होगा और 20% की दर से TDS कट सकता है।
  3. बैंक के नेट बैंकिंग/ऐप या ब्रांच से फॉर्म एक्सेस करें: ज्यादातर बड़े बैंकों ने इसे नेट बैंकिंग में डिजिटल फॉर्म के रूप में जोड़ दिया है।
  4. अनुमानित आय सही भरें: कम या गलत आय दिखाना बाद में नोटिस का कारण बन सकता है, इसलिए पिछले साल के ITR और Form 26AS/AIS के आधार पर अनुमान लगाएं।
  5. UIN सुरक्षित रखें: फॉर्म जमा होने के बाद मिलने वाला UIN भविष्य में किसी विवाद या पूछताछ के लिए रिकॉर्ड के तौर पर रखें।

PAN नहीं है या PAN-आधार लिंक नहीं है तो क्या होगा?

अगर आपका PAN बैंक के पास दर्ज नहीं है, PAN-आधार से लिंक नहीं है, या PAN इनएक्टिव हो चुका है, तो बैंक आपकी ब्याज आय पर थ्रेशोल्ड की परवाह किए बिना 20% की दर से TDS काट सकता है — भले ही आपने Form 121 जमा किया हो। इसलिए सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम यही है कि अपना PAN बैंक खाते और FD में अपडेट रखें, और यह सुनिश्चित करें कि वह आधार से लिंक है।

उदाहरण से समझें — असली गणना कैसे होती है

नीचे दिए गए सभी उदाहरण समझाने के लिए बनाए गए हैं, इनमें दिखाई गई ब्याज दरें सिर्फ मान ली गई हैं (assumption) — असली ब्याज दर आपके बैंक और FD की अवधि पर निर्भर करती है।

उदाहरण 1: सुनीता वर्मा, 42 साल, लखनऊ

सुनीता की बैंक में ₹8,00,000 की FD है, जिस पर मान लीजिए 7% सालाना ब्याज मिल रहा है।

  • सालाना ब्याज = ₹8,00,000 × 7% = ₹56,000
  • सामान्य व्यक्ति के लिए थ्रेशोल्ड = ₹50,000
  • चूंकि ₹56,000, ₹50,000 से ज्यादा है, इसलिए पूरी ₹56,000 की ब्याज राशि पर 10% TDS कटेगा — यानी ₹5,600
  • सुनीता के खाते में क्रेडिट होगा: ₹56,000 − ₹5,600 = ₹50,400

ध्यान दें — TDS सिर्फ ₹6,000 (यानी थ्रेशोल्ड से ऊपर के हिस्से) पर नहीं, बल्कि पूरी ₹56,000 की ब्याज राशि पर कटता है। यही सबसे बड़ी गलतफहमी है जो ज्यादातर डिपॉजिटर्स को होती है।

उदाहरण 2: रमेश गुप्ता, 66 साल, रांची (सीनियर सिटीजन)

रमेश जी की FD ₹12,00,000 की है, मान लीजिए 7.5% ब्याज दर पर।

  • सालाना ब्याज = ₹12,00,000 × 7.5% = ₹90,000
  • सीनियर सिटीजन के लिए थ्रेशोल्ड = ₹1,00,000
  • चूंकि ₹90,000, ₹1,00,000 से कम है, इसलिए बैंक कोई TDS नहीं काटेगा, भले ही रमेश जी ने Form 121 जमा न किया हो।

उदाहरण 3: सुमन देवी, 68 साल, पटना (सीनियर सिटीजन)

सुमन देवी की FD ₹15,00,000 की है, मान लीजिए 7.2% ब्याज दर पर।

  • सालाना ब्याज = ₹15,00,000 × 7.2% = ₹1,08,000
  • यह सीनियर सिटीजन थ्रेशोल्ड ₹1,00,000 से ज्यादा है, इसलिए पूरी ₹1,08,000 पर 10% TDS कटेगा — यानी ₹10,800
  • खाते में क्रेडिट होगा: ₹1,08,000 − ₹10,800 = ₹97,200
  • अगर सुमन देवी की कुल सालाना आय टैक्स-मुक्त सीमा के अंदर है और टैक्स देनदारी शून्य है, तो वे अप्रैल में ही Form 121 जमा करके यह TDS रुकवा सकती थीं।

उदाहरण 4: PAN अपडेट न होने की स्थिति

मान लीजिए किसी व्यक्ति की ₹9,00,000 की FD पर 7% के हिसाब से ₹63,000 ब्याज बन रहा है, लेकिन उसका PAN बैंक रिकॉर्ड में अपडेट नहीं है। ऐसी स्थिति में बैंक 10% की जगह 20% की दर से TDS काटेगा, यानी ₹12,600 — सामान्य दर से दोगुने से भी ज्यादा। यही वजह है कि PAN अपडेट रखना TDS बचाने का सबसे पहला कदम है।

सीनियर सिटीजन के लिए FD ब्याज पर TDS की सीमा और Form 121 की जानकारी

किसे Form 121 का फायदा मिलेगा, किसे नहीं — एक नजर में

स्थितिForm 121 से फायदा?
रिटायर्ड सीनियर सिटीजन, जिनकी कुल आय टैक्स-मुक्त सीमा के अंदर हैहां — TDS पूरी तरह रुक सकता है
गृहिणी या छात्र, जिनकी FD किसी रिश्तेदार की तरफ से है और कोई अन्य इनकम नहींहां — अगर कुल आय सीमा के अंदर है
नौकरीपेशा व्यक्ति, जिनकी सैलरी ही टैक्स योग्य सीमा से ऊपर हैनहीं — गलत घोषणा करने पर पेनल्टी और नोटिस का खतरा
NRI जमाकर्तानहीं — Form 121 सिर्फ भारत के निवासियों के लिए है, NRI पर अलग नियम (30% TDS) लागू होता है
कंपनी या पार्टनरशिप फर्म के नाम की FDनहीं — यह फॉर्म सिर्फ व्यक्तिगत निवासी करदाताओं और HUF के लिए है

TDS कट गया है तो अब क्या करें?

अगर आपकी ब्याज आय पर TDS कट चुका है, तो घबराने की जरूरत नहीं — यह पैसा डूबता नहीं है। ध्यान रखने वाली बातें:

  • Form 26AS और AIS जरूर चेक करें: इनकम टैक्स की वेबसाइट पर लॉगिन करके देखें कि बैंक ने कितना TDS काटकर जमा किया है। अगर आपकी पासबुक और 26AS/AIS में आंकड़ा मेल नहीं खाता, तो बैंक से तुरंत संपर्क करें।
  • ITR में क्लेम करें: अगर आपकी असली टैक्स देनदारी, कटे हुए TDS से कम है, तो ITR फाइल करके बचा हुआ पैसा रिफंड के रूप में वापस मिल जाता है।
  • Advance Tax से तुलना करें: अगर आपकी टैक्स देनदारी ज्यादा है, तो TDS सिर्फ एक हिस्सा चुकाता है, बाकी एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के जरिए चुकाना होगा।
  • रिफंड में देरी होने पर शिकायत करें: इनकम टैक्स पोर्टल पर रिफंड स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है, और अगर काफी देरी हो रही है तो हेल्पडेस्क से संपर्क करें।

आम गलतियां जो लोग करते हैं

  • FD को अलग-अलग ब्रांच में बांटकर यह सोचना कि TDS नहीं कटेगा — जबकि PAN के आधार पर बैंक पूरी ब्याज आय को जोड़कर ही TDS तय करता है।
  • टैक्स योग्य आय होने के बावजूद सिर्फ TDS बचाने के लिए Form 121 में गलत जानकारी देना — यह गलत घोषणा मानी जाती है और नोटिस आ सकता है।
  • हर साल फॉर्म रिन्यू करना भूल जाना — Form 121 सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए मान्य है।
  • PAN-आधार लिंकिंग को नजरअंदाज करना, जिससे 20% की ऊंची दर से TDS कट जाता है।
  • TDS कटने के बाद भी ITR फाइल न करना — जबकि कई बार TDS वापस पाने का यही एकमात्र तरीका होता है।

व्यावहारिक चेकलिस्ट — हर FD निवेशक के लिए

  1. अपनी सभी FD और सेविंग्स खातों की सालाना ब्याज आय का हिसाब लगाएं।
  2. चेक करें कि यह थ्रेशोल्ड (₹50,000 सामान्य, ₹1,00,000 सीनियर सिटीजन) से ऊपर है या नीचे।
  3. PAN बैंक रिकॉर्ड में अपडेट है और आधार से लिंक है, यह सुनिश्चित करें।
  4. अगर टैक्स देनदारी शून्य बनती है, तो अप्रैल के पहले हफ्ते में ही Form 121 जमा करें।
  5. हर तिमाही Form 26AS/AIS चेक करते रहें ताकि TDS सही तरीके से जमा हो रहा है, यह पता चलता रहे।
  6. समय पर ITR फाइल करें, चाहे TDS कटा हो या न कटा हो।

ITR फाइलिंग और TDS रिफंड से जुड़े दस्तावेज की जांच

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. Form 121 क्या पुराने Form 15G और 15H की जगह पूरी तरह ले चुका है?

हां, नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से Form 121 ने दोनों पुराने फॉर्म की जगह ले ली है। अब उम्र चाहे जो भी हो, एक ही फॉर्म भरना होता है, हालांकि अंदर की शर्तें उम्र के हिसाब से अलग हैं।

Q2. सामान्य व्यक्ति और सीनियर सिटीजन के लिए TDS की थ्रेशोल्ड लिमिट कितनी है?

सामान्य व्यक्ति (60 साल से कम) के लिए ₹50,000 सालाना ब्याज, और सीनियर सिटीजन (60 साल या उससे ज्यादा) के लिए ₹1,00,000 सालाना ब्याज की सीमा तय है। इस सीमा से ज्यादा ब्याज होने पर 10% TDS कटता है।

Q3. क्या TDS सिर्फ थ्रेशोल्ड से ऊपर वाले हिस्से पर कटता है या पूरी ब्याज राशि पर?

TDS पूरी ब्याज राशि पर कटता है, सिर्फ ऊपर वाले हिस्से पर नहीं। उदाहरण के लिए अगर थ्रेशोल्ड ₹50,000 है और ब्याज ₹56,000 बनता है, तो TDS पूरे ₹56,000 पर 10% की दर से कटेगा।

Q4. अगर मेरी कुल आय टैक्स योग्य सीमा से कम है तो क्या मुझे Form 121 हर साल भरना होगा?

हां, Form 121 सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए मान्य होता है। अगर अगले वित्त वर्ष में भी आपकी अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य रहने वाली है, तो उस साल अप्रैल में दोबारा फॉर्म जमा करना जरूरी है।

Q5. क्या NRI भी Form 121 भर सकते हैं?

नहीं, Form 121 सिर्फ भारत के निवासी व्यक्तियों और HUF के लिए है। NRI जमाकर्ताओं पर TDS की दर और नियम अलग होते हैं (आमतौर पर 30% तक)।

Q6. PAN बैंक रिकॉर्ड में अपडेट न हो तो कितना TDS कटेगा?

अगर PAN उपलब्ध नहीं है या आधार से लिंक नहीं है, तो सामान्य 10% की जगह 20% की दर से TDS काटा जा सकता है, चाहे Form 121 जमा किया गया हो या नहीं।

Q7. TDS कट जाने पर क्या वह पैसा वापस मिल सकता है?

हां, अगर आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी कटे हुए TDS से कम है, तो ITR फाइल करके बाकी रकम रिफंड के रूप में वापस ली जा सकती है। इसके लिए समय पर ITR फाइल करना और Form 26AS/AIS में TDS एंट्री मैच करना जरूरी है।

Q8. क्या पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर भी यही नियम लागू होता है?

हां, नया TDS सिस्टम बैंकों के साथ-साथ पोस्ट ऑफिस की ब्याज देने वाली स्कीमों पर भी लागू होता है, और वहां भी Form 121 के जरिए ही TDS से छूट ली जा सकती है।

निष्कर्ष

FD और सेविंग्स अकाउंट पर TDS कोई नई चीज नहीं है, लेकिन 2026 में आया बदलाव — नया आयकर अधिनियम, धारा 393, और सबसे ज्यादा चर्चा में रहा Form 121 — हर जमाकर्ता के लिए जानना जरूरी है। अगर आपकी ब्याज आय तय सीमा से कम रहने वाली है और टैक्स देनदारी शून्य बनती है, तो समय पर Form 121 जमा करके आप अनावश्यक TDS कटने से बच सकते हैं। और अगर TDS कट भी जाए, तो घबराने की बजाय Form 26AS/AIS चेक करें और समय पर ITR फाइल करें — पैसा आपका ही है, बस सही प्रक्रिया अपनानी है। जैसा हमेशा कहा जाता है, टैक्स से जुड़े फैसले लेने से पहले अपनी पूरी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखें और जरूरत पड़ने पर किसी योग्य Chartered Accountant से सलाह जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह न समझें। इसमें दी गई दरें, सीमाएं और उदाहरण लेख लिखे जाने के समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी टैक्स-संबंधी फैसले से पहले कृपया नवीनतम जानकारी incometax.gov.in पर जरूर देखें और अपने Chartered Accountant या टैक्स सलाहकार से सलाह लें।

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