घर या प्लॉट खरीदना ज़िंदगी के सबसे बड़े फैसलों में से एक है। लेकिन कीमत तय होने और पैसे देने के बाद भी प्रॉपर्टी कानूनी रूप से आपकी तब बनती है जब उसकी रजिस्ट्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है। बहुत से लोग रजिस्ट्री को सिर्फ “कागज़ी काम” समझकर दलाल के भरोसे छोड़ देते हैं, और बाद में स्टांप ड्यूटी में ज़्यादा पैसा, गलत कागज़ या दाखिल-खारिज न होने जैसी परेशानियों में फँस जाते हैं।
इस लेख में आसान हिंदी में समझिए कि 2026 में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कैसे होती है, इसमें कितना खर्च आता है, कौन-से दस्तावेज़ चाहिए, स्टांप ड्यूटी कैसे बचाई जा सकती है, ₹50 लाख से महंगी प्रॉपर्टी पर TDS का नियम क्या है, और रजिस्ट्री के बाद कौन-सा ज़रूरी काम कभी नहीं भूलना चाहिए।
ध्यान दें: स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और प्रक्रिया हर राज्य में अलग होती है और समय-समय पर बदलती रहती है। इस लेख में दिए गए प्रतिशत और उदाहरण समझाने के लिए हैं। रजिस्ट्री से पहले अपने राज्य के आधिकारिक रजिस्ट्रेशन पोर्टल या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से मौजूदा दर ज़रूर पता करें।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री क्या है और क्यों ज़रूरी है?
रजिस्ट्री का मतलब है खरीदार और विक्रेता के बीच हुए सौदे (सेल डीड या बैनामा) को सरकार के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में दर्ज कराना। रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत ₹100 से ज़्यादा कीमत की अचल संपत्ति (ज़मीन, मकान, फ्लैट) की बिक्री का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
रजिस्ट्री ज़रूरी क्यों है:
- कानूनी मालिकाना हक: बिना रजिस्ट्री के सिर्फ एग्रीमेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी से आप पूरे मालिक नहीं माने जाते।
- बैंक लोन: होम लोन या प्रॉपर्टी पर लोन लेने के लिए रजिस्टर्ड सेल डीड चाहिए।
- धोखाधड़ी से सुरक्षा: एक ही प्रॉपर्टी को दो लोगों को बेचने जैसे फ्रॉड से बचाव होता है, क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज होता है।
- आगे बेचने में आसानी: भविष्य में प्रॉपर्टी बेचनी हो या बच्चों के नाम करनी हो, तो रजिस्टर्ड डीड ही आधार बनती है।
रजिस्ट्री में कितना खर्च आता है?
रजिस्ट्री के खर्च के मुख्य तीन हिस्से होते हैं:
- स्टांप ड्यूटी: यह राज्य सरकार का टैक्स है। ज़्यादातर राज्यों में यह प्रॉपर्टी की कीमत का लगभग 4% से 8% के बीच होती है। शहर, गाँव, नगर निगम सीमा और खरीदार (पुरुष, महिला या संयुक्त) के हिसाब से दर बदलती है।
- रजिस्ट्रेशन फीस: आम तौर पर कीमत का लगभग 1%। कुछ राज्यों में इस पर अधिकतम सीमा (cap) भी होती है।
- अन्य खर्च: सेल डीड बनवाने के लिए वकील या डीड राइटर की फीस, फोटोकॉपी, स्कैनिंग और दाखिल-खारिज की फीस।
स्टांप ड्यूटी किस कीमत पर लगती है? (सर्किल रेट का नियम)
यह बहुत ज़रूरी बात है जिसे ज़्यादातर लोग नहीं जानते। स्टांप ड्यूटी सौदे की कीमत या सरकारी सर्किल रेट (कलेक्टर रेट / रेडी रेकनर रेट), जो भी ज़्यादा हो, उस पर लगती है। यानी अगर आप कागज़ पर कम कीमत दिखाते हैं, तब भी स्टांप ड्यूटी सर्किल रेट के हिसाब से ही देनी होगी।
साथ ही, सर्किल रेट से कम कीमत पर सौदा दिखाने पर इनकम टैक्स में भी दिक्कत आ सकती है — विक्रेता को कैपिटल गेन सर्किल रेट के हिसाब से जोड़ना पड़ सकता है, और एक तय सीमा से ज़्यादा अंतर होने पर खरीदार के हाथ में भी वह अंतर आय माना जा सकता है। इसलिए हमेशा सही कीमत ही कागज़ों में दिखाएँ।

एक उदाहरण से समझें
मान लीजिए आप ₹50 लाख का फ्लैट खरीद रहे हैं और उस इलाके का सर्किल रेट भी लगभग ₹50 लाख बनता है। समझने के लिए मान लेते हैं कि आपके राज्य में पुरुष खरीदार के लिए स्टांप ड्यूटी 6%, महिला खरीदार के लिए 5% और रजिस्ट्रेशन फीस 1% है (असली दर अपने राज्य में जाँचें):
| खर्च | पुरुष के नाम | महिला के नाम |
|---|---|---|
| स्टांप ड्यूटी | ₹3,00,000 (6%) | ₹2,50,000 (5%) |
| रजिस्ट्रेशन फीस (1%) | ₹50,000 | ₹50,000 |
| वकील/डीड राइटर व अन्य (अनुमान) | ₹10,000 | ₹10,000 |
| कुल खर्च | ₹3,60,000 | ₹3,10,000 |
इस उदाहरण में सिर्फ महिला के नाम रजिस्ट्री कराने से ₹50,000 की बचत हो जाती है। ध्यान रखें कि यह पूरा खर्च आम तौर पर बैंक लोन में शामिल नहीं होता, इसलिए इसे अपनी जेब से देना पड़ता है। घर का पूरा बजट बनाते समय इसे ज़रूर जोड़ें। घर खरीदने के कुल खर्च और किराये से तुलना के लिए हमारा लेख घर खरीदें या किराये पर रहें? 2026 का पूरा हिसाब पढ़ें।
अपना रजिस्ट्री खर्च खुद निकालें: कैलकुलेटर
अपने राज्य की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन दर सरकारी पोर्टल से देखकर नीचे डालें। कैलकुलेटर कुल खर्च, महिला के नाम पर बचत और ₹50 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी पर TDS — सब एक साथ बता देगा।
🧾 प्रॉपर्टी रजिस्ट्री खर्च कैलकुलेटर
अपने राज्य की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन दर डालें (सरकारी पोर्टल से देखें) और कुल खर्च तुरंत जानें।
| स्टांप ड्यूटी किस कीमत पर (सौदा या सर्किल रेट, जो ज़्यादा) | |
| स्टांप ड्यूटी | |
| रजिस्ट्रेशन फीस | |
| अन्य खर्च | |
| कुल रजिस्ट्री खर्च |
दरें उदाहरण के लिए भरी गई हैं। अपने राज्य, शहर और प्रॉपर्टी के प्रकार की मौजूदा दरें राज्य के रजिस्ट्रेशन पोर्टल या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से जाँचें। यह कैलकुलेटर सिर्फ अनुमान देता है।
कैलकुलेटर: Moneycontrol24.com
महिलाओं के नाम रजिस्ट्री: स्टांप ड्यूटी में छूट
कई राज्य सरकारें महिलाओं को संपत्ति का मालिक बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट देती हैं। यह छूट आम तौर पर 1% से 2% तक होती है, और कुछ राज्यों में यह एक तय रकम की छूट के रूप में मिलती है। संयुक्त नाम (पति-पत्नी) से रजिस्ट्री पर भी कुछ राज्यों में आंशिक लाभ मिलता है।
लेकिन ध्यान रखें:
- छूट तभी मिलती है जब महिला वास्तव में प्रॉपर्टी की मालिक (या सह-मालिक) हो।
- कुछ राज्यों में छूट की शर्तें होती हैं, जैसे एक तय सीमा तक की कीमत या कुछ साल तक प्रॉपर्टी न बेचना।
- अगर होम लोन लेना है, तो आम तौर पर महिला को को-एप्लिकेंट बनाना पड़ता है। इससे पहले उसकी आय और लोन योग्यता पर भी विचार करें।
रजिस्ट्री से पहले: इन दस्तावेज़ों की जाँच ज़रूर करें
रजिस्ट्री सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है। सबसे ज़्यादा धोखाधड़ी रजिस्ट्री से पहले की जाँच न करने की वजह से होती है। ये कागज़ ज़रूर देखें:
- टाइटल डीड / पिछली सेल डीड: विक्रेता के पास प्रॉपर्टी कैसे आई — पिछली सभी रजिस्ट्रियों की कड़ी (chain of title) पूरी होनी चाहिए।
- एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (भार-मुक्त प्रमाणपत्र): इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, गिरवी या कानूनी विवाद तो नहीं है।
- दाखिल-खारिज / म्यूटेशन रिकॉर्ड: नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम दर्ज होना चाहिए।
- प्रॉपर्टी टैक्स और बिजली-पानी के बिल: बकाया न होने की रसीदें।
- स्वीकृत नक्शा (approved building plan): मकान या फ्लैट नगर निगम/विकास प्राधिकरण से पास होना चाहिए।
- नए प्रोजेक्ट में RERA रजिस्ट्रेशन: बिल्डर से फ्लैट ले रहे हैं तो राज्य की RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन, पूरा होने की तारीख और शिकायतें देखें।
- Occupancy / Completion Certificate: तैयार फ्लैट के लिए यह सर्टिफिकेट बहुत ज़रूरी है।
- NOC: सोसाइटी, बैंक (अगर विक्रेता ने लोन लिया था) या अन्य संबंधित संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाणपत्र।
बड़ी रकम का सौदा हो तो किसी प्रॉपर्टी वकील से टाइटल सर्च रिपोर्ट बनवाना समझदारी है। कुछ हज़ार रुपये की फीस आपको लाखों के नुकसान से बचा सकती है।

रजिस्ट्री के दिन कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
| खरीदार के लिए | विक्रेता के लिए |
|---|---|
| आधार कार्ड और PAN कार्ड | आधार कार्ड और PAN कार्ड |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो | पासपोर्ट साइज़ फोटो |
| स्टांप ड्यूटी भुगतान की रसीद / ई-स्टांप | मूल टाइटल डीड / पिछली रजिस्ट्री |
| भुगतान का प्रमाण (चेक/बैंक ट्रांसफर विवरण) | प्रॉपर्टी टैक्स रसीद, NOC |
| TDS भुगतान का प्रमाण (₹50 लाख या ज़्यादा पर) | बैंक का लोन क्लोज़र लेटर (अगर लोन था) |
इसके अलावा दो गवाहों की ज़रूरत होती है, जिनके पास पहचान पत्र होना चाहिए। अलग-अलग राज्यों में दस्तावेज़ों की सूची थोड़ी अलग हो सकती है।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- प्रॉपर्टी का मूल्यांकन: राज्य के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर उस इलाके का सर्किल रेट देखें और तय करें कि स्टांप ड्यूटी किस कीमत पर लगेगी।
- स्टांप ड्यूटी का भुगतान: ज़्यादातर राज्यों में अब ई-स्टांप या ऑनलाइन चालान से स्टांप ड्यूटी जमा होती है। भुगतान की रसीद संभालकर रखें।
- सेल डीड का ड्राफ्ट: वकील या डीड राइटर से सेल डीड बनवाएँ। इसमें खरीदार-विक्रेता का नाम, प्रॉपर्टी का पूरा विवरण, सीमाएँ (चौहद्दी), कीमत और भुगतान का तरीका साफ लिखा होना चाहिए। साइन करने से पहले हर लाइन ध्यान से पढ़ें।
- ऑनलाइन आवेदन और अपॉइंटमेंट: कई राज्यों में पहले पोर्टल पर डीड की जानकारी भरकर सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का समय (slot) बुक करना होता है।
- सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में हाज़िरी: तय दिन खरीदार, विक्रेता और दो गवाह मूल दस्तावेज़ों के साथ पहुँचते हैं। वहाँ फोटो, बायोमेट्रिक (अंगूठा/उंगलियों के निशान) और हस्ताक्षर लिए जाते हैं।
- दस्तावेज़ों की जाँच और रजिस्ट्रेशन: सब-रजिस्ट्रार कागज़ जाँचकर सेल डीड रजिस्टर करता है।
- रजिस्टर्ड डीड लेना: कुछ राज्यों में उसी दिन, कुछ में कुछ दिनों बाद रजिस्टर्ड सेल डीड मिल जाती है। कई राज्यों में इसकी डिजिटल कॉपी पोर्टल से भी डाउनलोड हो सकती है।
- दाखिल-खारिज (म्यूटेशन): रजिस्ट्री के बाद नगर निगम या तहसील के राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराएँ (नीचे विस्तार से)।
₹50 लाख या ज़्यादा की प्रॉपर्टी: खरीदार को काटना होगा 1% TDS
अगर आप ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की अचल संपत्ति (खेती की ज़मीन को छोड़कर) खरीद रहे हैं, तो विक्रेता को भुगतान करते समय 1% TDS काटकर सरकार को जमा करना खरीदार की ज़िम्मेदारी है। यह TDS सौदे की कीमत या स्टांप ड्यूटी वैल्यू, जो ज़्यादा हो, उस पर लगता है।
- पुराने आयकर अधिनियम में यह नियम धारा 194-IA में था। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए आयकर अधिनियम 2025 में यह धारा 393(1) के तहत आ गया है, लेकिन दर (1%) और सीमा (₹50 लाख) वही है।
- TDS आम तौर पर कटौती वाले महीने के खत्म होने के 30 दिन के अंदर इनकम टैक्स पोर्टल पर चालान-सह-स्टेटमेंट (अब तक Form 26QB) से जमा होता है। इसके लिए खरीदार को TAN की ज़रूरत नहीं होती, PAN से काम हो जाता है।
- TDS जमा करने के बाद विक्रेता को TDS सर्टिफिकेट (Form 16B) देना होता है।
- देर करने पर ब्याज और लेट फीस लग सकती है, इसलिए रजिस्ट्री और भुगतान के साथ ही यह काम पूरा करें।
नए कानून के बाद फॉर्म के नाम या प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है, इसलिए भुगतान से पहले incometax.gov.in पर ताज़ा प्रक्रिया देख लें या अपने CA से पूछ लें।

रजिस्ट्री के बाद सबसे ज़रूरी काम: दाखिल-खारिज (Mutation)
बहुत से लोग रजिस्ट्री के बाद सोचते हैं कि काम पूरा हो गया। लेकिन दाखिल-खारिज (नामांतरण या म्यूटेशन) के बिना सरकारी राजस्व या नगर निगम के रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही रहता है।
दाखिल-खारिज क्यों ज़रूरी है:
- प्रॉपर्टी टैक्स आपके नाम से जमा हो सके।
- बिजली-पानी के कनेक्शन आपके नाम पर ट्रांसफर हो सकें।
- भविष्य में प्रॉपर्टी बेचने, लोन लेने या उत्तराधिकार में दिक्कत न आए।
- ज़मीन के मामले में खतौनी/जमाबंदी जैसे रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज हो।
दाखिल-खारिज के लिए आम तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी, पहचान पत्र और प्रॉपर्टी टैक्स रसीद के साथ नगर निगम, तहसील या राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। कई राज्यों में अब रजिस्ट्री के साथ ही म्यूटेशन की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाती है, फिर भी इसकी स्थिति ज़रूर जाँचें।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री पर टैक्स छूट
रिहायशी मकान खरीदने पर चुकाई गई स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पर आयकर में छूट मिल सकती है:
- यह छूट पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80C की ₹1.5 लाख की कुल सीमा के अंदर मिलती है (नए आयकर अधिनियम 2025 में 80C की जगह धारा 123 है, सीमा वही ₹1.5 लाख)।
- छूट उसी साल मिलती है जिस साल भुगतान किया गया।
- नई टैक्स व्यवस्था में यह छूट नहीं मिलती।
- ध्यान रहे कि इसी ₹1.5 लाख की सीमा में PPF, ELSS, LIC और होम लोन का मूलधन भी शामिल है।
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से कौन-सी आपके लिए बेहतर है, यह जानने के लिए पढ़ें: पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में कौन बेहतर है।
अपने राज्य की स्टांप ड्यूटी और सर्किल रेट कहाँ देखें?
हर राज्य का अपना रजिस्ट्रेशन पोर्टल है, जहाँ सर्किल रेट, स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर, अपॉइंटमेंट और पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। कुछ प्रमुख राज्यों के आधिकारिक पोर्टल:
- महाराष्ट्र: igrmaharashtra.gov.in
- उत्तर प्रदेश: igrsup.gov.in
- राजस्थान: epanjiyan.rajasthan.gov.in
- मध्य प्रदेश: sampada.mpigr.gov.in
- बिहार: nibandhan.bihar.gov.in
- गुजरात: garvi.gujarat.gov.in
- कर्नाटक: kaveri.karnataka.gov.in
- तमिलनाडु: tnreginet.gov.in
- पश्चिम बंगाल: wbregistration.gov.in
अगर आपका राज्य इस सूची में नहीं है, तो सर्च इंजन में “[राज्य का नाम] IGR registration portal” लिखकर सरकारी (.gov.in) वेबसाइट ही खोलें। दलालों या अनजान वेबसाइटों पर भुगतान न करें।
रजिस्ट्री में होने वाली आम गलतियाँ
- कैश में बड़ा भुगतान: ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश लेना विक्रेता के लिए आयकर नियमों का उल्लंघन है, और ₹20,000 या उससे ज़्यादा कैश में अग्रिम (advance) लेने-देने पर भी रोक है। हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक से भुगतान करें।
- सेल डीड बिना पढ़े साइन करना: प्रॉपर्टी का क्षेत्रफल, प्लॉट नंबर, चौहद्दी और नाम की स्पेलिंग की गलती बाद में बड़ी परेशानी बनती है।
- सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी पर खरीदना: GPA से हुई बिक्री को अदालतें मालिकाना हक का पूरा प्रमाण नहीं मानतीं। हमेशा रजिस्टर्ड सेल डीड कराएँ।
- TDS भूल जाना: ₹50 लाख से ज़्यादा की प्रॉपर्टी में यह खरीदार की ज़िम्मेदारी है।
- दाखिल-खारिज न कराना: रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन ज़रूर कराएँ।
- मूल कागज़ खो देना: रजिस्टर्ड डीड और सभी पुराने कागज़ों की स्कैन कॉपी बनाकर सुरक्षित रखें।

रजिस्ट्री से पहले और बाद की चेकलिस्ट
- ☐ टाइटल डीड और पिछली रजिस्ट्रियों की कड़ी जाँची
- ☐ एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट लिया
- ☐ नक्शा, RERA और Occupancy Certificate देखा (फ्लैट के लिए)
- ☐ सर्किल रेट देखकर स्टांप ड्यूटी का हिसाब लगाया
- ☐ महिला के नाम या संयुक्त नाम से छूट की जाँच की
- ☐ स्टांप ड्यूटी ई-स्टांप/चालान से जमा की
- ☐ सेल डीड का ड्राफ्ट ध्यान से पढ़ा
- ☐ ₹50 लाख या ज़्यादा पर 1% TDS जमा किया और विक्रेता को सर्टिफिकेट दिया
- ☐ सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री कराई, रजिस्टर्ड डीड ली
- ☐ दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए आवेदन किया
- ☐ प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली-पानी कनेक्शन अपने नाम कराए
- ☐ सभी कागज़ों की स्कैन कॉपी सुरक्षित रखी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रजिस्ट्री में कुल कितना खर्च आता है?
आम तौर पर स्टांप ड्यूटी (लगभग 4% से 8%) और रजिस्ट्रेशन फीस (लगभग 1%) मिलाकर प्रॉपर्टी की कीमत का लगभग 5% से 9% तक खर्च आता है। सही आंकड़ा आपके राज्य, शहर और खरीदार के प्रकार पर निर्भर करता है।
क्या स्टांप ड्यूटी होम लोन में शामिल होती है?
आम तौर पर नहीं। बैंक प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर लोन देते हैं और स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन का खर्च खरीदार को खुद देना होता है। घर का बजट बनाते समय इसे ज़रूर जोड़ें।
क्या रजिस्ट्री ऑनलाइन हो सकती है?
ज़्यादातर राज्यों में स्टांप ड्यूटी भुगतान, डीड की जानकारी भरना और अपॉइंटमेंट बुकिंग ऑनलाइन होती है, लेकिन फोटो, बायोमेट्रिक और हस्ताक्षर के लिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाना पड़ता है।
रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में क्या फर्क है?
रजिस्ट्री से सौदा कानूनी रूप से दर्ज होता है और मालिकाना हक आपको मिलता है। दाखिल-खारिज से नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदलता है, ताकि टैक्स और अन्य सरकारी काम आपके नाम से हों। दोनों ज़रूरी हैं।
₹50 लाख से कम की प्रॉपर्टी पर TDS लगेगा?
नहीं। यह 1% TDS तभी लागू होता है जब सौदे की कीमत या स्टांप ड्यूटी वैल्यू ₹50 लाख या उससे ज़्यादा हो।
निष्कर्ष
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री घर खरीदने का सबसे अहम कानूनी कदम है। रजिस्ट्री से पहले कागज़ों की पूरी जाँच, सर्किल रेट के हिसाब से स्टांप ड्यूटी का सही अनुमान, ₹50 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी पर TDS और रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज — ये चार काम सही से कर लिए तो आप ज़्यादातर परेशानियों से बच जाएँगे।
सबसे ज़रूरी बात: अपने राज्य की मौजूदा स्टांप ड्यूटी और प्रक्रिया हमेशा सरकारी पोर्टल से ही जाँचें, और बड़ी रकम के सौदे में किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील की सलाह लें। घर, होम लोन और रियल एस्टेट से जुड़ी और गाइड के लिए हमारी रियल एस्टेट कैटेगरी और Home Loan कैसे लें 2026 गाइड पढ़ें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, छूट और प्रक्रिया राज्य के हिसाब से अलग होती है और बदल सकती है। अंतिम निर्णय से पहले आधिकारिक पोर्टल, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, वकील या CA से पुष्टि करें।
जानकारी के स्रोत: Income Tax India: TDS on immovable property, Axis Max Life: TDS on property 2026, Square Yards: Stamp duty guide, Godrej Capital: Stamp duty and registration charges।
